09/06/2024
लोकतंत्र की जय हो ।
विश्व की सबसे बड़ी पार्टी का इस लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु, पंजाब , सिक्किम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, पुडुचेरी, चंडीगढ़, लद्दाख और लक्षद्वीप में खाता नहीं खुला है ।
आधी सदी से ज़्यादा देश के हर प्रदेश , ज़िले और गाँव तक में जीतने वाली कांग्रेस का मध्य प्रदेश , उत्तराखण्ड , हिमाचल प्रदेश , आंध्र प्रदेश , दिल्ली , अरुणाचल प्रदेश , सिक्किम , जम्मू कश्मीर , मिज़ोरम , लद्दाख , त्रिपुरा और अंडमान निकोबार में खाता नहीं खुला ।
राष्ट्रीय पार्टी बसपा पूरे देश में शून्य पर सिमट गयी । बंगाल और त्रिपुरा में कई बार सरकार बनाने वाली लेफ़्ट पार्टियाँ बंगाल और त्रिपुरा में शून्य पर सिमट गयी । तमिलनाडु में कई बार सरकार बनाने वाली एआईएडीएमके शून्य पर आ गयी ।
पिछले चुनाव में हाशिये पर पहुँच चुके चंद्रबाबु नायडू आज किंग मेकर की भूमिका में हैं और पिछले चुनाव में सूरज की तरह उगने वाले जगन रेड्डी डूबने की कगार पर पहुँच चुके हैं ।
उड़ीसा में दशकों से राज करने वाले नवीन पटनायक लुप्त हो गए और उड़ीसा में जिस बीजेपी को लड़ने के लिए प्रत्याशी तक नवीन बाबू देते थे वो अब प्रचंड बहुमत से सत्ता पर क़ाबिज़ है ।
नीतीश कुमार जिनका लोग यह चुनाव आख़िरी मान रहे थे वो अचानक इतने प्रासंगिक हो गये कि केंद्र की सरकार उनके ऊपर टिक गयी और केजरीवाल लगातार दो बार प्रचंड बहुमत से दिल्ली जीतने के बाद भी फिर से दिल्ली में खाता नहीं खोल पाये ।
चौटाला परिवार की दोनो पार्टियाँ हरियाणा में किसी सीट पर जीतना तो छोड़िये दूसरे नंबर पर भी नहीं आयी और पंजाब में कई बार सरकार बनाने वाले अकाली मात्र एक सीट जीत पाये ।
लोकतंत्र में अहंकार किसी भी पार्टी के लिए ज़हर है क्योंकि ईवीएम राजा नहीं जनसेवक चुनती है और जनता हर पाँच साल बाद उस सेवक के कर्मों का मूल्यांकन करती है । कई बार जनता से चूक भी हो जाती है लेकिन इस चूक की भरपाई का मौक़ा उसे अगले पाँच साल में दोबारा मिल जाता है ।
जो लोकतंत्र को नहीं समझते वो ही लोग जीत पर इतराते हैं और हार पर निराश हो जाते हैं । लोकतंत्र में कुछ भी परमानेंट नहीं होता है ।
जो आज साहिब ए मसनद हैं , कल नहीं होंगे ।
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