08/07/2026
आईसीयू के बेड पर पसलियों में असहनीय दर्द के बीच अवनी ने सुना, "कह देना पैर फिसल गया था," मगर उसने रोने के बजाय 15 साल पुराना वह राज मुट्ठी में भींच लिया!
हॉस्पिटल के इमरजेंसी वॉर्ड की सफेद लाइटें अवनी की आंखों में चुभ रही थीं।
उसका बायां पैर पूरी तरह सूज चुका था।
उसकी कीमती सिल्क साड़ी का पल्ला फर्श पर घिसट रहा था।
शशांक ओबेरॉय उसके बेहद करीब झुका।
उसकी आवाज में एक ठंडी धमकी थी।
"डॉक्टरों से कह देना कि हील्स ऊंची थीं, इसलिए तुम सीढ़ियों से फिसल गईं।"
अवनी ने कुछ नहीं कहा, बस अपनी आंखें बंद कर लीं।
वह अंदर से पूरी तरह शांत थी।
वह अपने दिमाग में उन नंबरों को दोहरा रही थी।
शशांक ने उसे ठीक 15 सीढ़ियों से नीचे धक्का दिया था।
उसकी सास सुमित्रा ने फोन पर 5 बार कहा था, "ओबेरॉय खानदान का नाम खराब नहीं होना चाहिए।"
और उसने शशांक की बिजनेस पार्टनर नियति की कलाई में वही कीमती ब्रेसलेट देखा था, जो शशांक ने उससे शादी की 5वीं सालगिरह पर देने का वादा किया था।
उस रात ओबेरॉय विला में एक बहुत बड़ी बिजनेस पार्टी थी।
शहर के बड़े-बड़े राजनेता, कमिश्नर और बिजनेसमैन वहां मौजूद थे।
शशांक ओबेरॉय अब रियल एस्टेट का सबसे बड़ा चमकता सितारा बन चुका था।
वह चैरिटी करता था, अखबारों के फ्रंट पेज पर आता था और मंच से आदर्शों की बातें करता था।
पार्टी खत्म होते ही अवनी ने सिर्फ एक सवाल पूछा था, "नियति के हाथ में मेरा ब्रेसलेट क्या कर रहा है शशांक?"
नियति ने उस वक्त केवल एक घमंडी मुस्कान दी थी।
मेहमानों के जाते ही शशांक का चेहरा गुस्से से लाल हो गया।
"तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई इतने रसूखदार लोगों के सामने मुझसे सवाल करने की?"
अवनी ने उसकी आंखों में देखा, "गलती तुम्हारी है शशांक, मेरी नहीं।"
सारे नौकर अपने कमरों में जा चुके थे।
शशांक ने अवनी का हाथ पकड़ा और उसे जबरन पीछे के गलियारे की तरफ खींचने लगा।
"तुम भूल रही हो अवनी कि तुम क्या थीं जब तुमसे शादी की थी, यह आलीशान जिंदगी मेरी वजह से है।"
अवनी ने कहा, "यह सब धोखे की बुनियाद पर है।"
अगले ही पल शशांक ने उसे धक्का दे दिया।
वह सीधे नीचे जा गिरी।
उसकी कांच की चूड़ियां फर्श पर बिखर गईं।
ऊपर खड़ी नियति ने सब देखा, लेकिन वह पीछे हट गई।
शशांक नीचे आया और बोला, "अगर पुलिस को कुछ भी बताया, तो कोई यकीन नहीं करेगा, सब जानते हैं कि तुम्हारा मानसिक संतुलन ठीक नहीं है।"
इसी झूठी बीमारी का बहाना बनाकर 3 साल पहले अवनी को उसकी आर्किटेक्ट की नौकरी से जबरन हटवाया गया था।
शशांक फॉर्म भरने बाहर गया।
अवनी ने अपनी तकिए के नीचे से एक पुरानी छोटी पर्ची निकाली।
यह पर्ची उसे 2 दिन पहले अपनी मां की अलमारी से मिली थी।
धुंधली लिखावट में लिखा था:
'अगर ओबेरॉय परिवार तुम्हें कभी नुकसान पहुंचाए, तो भोपाल के पुराने यार्ड के पास जाना, तुम्हारे पिता आलोक शर्मा जीवित हैं, उन्हें छुपाया गया है ताकि ओबेरॉय अपना पुराना गुनाह छुपा सकें, सारे सबूत उनके पास हैं।'
अवनी के हाथ कांप रहे थे।
उसके पिता 15 साल पहले एक कंस्ट्रक्शन साइट पर हुए हादसे में लापता घोषित कर दिए गए थे।
पर्ची पर एक पुराना 10 अंकों का नंबर था।
अवनी ने नर्स के जाते ही उसके काउंटर फोन से वह नंबर डायल किया।
पहली ही रिंग पर फोन उठ गया।
"अवनी..." दूसरी तरफ से एक भारी और बुजुर्ग आवाज आई।
"पिताजी..." अवनी की रुलाई फूटने ही वाली थी कि उसने खुद को रोका।
"घबराना मत बेटा, मैं ठीक हूं और पिछले 15 साल से इसी दिन का इंतजार कर रहा था।"
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PART 2: