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सचिन को संन्यास लिये लगभग 13–14 साल होने को हैं..24 साल देश के लिए क्रिकेट खेला है सचिन ने..आज सचिन आपको क्रिकेट ग्राउंड...
30/05/2026

सचिन को संन्यास लिये लगभग 13–14 साल होने को हैं..24 साल देश के लिए क्रिकेट खेला है सचिन ने..आज सचिन आपको क्रिकेट ग्राउंड में बमुश्किल देखने को मिलते हैं..ट्विटर पर ही थोड़ा एक्टिव रहते हैं..कमेंट्री में मुश्किल से कभी देखने को मिले..किसी मैच के प्रेजेंटेशन में भी मुश्किल से कभी..मैच के बीच होने वाले शो में भी नहीं दिखाई देते हैं..

लेकिन अपने पीछे ऐसी विरासत छोड़ कर गए हैं कि हर नया बल्लेबाज जब अच्छा प्रदर्शन करता है तो उसकी तुलना सीधे सचिन से की जाती है..अब सोशल मीडिया पर एक पक्ष एक्टिव हो गया है जो वैभव की तुलना में सचिन को कमतर दिखाने में लगा है..कभी शुभमन गिल तो कभी विराट कोहली, कभी रोहित शर्मा तो कभी पृथ्वी शॉ..यहीं नहीं लोग तो स्टीवन स्मिथ से लेकर जो रूट तक की सचिन से तुलना करने से नहीं चूकते हैं..

मतलब ऐसा नहीं है कि सिर्फ भारतीय खिलाड़ियों की तुलना ही की जाती हो, विदेशी खिलाड़ियों का कम्पेरिजन भी सचिन से किया जाता है..समस्या ये है कि जिन्होंने सचिन को देखा ही नहीं खेलते वो "वो अपने से बड़े क्रिकेट प्रेमी के पक्ष को ऐसे नकार देते हैं जैसे उन्होंने सचिन की एक एक पारी को लाइव देखा हो" समस्या ये है कि सचिन से तुलना हमेशा सचिन को नीचा दिखाने के लिए की जाती है..कभी विराट को सचिन से कहीं अधिक बड़ा बताएंगे तो कभी शुभमन गिल को, कभी कहेंगे कि संगाकारा बेहतर थे, तो कभी कहेंगे रिकी पोंटिंग..

कहने का तात्पर्य बस इतना है कि 13 साल बीत गए सचिन को मैदान छोड़े, लेकिन कोई वैभव के लिए ये नहीं कहता है कि उसका बैट स्विंग विराट से बेहतर है, या उसकी कलाई में शुभमन गिल से ज्यादा दम है..तुलना किसी भी बल्लेबाज की होती है तो सिर्फ और सिर्फ सचिन से..आप याद करिए और बताइए कि कभी आपने किसी के लिए सुना है कि "फलाना बैट्समैन अगला विराट कोहली है क्रिकेट की दुनिया का..?"

ऐसी विरासत आखिर कैसे बनाई सचिन ने..? वाक़ई आपको लगता है कि सचिन अपने लिए खेलते थे..आप कहेंगे कि शतक के समय सचिन धीमा खेलते थे.. मैं कहूंगा कि बिल्कुल, क्योंकि उस समय क्रिकेट इतना तेज़ नहीं था, और न टी20 जैसी मानसिकता होती थी...फिर जो आदमी अपने करियर में कई बार नर्वस 90 का शिकार हुआ हो, उसका शतक के लिए रुकना कोई बड़ी बात नहीं थी तब..लगभग उस समय दुनिया का हर बल्लेबाज यही करता था, यही ट्रेंड था..यही जरूरत थी उस समय क्रिकेट की..फिर भी 463 मैच में सचिन का स्ट्राइक रेट लगभग 87 का है..जो कि शानदार है..इसीलिए सचिन ही थे जिन्होंने वनडे क्रिकेट की दुनिया में पहला दोहरा शतक लगाया था..

पर सचिन को हमने ऐसी परियाँ खेलते देखे हैं जो उस दौर में दूसरे नहीं खेल सकते थे..आज आईपीएल में GT को देखिए, सिर्फ साईं सुदर्शन और शुभमन गिल के भरोसे आज वो फाइनल में हैं.. जॉस बटलर का फॉर्म खराब ही रहा है इस साल लगभग, इसके अलावा उनके पास एक ढंग का बैट्समैन नहीं दिखाई देता जो जिम्मेदारी अपने कंधे पर ले सके..ऐसी ही टीम थी भारत की तब..सचिन आउट तो टीम ढेर..

मुझे लगता है कि आने वाले 20 साल और लोग सचिन से ही तुलना करेंगे आने वाले नए बल्लेबाजों की.. मैंने तो ऐसे ऐसे बल्लेबाजों की तुलना सचिन से होते देखा हूँ, जो एक सीरीज के बाद फिर कभी दिखाई भी नहीं दिये..आने वाले समय में भी कई रचिन रवींद्र आयेंगे, हाशिम अमला आयेंगे, या विराट कोहली आयेंगे, जिनकी तुलना सचिन से की जाएगी, और हम भी चाहते हैं कि होनी ही चाहिए, बस सचिन को नीचा या छोटा दिखाकर नहीं..और फिर इसे ही तो विरासत कहा जाता है..ऐसी विरासत कोई साल दो साल में नहीं बनती है, इसके लिए सचिन की दशकों की मेहनत है..

बॉलीवुड ल्यारी ने रणवीर सिंह पर इंडस्ट्री बैन लगाया है न!  हालांकि लोगों का रिएक्शन देखकर, बैन अन प्रोफेशनल रवैये में बद...
30/05/2026

बॉलीवुड ल्यारी ने रणवीर सिंह पर इंडस्ट्री बैन लगाया है न! हालांकि लोगों का रिएक्शन देखकर, बैन अन प्रोफेशनल रवैये में बदल गया है। खैर

ल्यारी के इस बैन से 1993 का बैन याद आ गया है।

अनुराग कश्यप ने हुसैन ज़ैदी की पुस्तक ब्लैक फ्राइडे: द ट्रू स्टोरी ऑफ द बॉम्बे बॉम ब्लास्ट का फ़िल्म रूपांतरण किया था। फ़िल्म में सारे क्रिमिनल किरदार ओरिजनल थे यानी दाऊद इब्राहिम, टाइगर मेनन, याकूब मेनन आदि। कोई फ़िल्टर नहीं लगाया था।

इसलिए इसके साइड इफ़ेक्ट में फ़िल्म पर बैन लगा दिया गया। चूँकि उन दिनों डी कंपनी बहुत पावरफुल थी। फ़िल्म को बैन करने की याचिका बम धमाकों में शामिल आरोपियों ने की थी। और मिलार्ड ने उनकी माँग मानते हुए फ़िल्म बैन कर दी।

फ़िल्म तीन साल तक बैन रही। जब फ़िल्म का हाईअप ख़त्म हो गया तब रिलीज़ हुई। खैर

आदित्य धर ने धुरंधर से ल्यारी के अब्बू को विथ आउट फ़िल्टर सिल्वर स्क्रीन पर उतारा है। बल्कि हीरो माफिक छवि से उलट तड़पता, लाचार, बीमार दिखाया है।

ल्यारी कैसे सहन करें?

सीधे सीधे आदित्य धर को कैसे कुछ कहे! फिर भी धुरंधर के लिए बहुत नैरेटिव खड़े किए गए। जर्मन शेपर्ड को भी पीछे छोड़ा गया था। कोई फ़ायदा नहीं हुआ और धुरंधर इंडस्ट्री हिट हुई।

धुरंधर की खीझ मिटाने का मौक़ा तलाश रहे थे कि रणवीर सिंह को लपेट लिया।

अकेले रणवीर सिंह नहीं है। द केरला स्टोरी की अदा शर्मा भी है। और दर्शन कुमार भी द कश्मीर फाइल्स से ल्यारी की आँखों में खटक रहे थे। उन्हें तो इग्नोर कर दिया गया है। रणवीर सिंह को इग्नोर करना कतई आसान नहीं है।

इतना ही नहीं, अवार्ड फ़क्शन में जाकिर ख़ान ने धुरंधर, जुहू और धुएँ का जिक्र किया था। तो गोल्डी बहल ने ज़ाकिर की इंसल्ट कर दी। क्योंकि ज़ाकिर ने ल्यारी में खड़े होकर उस फ़िल्म की प्रशंसा की थी जिसने उनके अब्बा की ख़राब इमेज दिखाई है।

बॉलीवुड ल्यारी की विचारधारा स्पष्ट है कि एकतरफा सेकुलरिज्म रखोगे तो फायदे में रहोगे। किंतु अब ल्यारी के दिन लद चुके है। उनके दांव ज़्यादा कारगर नहीं है। क्योंकि ल्यारी की सफ़ाई चल रही है और जल्द साफ़ हो जाएगी।

फोटो-इंटरनेट

27/05/2026

देश के अलग-अलग हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसके साथ ही दैनिक जीवन में गर्मी से होने वाली कई कठिनाइयां भी बढ़ रही हैं। मैं सभी देशवासियों से आग्रह करता हूं कि जितनी अधिक सावधानी बरत सकें, अवश्य बरतें। कृपया स्वयं को हाइड्रेटेड रखें, घर से बाहर निकलते समय पानी साथ रखें। ऐसे मौसम में आपकी संवेदनशीलता भी बहुत बड़ा सहारा बन जाती है। यदि संभव हो, तो किसी प्यासे व्यक्ति को एक गिलास पानी अवश्य दें। मैं ऐसे लोगों की सराहना भी करूँगा जो अपने घरों के और दुकानों के बाहर मटके में जल रखते हैं ताकि कोई भी उनसे पानी पी सके।

अत्यधिक गर्मी से होने वाली परेशानी, जैसे चक्कर आना, मतली या ज्यादा थकान लगे तो उसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। यदि आपके आसपास किसी व्यक्ति को अचानक बेहोशी जैसा लगे, कमजोरी महसूस करे या फिर अस्वस्थ दिखाई दे, तो उसे तुरंत किसी ठंडी और छायादार जगह पर ले जाएं। उसे पानी, ORS या अन्य तरल पदार्थ दें, जिससे शरीर को राहत मिल सके। बच्चे, बुज़ुर्ग और धूप में काम करने वाले लोग इस भीषण गर्मी में सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। समय रहते ध्यान न देने पर यह स्थिति हीटस्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या का रूप ले सकती है। ऐसे समय में आपकी सतर्कता और देखभाल किसी का जीवन बचा सकती है।

जब भी संभव हो, अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और अन्य प्रियजनों को फोन कर उनका हालचाल अवश्य पूछें। उन्हें पर्याप्त पानी पीने, दोपहर की तेज धूप में बाहर न निकलने और जितना हो सके, आराम करने की सलाह दें।

इस प्रचंड गर्मी में हमें अपने आसपास के पशु-पक्षियों को भी नहीं भूलना चाहिए। अपने घर, बालकनी, छत, दुकान या ऑफिस के बाहर पानी से भरा एक छोटा-सा बर्तन रखना भी किसी प्यासे पक्षी के लिए जीवनदान बन सकता है। आइए, इन कठिन दिनों में पूरी संवेदनशीलता और करुणा के साथ एक-दूसरे का ध्यान रखें।

......आज से प्रधानमंत्री मोदीजी का 5 देशों का 5 दिवसीय दौरा शुरू हो रहा है....भारत के भविष्य के लिए ये दौरा बहुत अहम है....
16/05/2026

......आज से प्रधानमंत्री मोदीजी का 5 देशों का 5 दिवसीय दौरा शुरू हो रहा है....भारत के भविष्य के लिए ये दौरा बहुत अहम है....इन 5 मे से 4 यूरोपीय देश हैं और एक UAE है.....इस दौरे पर 70 billion डॉलर के व्यापार समझौते होने हैं.....

* आज सबसे पहले मोदीजी UAE जाएंगे....जहां तेल और गैस के समझौते होंगे...भारत ओमान के बीच 40000 करोड़ का एक समझौता होने वाला है....जिसमें समुद्र के नीचे से पाइपलाइन के जरिए ओमान से गुजरात तक तेल की supply होगी....UAE को इस समझौते से जोड़ने की बात भी चल रही है ....अगर ये फाइनल होता है तो अगले 5 साल में तेल की supply में आने वाली दिक्कत दूर हो जाएगी.

* इसके बाद आज ही मोदीजी नीदरलैंड जाएंगे....दुनिया की सबसे एडवांस semiconductor टेक्नोलॉजी यहीं से आती है....और भारत chip manufacturing का बड़ा खिलाड़ी बनना चाहता है....तो उसके लिए technology यहीं से आएगी.

* 17 मई को मोदीजी स्वीडन पहुंचेंगे....जहां AI...Green Technology....Defence और Innovation पर समझौते होंगे.

* 18 मई को मोदीजी नॉर्वे जाएंगे....पिछले 43 सालों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का ये पहला दौरा होगा नॉर्वे का.....नोर्वे समुद्री अर्थव्यवस्था में दुनिया का सबसे मजबूत देश माना जाता है....वहां Blue Economy....Green Shipping और Offshore Wind Energy पर समझौते होंगे.

* 19 मे को इस दौरे के आखिरी देश इटली पहुंचेंगे...Defence Manufacturing.....Aerospace....और Rail Technology पर समझौते होंगे...Make In India को यूरोपीय टेक्नोलॉजी से जोड़ा जाएगा.

* 20 को वापस भारत.
.......यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि यूरोप ने चीन से दूरी बना रखी है और अमेरिका के साथ भी उसके रिश्ते अब पहले जैसे नहीं रहे....भारत के साथ अभी पिछले दिनों ही यूरोप ने FTA sign किया है....जिसे Mother of All Trade Deal कहाः गया है.......इसलिए ये यात्रा सिर्फ यात्रा नहीं है....बल्कि भविष्य के दुनिया और भविष्य के भारत का ब्लू प्रिंट है.....
....बाकि 5 दिनों मे 5 देशों के दौरे को कोई विदेश घूमने जाना कहे तो ये उसकी समझ है....जिसकी जितनी समझ है वो उतना ही समझेगा....

जय श्रीराम 🙏🚩
Nation Pulse 🇮🇳🚩

IPL में रिकॉर्ड 9 शतक बनाने के बाद विराट कोहली ने कल एक बहुत महत्वपूर्ण बात कही..जब इयान बिशप ने कोहली से पूछा कि सबसे त...
15/05/2026

IPL में रिकॉर्ड 9 शतक बनाने के बाद विराट कोहली ने कल एक बहुत महत्वपूर्ण बात कही..जब इयान बिशप ने कोहली से पूछा कि सबसे तेज़ 14 हज़ार रन..रिकॉर्ड 9 शतक बनाकर उन्हें कैसा लगता है तो कोहली का जवाब था कि..

"मुझे वो सब करने का मौका मिल रहा है, जिसका सपना करोड़ों लोग देखते हैं..देश को रिप्रेजेंट कर रहा हूं..IPL में दुनिया के बेस्ट खिलाड़ियों से कंपीट कर रहा हूं..नए और तूफानी बैटिंग करने वाले युवा खिलाड़ियों के बीच भी अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए हूं..मैं जानता हूं कि एक दिन ये सब खत्म होगा..मुझे खेल छोड़ना पड़ेगा..इसलिए जब तक खेल रहा हूं..तब तक एंजॉय करना चाहता हूं, फिर चाहे बैटिंग हो या फील्डिंग"

अब कोहली की बात को खुद से जोड़िए..ये बात मैं उनके लिए कह रहा हूं, जो मेरी तरह 45 या 50 के फेरे में हैं..84 लाख योनियों में भटकने के बाद मनुष्य योनि मिली है..50 साल तक ज़िंदा हैं, जो कोरोनकाल के बाद अचानक/युवावस्था में हो रही मौतों को देखते हुए अपने आप में बड़ी उपलब्धि है..हालांकि एक दिन हमें भी खत्म हो जाना है, तो जब तक ज़िन्दा हैं, क्यों ना एंजॉय करें?

अब ये मत कहना कि जीवन में इतना संघर्ष है, खुश कैसे रहें..तो बंधु बात ऐसी है, जीवन में संघर्ष सभी के हैं..फिर चाहे राजा हो या रंक? संघर्षों का प्रारूप अलग है..भगवान राम भी जीवन भर संघर्ष करते रहे..अभी कल ही अरबपति प्रतीक यादव की खबर भी आई..तो परफेक्ट लाइफ किसी की नहीं है..जैसी है, उसी में एंजॉय करना है..
#विराट #विराटकोहली

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के विरोध के पीछे छिपे हाथ का पर्दाफ़ाश।मिलिए आशीष कोठारी से। उन्होंने इस प्रोजेक्ट के खिलाफ NGT ...
14/05/2026

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के विरोध के पीछे छिपे हाथ का पर्दाफ़ाश।

मिलिए आशीष कोठारी से। उन्होंने इस प्रोजेक्ट के खिलाफ NGT में पिटीशन फाइल की थी।
लेकिन क्यों? और वह कौन हैं?
आशीष कोठारी ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के खिलाफ बहुत एक्टिव हैं। वह कल्पवृक्ष NGO के फाउंडर हैं। आशीष कोठारी के कई NGO से कनेक्शन हैं, जिनमें हर्ष मंदर और प्रशांत भूषण से जुड़े NGO भी शामिल हैं।
हमेशा की तरह, आशीष कोठारी के NGO को उसी इंटरनेशनल एलीट NGO ग्रुप और उनके इंडियन बिजनेस पार्टनर से फंड मिलता है।
आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि आशीष कोठारी लद्दाख में भी बहुत करीब से काम कर रहे थे और विरोध प्रदर्शनों में एक्टिव थे। सिर्फ लद्दाख ही नहीं, आप उन्हें नॉर्थ ईस्ट और लेह लद्दाख समेत हर ज़रूरी ट्राइबल इलाके में पाएंगे। लेकिन वह इतने पावरफुल क्यों हैं, और वह कौन हैं?

सबसे हैरान करने वाली बात यह है।

वह रजनी कोठारी के बेटे हैं, जिन्होंने CSDS शुरू किया था, जिसे CIA के पैसे से फंड किया गया था।
फोर्ड फाउंडेशन और फोर्ड ट्रस्टी टाटा ने उन्हें CSDS में सम्मानित किया है। अब, एक और दिलचस्प बात। एक इंटरनेशनल NGO, सर्वाइवल इंटरनेशनल, 2023/24 से निकोबार प्रोजेक्ट के खिलाफ काम कर रहा है।
इत्तेफाक से, इस NGO को CIA की ब्रांच, फोर्ड फाउंडेशन और रॉकफेलर से भी शुरुआती फंडिंग मिली है! इस NGO ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर जेनोसाइड एक्सपर्ट्स का कॉल पब्लिश किया है। दिलचस्प बात यह है कि नंदिनी सुंदर इन तथाकथित एक्सपर्ट्स में से एक हैं जिनके माता-पिता फोर्ड और टाटा के लिए काम करते थे, और जिनके पति को टाटा से उनकी प्रोपेगैंडा वेबसाइट, द वायर के लिए डोनेशन मिला है! दिलचस्प बात यह है कि द वायर द ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के खिलाफ बहुत एक्टिव है!
क्या आप जानते हैं कि वे लोगों को कैसे बेवकूफ बना रहे हैं? उनके ‘एनवायरनमेंटल एक्टिविस्ट’ पंकज सेखसरिया आशीष कोठारी के कल्पवृक्ष के मेंबर हैं, और वह IIT में भी पब्लिक के पैसे से काम करते हैं! कांग्रेस से, जयराम रमेश ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के खिलाफ बहुत एक्टिव हैं, और वह राहुल गांधी के पीछे मुख्य लोगों में से एक हैं। इत्तेफ़ाक से, आशीष कोठारी के पिता, रजनी कोठारी, सैम पित्रोदा के साथ 1988 से जयराम रमेश के मेंटर रहे हैं।

चलिए मैं आपको एक और इत्तेफ़ाक दिखाता हूँ! प्रोफ़ेशनल प्रोटेस्टर और राहुल गांधी के भारत जोड़ो अभियान के डायरेक्टर, योगेंद्र यादव, रजनी कोठारी के CSDS लोकनीति के फ़ाउंडर-डायरेक्टर थे। ये रहे, विजय महाजन के साथ।

अब फिर से आशीष कोठारी पर आते हैं।

एक और इत्तेफ़ाक: सरदार सरोवर डैम के विरोध के पीछे आशीष कोठारी और उनका कल्पवृक्ष ग्रुप था। उन्होंने शुरुआती प्रोपेगैंडा रिपोर्ट तैयार की थी, और बाद में उन्होंने अपने NGO ग्रुप के साथ विरोध का प्लान बनाया। इत्तेफ़ाक से, आशीष कोठारी के पिता, रजनी कोठारी, सरदार सरोवर डैम के खिलाफ़ पहले साइन करने वाले थे!
इत्तेफ़ाक से, वह मेधा पाटकर समेत भारत के एक्टिविस्ट ग्रुप के मेंटर थे! बहुत कम लोग जानते हैं कि सरदार सरोवर डैम के विरोध में विदेशी लोग भी काफ़ी शामिल थे। इत्तेफ़ाक से, आशीष कोठारी इंटरनेशनल प्रोटेस्ट ग्रुप से भी बहुत अच्छे से जुड़े हुए हैं।
एक और इत्तेफ़ाक, आशीष कोठारी का भाई स्विट्जरलैंड में रहता है और UN एजेंसियों और इंटरनेशनल ग्रुप के लिए काम करता है, जिसमें भारत विरोधी ऑक्सफैम और सोरोस शामिल हैं। तो बहुत जल्द, ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के खिलाफ इंटरनेशनल ग्रुप की लहर आएगी।
उनका लोकल NGO ग्रुप भी नेचर के नाम पर प्रोटेस्ट करना शुरू कर देगा! आम लोग इन प्रोटेस्ट के पीछे छिपे हाथ को नहीं देख पाएंगे। इसलिए, ज़रूरी प्रोजेक्ट्स के खिलाफ पिटीशन फाइल करने से लेकर उनके खिलाफ प्लान किए गए प्रोटेस्ट के साथ नैरेटिव चलाने तक, इंटरनेशनल ग्रुप के हाथ में एक STRING है, उन्हें नेचर की कोई परवाह नहीं है!

आज तमिलनाडु विधानसभा में उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि सनातन धर्म को खत्म कर देना चाहिए। CM जोसेफ ने इसके खिलाफ कुछ कहने के ...
13/05/2026

आज तमिलनाडु विधानसभा में उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि सनातन धर्म को खत्म कर देना चाहिए। CM जोसेफ ने इसके खिलाफ कुछ कहने के बजाय हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया, मानो वे उनकी बात से सहमत हों।

अब बहुत से लोग पूछ रहे हैं कि केंद्र सरकार कोई कदम क्यों नहीं उठा रही। उनके पास इतनी बड़ी ताकत है, फिर भी वे कुछ नहीं कर रहे। कुछ लोग नूपुर शर्मा का उदाहरण दे रहे हैं, यह कहते हुए कि उन्होंने कुछ गलत नहीं कहा था, फिर भी इतना बड़ा विवाद हुआ, जबकि यहां एक नेता खुलेआम सनातन धर्म को मिटाने की बात कर रहा है और BJP चुप बैठी है।

मैं RSS को जानता हूं कि वे कैसे काम करते हैं और उनकी विचारधारा क्या है। वे कभी हिंसक नहीं होंगे और न ही किसी नेता के खिलाफ सीधे कार्रवाई करेंगे जो खुलेआम हमारे धर्म और संस्कृति के खिलाफ बोल रहा हो।

इसके बजाय, वे समय लेते हैं, जमीनी स्तर पर काम करते हैं और यह सुनिश्चित करने की कोशिश करते हैं कि तमिलनाडु में रहने वाले 7 करोड़ लोग समझें कि उनका नेता क्या कह रहा है और वे ऐसी बातों को किसी भी हालत में स्वीकार न करें। एक व्यक्ति को चुप कराने के बजाय, RSS तमिलनाडु के 7 करोड़ लोगों को जागरूक करना पसंद करती है। मुझे पता है कि यह बहुत लंबी प्रक्रिया है, लेकिन उनका काम करने का तरीका यही है।

हमने बंगाल में देखा है कि एक समय जो समाज खुद को उदारवादी और सेक्युलर कहता था, वह तथाकथित सेक्युलरिज्म के नाम पर अपनी ही संस्कृति का अपमान और मजाक सहन करता था। लेकिन अब स्थिति वैसी नहीं रही, और यह किसी जबरदस्ती या हिंसा का परिणाम नहीं है। यह RSS कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर किए गए जमीनी काम का नतीजा है, और फिलहाल तमिलनाडु में भी इसी तरह के काम की जरूरत है।

11/05/2026

"सक्षम राष्ट्र संकट आने से पहले अपने समाज को संगठित करना जानते हैं"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील को समझने के लिए एक बड़ा फर्क समझना पड़ेगा, Scarcity management और Strategic participation का फर्क।

पुराने भारत में जब प्रधानमंत्री जनता से अपील करते थे, तो उसका भाव अक्सर कमी से पैदा होता था। अनाज कम है, विदेशी मुद्रा कम है, संसाधन सीमित हैं, इसलिए नागरिक त्याग करें, एक समय का भोजन छोड़ें, कम खाएं... वह दौर scarcity management का था, जिसमें राज्य जनता से कहता था कि देश के पास पर्याप्त साधन नहीं हैं, इसलिए आप अपनी खपत घटाकर संकट को किसी तरह झेलने में मदद करें।

आज मोदी की अपील का भाव उससे बिल्कुल अलग है। यहां संदेश यह नहीं है कि भारत असहाय है, इसलिए जनता कष्ट सहे। संदेश यह है कि भारत मजबूत है, लेकिन दुनिया अस्थिर हो रही है, इसलिए हर नागरिक इस मजबूती को और टिकाऊ बनाने में भागीदार बने।

इसीलिए प्रधानमंत्री की स्पीच को West Asia के संकट और Strait of Hormuz की स्थिति से अलग करके नहीं देखा जा सकता। होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण chokepoints में से एक है, जहां से वैश्विक तेल का करीब एक चौथाई हिस्सा, साथ ही LNG और फटलिज़ेर्स की बड़ी मात्रा गुजरती है।

मौजूदा सैन्य तनाव ने इस रुट पर दबाव बढ़ाया है, shipping flows बाधित हुए हैं और energy markets पर असर पड़ा है। भारत के लिए इसका महत्व और अधिक है, क्योंकि crude oil, gas और fertiliser supply का बड़ा हिस्सा इसी भूगोल से जुड़ा है।

जब मोदी public transport, WFH, EV, solar pumps, local products और imported gold में कमी की बात करते हैं, तो वे अलग-अलग उपदेश नहीं दे रहे होते। वे देश को यह समझा रहे होते हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सीमा पर तैनात सैनिक या दिल्ली में बैठी सरकार का विषय नहीं है। एक आम नागरिक की consumption choices भी देश की स्ट्रेटेजिक स्ट्रेंथ को प्रभावित करती हैं।

कम fuel consumption का अर्थ है कम oil import pressure

कम imported gold का अर्थ है foreign exchange पर कम बोझ

solar pump का अर्थ है diesel dependency में कमी

EV का अर्थ है long-term energy diversification

local products का अर्थ है बाहरी झटकों के समय domestic economy को मजबूत आधार

यानी नागरिक का व्यवहार सीधे राष्ट्र की आर्थिक रक्षा-पंक्ति का हिस्सा बन जाता है।

यही वह परिवर्तन है जिसे राष्ट्रवादी पाठकों को ठीक से समझना चाहिए। राष्ट्रनिर्माण का पुराना संस्करण कहता था, “देश संकट में है, आप त्याग कीजिए।” नया संस्करण कहता है, “देश सक्षम है, अब आप उसकी क्षमता को multiplied force बनाइए।”

पहले नागरिक crisis का बोझ उठाता था, आज नागरिक national resilience का contributor बनता है। पहले अपील का लक्ष्य shortage को manage करना था, आज लक्ष्य shock को absorb करना है। पहले केंद्र में अभाव था, आज केंद्र में preparedness है।

और यही फर्क भारत की बदलती आत्मछवि का भी है। जो देश कभी external shocks के सामने असुरक्षित उपभोक्ता की तरह खड़ा रहता था, वह अब अपने नागरिकों को strategic actors की तरह संबोधित कर रहा है।

अगर करोड़ों भारतीय थोड़ी-सी fuel demand घटाते हैं, थोड़ा-सा import-heavy consumption रोकते हैं और थोड़ी-सी preference domestic alternatives को देते हैं, तो उसका संचयी असर मामूली नहीं होता। इससे भारत अरबों डॉलर के import burden को कम कर सकता है, rupee पर दबाव हल्का कर सकता है, inflation को नियंत्रित रखने की गुंजाइश बढ़ा सकता है और युद्ध या blockade जैसी परिस्थितियों में अपनी bargaining power सुरक्षित रख सकता है। यह austerity नहीं है, यह distributed national strength है।

इसलिए आज की अपील को “कम चलाओ, कम खरीदो” की नैतिक सीख समझना भूल होगी। यह उस भारत की भाषा है जो जनता को प्रजा नहीं, stakeholder मानता है। यह scarcity management से strategic participation की यात्रा है। आज का नागरिक केवल सरकार से सुरक्षा पाने वाला व्यक्ति नहीं है, वह स्वयं भारत की सुरक्षा, स्थिरता और आत्मनिर्भरता की श्रृंखला की एक कड़ी है। मोदी का संदेश मूलतः यही था कि दुनिया अगर अधिक अशांत होने जा रही है, तो भारत की तैयारी केवल तेल भंडार, कूटनीति और नौसेना से नहीं होगी, बल्कि नागरिक अनुशासन, आर्थिक विवेक और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की साझा समझ से भी होगी। डर इसलिए कम था, क्योंकि भारत पहले से अधिक सक्षम है। तैयारी इसलिए अधिक थी, क्योंकि सक्षम राष्ट्र संकट आने से पहले अपने समाज को संगठित करना जानते हैं।

आप दावा करेंगे, बंगाल Narendra Modi ने जीता! नितिन नबीन के कारण जीते! Suvendu Adhikari ने विजय दिलाई। तो मेरा निवेदन है,...
04/05/2026

आप दावा करेंगे, बंगाल Narendra Modi ने जीता! नितिन नबीन के कारण जीते! Suvendu Adhikari ने विजय दिलाई। तो मेरा निवेदन है, नहीं! घोर घटाटोप के दौर में तन कर खड़ी निर्धन हिन्दू Chaina Barman के कारण हम बंगाल जीते।

जब चहुंओर ख़ौफ़ की खामोशी थी, उस वक्त साधारण परिवार की चाइना बर्मन अपने मामूली मोबाइल से Bharatiya Janata Party (BJP) के जयकारा लगाती पोस्ट करती रही। रील बनाती रही। जब कभी चाइना बिटिया की रील सामने आती, दिल से एक भय उमड़ता, और कितने दिन तेरा जीवन बिटिया?

हिंदी पट्टी के तमाम #इंफलयून्सर जब मोदी में खोट निकाल रहे थे, बायकॉट का एलान कर रहे थे, चाइना बर्मन मोदी के साथ पूर्ण निष्ठा के साथ खड़ी रही। जानती थी, मार दी जाएगी। घर जला देंगे तृणमूल के गुंडे। मुझे नहीं पता, बंगाल में कहां रहती है चाइना? जीविका क्या है इनकी?

जब सत्ता के शीर्ष पर बैठा राजनेता और झोपड़ी में रहती एक अति सामान्य महिला, सपरिवार कनेक्ट होते हैं तो #परिवर्तन को कोई रोक नहीं सकता।

इस विजय का अधिकतम श्रेय चाइना मंडल और आरजी कर की पीड़िता बिटिया की मां रत्ना देबनाथ को।

बंगाल ना जाने कितने ही चाइना और रत्ना जी सरीखी मां-बहनों की पीड़ा की भूमि है। जिसका दायित्व एकमात्र Mamata Banerjee दीदी पर था। जिस दायित्व से बंग प्रदेश ने दीदी को मुक्त कर दिया। एकांतिक, उपेक्षित शेष जीवन जीने के लिए।

#बंगाल

भारत और रूस के बीच RELOS (Reciprocal Exchange of Logistics Support) समझौता अब आधिकारिक रूप से लागू हो गया है।यह रणनीतिक ...
21/04/2026

भारत और रूस के बीच RELOS (Reciprocal Exchange of Logistics Support) समझौता अब आधिकारिक रूप से लागू हो गया है।
यह रणनीतिक समझौता दोनों देशों को एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों, बंदरगाहों और एयरफील्ड्स का उपयोग करने की अनुमति देता है—चाहे वह संयुक्त सैन्य अभ्यास, ऑपरेशन्स, या आपदा राहत मिशन ही क्यों न हो।
इस समझौते के तहत, दोनों देश एक-दूसरे की धरती पर
👉 3000 तक सैनिक,
👉 10 विमान, और
👉 5 युद्धपोत तैनात कर सकते हैं।
यह समझौता शुरुआती तौर पर 5 वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा, जिसे आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
👉 यह कदम भारत-रूस रक्षा सहयोग को नई ऊँचाई पर ले जाता है और क्षेत्रीय सुरक्षा, सैन्य समन्वय और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करता है।

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