01/12/2025
आजकल जो देश में नफरत की गंदगी फैलाने का काम कर रहे है उन वाट्सअप यूनिवर्सिटी भक्तों के लिए एक सच्चाई जो कि ना तो उनके किसी पूर्वजों ने किया होगा ना ही उनको जो नफरत फैलाने वाले ज्ञान दे रहे उनके पूर्वजों ने ।।
कमालुद्दीन का कमाल बात 30 अगस्त 1965 की है, ड्राइवर कमालुद्दीन मलेरकोटला पंजाब से ट्रक क्रमांक PNR 5317 में 90 बोरी गेहूं लादकर दिल्ली आ रहे थे,
रास्ते मे सेना के जवानों ने उनके ट्रक को रोका और कहा कि पाकिस्तान से जंग छिड़ गई है, हमें आपके ट्रक और आपकी मदद चाहिए, कमालुद्दीन जी ने ट्रक में लदीं 90 बोरियां सड़क पर ही उतार दीं और ट्रक में गोला-बारूद भरकर सेना की मदद के लिए बॉर्डर की तरफ चल दिए, जंग करते हुए वे पाकिस्तान के सियालकोट सेक्टर पहुंच गए, पाकिस्तानी सैनिकों और तोपों को छकाते सेना का असलहा लेकर ऐसे गुजरते मानो जैसे किसी आम रास्ते से गुजर रहे हों, कई बार तो उन्होंने ट्रक पाकिस्तानी सैनिकों पर फिल्मी स्टाइल में चढ़ा दिए तो कई बार खुद गोला-बारूद चलाने लगे,
सरकार ने ट्रक ड्राइवर कमालूद्दीन को सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने के अदम्य साहस पर अशोक चक्र देकर सम्मानित किया था, जिसके तहत उन्हें 15 लाख रुपए नगद और 70 हजार रुपए सालाना देने की घोषणा हुई थी,
देश भक्त इसे कहते हैं ये भी एक मुस्लिम थे जिसने जंग के मैदान में कूद गए और लड़े भी डटकर ।।