03/05/2026
वो दौर सोचिए जब बेटियों को बोझ समझा जाता था, उनकी आवाज़ दबा दी जाती थी और उनके सपनों को जन्म लेने से पहले ही खत्म कर दिया जाता था… उसी अंधेरे में एक इंसान खड़ा हुआ—डॉ. भीमराव अंबेडकर—जिसने सिर्फ कानून नहीं बनाए, बल्कि हर उस खामोश बेटी को आवाज़ दी, उसे पढ़ने का हक दिया, बराबरी का अधिकार दिया और सिर उठाकर जीने की हिम्मत दी… आज अगर कोई लड़की अपने सपने देख पा रही है, अपने फैसले खुद ले पा रही है, तो उसकी हर धड़कन में बाबासाहेब का संघर्ष गूंजता है—क्योंकि उन्होंने सिर्फ समाज नहीं बदला, उन्होंने हर बेटी की किस्मत नई लिख दी।