12/12/2025
यह पोस्ट देश में चल रही राजनीतिक परिस्थितियों की तस्वीर पेश करती है। एक न्यायाधीश के धार्मिक स्थल पर दीप जलाने की अनुमति देने के फैसले को लेकर विरोध तेज हो गया है। विपक्षी दलों का इस फैसले का विरोध करते हुए ज्ञापन देना, यह दर्शाता है कि वे इसे एक राजनीतिक अवसर के रूप में देख रहे हैं। पोस्ट में लिखा संदेश इसे हिंदू आस्था पर हमला और वोट-बैंक राजनीति बताता है। वास्तव में, जब धार्मिक मुद्दे राजनीति के केंद्र में आ जाते हैं, तो समाज में विभाजन की संभावना बढ़ जाती है। किसी भी समुदाय की धार्मिक भावना का सम्मान होना चाहिए, और न्यायपालिका द्वारा लिए गए निर्णय उसी आधार पर होते हैं। राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे न्यायिक फैसलों को राजनीति का हथियार न बनाएं। जनता की भावनाओं को भड़काने के बजाय, उन्हें सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास को मजबूत बनाना चाहिए। यही देश और लोकतंत्र के लिए बेहतर होगा।