20/07/2026
लोकतंत्र में लाठी नहीं, संवाद की ज़रूरत है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के साथ हुई कथित लाठीचार्ज की तस्वीरें कई सवाल खड़े करती हैं। यदि नागरिक अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने के लिए भी सुरक्षित महसूस न करें, तो लोकतंत्र की आत्मा कमजोर होती है।
विरोध करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार व पुलिस की जिम्मेदारी। यदि किसी कार्रवाई में आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
लोकतंत्र की ताकत असहमति को सुनने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने में है, न कि टकराव में।
आवाज़ दबाने से सवाल खत्म नहीं होते, बल्कि और मजबूत हो जाते हैं।