Divya Marg

Divya Marg Bhakti mera sahara hai, aur gyaan mera raasta

दौलत, शोहरत सब है अधूरी,मन से जीना ही है असली दूरी
18/09/2025

दौलत, शोहरत सब है अधूरी,
मन से जीना ही है असली दूरी

17/09/2025
Divya marg
17/09/2025

Divya marg

31/08/2025

कुछ लोग सोचते है की वो हमें ignore कर रहे है, जब की सच में वो हमें खो रहे होते है.

18/08/2025

सफल लोग बहाने नहीं,
रास्ते ढूँढते हैं..!

मा कुरु धन जन यौवन गर्वं हरति कालः निमेषात्सर्वम् ।अर्थ -हमें धन,जन, और अपनी जवानी पर घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय ...
17/08/2025

मा कुरु धन जन यौवन गर्वं हरति कालः निमेषात्सर्वम् ।

अर्थ -हमें धन,जन, और अपनी जवानी पर घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय इसे क्षण भर में छिन लेने का सामर्थ्य रखता है।

भगत सिंह – अमर शहीद का बलिदान 🇮🇳✨भगत सिंह, जिनका नाम सुनते ही हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है, केवल 23 साल की...
15/08/2025

भगत सिंह – अमर शहीद का बलिदान 🇮🇳✨

भगत सिंह, जिनका नाम सुनते ही हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है, केवल 23 साल की उम्र में देश के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर गए। उनका जीवन आज़ादी की लड़ाई का प्रतीक था। 1928 में लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए उन्होंने और उनके साथियों ने सांडर्स की हत्या की। 1929 में, उन्होंने दिल्ली की सेंट्रल असेंबली में बम फेंककर “इंकलाब जिंदाबाद” का नारा बुलंद किया, ताकि ब्रिटिश सरकार को भारतीयों की आवाज़ सुनाई दे।

भगत सिंह का मानना था कि आज़ादी केवल ब्रिटिश शासन से मुक्ति नहीं, बल्कि हर प्रकार के शोषण से मुक्ति होनी चाहिए। जेल में उन्होंने भूख हड़ताल की, ताकि राजनीतिक कैदियों को सम्मान मिले। 23 मार्च 1931 को उन्हें राजगुरु और सुखदेव के साथ फाँसी दी गई, लेकिन उनकी सोच और साहस आज भी करोड़ों दिलों में जिंदा है।

आज, स्वतंत्रता दिवस पर, हमें याद रखना चाहिए कि हमारी आज़ादी उनके जैसे वीरों के खून से सिंची है। भगत सिंह का जीवन हमें सिखाता है कि सच्चा देशभक्ति मतलब है – अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाना और राष्ट्र के लिए हर त्याग करने को तैयार रहना।

इंकलाब ज़िंदाबाद! 🇮🇳🔥

"ମୃତ୍ୟୁ ଶେଷ ନୁହେଁ, ଏକ ନୂତନ ଯାତ୍ରାର ଆରମ୍ଭ।ଆମେ ଏହି ପୃଥିବୀରେ କିଛି ସମୟ ପାଇଁ ଆସୁ, ନିଜ କର୍ମ ସମାପ୍ତ କରି ଆଗକୁ ବଢ଼ିଯାଉ।ଦେହ ମାଟିରୁ...
12/08/2025

"ମୃତ୍ୟୁ ଶେଷ ନୁହେଁ, ଏକ ନୂତନ ଯାତ୍ରାର ଆରମ୍ଭ।
ଆମେ ଏହି ପୃଥିବୀରେ କିଛି ସମୟ ପାଇଁ ଆସୁ, ନିଜ କର୍ମ ସମାପ୍ତ କରି ଆଗକୁ ବଢ଼ିଯାଉ।
ଦେହ ମାଟିରୁ ତିଆରି, ମାଟିରେ ମିଶିଯିବ, କିନ୍ତୁ ଆତ୍ମା — ସେ ଅମର, ଯାହା କେବେ ମରେନାହିଁ।

ଯେପରି ଆମେ ପୁରୁଣା ବସ୍ତ୍ର ବଦଳାଇ ନୂଆ ପିନ୍ଧୁ, ସେପରି ଆତ୍ମା ମଧ୍ୟ ଦେହ ବଦଳାଏ।
ମୃତ୍ୟୁ ଆମକୁ ଏହା ମନେ ପକାଏ ଯେ ଜୀବନ ଅତ୍ୟନ୍ତ ମୂଲ୍ୟବାନ, ଏବଂ ପ୍ରତ୍ୟେକ ମୁହୂର୍ତ୍ତକୁ ସତ୍କର୍ମରେ ବ୍ୟୟ କରିବା ଉଚିତ।

ମୃତ୍ୟୁକୁ ଭୟ କରିବାରୁ ବାଜି, ତାହାକୁ ବୁଝିବା ଓ ଗ୍ରହଣ କରିବା ଉଚିତ, କାରଣ ସେହିଥିରେ ଆମେ ପରମାତ୍ମାଙ୍କୁ ଆହୁରି ନିକଟରେ ପାଉ।
ଯେତେବେଳେ ଆମେ ମୃତ୍ୟୁକୁ ସତ୍ୟ ଭାବରେ ଗ୍ରହଣ କରୁ, ସେତେବେଳେ ଜୀବନର ପ୍ରତ୍ୟେକ କ୍ଷଣ ଅଧିକ ସୁନ୍ଦର ଓ ସାରଥିବାନ୍ତି।

ଯେଉଁଥି @@ଆସିଛି, ସେ ଗୋଟେ ଦିନ ଯିବ — ଏହିହି ସୃଷ୍ଟିର ନିୟମ।
ସେଥିପାଇଁ ବଞ୍ଚିଥିବା ସମୟରେ ପ୍ରେମ, କରୁଣା ଓ ଭଲାଇ ବଣ୍ଟ, ଯାହାଦ୍ୱାରା ଯିବା ପରେ କେବଳ ତୁମର ନାମ ଓ ସଦ୍କର୍ମ ରହିଯାଉ।"

Address

Koraput
764020

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Divya Marg posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share