19/12/2025
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हाँ, पद पर रहते हुए भी मुख्यमंत्री पर IPC (भारतीय दंड संहिता) के तहत कार्रवाई की जा सकती है, क्योंकि वे कानून के समक्ष सभी नागरिकों के समान हैं, हालांकि उन्हें आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी से कुछ खास छूट मिलती है, खासकर विधानसभा सत्र के दौरान; सिविल और आपराधिक दोनों मामलों में उन पर मुकदमा चल सकता है, लेकिन उन्हें संविधान या कानून द्वारा पूर्ण रोग-निरोध (immunity) प्राप्त नहीं है, और लोक सेवक होने के कारण उन पर मुकदमा चलाने के लिए विशेष प्रक्रियाओं (जैसे < लोकपाल या विशेष अदालत) की आवश्यकता हो सकती है।
मुख्य बिंदु:
कानून के समक्ष समानता: मुख्यमंत्री किसी भी अन्य नागरिक की तरह कानून के दायरे में आते हैं और उन पर आपराधिक आरोप लगाए जा सकते हैं।
आपराधिक मामलों में कार्रवाई: यदि मुख्यमंत्री पर कोई आपराधिक मामला दर्ज होता है, तो भारतीय दंड संहिता (IPC) या अन्य आपराधिक कानूनों के तहत उन पर कार्रवाई हो सकती है।
गिरफ्तारी में छूट (कुछ हद तक):
आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 135 के तहत, मुख्यमंत्री और विधायकों को विधानसभा सत्र के शुरू होने से 40 दिन पहले और सत्र खत्म होने के 40 दिन बाद तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है।
उन्हें सदन के अंदर से भी गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है।
यह छूट मुख्य रूप से सिविल मामलों (जैसे दिवालियापन) के लिए है, लेकिन आपराधिक मामलों में भी गिरफ्तारी के लिए विशेष प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है।
लोक सेवक का दर्जा: मुख्यमंत्री IPC की धारा 21 के तहत 'लोक सेवक' की परिभाषा में आते हैं, इसलिए उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) जैसे कानूनों के तहत भी कार्रवाई हो सकती है, जिसके लिए विशेष अनुमति (जैसे लोकपाल या सक्षम प्राधिकारी) की आवश्यकता होती है।
सजा और अयोग्यता: यदि किसी मुख्यमंत्री को किसी आपराधिक मामले में दोषी ठहराया जाता है (दो साल या उससे अधिक की सजा), तो वे विधायक के रूप में अयोग्य हो सकते हैं।