26/05/2026
आज गर्मी से बचने के लिए लोग AC, कूलर और पंखों पर निर्भर हैं। लेकिन सोचिए जब भारत में AC का इस्तेमाल भी नहीं होता था, तब राजस्थान जैसे तपते रेगिस्तान के बड़े बड़े महलों में राजा-महाराजा कैसे रहते थे? सबसे हैरानी की बात तो ये है कि उस समय के बहुत से महल आज भी बाहर की तुलना में अंदर से काफी ठंडे महसूस होते हैं।
असल में पुराने राजस्थानी महल सिर्फ सुंदर नहीं, बल्कि “नेचुरल साइंस” का कमाल थे।
महलों की दीवारें बहुत मोटी बनाई जाती थीं, जिससे बाहर की गर्म हवा अंदर जल्दी नहीं पहुंचती थी। कई जगह सफेद पत्थर और चूने का इस्तेमाल होता था, जो सूरज की गर्मी को कम सोखते थे।
महलों में छोटे-छोटे झरोखे और ऐसी खिड़कियां बनाई जाती थीं, जिनसे हवा लगातार घूमती रहती थी। इसे आज की भाषा में “नेचुरल वेंटिलेशन” कहा जाता है।
कुछ महलों में फव्वारे और पानी की नहरें भी होती थीं। जब हवा पानी से होकर गुजरती थी, तो वह ठंडी हो जाती थी। यही तकनीक आज के “एयर कूलर” की शुरुआती सोच मानी जाती है।
सबसे दिलचस्प बात ये है कि उस समय बिना बिजली के लोग ऐसी इमारतें बना रहे थे, जो आज भी इंजीनियरों को हैरान कर देती हैं।
यानि पुराने लोग सिर्फ महल नहीं बनाते थे… वे मौसम को समझकर “स्मार्ट कूलिंग सिस्टम” तैयार करते थे।