30/05/2026
सचिन को संन्यास लिये लगभग 13–14 साल होने को हैं..24 साल देश के लिए क्रिकेट खेला है सचिन ने..आज सचिन आपको क्रिकेट ग्राउंड में बमुश्किल देखने को मिलते हैं..ट्विटर पर ही थोड़ा एक्टिव रहते हैं..कमेंट्री में मुश्किल से कभी देखने को मिले..किसी मैच के प्रेजेंटेशन में भी मुश्किल से कभी..मैच के बीच होने वाले शो में भी नहीं दिखाई देते हैं..
लेकिन अपने पीछे ऐसी विरासत छोड़ कर गए हैं कि हर नया बल्लेबाज जब अच्छा प्रदर्शन करता है तो उसकी तुलना सीधे सचिन से की जाती है..अब सोशल मीडिया पर एक पक्ष एक्टिव हो गया है जो वैभव की तुलना में सचिन को कमतर दिखाने में लगा है..कभी शुभमन गिल तो कभी विराट कोहली, कभी रोहित शर्मा तो कभी पृथ्वी शॉ..यहीं नहीं लोग तो स्टीवन स्मिथ से लेकर जो रूट तक की सचिन से तुलना करने से नहीं चूकते हैं..
मतलब ऐसा नहीं है कि सिर्फ भारतीय खिलाड़ियों की तुलना ही की जाती हो, विदेशी खिलाड़ियों का कम्पेरिजन भी सचिन से किया जाता है..समस्या ये है कि जिन्होंने सचिन को देखा ही नहीं खेलते वो "वो अपने से बड़े क्रिकेट प्रेमी के पक्ष को ऐसे नकार देते हैं जैसे उन्होंने सचिन की एक एक पारी को लाइव देखा हो" समस्या ये है कि सचिन से तुलना हमेशा सचिन को नीचा दिखाने के लिए की जाती है..कभी विराट को सचिन से कहीं अधिक बड़ा बताएंगे तो कभी शुभमन गिल को, कभी कहेंगे कि संगाकारा बेहतर थे, तो कभी कहेंगे रिकी पोंटिंग..
कहने का तात्पर्य बस इतना है कि 13 साल बीत गए सचिन को मैदान छोड़े, लेकिन कोई वैभव के लिए ये नहीं कहता है कि उसका बैट स्विंग विराट से बेहतर है, या उसकी कलाई में शुभमन गिल से ज्यादा दम है..तुलना किसी भी बल्लेबाज की होती है तो सिर्फ और सिर्फ सचिन से..आप याद करिए और बताइए कि कभी आपने किसी के लिए सुना है कि "फलाना बैट्समैन अगला विराट कोहली है क्रिकेट की दुनिया का..?"
ऐसी विरासत आखिर कैसे बनाई सचिन ने..? वाक़ई आपको लगता है कि सचिन अपने लिए खेलते थे..आप कहेंगे कि शतक के समय सचिन धीमा खेलते थे.. मैं कहूंगा कि बिल्कुल, क्योंकि उस समय क्रिकेट इतना तेज़ नहीं था, और न टी20 जैसी मानसिकता होती थी...फिर जो आदमी अपने करियर में कई बार नर्वस 90 का शिकार हुआ हो, उसका शतक के लिए रुकना कोई बड़ी बात नहीं थी तब..लगभग उस समय दुनिया का हर बल्लेबाज यही करता था, यही ट्रेंड था..यही जरूरत थी उस समय क्रिकेट की..फिर भी 463 मैच में सचिन का स्ट्राइक रेट लगभग 87 का है..जो कि शानदार है..इसीलिए सचिन ही थे जिन्होंने वनडे क्रिकेट की दुनिया में पहला दोहरा शतक लगाया था..
पर सचिन को हमने ऐसी परियाँ खेलते देखे हैं जो उस दौर में दूसरे नहीं खेल सकते थे..आज आईपीएल में GT को देखिए, सिर्फ साईं सुदर्शन और शुभमन गिल के भरोसे आज वो फाइनल में हैं.. जॉस बटलर का फॉर्म खराब ही रहा है इस साल लगभग, इसके अलावा उनके पास एक ढंग का बैट्समैन नहीं दिखाई देता जो जिम्मेदारी अपने कंधे पर ले सके..ऐसी ही टीम थी भारत की तब..सचिन आउट तो टीम ढेर..
मुझे लगता है कि आने वाले 20 साल और लोग सचिन से ही तुलना करेंगे आने वाले नए बल्लेबाजों की.. मैंने तो ऐसे ऐसे बल्लेबाजों की तुलना सचिन से होते देखा हूँ, जो एक सीरीज के बाद फिर कभी दिखाई भी नहीं दिये..आने वाले समय में भी कई रचिन रवींद्र आयेंगे, हाशिम अमला आयेंगे, या विराट कोहली आयेंगे, जिनकी तुलना सचिन से की जाएगी, और हम भी चाहते हैं कि होनी ही चाहिए, बस सचिन को नीचा या छोटा दिखाकर नहीं..और फिर इसे ही तो विरासत कहा जाता है..ऐसी विरासत कोई साल दो साल में नहीं बनती है, इसके लिए सचिन की दशकों की मेहनत है..