27/04/2026
कहानी: गलतफहमी की कीमत
एक ऐसी युवक की कहनी जिसकी पत्नी गलतफहमी का शिकार हो जाती है और अंत में जब सही जानकारी होती है तो वह पछताती है. तब तक सब ख़त्म हो चूका होता है. उसका नया प्रेमी धोखा देकर सब लूट कर चला गया होता है। पूरी कहानी पढ़ें।
राहुल और नेहा की शादी को सात साल हो चुके थे। दोनों की जिंदगी खुशहाल थी, लेकिन पिछले कुछ महीनों से राहुल काम में बहुत व्यस्त रहने लगा था। वह देर रात घर आता, फोन पर ज्यादा बात करता और अक्सर चुप-चुप रहता।
नेहा के मन में शक घर करने लगा। उसने कई बार राहुल से पूछा, मगर राहुल हर बार सिर्फ इतना कहता, “बस थोड़ा काम का दबाव है, सब ठीक हो जाएगा।”
एक दिन नेहा ने राहुल के फोन पर एक महिला का मैसेज देखा—
"कल मिलना मत भूलना, इंतज़ार रहेगा।"
अब नेहा को यकीन हो गया कि राहुल उसे धोखा दे रहा है। गुस्से और दर्द में उसने राहुल से दूरी बना ली। इसी बीच उसकी मुलाकात करण नाम के एक आदमी से हुई। करण मीठी बातें करता, नेहा का दुख समझता और उसे एहसास दिलाता कि वही उसका सच्चा साथी है।
धीरे-धीरे नेहा करण के करीब आ गई।
उसने राहुल का घर छोड़ दिया और करण के साथ नई जिंदगी के सपने देखने लगी।
कुछ दिनों बाद अचानक राहुल की तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल से फोन आया, लेकिन नेहा नहीं गई। उसे लगा यह सब नाटक है।
दो हफ्ते बाद खबर मिली—राहुल अब इस दुनिया में नहीं रहा।
नेहा टूट गई, लेकिन जब वह राहुल के ऑफिस गई, तो वहां उसे सच्चाई पता चली। राहुल कैंसर से जूझ रहा था। वह इलाज करवा रहा था और जिस महिला के मैसेज आए थे, वह डॉक्टर थी।
राहुल ने नेहा को इसलिए नहीं बताया क्योंकि वह उसे दुखी नहीं करना चाहता था।
ऑफिस वालों ने बताया कि राहुल आखिरी दिनों में भी नेहा के नाम एक घर और बैंक बैलेंस छोड़ गया था।
नेहा रोते हुए करण के पास गई, मगर वहां ताला लगा था।
पड़ोसियों ने बताया—
“वह तो कई लड़कियों से पैसे लेकर भाग चुका है।”
अब नेहा के पास न राहुल था, न करण।
एक तरफ सच्चा प्यार मिट्टी में सो चुका था, दूसरी तरफ झूठा प्रेम उसे लूटकर चला गया था।
नेहा आईने के सामने खड़ी खुद से सिर्फ एक सवाल पूछ रही थी—
"अगर मैंने एक बार सच जानने की कोशिश की होती... तो क्या आज सब कुछ बच सकता था?"
लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी।