Adv जीतू पासी

Adv जीतू पासी Advocate at civil court,Lakhimpur kheri ,
Ex राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जनता रक्षक पार्टी, दग्रेटपासीसेनामिशन
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अवध सम्राट , वीर शिरोमणि , १२ किलों के मालिक महाराजा बिजली पासी जी की जन्म जयंती की आप सभी लोगों को ढेरों शुभकामनाएं 🙏🎉👏...
25/12/2025

अवध सम्राट , वीर शिरोमणि , १२ किलों के मालिक महाराजा बिजली पासी जी की जन्म जयंती की आप सभी लोगों को ढेरों शुभकामनाएं 🙏🎉👏👑
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24/12/2025

खाने का देशी तरीका यही है
बाकी तो साला सब विदेशी तरीकों की बात करते हैं
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24/12/2025

पापी पापी पापी छूलो
पापी ठंडक को मत छूना
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23/12/2025

चांदनी रात में, ये ले
मोहब्बत भरा चाटा

21/12/2025

आँख दिखाता है माँ के लाडले को , ये ले अब दिखा आँख माँ को।।

20/12/2025

एक बाप बच्चे के सामने शेर , माँ के सामने भीगी बिल्ली बन जाता है। **er

19/12/2025

Bihar cm snatched hijab a muslim lady dr discuss about indian laws :---
हाँ, पद पर रहते हुए भी मुख्यमंत्री पर IPC (भारतीय दंड संहिता) के तहत कार्रवाई की जा सकती है, क्योंकि वे कानून के समक्ष सभी नागरिकों के समान हैं, हालांकि उन्हें आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी से कुछ खास छूट मिलती है, खासकर विधानसभा सत्र के दौरान; सिविल और आपराधिक दोनों मामलों में उन पर मुकदमा चल सकता है, लेकिन उन्हें संविधान या कानून द्वारा पूर्ण रोग-निरोध (immunity) प्राप्त नहीं है, और लोक सेवक होने के कारण उन पर मुकदमा चलाने के लिए विशेष प्रक्रियाओं (जैसे < लोकपाल या विशेष अदालत) की आवश्यकता हो सकती है।
मुख्य बिंदु:
कानून के समक्ष समानता: मुख्यमंत्री किसी भी अन्य नागरिक की तरह कानून के दायरे में आते हैं और उन पर आपराधिक आरोप लगाए जा सकते हैं।
आपराधिक मामलों में कार्रवाई: यदि मुख्यमंत्री पर कोई आपराधिक मामला दर्ज होता है, तो भारतीय दंड संहिता (IPC) या अन्य आपराधिक कानूनों के तहत उन पर कार्रवाई हो सकती है।
गिरफ्तारी में छूट (कुछ हद तक):
आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 135 के तहत, मुख्यमंत्री और विधायकों को विधानसभा सत्र के शुरू होने से 40 दिन पहले और सत्र खत्म होने के 40 दिन बाद तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है।
उन्हें सदन के अंदर से भी गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है।
यह छूट मुख्य रूप से सिविल मामलों (जैसे दिवालियापन) के लिए है, लेकिन आपराधिक मामलों में भी गिरफ्तारी के लिए विशेष प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है।
लोक सेवक का दर्जा: मुख्यमंत्री IPC की धारा 21 के तहत 'लोक सेवक' की परिभाषा में आते हैं, इसलिए उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) जैसे कानूनों के तहत भी कार्रवाई हो सकती है, जिसके लिए विशेष अनुमति (जैसे लोकपाल या सक्षम प्राधिकारी) की आवश्यकता होती है।
सजा और अयोग्यता: यदि किसी मुख्यमंत्री को किसी आपराधिक मामले में दोषी ठहराया जाता है (दो साल या उससे अधिक की सजा), तो वे विधायक के रूप में अयोग्य हो सकते हैं।

एक डॉक्टर महिला के साथ दुर्व्यहार तथा उसके निजता के अधिकार (Article २१) का घोर उल्लंघन बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा किया ...
19/12/2025

एक डॉक्टर महिला के साथ दुर्व्यहार तथा उसके निजता के अधिकार (Article २१) का घोर उल्लंघन बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा किया गया है |||
Shame! Shame! Shame! Govt of bihar
Shame for human rights 📴☸🇮🇲
भारतीय अपराधिक न्यायशास्त्र के तहत कोई भी ऐसा काम जो किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचता हो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का इस्तेमाल से संबंधित है. बिना इजाजत के हिजाब हटाना व्यक्तिगत जगह, निजता और गरिमा पर हमला करने वाला काम माना जा सकता है.

अगर अपराध साबित होते हैं तो संभावित सजा

अगर कोई भी अदालत इस नतीजे पर पहुंचती है कि यह काम जानबूझकर किया गया था और इससे महिला महिला की गरिमा को ठेस पहुंची है तो सजा गंभीर हो सकती है. कानून में 1 साल से लेकर 5 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है. आपको बता दें कि यह अपराध संज्ञेय और गैर जमानती है. जिसका मतलब है कि पुलिस बिना किसी पूर्व अदालती मंजूरी के कार्रवाई कर सकती है और जमानत अधिकार का मामला नहीं है.

धार्मिक स्वतंत्रता और भावनाओं को ठेस पहुंचाना

हिजाब सिर्फ कपड़ा नहीं है बल्कि यह कई मुस्लिम महिलाओं के लिए धार्मिक प्रतीक के तौर पर पहचाना जाता है. इसे जबरदस्ती हटाने पर धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े प्रावधान भी लागू हो सकते हैं. भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 जानबूझकर और दुर्भावना पूर्ण कृतियों से संबंधित है.

क्या मुख्यमंत्री का पद छूट देता है

एक आम गलतफहमी यह है कि संवैधानिक अधिकारियों को आपराधिक कानून से छूट मिल जाती है. दरअसल कोई भी कानून से ऊपर नहीं है. हालांकि सरकारी कर्मचारियों के लिए काफी सुरक्षा उपाय मौजूद है लेकिन अगर कोई संज्ञेय अपराध होता है तो यह जांच या मुकदमा चलाने से नहीं रोकते.

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