Shah Faisal Choudhary

Shah Faisal Choudhary 21 Jan
Iɴᴅɪᴀɴ
Lᴜᴄᴋɴᴏᴡ❤️
Mᴜsʟɪᴍ🕋 Hi there! Welcome to my personal blog where I share my thoughts and opinions on the worlds of games, sports, and politics.

As a passionate gamer and sports enthusiast, I love diving deep into these topics and exploring the latest news and trends. I also have a keen interest in politics, and often discuss current events and policy issues that impact our world. Join me as we explore these exciting worlds together and discover all the latest updates and insights. Let's connect and engage in meaningful conversations!

02/03/2026

Important to note: It’s increasingly apparent that New Delhi has picked a side this time in the West Asia war. PM Modi’s visit to Israel, the call to express solidarity with UAE govt and the silence on Ali Khamenei death are clear signs that India is with the US-Israel axis. Whether it’s the ‘right’ call we shall know in time (‘normalising’ regime change through bloody conflict is fraught with unimagined risk) but for now New Delhi appears to have abandoned any pretence of neutrality and non-alignment in the belief that our ‘national interest’ lies in being with the more powerful side in a polarised Trumpian world disorder. How we navigate this uncertain world will be watched with much interest...

   UP वोटर लिस्ट 2003 में अचानक बदलाव से हड़कंप, मतदाताओं में बढ़ी शंका—आखिर जिम्मेदार कौन..?विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SI...
10/12/2025

UP वोटर लिस्ट 2003 में अचानक बदलाव से हड़कंप, मतदाताओं में बढ़ी शंका—आखिर जिम्मेदार कौन..?

विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई वर्ष 2003 की मतदाता सूची में अचानक हुए बदलाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। नवंबर माह में बड़ी संख्या में लोगों ने वेबसाइट Chief Electoral Officer, Uttar Pradesh से 2003 की लिस्ट डाउनलोड की थी, लेकिन 7 दिसंबर को पुनः डाउनलोड करने पर उसका स्वरूप पूरी तरह बदला हुआ नजर आया।

जीता जागता उदाहरण प्रयागराज की 261-पश्चिम विधानसभा, भाग संख्या 271 के मतदाताओं ने बताया कि 10 नवंबर को डाउनलोड की गई सूची और मौजूदा सूची के पहले पन्ने में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। इसके बाद लोगों में आशंका बढ़ गई है कि कहीं नाम गायब तो नहीं किए गए, या सूची में किसी प्रकार की फेरबदल तो नहीं हुई।

मतदाता लगातार सवाल उठा रहे हैं कि इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज में बदलाव क्यों हुआ, इसकी जिम्मेदारी किसकी है और इसका जवाब कौन देगा।

   will      , remember these faces.            "Zulm k sathi bhi zalim hi kehlaye jate hain, Khamosh lab bhi kabhi kabh...
03/04/2025

will , remember these faces.

"Zulm k sathi bhi zalim hi kehlaye jate hain, Khamosh lab bhi kabhi kabhi gunah uthate hain"

28/03/2025

20/03/2025
09/03/2025

30/08/2024
30/08/2024

कंगना रनौत विपक्ष को वो अनमोल हीरा मिली है वो जब भी इंटरव्यू करेंगी विपक्ष को कोई न कोई मुद्दा और सोशल मीडिया को कोई न कोई मसाला दे देंगी !!
ये सब जानबूझकर भी किया जा सकता है क्योंकि पॉपुलर होना मीडिया में बने रहना नेताओ और अभिनेताओं की आदत है !!

09/06/2024

लोकतंत्र की जय हो ।

विश्व की सबसे बड़ी पार्टी का इस लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु, पंजाब , सिक्किम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, पुडुचेरी, चंडीगढ़, लद्दाख और लक्षद्वीप में खाता नहीं खुला है ।

आधी सदी से ज़्यादा देश के हर प्रदेश , ज़िले और गाँव तक में जीतने वाली कांग्रेस का मध्य प्रदेश , उत्तराखण्ड , हिमाचल प्रदेश , आंध्र प्रदेश , दिल्ली , अरुणाचल प्रदेश , सिक्किम , जम्मू कश्मीर , मिज़ोरम , लद्दाख , त्रिपुरा और अंडमान निकोबार में खाता नहीं खुला ।

राष्ट्रीय पार्टी बसपा पूरे देश में शून्य पर सिमट गयी । बंगाल और त्रिपुरा में कई बार सरकार बनाने वाली लेफ़्ट पार्टियाँ बंगाल और त्रिपुरा में शून्य पर सिमट गयी । तमिलनाडु में कई बार सरकार बनाने वाली एआईएडीएमके शून्य पर आ गयी ।

पिछले चुनाव में हाशिये पर पहुँच चुके चंद्रबाबु नायडू आज किंग मेकर की भूमिका में हैं और पिछले चुनाव में सूरज की तरह उगने वाले जगन रेड्डी डूबने की कगार पर पहुँच चुके हैं ।

उड़ीसा में दशकों से राज करने वाले नवीन पटनायक लुप्त हो गए और उड़ीसा में जिस बीजेपी को लड़ने के लिए प्रत्याशी तक नवीन बाबू देते थे वो अब प्रचंड बहुमत से सत्ता पर क़ाबिज़ है ।

नीतीश कुमार जिनका लोग यह चुनाव आख़िरी मान रहे थे वो अचानक इतने प्रासंगिक हो गये कि केंद्र की सरकार उनके ऊपर टिक गयी और केजरीवाल लगातार दो बार प्रचंड बहुमत से दिल्ली जीतने के बाद भी फिर से दिल्ली में खाता नहीं खोल पाये ।

चौटाला परिवार की दोनो पार्टियाँ हरियाणा में किसी सीट पर जीतना तो छोड़िये दूसरे नंबर पर भी नहीं आयी और पंजाब में कई बार सरकार बनाने वाले अकाली मात्र एक सीट जीत पाये ।

लोकतंत्र में अहंकार किसी भी पार्टी के लिए ज़हर है क्योंकि ईवीएम राजा नहीं जनसेवक चुनती है और जनता हर पाँच साल बाद उस सेवक के कर्मों का मूल्यांकन करती है । कई बार जनता से चूक भी हो जाती है लेकिन इस चूक की भरपाई का मौक़ा उसे अगले पाँच साल में दोबारा मिल जाता है ।

जो लोकतंत्र को नहीं समझते वो ही लोग जीत पर इतराते हैं और हार पर निराश हो जाते हैं । लोकतंत्र में कुछ भी परमानेंट नहीं होता है ।

जो आज साहिब ए मसनद हैं , कल नहीं होंगे ।

#लोकसभाचुनाव2024 #लोकसभाचुनाव #भारतीय #लोकतंत्र

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