27/12/2025
कबीर दास जी ने कपिल मुनि के इसी दर्शन को अपनी भाषा में बहुत सुंदर ढंग से समझाया है:
गर्भ वास में भक्ति कबूली, बाहर आय के माया भूली।
कह कबीर यह अवसर खोया, अंत काल जम मारै रोया॥
अर्थ: गर्भ के भीतर जीव ने भगवान की भक्ति करने की कसम खाई थी, लेकिन बाहर आते ही वह माया के वश में होकर सब भूल गया। कबीर कहते हैं कि इस अनमोल अवसर को खोने के बाद अंत में केवल पछतावा बचता है।