05/01/2025
Chapter 3: टीम का गठन
Chapter 2 से अब आगे.....
मुंबई की शाम धीरे-धीरे नरम रोशनी में ढल रही थी। आर्यन के छोटे से स्टूडियो में मीरा और राजेश के साथ उसकी टीम जुटी हुई थी। फिल्म फेस्टिवल की डेडलाइन करीब आ रही थी, और उनके पास समय बहुत कम था।
"हमें हर दृश्य को परफेक्ट करना होगा," आर्यन ने कैमरे के सामने खड़े होकर कहा। उसकी आंखों में एक अलग ही जोश था। मीरा ने स्क्रिप्ट को ध्यान से देखा और कहा, "इस सीन में कुछ बदलाव की जरूरत है।"
राजेश ने तुरंत नोट्स निकाले। वह जानता था कि इस परियोजना में हर मिनट कीमती था। "बजट का ख्याल रखना होगा," उसने आर्यन को याद दिलाया।
विक्रम मेहता का फोन आया। उन्होंने आर्यन को महत्वपूर्ण सलाह दी - "अपनी कहानी में सच्चाई रखो। व्यावसायिक दबाव में अपनी कला को मत खोना।"
मीरा ने आर्यन का हाथ पकड़ा। उनके बीच का तनाव धीरे-धीरे कम हो रहा था। वह समझ गई थी कि आर्यन के सपने सिर्फ उसके अपने नहीं, बल्कि उन सबके थे जो बॉलीवुड में बदलाव चाहते थे।
"हमारी फिल्म सिर्फ एक फिल्म नहीं, एक आंदोलन है," आर्यन ने दृढ़ता से कहा।
सेट पर तकनीकी चुनौतियां आईं। लाइट्स में खराबी, कैमरे में तकनीकी समस्याएं - लेकिन टीम ने मिलकर हर बाधा को पार किया। राजेश ने अपने संपर्कों की मदद ली, मीरा ने निर्देशन में सहयोग दिया, और आर्यन ने हर समस्या का समाधान निकाला।
एक रात, जब सभी थक चुके थे, विक्रम ने उन्हें एक महत्वपूर्ण सबक सिखाया - "बॉलीवुड में सफलता सिर्फ प्रतिभा से नहीं, दृढ़ संकल्प से आती है।"
आर्यन को एहसास हुआ कि यह सफर सिर्फ एक फिल्म बनाने का नहीं, बल्कि एक नई परंपरा की शुरुआत करने का था। हर दृश्य, हर संवाद उनकी कहानी का हिस्सा था - एक ऐसी कहानी जो बॉलीवुड की रूढ़िवादी सोच को चुनौती देगी।
जैसे-जैसे फिल्म का अंतिम दृश्य शूट हुआ, आर्यन की आंखों में एक नई उम्मीद थी। वह जानता था कि उनकी यह फिल्म सिर्फ एक कलाकृति नहीं, बल्कि एक संदेश है - जो कहता है कि सपने छोटे नहीं होते, बस उन्हें पूरा करने का साहस चाहिए।
रात के दस बज चुके थे। स्टूडियो में सन्नाटा छाया हुआ था। आर्यन, मीरा और राजेश एक-दूसरे को देख रहे थे - उनकी आंखों में विश्वास, उनके चेहरों पर मुस्कान।
फिल्म फेस्टिवल अब बस कुछ दिन दूर था।
chapter 3........