17/04/2026
जिस उम्र में शरीर साथ छोड़ देता है, उस 80 साल की उम्र में बिहार के शेर बाबू कुंवर सिंह राजपूत ने अंग्रेजों को एक बार नहीं, 7 बार दौड़ा-दौड़ा कर मारा था!
इतिहास गवाह है कि ब्रिटिश इतिहासकार होम्स ने भी माना था: "युद्ध के समय कुंवर सिंह की उम्र 80 साल थी। अगर वह जवान होते तो अंग्रेजों को 1857 में ही भारत छोड़ना पड़ता।"
1857 की क्रांति के भीष्म पितामह कहे जाने वाले जगदीशपुर के इस राजपूत योद्धा की कहानी सुनिए:
जब गंगा पार करते समय अंग्रेजों की गोली उनकी बांह में लगी, तो शरीर में जहर फैलने के डर से उन्होंने अपनी तलवार उठाई और अपना ही हाथ काटकर माँ गंगा को अर्पित कर दिया।
हाथ कटने के बाद भी वे रुके नहीं! एक हाथ से युद्ध लड़ा, अंग्रेजों को हराया और जगदीशपुर किले से उनका झंडा उतारकर अपना केसरिया ध्वज फहराया।
सवाल यह है कि क्या ऐसे महान क्रांतिकारी का इतिहास पाठ्यपुस्तकों में प्रमुखता से नहीं होना चाहिए?
ताकि हमारी युवा पीढ़ी जान सके कि हमारे पूर्वजों ने मातृभूमि के लिए क्या बलिदान दिए हैं।