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फ़्रांस के ट्रेले नामक वैज्ञानिक ने हवन पर रिसर्च की। जिसमें उन्हें पता चला की हवन मुख्यतः आम की लकड़ी पर किया जाता है। जब...
23/09/2025

फ़्रांस के ट्रेले नामक वैज्ञानिक ने हवन पर रिसर्च की। जिसमें उन्हें पता चला की हवन मुख्यतः आम की लकड़ी पर किया जाता है। जब आम की लकड़ी जलती है तो फ़ॉर्मिक एल्डिहाइड नामक गैस उत्पन्न होती है।जो कि खतरनाक बैक्टीरिया और जीवाणुओं को मारती है ।तथा वातावरण को शुद्द करती है। इस रिसर्च के बाद ही वैज्ञानिकों को इस गैस और इसे बनाने का तरीका पता चला।

*गुड़ को जलाने पर भी ये गैस उत्पन्न होती है।*

टौटीक नामक वैज्ञानिक ने हवन पर की गयी अपनी रिसर्च में ये पाया की यदि आधे घंटे हवन में बैठा जाये अथवा हवन के धुएं से शरीर का सम्पर्क हो तो टाइफाइड जैसे खतरनाक रोग फ़ैलाने वाले जीवाणु भी मर जाते हैं और शरीर शुद्ध हो जाता है।

हवन की महत्ता देखते हुए राष्ट्रीय वनस्पति अनुसन्धान संस्थान लखनऊ के वैज्ञानिकों ने भी इस पर एक रिसर्च की । क्या वाकई हवन से वातावरण शुद्द होता है और जीवाणु नाश होता है ?अथवा नही ? उन्होंने ग्रंथों में वर्णिंत हवन सामग्री जुटाई और जलाने पर पाया कि ये विषाणु नाश करती है। फिर उन्होंने विभिन्न प्रकार के धुएं पर भी काम किया और देखा कि सिर्फ आम की लकड़ी १ किलो जलाने से हवा में मौजूद विषाणु बहुत कम नहीं हुए । पर जैसे ही उसके ऊपर आधा किलो हवन सामग्री डाल कर जलायी गयी तो एक घंटे के भीतर ही कक्ष में मौजूद बैक्टीरिया का स्तर ९४ % कम हो गया।

यही नहीं उन्होंने आगे भी कक्ष की हवा में मौजुद जीवाणुओ का परीक्षण किया और पाया कि कक्ष के दरवाज़े खोले जाने और सारा धुआं निकल जाने के २४ घंटे बाद भी जीवाणुओं का स्तर सामान्य से ९६ प्रतिशत कम था। बार-बार परीक्षण करने पर ज्ञात हुआ कि इस एक बार के धुएं का असर एक माह तक रहा और उस कक्ष की वायु में विषाणु स्तर 30 दिन बाद भी सामान्य से बहुत कम था।

यह रिपोर्ट एथ्नोफार्माकोलोजी के शोध पत्र (resarch journal of Ethnopharmacology 2007) में भी दिसंबर २००७ में छप चुकी है। रिपोर्ट में लिखा गया कि हवन के द्वारा न सिर्फ मनुष्य बल्कि वनस्पतियों एवं फसलों को नुकसान पहुचाने वाले बैक्टीरिया का भी नाश होता है। जिससे फसलों में रासायनिक खाद का प्रयोग कम हो सकता है ।

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ये सामान्यजन उपयोगी है 🙏

सनातन, हिंदू धर्म और हिंदुत्व की सदैव ही जय
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20/09/2025

श्रीरामचरित मानस के सुंदरकांड में शांति बनाए रखने और सफलता पाने के कई सूत्र बताए गए हैं। इस कांड में वानरों के सामने एक असंभव सी दिखने वाली चुनौती थी। माता सीता की खोज में वानरों को सौ योजन लंबा समुद्र लांघकर लंका पहुंचना था। जब समुद्र लांघने के बात आई तो सबसे पहले जामवंत ने असमर्थता जाहिर की।

जरठ भयउँ अब कहइ रिछेसा। नहिं तन रहा प्रथम बल लेसा॥
जबहिं त्रिबिक्रम भए खरारी। तब मैं तरुन रहेउँ बल भारी॥

भावार्थ:-ऋक्षराज जाम्बवान् कहने लगे- मैं बूढ़ा हो गया। शरीर में पहले वाले बल का लेश भी नहीं रहा। जब खरारि (खर के शत्रु श्री राम) वामन बने थे, तब मैं जवान था और मुझ में बड़ा बल था॥

अंगद कहइ जाउँ मैं पारा। जियँ संसय कछु फिरती बारा॥
जामवंत कह तुम्ह सब लायक। पठइअ किमि सबही कर नायक॥

भावार्थ:-अंगद ने कहा- मैं पार तो चला जाऊँगा, परंतु लौटते समय के लिए हृदय में कुछ संदेह है। जाम्बवान् ने कहा- तुम सब प्रकार से योग्य हो, परंतु तुम सबके नेता हो, तुम्हे कैसे भेजा जाए?॥

जामवंत के बाद अंगद ने कहा कि मैं लंका तक जा तो सकता हूं, लेकिन समुद्र पार करके फिर लौट पाऊंगा इसमें संदेह है। अंगद ने खुद की क्षमता और प्रतिभा पर ही संदेह जताया। अंगद को अपनी ही शक्तियों पर भरोसा नहीं था।
जब वानरों के दल कोई भी लंका जाने के लिए तैयार नहीं हुआ तब जामवंत ने हनुमानजी को इस काम के लिए प्रेरित किया।

कहइ रीछपति सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना॥
पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना॥

भावार्थ:-ऋक्षराज जाम्बवान् ने श्री हनुमानजी से कहा- हे हनुमान्! हे बलवान्! सुनो, तुमने यह क्या चुप साध रखी है? तुम पवन के पुत्र हो और बल में पवन के समान हो। तुम बुद्धि-विवेक और विज्ञान की खान हो॥

कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥
राम काज लगि तव अवतारा। सुनतहिं भयउ पर्बताकारा॥

भावार्थ:-जगत् में कौन सा ऐसा कठिन काम है जो हे तात! तुमसे न हो सके। श्री रामजी के कार्य के लिए ही तो तुम्हारा अवतार हुआ है। यह सुनते ही हनुमान्जी पर्वत के आकार के (अत्यंत विशालकाय) हो गए॥

कनक बरन तन तेज बिराजा। मानहुँ अपर गिरिन्ह कर राजा॥
सिंहनाद करि बारहिं बारा। लीलहिं नाघउँ जलनिधि खारा॥

भावार्थ:-उनका सोने का सा रंग है, शरीर पर तेज सुशोभित है, मानो दूसरा पर्वतों का राजा सुमेरु हो। हनुमान्जी ने बार-बार सिंहनाद करके कहा- मैं इस खारे समुद्र को खेल में ही लाँघ सकता हूँ॥

सहित सहाय रावनहि मारी। आनउँ इहाँ त्रिकूट उपारी॥
जामवंत मैं पूँछउँ तोही। उचित सिखावनु दीजहु मोही॥

भावार्थ:- और सहायकों सहित रावण को मारकर त्रिकूट पर्वत को उखाड़कर यहाँ ला सकता हूँ। हे जाम्बवान्! मैं तुमसे पूछता हूँ, तुम मुझे उचित सीख देना (कि मुझे क्या करना चाहिए)॥

एतना करहु तात तुम्ह जाई। सीतहि देखि कहहु सुधि आई॥
तब निज भुज बल राजिवनैना। कौतुक लागि संग कपि सेना॥

भावार्थ:-(जाम्बवान् ने कहा-) हे तात! तुम जाकर इतना ही करो कि सीताजी को देखकर लौट आओ और उनकी खबर कह दो। फिर कमलनयन श्री रामजी अपने बाहुबल से (ही राक्षसों का संहार कर सीताजी को ले आएँगे, केवल) खेल के लिए ही वे वानरों की सेना साथ लेंगे॥

हनुमानजी को उनकी शक्तियां याद आ गईं और उन्होंने अपने शरीर को पहाड़ जैसा बड़ा बना लिया। आत्मविश्वास से भरकर वे बोले कि अभी एक ही छलांग में समुद्र लांघकर, लंका उजाड़ देता हूं और रावण सहित सारे राक्षसों को मारकर सीता को ले आता हूं।
हनुमानजी के इस आत्मविश्वास को देखकर जामवंत ने कहा कि नहीं, आप ऐसा कुछ न करें। आप सिर्फ सीता माता का पता लगाकर लौट आइए। हमारा यही काम है। फिर प्रभु राम खुद रावण का संहार करेंगे।

जामवंत के बचन सुहाए। सुनि हनुमंत हृदय अति भाए॥
तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई। सहि दुख कंद मूल फल खाई॥

भावार्थ:-जाम्बवान् के सुंदर वचन सुनकर हनुमान्जी के हृदय को बहुत ही भाए। (वे बोले-) हे भाई! तुम लोग दुःख सहकर, कन्द-मूल-फल खाकर तब तक मेरी राह देखना॥

हनुमान समुद्र लांघने के लिए निकल गए। सुरसा और सिंहिका नाम की राक्षसियों ने रास्ता रोका भी, लेकिन उनका आत्म विश्वास कम नहीं हुआ।

प्रसंग की सीख
अगर हमें अपनी शक्तियों पर ही संदेह होगा तो हम कभी भी कोई उल्लेखनीय काम नहीं कर पाएंगे। किसी भी काम की शुरुआत में मन में कई तरह की बातें चलती रहती हैं। नकारात्मक बातों की वजह से सफलता हमसे दूर हो जाती है। इसीलिए कभी भी अपनी शक्तियों पर संदेह न करें और सकारात्मक सोच बनाए रखें।

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🚩जय सियाराम 🚩🚩जय श्री हनुमान 🚩

18 मार्च 1999 लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी दूसरी बार बिहार की मुख्यमंत्री बनी थी। अरवल जनपद का गांव सेनारी (तत्कालीन जहान...
19/09/2025

18 मार्च 1999 लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी दूसरी बार बिहार की मुख्यमंत्री बनी थी। अरवल जनपद का गांव सेनारी (तत्कालीन जहानाबाद जनपद) रात्रि 8 के करीब 500 नक्सलियों का गिरोह बम बंदूक लिए गांव की ओर बढ़ रहा था। गांव से 2km निकट सहरसा गांव में पुलिस चौकी थी, चौकी में मात्र 6 पुलिस कर्मी थे तथा नक्सलियों के गिरोह ने चौकी पर कब्जा कर लिया। 200 नक्सली उस चौकी को कब्जे में रखे रहे और शेष 300 नक्सली सेनारी गांव की ओर बढ़े। गांव में उस समय केवल 5 आदमी बैठकर बातें कर रहे थे जिन्हें नक्सलियों ने पकड़ लिया। और उन आदमियों से ठाकुरबाड़ी का रास्ता पूछा गया और उन्हें पकड़कर साथ ले चले। ठाकुरबाड़ी पहुंचने पर रास्ता दिखाने वाले 5 हिन्दुओं को मार गिराया नक्सलियों ने।

गांव में पहुंचते ही नक्सलियों द्वारा “कम्युनिस्ट पार्टी जिंदाबाद, माओवाद जिंदाबाद, लालू प्रसाद जिंदाबाद” के नारे लगाए गए। और भूमिहार किसानों के घरों पर दावा बोल दिया गया। डायनामाइट से धमाका कर घरों की दीवारें उड़ाई गईं। 50 से अधिक भूमिहार किसानों का नरसंहार किया गया… सबको लाइन में बांध दिया गया और एक एक करके सबके गले काटे गए नक्सलियों द्वारा। महिलाओं की इज्जत लूट ली गई, उनके निजी अंगों पर बंदूक से वार किए गए। रात 12 बजे तक नक्सलियों द्वारा गांव में तांडव मचाया गया… लालू प्रसाद जिंदाबाद, कम्युनिस्ट पार्टी जिंदाबाद, भूमिहार मुर्दाबाद, लाल सलाम के नारे लगाए गए उनके द्वारा।

जब नक्सली जा चुके थे तो तड़के 3 बजे के बाद पुलिस ठाकुरबाड़ी पहुंची। पुलिस ने टॉर्च जलाया तो हर तरफ लाशें ही लाशें बिछी हुई थीं, लोगों के कंठ से खून के फव्वारे छूटे हुए थे, पेट से आंतें निकली हुईं थी… मानो जैसे कोई बूचड़खाना हो। इस घटना के बाद सेनारी को विधवाओं का गांव कहा जाने लगा। 19 मार्च को पटना उच्च न्यायालय के तत्कालीन रजिस्ट्रार पद्मनारायण अपने गांव सेनारी पहुंचे। जहां अपने परिवार की 8 लाशें देखकर उन्हें हार्ट अटैक आ गया… कुछ ही देर बाद उनकी मृत्यु हो गई। जिससे गांव वाले और अधिक भड़क गए, बहुत ही भयानक मंजर था जो भी देखता था।

केंद्र में अटल सरकार के मंत्री सेनारी गांव पहुंचे। जनवरी में शंकर बिगहा और फरवरी में दो जगह और नरसंहार के पश्चात अटल सरकार ने राबड़ी सरकार बर्खास्त कर दी। लेकिन राज्यसभा में बहुमत ना होने के कारण 8 मार्च को राष्ट्रपति शासन वापिस लेना पड़ा, क्योंकि कांग्रेस ने लालू सरकार के समर्थन में वोटिंग करी। 9 मार्च को राबड़ी फिर से CM बनी और सीएम बनने के 9 दिन बाद सेनारी नरसंहार हो गया। इस भयानक घटना पश्चात भाजपा वाले राबड़ी से इस्तीफा मांगने लगे। अटल बिहारी वाजपेई जी ने देश को संबोधित करते हुए कहा, “इस नरसंहार में कांग्रेस जिम्मेवार है, उसने एक ऐसे दल (RJD) को सपोर्ट किया जो नरसंहार की जिम्मेदार है”। पर उस समय कांग्रेस बिहार की राबड़ी सरकार में शामिल हो चुकी थी।

जब जनता ने सेनारी पीड़ितों के गांव जाने के लिए सीएम राबड़ी से अपील की तो राबड़ी ने कहा, “मरने वाले लोग हमारे वोटर्स नहीं हैं, मैं क्यूं जाऊं वहां!” कुछ महीनों बाद उसी जहानाबाद जिले में लालू प्रसाद ने RJD की रैली रखी जहां पीड़ितों के जख्मों पर और नमक रगड़ा गया। मंच से लालू प्रसाद ने माइक पकड़के भीड़ से पूछा, “हिंदूवादियों के खिलाफ हो के नहीं?” फिर पूछा, “भूमिहारों के खिलाफ हो के नहीं?”

बाद में अटल सरकार के आदेश पर बिहार के राज्यपाल बीएम लाल सेनारी पहुंचे। राज्यपाल से गांव वालों ने बंदूक की मांग की, गांव वालों ने स्पष्ट कह दिया कि प्रदेश सरकार की सुरक्षा पर हमें भरोसा नहीं है। पटना लौटने उपरांत राज्यपाल ने आदेश जारी किया जिसमें गांववालों को गन लाइसेंस जारी किए गए।

08/09/2025

---पानी का तांडव-
A Warning bell for September--

पानी का तांडव सबने देखा,
पंजाब, हिमाचल, कश्मीर का लेखा।
देवभूमि भी डूबी पीड़ा में,
प्रकृति ने खोला क्रोध के घेरे में।

मंगल का करिश्मा अगला अध्याय,
गगन में छुपा कोई गूढ़ उपाय।
पर धरती पर जो हो रहा है आज,
वो चेतावनी है, न कोई राज।

ईश्वर की वंदना मत छोड़ो,
धर्म का दीपक फिर से जोड़ो।
वरना जो अफ़ग़ान में घटा था हाल,
यहाँ भी आएगा वैसा ही काल।

झूठ, बेईमानी, मक्कारी से तौबा करो,
सत्य और न्याय की राह पकड़ो।
जो अंधकार बोएगा, वही काटेगा,
समय का चक्र सबको बाँधेगा।

धरा को बचाओ, मानवता को पलो।
अब तो चेतो, अब तो सँभालो।

08.09.2025

90 के दशक में जन्मे लोगों का बचपन तूफानी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के बगैर अधूरा है। वीरेंद्र सहवाग टेस्ट मैचों में 2 बार ...
07/09/2025

90 के दशक में जन्मे लोगों का बचपन तूफानी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के बगैर अधूरा है। वीरेंद्र सहवाग टेस्ट मैचों में 2 बार तिहरा शतक लगाने भारत के इकलौते बल्लेबाज हैं। उनकी पहचान हमेशा ताबड़तोड़ बल्लेबाज के रूप में की जाती है। हालांकि, नजफगढ़ के इस सुल्तान ने बचपन में घरवालों से पिटाई का स्वाद भी खूब चखा है। यही नहीं, एक बार बीड़ी पीने के चक्कर में तो उनकी चप्पलों से पिटाई हुई थी। सहवाग ने 20 अक्टूबर 2015 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। आजकल वह कॉमेंट्री करते दिखाई देते हैं। वह सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहते हैं। साथ ही बेबाक अंदाज के लिए भी चर्चा में बने रहते हैं। वीरू की मां कृष्णा सहवाग ने एक इंटरव्यू में बताया, बचपन से ही वह बहुत चंचल और गोल-मटोल था। इसलिए सभी उसे गोलू कहते थे। थोड़ा बड़ा हुआ तो हर दिन एक नई शैतानी सामने आती थी। कभी स्कूल में क्लास के लड़कों की पिटाई करना और कभी घर पर छोटे भाई विनोद को धमका कर अपना होमवर्क करवा लेना।

और जब इससे भी मन नहीं भरता, तब चाचा ताऊ के बच्चों की बारी आती थी। उनका दूध का गिलास छीन लेता था... दूध इसे बहुत पसंद था ना इसलिए..। वीरू जब नवीं क्लास में था, तब नजबगढ़ में दो टीमो के बीच मैच चल रहा था। वीरू के एक शॉट से पास के एक क्लीनिक का शीशा टूट गया, लेकिन खेल ख़त्म होने पर डाक्टर ने वीरू की पीठ थपथपाते हुए उसे सौ रूपए दिए और कहा, भाई शीशा तोड़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। इस बहाने मेरे क्लीनिक का बहुत पुराना और गंदा शीशा तो बदल जाएगा। उसका आत्मविश्वास और कम बोलना मुझे बहुत पसंद आता है। गोलू आज भी कम बोलता है, मगर उसकी बात में वज़न होता है। एक बार, जब वह बहुत छोटा था तब टीवी पर कपिल देव की माँ का इंटरव्यू आ रहा था। सब बच्चे फिल्म देखना चाहते थे लेकिन वीरू अड़ गया कि मुझे यही देखना है। फिर वह मुझे पकड़ कर लाया और बोला, 'एक दिन तू भी ऐसे ही इंटरव्यू देगी'। उसकी इस बात पर घर के सभी बच्चें हँस दिए थे। लेकिन मेरे बेटे ने सपना पूरा किया।

ब्रह्मांड का रचयिता जब तुम्हें बनाने पर आयेगा, तुम्हारा अंत भी प्रारम्भ बन जाए।
07/09/2025

ब्रह्मांड का रचयिता जब तुम्हें बनाने पर आयेगा, तुम्हारा अंत भी प्रारम्भ बन जाए।

07/09/2025

गुलाब जामुन की मिठाई आपने खूब खाई होगी लेकिन गुलाब जामुन का फल आपने नही खाया होगा इस फल का नाम गुलाब जामुन है और खाने में बहुत ही मीठा और महक गुलाब जैसी आती है......

आपने वैसे तो खूब गुलाब जामुन खाए होंगे, शादियों, बर्थडे पार्टी या रेस्ट्रान्ट पर, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह कई राज्यों में ऐसे पेड़ भी हैं, जहां गुलाब जामुन लगते हैं। जी हां, आपने सही पढ़ा! हम यहां मिठाई नहीं बल्कि एक तरह के फल की बात कर रहे हैं, जिसे गुलाब जामुन कहा जाता है।

बीज है लाभकारी
इस फल के जानकर इसके बीजों को न फेंकने की सलाह देते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि कई औषधीय गुण होते हैं। फल के बीज का सेवन शरीर में नए सेल्स बनाने का काम करता है। इस फल के बीज का पाउडर ब्लड शुगर स्तर को कंट्रोल कर डायबिटीज़ में फायदा पहुंचाता है।

पत्ते भी पहुंचाते हैं फायदा
जिस तरह इस फल के बीज डायबिटीज में फायदा पहुंचाते हैं। उसी तरह गुलाब जामुन के पत्ते भी कम नहीं हैं। इसमें मौजूद गुण किसी भी तरह की डायबिटीज़ में फायदा पहुंचा सकते हैं। इसके लिए आपको पत्तियों को सुखाना है और फिर इनका पाउडर तैयार कर लेना है। इस पाउडर को गुनगुने पानी के साथ पी लें। इससे भी शगुर को कंट्रोल किया जा सकता है।

यह अमरूद की तरह हल्का पीले-हरे रंग का होता है। यह फल पेड़ पर फरवरी में लगना शुरू हो जाता है और अप्रैल- मई तक खाने लायक हो जाता है। इसमें एक बड़ा बीज भी होता है......

पश्चिम बंगाल में इसे पंटुआ, गोलप जैम और कालो जैम कहा जाता है. मध्य प्रदेश का जबलपुर गुलाब जामुन के लिए काफी फेमस है......

इस फल का यह पेड़ मुख्यत: उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, बंगाल, राजस्थान में पाए जाते हैं। इसके अलावा दक्षिण भारत उत्तर पूर्व के कुछ राज्यों में भी हैं और इसकी कीमत सौ रुपये से डेढ़ सौ रुपये किलो हैं.....

यह फल का पेड़ गोण्डा जिले के माँ मनसा नर्सरी गौरा चौकी बाजार में उपलब्ध है

05/09/2025

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