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यह पोस्ट देश में चल रही राजनीतिक परिस्थितियों की तस्वीर पेश करती है। एक न्यायाधीश के धार्मिक स्थल पर दीप जलाने की अनुमति...
12/12/2025

यह पोस्ट देश में चल रही राजनीतिक परिस्थितियों की तस्वीर पेश करती है। एक न्यायाधीश के धार्मिक स्थल पर दीप जलाने की अनुमति देने के फैसले को लेकर विरोध तेज हो गया है। विपक्षी दलों का इस फैसले का विरोध करते हुए ज्ञापन देना, यह दर्शाता है कि वे इसे एक राजनीतिक अवसर के रूप में देख रहे हैं। पोस्ट में लिखा संदेश इसे हिंदू आस्था पर हमला और वोट-बैंक राजनीति बताता है। वास्तव में, जब धार्मिक मुद्दे राजनीति के केंद्र में आ जाते हैं, तो समाज में विभाजन की संभावना बढ़ जाती है। किसी भी समुदाय की धार्मिक भावना का सम्मान होना चाहिए, और न्यायपालिका द्वारा लिए गए निर्णय उसी आधार पर होते हैं। राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे न्यायिक फैसलों को राजनीति का हथियार न बनाएं। जनता की भावनाओं को भड़काने के बजाय, उन्हें सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास को मजबूत बनाना चाहिए। यही देश और लोकतंत्र के लिए बेहतर होगा।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो ने सबको भावुक कर दिया है। एक छोटे बच्चे की आँखों में जैसे भगवान जगन्नाथ का दिव्य स...
10/12/2025

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो ने सबको भावुक कर दिया है। एक छोटे बच्चे की आँखों में जैसे भगवान जगन्नाथ का दिव्य स्वरूप दिखाई दे रहा है। बच्चे के चेहरे पर आश्चर्य, भक्ति और निष्कपट भाव साफ झलकते हैं। माथे पर लगा तिलक और बड़ी खुली आँखें लोगों में श्रद्धा की भावना जगा रही हैं। वहीं पोस्ट में भगवान जगन्नाथ की मूर्ति की झलक ने इस घटना को और भी विशेष बना दिया है। मंदिर के बाहर भीड़ उमड़ती है, आरती गूंजती है और लोग इसे चमत्कार मानकर दर्शन करने पहुँचते हैं। कई लोगों के लिए यह सिर्फ एक वीडियो नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास की ताकत का प्रमाण है। कहते हैं कि भक्ति वहीं सच्ची होती है जहां मासूमियत हो, और इस बच्चे की निश्छल अभिव्यक्ति ने उसी तथ्य को जीवंत कर दिया है। लोग इसे ईश संकेत समझ रहे हैं और इससे जुड़ी कथाएं तेजी से फैल रही हैं। यह दृश्य हर किसी को आध्यात्मिकता की ओर सोचने को मजबूर कर रहा है।

इस पोस्ट की तस्वीरें बंगाल में बढ़ते बदलाव की भावना को दर्शाती हैं। भीड़ का आकार और उत्साह स्वयं संदेश दे रहा है। रंग-बि...
08/12/2025

इस पोस्ट की तस्वीरें बंगाल में बढ़ते बदलाव की भावना को दर्शाती हैं। भीड़ का आकार और उत्साह स्वयं संदेश दे रहा है। रंग-बिरंगे दृश्य और श्रृद्धा से जुड़ी झलक दिखाती है कि लोगों की सोच नई दिशा में जुट रही है। जनसमर्थन की यह तस्वीर बताती है कि जनता कुछ अलग चाहती है। पोस्ट में लिखा संदेश भी इसी सोच को मजबूत करता है कि बंगाल परिवर्तन के लिए तैयार है। यह लहर उन विचारों का प्रतिनिधित्व करती है जिनके साथ लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। आने वाले समय में इसका असर राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

यह तस्वीर सामाजिक परिवेश का एक दिलचस्प पहलू दिखाती है जहाँ एक समूह धार्मिक स्थल पर चादर चढ़ा रहा है। इसके साथ लगी पंक्ति...
07/12/2025

यह तस्वीर सामाजिक परिवेश का एक दिलचस्प पहलू दिखाती है जहाँ एक समूह धार्मिक स्थल पर चादर चढ़ा रहा है। इसके साथ लगी पंक्तियाँ सवाल उठाती हैं कि क्या यह चादर किसी गरीब को देने से ज्यादा उपयोगी नहीं होती? यह व्यंग्य केवल एक धार्मिक रिवाज पर नहीं, बल्कि समाज के दिखावे पर किया गया है।

धर्म का मुख्य उद्देश्य सेवा, सहानुभूति और करुणा माना जाता है, लेकिन अक्सर महंगी वस्तुएँ अनुष्ठानों में लगाई जाती हैं, जबकि जरूरतमंद ठंड से जूझते हैं। पोस्ट में यह भी पूछा गया है कि वे लोग कहाँ हैं जो दूसरे धर्मों के रीति-रिवाजों पर टिप्पणी करते हैं, पर स्वयं ऐसे कर्म करते समय वाद-विवाद भूल जाते हैं।

यह तस्वीर हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारा धर्म केवल रीतियों तक सीमित हो गया है? क्या समाज ईश्वर की कृपा दिखाने के लिए गरीबों की मदद को प्राथमिकता देगा या अनुष्ठानों को ही सर्वोच्च मानेगा? यही मुद्दा इस पोस्ट को सार्थक बनाता है।

यह पोस्ट दो प्रमुख चेहरों की तस्वीरों को जोड़ते हुए कथित बयानों पर आधारित व्यंग्यात्मक संदेश प्रस्तुत करती प्रतीत होती ह...
03/12/2025

यह पोस्ट दो प्रमुख चेहरों की तस्वीरों को जोड़ते हुए कथित बयानों पर आधारित व्यंग्यात्मक संदेश प्रस्तुत करती प्रतीत होती है। सोशल मीडिया पर इस प्रकार का कंटेंट आम है, जहाँ राजनीतिक मतभेदों को हास्य, व्यंग्य या अतिरंजना के माध्यम से दिखाया जाता है।
पोस्ट में धार्मिक और राजनीतिक शब्दावली का मिश्रित उपयोग दिखता है, जो संवेदनशील मुद्दों को हास्य के माध्यम से प्रस्तुत करने की कोशिश करता है। हालांकि, यह जरूरी है कि हम समझें कि किसी भी व्यक्ति या संस्था के नाम पर किए गए दावे हमेशा सत्य नहीं होते। कई बार ऐसे संदेश संदर्भ से हटाकर बनाए जाते हैं या पूरी तरह काल्पनिक होते हैं, जिससे भ्रम फैलता है।
एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमें किसी भी वायरल कंटेंट को संतुलित दृष्टिकोण से देखना चाहिए। राजनीतिक विरोध या समर्थन व्यक्त करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली सामग्री को तथ्य मानकर स्वीकार करना समाज में गलतफहमियाँ बढ़ा सकता है। इसलिए विवेकपूर्ण विश्लेषण आवश्यक है।

सोशल मीडिया पर वायरल यह पोस्ट, जिसमें दावा किया जा रहा है कि “जापान सरकार ने मुसलमानों को दफनाने की जगह देने से इनकार कर...
03/12/2025

सोशल मीडिया पर वायरल यह पोस्ट, जिसमें दावा किया जा रहा है कि “जापान सरकार ने मुसलमानों को दफनाने की जगह देने से इनकार कर दिया है”, काफी चर्चा का विषय बन गया है। इस तरह के दावों से पहले यह समझना जरूरी है कि जापान की भूमि सीमित है और वहां अधिकतर लोग दाह संस्कार की परंपरा का पालन करते हैं। हालांकि, जापान में रहने वाले मुसलमानों के लिए कुछ विशेष कब्रिस्तानों की व्यवस्था पहले से मौजूद है। कई स्थानीय प्रशासन और इस्लामिक संगठनों की मदद से दफनाने की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। वायरल पोस्ट में दिखाया गया बयान अधिकतर भ्रामक लगता है, क्योंकि जापानी सरकार की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है। इस प्रकार के दावे अक्सर लोगों की भावनाओं को भड़काने के लिए किए जाते हैं। जरूरत है कि किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसकी सत्यता जांची जाए। सोशल मीडिया के इस दौर में फेक न्यूज़ तेजी से फैलती है, इसलिए हर नागरिक को जिम्मेदारी से जानकारी का उपयोग करना चाहिए।

इस पोस्ट में वक्ता द्वारा राहुल गांधी को लेकर दिए गए बयान को व्यंग्यात्मक अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया है। कहा गया कि पू...
01/12/2025

इस पोस्ट में वक्ता द्वारा राहुल गांधी को लेकर दिए गए बयान को व्यंग्यात्मक अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया है। कहा गया कि पूरा देश उन्हें देख और सुन रहा है, लेकिन पोस्ट के अनुसार उन्हें समझ कोई नहीं रहा, इसलिए जनता उन्हें चुन भी नहीं रही। यह बयान उस राजनीतिक माहौल की झलक देता है जहां हर टिप्पणी तुरंत सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन जाती है। राजनीतिक बयानबाज़ी भले ही गंभीर होती है, लेकिन सोशल मीडिया उसे एक नए रूप में पेश कर देता है—कभी मीम, कभी व्यंग्य तो कभी तंज। यह पोस्ट भी उसी श्रेणी में आती है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि राजनीति में संचार का तरीका बदल चुका है। अब किसी भी वक्तव्य का प्रभाव केवल न्यूज़ चैनलों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उसे जनता तक अपने अंदाज़ में पहुंचाते हैं। हास्य के माध्यम से राजनीतिक संदेश देना आज आम हो चुका है। यह पोस्ट भी मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और जनता के नजरिए को अनोखे ढंग से सामने रखती है।

इस पोस्ट में एक व्यक्ति गंभीर भाव से बैठे दिखाई देते हैं और नीचे लिखे संदेश में कहा गया है कि “वंदे मातरम् का जो गायक नह...
30/11/2025

इस पोस्ट में एक व्यक्ति गंभीर भाव से बैठे दिखाई देते हैं और नीचे लिखे संदेश में कहा गया है कि “वंदे मातरम् का जो गायक नहीं है, भारत में रहने के लायक नहीं है।” यह कथन देशभक्ति को लेकर एक तीखी और विवादित राय प्रस्तुत करता है। वंदे मातरम् भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण प्रतीक रहा है और इससे करोड़ों भारतीयों की भावनाएँ जुड़ी हैं, लेकिन किसी व्यक्ति की देशभक्ति को केवल एक गीत गाने से जोड़ देना कई प्रश्न खड़े करता है। भारत जैसे विविधतापूर्ण लोकतांत्रिक देश में हर व्यक्ति को अपने विवेक, अपने धर्म और अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। देशभक्ति का मापदंड किसी एक गीत या रीति से तय नहीं किया जा सकता। देशप्रेम कर्म, जिम्मेदारी, ईमानदारी और समाज के प्रति योगदान से भी प्रकट होता है। इसलिए ऐसे विचारों पर संतुलित चर्चा होनी चाहिए ताकि समाज में आपसी सम्मान और समझ बनी रहे। पोस्ट का संदेश भले ही प्रभावशाली हो, लेकिन इसे संवेदनशीलता और तर्क के साथ देखने की आवश्यकता है।

पोस्ट में दिखाया गया संदेश सोशल मीडिया पर बहस को जन्म दे रहा है। धार्मिक नेताओं के बयानों से हमेशा लोगों की भावनाएँ जुड़...
29/11/2025

पोस्ट में दिखाया गया संदेश सोशल मीडिया पर बहस को जन्म दे रहा है। धार्मिक नेताओं के बयानों से हमेशा लोगों की भावनाएँ जुड़ी होती हैं, इसलिए इस तरह की पोस्टों का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है। तस्वीर में व्यक्ति कुछ कह रहे हैं, लेकिन पोस्ट में दिया गया टेक्स्ट तस्वीर से मेल खाता है या नहीं—यह हमेशा स्पष्ट नहीं होता। कई बार इंटरनेट पर किसी व्यक्ति के नाम से ऐसे कथन जोड़ दिए जाते हैं, जो उन्होंने वास्तव में कभी कहे ही नहीं। इसलिए तथ्य जाँच (फैक्ट-चेकिंग) इस समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यह पोस्ट हमें याद दिलाती है कि सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए अफवाहों और भ्रामक सामग्री से दूरी रखना बेहद जरूरी है। लोगों को चाहिए कि वे किसी भी संदेश को आगे बढ़ाने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करें। समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब बातचीत, सहिष्णुता और समझ को प्राथमिकता दी जाए, न कि भावनात्मक या भड़काऊ संदेशों को।

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही एक पोस्ट में दावा किया गया है कि मशहूर बॉलीवुड अभिनेता का 89 वर्ष की आयु में निधन हो...
25/11/2025

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही एक पोस्ट में दावा किया गया है कि मशहूर बॉलीवुड अभिनेता का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। इस खबर ने फ़िल्म प्रेमियों को गहरी भावनात्मक स्थिति में डाल दिया है, क्योंकि यह अभिनेता अपने समय के सबसे लोकप्रिय सितारों में से एक रहे हैं। उनकी फ़िल्मों ने भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम युग को एक नई पहचान दी थी। चाहे रोमांटिक किरदार हों या एक्शन से भरपूर भूमिकाएँ, उन्होंने हर शैली में अपनी अलग छाप छोड़ी। उनके संवाद, उनकी मुस्कान और उनका आकर्षक व्यक्तित्व दर्शकों पर हमेशा अमिट प्रभाव छोड़ता था।
हालाँकि सोशल मीडिया पर कई बार बिना पुष्टि के खबरें फैल जाती हैं, इसलिए ऐसी सूचनाओं की प्रामाणिकता की जाँच करना जरूरी हो जाता है। यह पोस्ट भी लोगों के बीच भावनात्मक लहर पैदा कर रही है। यह अभिनेता पीढ़ियों के दिलों में बसे रहे हैं और भारतीय सिनेमा में उनका योगदान अविस्मरणीय माना जाता है।

इस तस्वीर में एक ऐसा क्षण कैद है जो शब्दों से कहीं अधिक शक्तिशाली है। वर्दी में खड़ी महिला अधिकारी जब सलामी देती हैं, तो...
24/11/2025

इस तस्वीर में एक ऐसा क्षण कैद है जो शब्दों से कहीं अधिक शक्तिशाली है। वर्दी में खड़ी महिला अधिकारी जब सलामी देती हैं, तो उनकी आँखें दर्द और गर्व दोनों का मिश्रण बन जाती हैं। यह दृश्य बताता है कि देश की रक्षा केवल सैनिक नहीं, बल्कि उनके परिवार भी मिलकर करते हैं। आँखों से रिसते आँसू उस टूटे हुए दिल की कहानी कहते हैं जो किसी अपूरणीय क्षति से गुजरा है। पीछे मौजूद भीड़ इस भावना को और गहरा करती है, मानो हर चेहरा उस पीड़ा को साझा कर रहा हो। इस पोस्ट ने हर भारतीय के दिल को छुआ है, क्योंकि यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि बलिदान की सच्ची परिभाषा है। यह हमें याद दिलाती है कि जब भी हम देश के नायकों का सम्मान करते हैं, तो उनके पीछे खड़े परिवारों के साहस को भी सलाम करना चाहिए। उनकी दृढ़ता और भावनात्मक संघर्ष देशभक्ति की असली पहचान है।

नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में देश ने फिर एक बहादुर सिपाही को खो दिया। इंस्पेक्टर आशीष शर्मा ने अपने कर्तव्य का पालन...
23/11/2025

नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में देश ने फिर एक बहादुर सिपाही को खो दिया। इंस्पेक्टर आशीष शर्मा ने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए जिस साहस और समर्पण का परिचय दिया, वह हमेशा देशवासियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। कुछ महीने पहले ही उनकी शादी हुई थी और जीवन नई शुरुआत की ओर बढ़ रहा था, लेकिन देश की सुरक्षा के लिए किया गया उनका बलिदान हर भारतीय के दिल को गहराई से छू जाता है।
शहीद आशीष की वीरता सिर्फ एक परिवार का गर्व नहीं, बल्कि पूरे देश की शान है। उनके अंतिम संस्कार के दृश्य में परिजनों और साथियों का दर्द साफ देखा जा सकता है, जो यह बताता है कि एक वीर को खोना कितना मुश्किल होता है। देश आशीष जैसे सच्चे रक्षक का हमेशा ऋणी रहेगा।
उनका बलिदान हमें यह याद दिलाता है कि सीमा पर, जंगलों में और हर मोर्चे पर हमारे जवान दिन-रात देश की रक्षा में लगे रहते हैं। उनकी याद में सिर झुकाकर देश नमन करता है।
ओम शांति।

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