05/06/2026
लुबूब शाही (लुबूब कबीर – नुस्ख़ा खास)
यह अत्यंत शक्तिवर्धक एवं वीर्यवर्धक योग माना जाता है। कहा जाता है कि इसकी पहली खुराक से ही प्रभाव अनुभव होने लगता है। विशेष रूप से वृद्ध एवं कमजोर व्यक्तियों के लिए लाभकारी माना गया है। यह शरीर को पुष्ट करता है, वीर्य बढ़ाता है, गुर्दों को शक्ति देता है तथा कामशक्ति को बढ़ाने वाला माना जाता है।
सामग्री
प्रत्येक 2-2 तोला
- खोलनजन
- शक्काकुल
- बहमन सुर्ख
- बहमन सफेद
- तूदरी सुर्ख
- तूदरी सफेद
- तुख्म ओटंगन
- हब्बुल कलकल
- हब्बुज्जलम
- हब्बतुल खज़रा
प्रत्येक सवा-सवा तोला
- सोंठ
- दालचीनी
- नागरमोथा
- बालछड़
- लौंग
- कबाबचीनी
- क़रफ़ा
- गाजर के बीज
- मूली के बीज
- प्याज के बीज
- शलगम के बीज
- हिल्यून के बीज
- अस्पस्त के बीज
- अंदरजो शिरीं
- दरूनज अकरबी
प्रत्येक 1-1 तोला
- अजवायन खुरासानी
- बोजीदान
- सूखा पुदीना
प्रत्येक 9-9 माशा
- मगज़ जायफल
- जावित्री
- छड़ेला
- पीपल
- रेग माही
- माही रोबियां
प्रत्येक 5-5 नग
- नर गौरैया (जिबह की हुई)
- बकरे के अंडकोष
5 तोला
- छुहारे
बनाने की विधि
सभी सूखी दवाओं को कूटकर 8 सेर पानी में रात भर भिगो दें।
सुबह नर गौरैया और बकरे के अंडकोष का कीमा बनाकर इसमें मिलाएँ और करअ-अंबीक द्वारा 5 सेर अर्क निकाल लें।
फिर उसी प्रकार दूसरी बार दवाओं को उसी अर्क में भिगोकर 3 सेर अर्क निकालें।
तीसरी बार भी यही प्रक्रिया दोहराकर लगभग सवा सेर अर्क प्राप्त करें।
इस अर्क में 3 सेर शहद मिलाकर क़वाम तैयार करें।
बाद में मिलाए जाने वाले पदार्थ
प्रत्येक 5-5 तोला
- सालब मिस्री
- नर गौरैया का मगज़
प्रत्येक 3-3 तोला
- बादाम मगज़
- पिस्ता
- चिलगोज़ा
- फंदुक
- सिंघाड़े का आटा
- खरबूजे के बीजों का मगज़
- हब्बुज्जलम का मगज़
- हब्बतुल खज़रा का मगज़
- हब्बुल कलकल का मगज़
- छिले हुए तिल
- सफेद खसखस
- कपास बीज का मगज़
प्रत्येक डेढ़-डेढ़ तोला
- शलगम बीज
- मूली बीज
- गाजर बीज
- प्याज बीज
- गंदना बीज
- अस्पस्त बीज
- हिल्यून बीज
- ओटंगन बीज
- शक्काकुल
- बहमन सुर्ख
- बहमन सफेद
- मुसली काली
- मुसली सफेद
अन्य द्रव्य
रेग माही, माही रोबियां, खोलनजन, दालचीनी, कबाबचीनी, क़रफ़ा, सोंठ, बालछड़, नागरमोथा, लौंग, पीपल, जायफल, जावित्री, सूरंजन शिरीं, बोजीदान, पुदीना, अंदरजो शिरीं, माया शुतर अरबी, दरूनज अकरबी, ज़रनबाद आदि निर्धारित मात्रा में।
प्रत्येक 9-9 माशा
- ऊद खाम
- मस्तगी
- नार मुश्क
- तुख्म फरंजमुश्क
- ज़ाफ़रान
6 माशा
- अंबर
3 माशा
- कस्तूरी
वरक
- सोने का वर्क 100
- चाँदी का वर्क 200
इन सबको मिलाकर माजून तैयार करें।
मात्रा
7 माशा प्रातःकाल।
यदि सामर्थ्य हो तो
निम्न भस्म/कुश्ते प्रत्येक 1-1 तोला मिलाने से यह और अधिक उत्कृष्ट माना जाता है:
- कुश्ता सोना
- कुश्ता चाँदी
- कहरबा
- मर्जान
- अकीक
- मोती
सोने और चाँदी के वर्क को अर्क में घोटकर विशेष विधि से सात बार अग्नि देकर मकल्स तैयार कर उसमें सम्मिलित किया जा सकता है।
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