02/09/2026
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के एक हफ्ते बाद भी तबाही का सिलसिला जारी है। मौतों का आंकड़ा 1,114 पहुंच गया है, जबकि करीब 3,900 लोग अब भी लापता हैं। बचाव दल सुरंगों और दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं।
इस आपदा ने एक बार फिर हिमालयी इलाकों में बढ़ते प्राकृतिक खतरों और तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, भविष्य में ऐसे हादसों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए तीन बातों पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
पहली- सुरक्षित जगह पर निर्माण। नदियों के किनारे, नदी के पुराने रास्तों और अस्थिर पहाड़ी ढलानों पर निर्माण को लेकर सख्त नियम जरूरी हैं।
दूसरी- बुनियादी ढांचे की लंबी अवधि की सुरक्षा। सड़क, पुल, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और दूसरी परियोजनाएं बनाते समय सिर्फ मौजूदा हालात नहीं, बल्कि आने वाले दशकों में तापमान, ग्लेशियर और पहाड़ों में होने वाले बदलावों को भी ध्यान में रखना होगा।
तीसरी- स्थानीय और पारंपरिक ज्ञान का इस्तेमाल। पहाड़ी इलाकों में रहने वाले समुदाय पुराने समय से नदी और निचले इलाकों से दूर ऊंची जगहों पर बसते आए हैं। आधुनिक निर्माण में कई जगह इस प्राकृतिक सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया है। ऐसे में स्थानीय लोगों के पारंपरिक ज्ञान को आपदा प्रबंधन और जमीन के इस्तेमाल की योजना में शामिल करना जरूरी है।
Nepal में तबाही के बाद जमीनी हालात क्या हैं? देखिए नेपाल से NewsPotli के लिए
Arvind Shukkla की ग्राउंड रिपोर्ट- https://youtu.be/yCOrnFNCPL0?si=K5uvFQU7U2q-a-og