30/05/2026
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लोकतंत्र के लिए वरदान है या डिजिटल गुलामी का नया औजार? सैम पित्रोदा ने मीडिया स्वराज के साथ विशेष बातचीत में EVM, चुनावी रैलियों और भारतीय भाषाओं के डेटा संकट पर किए कई चौंकाने वाले खुलासे। पढ़ें पूरा लेख।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या डिजिटल गुलामी? सैम पित्रोदा ने चेताया—लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव को कुचल रहा है 'पावर और प्रॉफिट' का गठजोड़
आज पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की नई क्रांति को लेकर कौतूहल में है। तकनीक की इस चमक-दमक के बीच एक बड़ा और डरावना सवाल यह उठ रहा है कि क्या AI आम नागरिक को ज्यादा आजादी और ताकत देगा, या फिर यह चंद बड़ी टेक कंपनियों के एल्गोरिदम और अकूत पैसे वाली राजनीतिक पार्टियों के भंवरजाल में हमें 'डिजिटल गुलाम' बना देगा?
इसी गंभीर विषय पर भारत की टेलीकॉम क्रांति के जनक और तकनीकी विशेषज्ञ **सैम पित्रोदा (Sam Pitroda) ने अमेरिका के शिकागो शहर से 'मीडिया स्वराज' (Media Swaraj) के लिए हमसे खुलकर बात की। इस विशेष इंटरव्यू में उन्होंने AI के खतरों, चुनावी धांधलियों, ईवीएम (EVM) पर उठते सवालों और भारत की तकनीकी संप्रभुता को लेकर कई ऐसे चौंकाने वाले बिंदु उठाए हैं, जिन पर तुरंत बहस शुरू होना जरूरी है। please visit www.mediaswaraj.com and YouTube channel for full article and interview
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दूसरी कुछ प्रेक्षकों का अनुमान है कि इस अभियान के पीछे सत्तारूढ़ भारतीय जानता पार्टी…