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देश प्रदेश की संस्कृति, प्रकृति,जीवन शैली को दर्शाने वाली तस्वीरे और वीडियो एवं देश के गुमनामी क्रांतिकारीयों की जीवनी एवं उनके संघर्ष भरे इतिहास को आप हमारे साथ बेहतर ढंग से देख और पढ़ सकते हैं।

बाल काटने वाले नाई का नाम अलीम हकीम है और बाल कटवाने वाले का नाम रजत शर्मा इंडिया टीवी वाले है...बाल काटने वाले अलीम हकी...
12/06/2026

बाल काटने वाले नाई का नाम अलीम हकीम है और बाल कटवाने वाले का नाम रजत शर्मा इंडिया टीवी वाले है...

बाल काटने वाले अलीम हकीम की हेयर कटिंग के चार्जेस 1 लाख रुपए से शुरू होते है और इसके 99% ग्राहक हिंदु सेलिब्रेटी है...

इसके हेयर कटिंग चार्जेस की जानकारी आप भी गूगल से पता कर सकते हो,,,मेने साथ में स्क्रीनशॉट दिया है

इसकी प्रतिदिन की आय का अंदाजा लगाइए.. और यह विचार कीजिए कि उस कमाई में से कितना पैसा उन संगठनों को जाता होगा जो सनातन विरोधी कार्यो में 24 घंटे लिप्त रहते हैं और अदालत से लेकर अन्य घटनाक्रमों में आतंकवादियों की मदद करते हैं..

इसका मतलब सनातन के सबसे बड़े दुश्मन सेलिब्रिटी हिंदु है.. और अफसोस ये हमारे कारण ही सेलिब्रिटी है..

हर शाख पे उल्लू बैठा है..
अंजाम में गुलिस्तां क्या होगा..

मैनें पेड़ से फोन कर के पूछा कैसे हो, कहाँ रहते हो, आजकल दिखाई नहीं देते....पेड़ बोला मात्र चालिस साल पहले तक हम बहुत सारे...
12/06/2026

मैनें पेड़ से फोन कर के पूछा कैसे हो, कहाँ रहते हो, आजकल दिखाई नहीं देते....

पेड़ बोला मात्र चालिस साल पहले तक हम बहुत सारे नीम, पीपल, बड़, कीकर, शीशम, जांडी, आम, जामुन, जाळ, कंदू, शहतूत व लेसुवे आदि आपके आसपास ही रहते थे।

याद करो तब तक आपके घरों में फर्नीचर के नाम पर खाट, पीढे व मूढ़े ही होते थे। खाट व पीढे के सिर्फ पावे हमारी लकड़ी से बनते थे। सेरू व बाही बाँस की ही होती थी, मूढ़े सरकंडे से बने होते थे।

फिर आप लोगों को पता नहीं क्या हुआ आपने हमें अखाड़ बाडे काटना शुरू कर दिया। हमारी लकड़ी से डबल बैड, सोफे, मेज, अलमारी व कुर्सी आदि बना कर अपने घरों में भर ली। आप स्कूलों में टाट बिछाकर पढ़ा करते थे फिर हमें काट कर बैंच बना डाले। नजर घुमाओ और देखो कोई तीस चालिस साल पुराणा पेड़ आसपास है के.....

हम पेड़ आजकल आपके घर, दफ्तर व स्कूल कालेजों में ही हैं।

मैनें फिर पेड़ से पूछा कि आज तो विश्व पर्यावरण दिवस है चलो एक पेड़ मैं लगा देता हूँ।

पेड़ भड़क गया और कहा कि जन्मजात मुर्ख हो या पढ़लिख कर हो गये, लगता है हमारी लाश से बणे सोफे या डबल बैड पर बैठकर, ऐ•सी• चलाकर, सोशल मीडिया से प्रभावित हो कर फोन कर रहे हो। बाहर निकल कर देखो इस 48℃ के तापमान में हमारी वृद्धि कैसे होगी।

अरे वो पश्चिमी जगत वाले अपने मौसम व मान्यताओं के हिसाब से दिन निर्धारित करते हैं और तुम अक्ल से अंधे भारतीय आँख मिंच कर उन्हें मानने लगते हो।

पेड़ एक नहीं अनेक लगाना पर मानसून आने पर। जेठ के महीने में पेड़ लगायेगा मंदबुद्धि पानी तेरा बाप देगा। अषाढ़ से फागुन तक जितने मर्जी लगा लेना....

फिर पेड़ गाणा गाणे लगा "तेरी दुनिया से दूर, चले हो के मजबूर, हमें याद रखना"

इतना कह कर पेड़ ने फोन रख दिया।
साभार..

12/06/2026

राजस्थान के हरे भरे खेत

लीवर के रोग से मरने वाले सबसे अधिक पुरुष होते हैं....।।।।एक कहावत है "करेला उस पर भी नीम चढ़ा " यह साबित करता है फैटी लि...
12/06/2026

लीवर के रोग से मरने वाले सबसे अधिक पुरुष होते हैं....।।।।

एक कहावत है "करेला उस पर भी नीम चढ़ा " यह साबित करता है फैटी लिवर वाले रोगी यदि शराब पीते हैं तो फिर यह कहावत पूर्ण रूप से चरितार्थ होती है...

स्वस्थ रहना है और लंबा जीना है तो आवश्यक है कि अपने लिवर का ध्यान जरूर रखें... एक लीवर ही है जो आपको स्वस्थ रखने की पूर्ण कोशिश करता है... उसके कोशिश करने में कोई बाधा उत्पन्न ना करें।

जिससे आप मधुमेह उच्च रक्तचाप कोलेस्ट्रॉल आदि परेशानियों से बचे रह सकते हैं.....

परहेज करें......

रिफाइंड तेल, फ्राइड भोजन, फास्ट फूड, डीप फ्राइड, स्ट्रीट फूड,सॉफ्ट ड्रिंक,मिठाई , देर रात तक जागना, शराब पीना...



लाभ...???
यह किडनी व लीवर के समस्त रोग,उदररोग ,सर्वोगशोथ (सुजन), पीलिया, आमवात, संधिवात, बवासीर, भगंदर, हाथीपांव, श्वास, खांसी, किडनी व पित्ताशय की पथरी, मधुमेह (डायबिटीज), संक्रामक व विषजन्य रोग, उपदंश , स्त्रीरोग, त्वचारोग तथा विभिन्न हृदयरोगों व नेत्रविकारों में लाभदायी है ।
सभी सुखी और निरोगी रहे।

पुनर्नवा अर्थात शरीर के अंगों को पुनः नया जीवन देने वाली औषधि ऑटो इम्यून डिसीज की घातक शत्रु है यह दिव्य औषधि। इसके प्रयोग से आज के तनाव भरे जीवन को खुशहाल बनाया जा सकता है। पुनर्नवा, जिसे आयुर्वेद में "पुनर्नवा" कहा जाता है, का अर्थ है "पुनः नया करने वाली"। यह एक अद्भुत औषधीय पौधा है, जो भारत में मुख्य रूप से गीली और नम भूमि में पाया जाता है।

पुनर्नवा आयुर्वेद की सबसे भरोसेमंद और कारगर औषधियों में से एक है। इसका प्रयोग मूत्र संबंधी रोगों के उपचार में किया जाता है। खास बात यह है की इसे महिला और पुरुष दोनों ही इस्तेमाल कर सकते हैं। लोगों में भ्रांति बनी हुई है कि यह केवल महिलाओं के रोगों में ही उपयोगी है। इसके नाम का ही अर्थ होता है rejuvenation यानि कि शरीर को पुनः नया या जैसा का वैसा कर देने वाली औषधि। इसे कई सारी बीमारियो एवम रोगों में औषधि की तरह प्रयोग किया जाता है, किन्तु मुख्यतः UTI, धातु रोग, मासिक धर्म के असंतुलन, रक्ताल्पता, कमजोरी तथा शरीर में harmonal imbalance को ठीक करने के लिए यह सबसे भरोसे मंद औषधि है। लिवर और किडनी रोगों के लिये यह सबसे चर्चित है। पुराने अनुभवी चिकित्सक मानते हैं कि इसके काढ़े के नित्य सेवन से कैंसर में जबरदस्त फायदा मिलता है। ल्युकोडेर्मा नामक त्वचा रोग अगर प्रारंभिक अवस्था मे है तो यह पुर्ननवा के नित्य सेवन से जल्द ही ठीक हो जाता है। लंबा बना रहने वाला बुखार, किडनी रोग व वात रोग के कारण हाथ पैरों में आने वाली सूजन को भिनयः कम करता है। उच्च रक्तचाप तथा हृदय रोगों में वही यह अच्छा खासा कारगर है। पीलिया/ कामला रोग में तो भूमि आंवले के साथ पुनर्नवा की साग बनाकर खाने की सलाह दी जाती है। 2- 3 दिन में ही रोग छू मंतर हो जाता है।

वैसे तो इसके सम्पूर्ण पौधे (पंचांग) का उपयोग किया जाता है, किन्तु जड़ों का विशेष महत्व है। आयुर्वेद में इसके सफ़ेद और लाल फूल वाले दो भेद माने जाते हैं। जिसमे सफ़ेद फूल वाला ज्यादा कारगर है। लेकिन सावधानी रखने वाली बात है कि इसी से मिलती जुलती Trianthema portulacastrum नामक वनस्पति को लोग अक्सर पुनर्नवा समझ बैठते हैं जबकि यह सामान्य भाषा मे सांठी कहलाता है। आयुर्वेद व पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में कई औषधियों को खाली पेट लेने की सलाह दी जाती है लेकिन इन सबके विपरीत पुनर्नवा को भोजन में बाद ही ग्रहण किया जाता है। वर्तमान समय मे auto immune disease बहुत घातक और चर्चित विषय है और इस मामले में कोई खास दवाएं भी असरदार नही होती किन्तु एकमात्र पुनर्नवा ऐसी औषधि है जो ऑटो इम्मयून डिसीज में भी अपना प्रभाव रखती है, बशर्ते कि सही समय पर बीमारी की पहचान हो जाये।


गाँव देहात में पुनर्नवा के कोमल डंठल और पत्तियों को चुनकर इसका साग बनाया जाता है, चूंकि यह मौसमी साग है अतः सिर्फ विशेष मौसम ठंड के समय ही यह उपलब्ध होता है। गर्मियों में इसकी शाखायें सूख जाती हैं और मोटी जड़ो के रूप में यह भविष्य के लिए सुरक्षित रहता है। इन मांसल जड़ों से प्रतिवर्ष वर्ष ऋतु में नए पौधे विकसित होते हैं जो ठण्ड के मौसम में खूब फैलते हैं।

इसका उपयोग प्राचीन काल से ही आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में किया जा रहा है।

पुनर्नवा बूटी दो प्रकार की होती हैं। एक के पत्ते नकुले व फूल लाल होते हैं। इसे लाल या रक्त पुनर्नवा कहते हैं। दूसरी पुनर्नवा के पत्ते थोड़े चपटे होते हैं व इसके फूल सफेद से हल्की लालिमा लिये होते हैं। इसे आम भाषा में साँठी कहा जाता है।

दोनों ही औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं।

पुनर्नवा (गदापुरना) खास तौर पर बरसात के मौसम में उगने वाला पौधा है। औषधि के रूप में इसका पंचांग और हमेशा मिलने वाला जड़ को उपयोग में लाया जाता है। पुनर्नवा का पावडर , सिरप और टैबलेट आप को आसानी से मार्केट में मिल जाएंगे। इसका उपयोग गंभीर से गंभीर बीमारियों को जड़ से खतम करने के लिए किया जाता है। पुनर्नवा शरीर को ऊर्जावान बनाता है यह इतना गुणकारी है कि शरीर के पांव से लेकर शर तक हर बीमारी को मात दे सकता है। इसके गुणों के कारण आयुर्वेद में इसे अमृत समान माना गया है । यह हमारे स्किन को हेल्दी, अस्थमा रोग निवारक, तिल्ली ,लिवर,किडनी को सुरक्षा प्रदान करने वाला होता है तथा यह कैंसर जैसे घातक बीमारी से भी बचाता है।
पुनर्नवा में नाइट्रेट क्लोराइड पाए जाते हैं इस लिए यह हार्ट डिजीज में बहुत अच्छा काम करता है। ब्लडप्रेशर को नियंत्रित करता है। इसका 7/8 दिन उपयोग करने से अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर देता है,इसे हम काढ़े के रूप में या पावडर,टैबलेट, सिरप के रूप में उपयोग में ला सकते हैं।

पुनर्नवा_के_प्रमुख_फायदे ओर लाभ

1. सूजन और सूजन संबंधी रोगों में फायदेमंद।

यह प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी है, जो गठिया (arthritis), जोड़ों के दर्द और सूजन में राहत देता है। पुनर्नवा सुजन को नष्ट करती है यह ह्रदय रोग व किडनी के विकारों में (पथरी, किडनी की सुजन आदि) में विशेष लाभदायी है। पुनर्नवा शारीर में आए हुए सूजन को कम करता है ।यह शरीर के बाहरी अंग में आए हुए सूजन को कम करता है ।और शरीर के अंदर जो अंग होते हैं अगर उनमें सूजन आ गया हो तो उसको भी यह कम करता है यह मूत्रल होता है मूत्रल होने के वजह से पेशाब ज्यादा लाता है और शरीर में जमा हुआ पानी बाहर निकलने में मदद करता है जिससे सूजन कम हो जाता है सूजन लीवर में हो तिल्ली में हो, युटेरस में हो, किडनी में हो,हाथ में हो पैर में हो या चाहे पूरे शरीर में ही क्यों ना हो हर जगह की सूजन खत्म करने की ताकत यह पुनर्नवा रखता है।

2. गुर्दे (किडनी) की सेहत के लिए उपयोगी

यह मूत्रल (diuretic) गुणों वाला होता है, जो मूत्र मार्ग को साफ करता है और किडनी फंक्शन सुधारता है। अगर पेशाब करते समय जलन होता हो, पेशाब रुक रुक कर आता हो, किडनी में सूजन हो, पथरी हो, या फिर किडनी खराब हो रही हो,क्रिएटिनिन का लेवल बढ़ता जा रहा हो तो पुनर्नवा इसमें रामबाण की तरह काम करता है।
इसके लिया पुनर्नवा जड़ और गोखरू को समान मात्रा में लेकर पावडर बना ले और सुबह शाम 5/5 ग्राम खाना खाने के पश्चात सेवन करें।

किडनी स्टोन (पथरी) के इलाज में भी सहायक है।

3. लीवर_डिटॉक्स में मददगार

पुनर्नवा लीवर को विषैले तत्वों से मुक्त करता है और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों में लाभदायक है। अगर आप के लिवर में खराबी आ गई हो तो आप पुनर्नवा का इस्तेमाल कर सकते हैं यह लिवर को detox करके लिवर के सूजन को मिटाता है लिवर के गंदगी को बाहर निकालता है और लिवर संक्रमित होने से बच जाता है। पुनर्नवा हेपेटाइटिस ए हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी, एनीमिया , एनोरेक्सिया, पीलिया जैसे गंभीर रोग में भी फायदेमंद है। पुनर्नवा पावडर सुबह शाम 3/3 ग्राम सेवन करें। इसका सिरप भी मार्केट में उपलब्ध है आप दवा को 15 ml निकाल कर के 15ml पानी में मिक्स करके सुबह शाम खाना खाने के बाद ले सकते हैं । अगर पुनर्नवा का पौधा मिल जाए तो इसका साग (सब्जी बना कर) खाएं।

4. मूत्र_संबंधी समस्याएं

पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना या रुक-रुक कर पेशाब आने की समस्या में फायदेमंद है। पुनर्नवा के चूरण का नियमित रूप से सेवन करने से आप स्वस्थ रह सकते हैं. किडनी में पथरी होने की समस्या आजकल काफी बढ़ रही है और इसके इलाज के लिए लोग नए-नए तरीके भी अपनाते हैं. पुनर्नवा गुर्दे में मौजूद पथरी को खत्म करने मे बहुत ही कारगर है।

5. मधुमेह (डायबिटीज) में सहायक।

यह रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। शरीर का ब्लड शुगर कंट्रोल करने में भी पुनर्नवा काफी फायदेमंद होता है. पुनर्नवा के इस्तेमाल से खून में ग्लूकोज का स्तर नियंत्रित होता है, जिससे डायबिटीज जैसी प्रॉब्लम से बचा जा सकता है. इस औषधि में एंटीडायबिटिक गुण होते हैं, जो ब्लड शुगर स्पाइक को करने में मदद करते हैं.

6. ह्रदय स्वास्थ्य में लाभकारी -

यह रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है और ह्रदय को मजबूत बनाता है। पुनर्नवा का पाउडर शहद के साथ मिलाकर खा सकते हैं. इसमें मौजूद मैग्नीशियम हाई और लो ब्लडप्रेशर को कंट्रोल करने में काफी मददगार साबित हो सकता है. जिन लोगों को ब्लड प्रेशर की समस्या है, उन्हें दिन में एक बार इसका सेवन जरूर करना चाहिए।

7. त्वचा रोगों में उपयोगी -

त्वचा पर फोड़े-फुंसी, एक्जिमा आदि में पुनर्नवा का पेस्ट लाभदायक होता है।

8. पाचनतंत्र सुधारता है -

गैस, कब्ज, अपच जैसी समस्याओं में राहत देता है।

9. मोटापा को कंट्रोल -

पुनर्नवा का उपयोग वजन घटाने के लिए लगभग सभी हर्बल दवाओं में घटक के रूप में किया जाता है।यह जड़ी-बूटी इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा को कम किए बिना पेशाब को उत्तेजित करता है और शरीर से अतिरिक्त तरल और अपशिष्ट पदार्थ को शरीर से हटाने में मदद करता है। इस प्रकार पुनर्नवा वजन घटाने में मदद करता है।
मोटापा दूर करने के लिए पुनर्नवा के 5 ग्राम चूर्ण में 10 ग्राम शहद मिलाकर सुबह-शाम लें। पुनर्नवा की सब्जी बना कर खायें।

10. प्रोस्टेट में फायदेमंद

पुरुषों में 50 वर्ष के बाद प्रोस्टेट का बढ़ाना आम सी बीमारी हो गई है। जिन लोगों का प्रोस्टेट बढ़ जाता है उन लोगों के लिए पुनर्नवा बहुत ही लाभकारी होता है। प्रोस्टेट ग्रंथि की वृद्धि हो जाने पर पुनर्नवा का चूर्ण और गोखरू का चूर्ण समान मात्रा में लेकर के 5 ग्राम सुबह खाली पेट और 5 ग्राम शाम को सोते समय हल्का गुनगुना पानी से लें इससे प्रोस्टेट का साइज कम होगा और आप इस रोग से छुटकारा पा लेंग

12. पेट के लिए फायदेमंद

पुनर्नवा पेट के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है । यह एसिडिटी कम करता है। पेट दर्द को कम करता है। भूख को बढ़ाने में मदद करता है। यह कब्ज से भी राहत देता है।
इसके लिए आप पुनर्नवा का चूर्ण 5/5 ग्राम सुबह-शाम या फिर पुनर्नवारिष्ट सिरप लाकर 15 ml दवा और 15 ml पानी किसी बर्तन में मिक्स करके सुबह शाम खाना खाने के बाद ले सकते हैं।

13. कैंसर में फायदेमंद

पुनर्नवा को कैंसर के इलाज के लिए सब से अच्छी जड़ीबूटियों में से एक माना जाता है। इसको कैंसर विरोधी एजेंट माना जाता है। पुनर्नवा कैंसर सेल्स के प्रगति को रोकता है।

सेवन_का_तरीका:-

पुनर्नवा का उपयोग ताजा पत्तों का रस, सब्जी के रुप में, या जड़ तना फूल और पतियों को सुखाकर पीस कर पाउडर बनाकर लंबे समय तक के उपयोग कर सकते हैं। पुनर्नवा का जड़ आयुर्वेदिक दुकान पर आपको आसानी से उपलब्ध हो जाएगा पुनर्नवा के जड़ का पाउडर आप उपयोग में ला सकते हैं।

सावधानियां:-

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को बिना चिकित्सक की सलाह के सेवन नहीं करना चाहिए।

जाट  #आयुष  #मलिक उर्फ  #रहमान के बहाने ही सही जाटो को अब खुद की बनाई और लिखी हुई दुनिया से बाहर आना चाहिए... जाटो की वर...
12/06/2026

जाट #आयुष #मलिक उर्फ #रहमान के बहाने ही सही जाटो को अब खुद की बनाई और लिखी हुई दुनिया से बाहर आना चाहिए...

जाटो की वर्तमान पीढी ने पूरा जोर लगा दिया है अपने लोगो को यह समझाने में कि हम न हिंदू न मुसलमान है हम तो केवल जाट है!

हमारा DNA हमारे जीन्स अलग है हम ही असली आर्य है हम अनोखे है हमसे बड़ा कोई वीर नही हुआ आदि आदि! इनका कहना है कि जाट मुसलमानो मे भी "पाए" जाते है और हिंदुओ मे भी!
कोई ये नही बताएगा कि जाट मुसलमानो मे कैसे पाए जाते है, कोई यह बताने का कष्ट नही उठाता कि आज के मुले जाट ही अतीत के पराजित हिंदू जाट है!
जो इनसे हारा अपनी घर जमीन बेटिया और आस्था तक खो बैठा!

जाटो की बकचोदी से युवा जाट identity crisis अर्थात पहचान की संकट के दौर से गुजर रहा है! चूंकि जाट समाज में धर्म और आस्था को बड़े ही सतही स्तर पर निभाया जाता है तो इसके कारण पहचान का संकट ओर गहरा जाता हैं! जाटो मे कोई विशेष धार्मिक परवरिश धार्मिक अध्य्यन अथवा धार्मिक शिक्षा की कोई व्यवस्थित परंपरा है ही नही!
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तो बहुतायत मे कावड यात्रा और खेत मे स्थापित देवताओ की पूजा ही लगभग अंतिम धार्मिक क्रिया कलाप मानकर चलो!

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुले जाटो के गाँव के गाँव है, कमोबेश यही स्तिथि गुर्जर और राजपूत समाज की है!

मुसलमान जाट, गुर्जर और राजपूतो के गाँव के गाँव है, लेकिन जाट और गुजरो ने जो भसड मचाई वो राजपूतो ने थोड़ी कम मचाई, जो राजपूत लडाई के कालखंड मे मुसलमान बना उसे राजपूतो ने कभी बाप नही बनाया, संबंध रहे पर बहुत ही सतही स्तर पर!

जाटो और गुजरो ने खुद की राजनैतिक ताकत बढ़ाने के उद्देश्य से अपने परिवर्तित लोगो को सर पर बैठा कर रखा! नतीजा... नई पीढी मे identity crisis अर्थात पहचान का संकट!

जब एक बच्चा दिन में 100 बार हर जगह यही पढ़ेगा कि हम अलग है हमारी पहचान अलग है हमारा जीन्स अलग है हमारा DNA अलग है हम अनोखे है हम विशेष है... हम किसान कौम है हम हिंदू नही है तो कहीं न कहीं इन बातो का दो चार प्रतिशत असर तो होगा ही!

थोड़े दिन पहले एक किताब आई थी, हरियाणा के किसी जाट ने लिखी थी, किताब का नाम था " #जाट_हिंदू_नही"
आप राजनैतिक लाभ के लिए ऐसी मूर्खता करेंगे व 99% समाज इन बातो पर आँखे मूंद लेगा और आप लोग समझते है कि इन बातो का असर नही होगा?

अपने बच्चो को आपने जड़ो से काट दिया सिर्फ इसलिए कि कही वो एक गर्वित हिंदू न बन जाए और बन गया तो भाजपा का वोटर बन जायेगा! जो पेड़ जड़ो से कट जाते है वो सूख जाते है और सूखे हुए पेड़ काट दिये जाते है!

आयुष मालिक एक अंध प्रेमी तो है ही साथ ही अपनी जड़ो से कटा हुआ सूखा हुआ पेड़ भी है, जो बच्चा यूट्यूब पर बैठकर इस्लाम सीख गया उसे कभी घर में #हिंदू #शिक्षा #हिंदू #संस्कार दिये ही नही गए होंगे क्युकि हम तो किसान कौम है और धार्मिक संस्कार तो ब्राह्मणवाद है! अपने बेटे को ब्राह्मणवाद से बचाना जरूरी है भले ही वो मुहम्मद अली बन जाए, औरत के लिए धर्म बदल दे!

आयुष मलिक सामूहिक हार है!
आयुष मलिक उस विमर्श का पहला शिकार है जिसे हमी ने आगे बढ़ाया है, पता नही कितने आयुष मलिक मुहम्मद अली बनने की राह में होंगे!
और ये भी है कि कल कोई तुम्हारा अपना बेटा बेटी या सगा कोई भी अली बन सकता है ये आपके जेहन में हमेशा रहना चाहिए ,और ये कोई ढकोसला भी बल्कि वास्तविकता भी हो सकती है ,आयुष मलिक आपके सामने है उदारहण।

जाट सुधरे, अपनी हिंदू पहचान को स्वीकार करे अपने बच्चो को सनातन की शिक्षा दे ब्राहमणवाद के विरोध की आड़ मे नास्तिको जैसा व्यवहार करना और आस्थाओ का मखौल बनाना बंद करे! सनातन के विरुद्ध बोलने वाले सजातीय लोगो की कनपटी लाल करे तो ही कोई समाधान निकलेगा नही तो आयुष मलिक न पहला है और न आखिरी।।

और ये सिर्फ जाटों के लिए नहीं बल्की हर उस बिरादरी को लिए एक संदेश है जो खुद की जड़ो से कटना चाहती है मात्र इसलिए कि कही भाजपा को फायदा न हो ।
अरे मूर्खो भाजपा को वोट न देना तुम लेकिन अपने घर की संतानों और आने वाली पीढ़ियों को तो बचा ही सकते है - मत देना संघियो को वोट, मत देना भाजपा मोदी योगी को वोट , गरियाते रहना भक्तों को , ये सब चलेगा , लेकिन कोई आयुष अगर कहीं अली बन गया इसमें तुम्हारा ही नुकसान है, बाकी आपकी मर्जी🙏🙏🙏
साभार

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री और मशहूर स्टार जयललिता ने जिंदा रहते हुए कभी दिवाली नहीं मनाई,आप ‌जानते हो क्यों,,,???1790...
11/06/2026

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री और मशहूर स्टार जयललिता ने जिंदा रहते हुए कभी दिवाली नहीं मनाई,आप ‌जानते हो क्यों,,,???

1790 नरक चतुर्दशी,यह मध्यरात्रि है, जिहादी आतंकवादी टीपू सुल्तान के पास अपने सबसे वफादार और क्रूर साथियों के साथ एक सेना थी,जो मेलुकोट के श्री चेलुवरया स्वामी के मंदिर में प्रवेश करती है।

वहीं नरक चतुर्दशी के अवसर पर आयोजित भगवान झांकी में लगभग 1000 श्रद्धालु शामिल हुए। रात की पूजा के बाद वे आराम करने की तैयारी कर रहे थे।

जिहादी टीपू ने आकर मंदिर के सभी द्वार बंद कर दिए और 1000 भक्तों में से 800 लोगों को बंद कर दिया उसने अपनी सेना के बल से नरसंहार किया और उसे जमीन पर गिरा दिया। बच्चों-बच्चों को भी नहीं बख्शा। उसने अपने जनाना के लिए शेष 200 सुंदर महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया।

अगली सुबह दीपावली पद्य का दिन था। वह मेलुकोट मंदिर को तोड़ देता है और उसकी विशाल संपत्ति को लूट लेता है।

लूट को ले जाने के लिए 26 हाथियों और 180 घोड़ों की जरूरत थी। भले ही इसे इतने लंबे समय तक ले जाने में 3 दिन लगे।

यही कारण है कि आज भी मेलुकोटे के कई परिवार (मांड्याम अयंगर कहलाते हैं) उस अंधेरी दिवाली की भयानक घटनाओं के कारण इस त्योहार को नहीं मना रहे हैं।

जयललिता भी इसी समुदाय की थीं इसलिए उन्होंने भी कभी दिवाली का त्योहार नहीं मनाया। क्या उनके पूर्वज (मेलकोट अयंगर) 800 नरसंहारों में शामिल नहीं थे? वह कैसे भूल सकती थीं,,,,???

इतिहास की किताबों में आतंकवादी टीपू सुल्तान को एक सुंदर, गंभीर, शांत और बहादुर व्यक्ति के रूप में दर्शाया गया है। लेकिन लंदन के पुस्तकालय में टीपू की वास्तविक छवि बहुत अलग है।

टीपू सुल्तान का इतिहास इस बात का एक अच्छा उदाहरण है कि कैसे कांग्रेस और कुम्मी ने भारत के इतिहास को विकृत किया है।रूप में दानव कहे जाने वाले इस सुल्तान ने न केवल मेलुकोट मंदिर बल्कि दक्षिण भारत के लगभग 25 मंदिरों की संपत्ति भी लूट ली।

जिहादी टीपू हमेशा बड़े-बड़े त्योहारों पर नरसंहार और धन की लूट में लिप्त रहता था। क्योंकि वह अच्छी तरह जानता था कि उन दिनों भक्त बड़ी संख्या में इकट्ठा होते हैं और उन सभी के पास अधिक धन और प्रसाद के रूप में चांदी और सोना होता था। उन दिनों मंदिर में ही सारा धन और अनाज इकट्ठा करने की प्रथा थी।

अब उनकी हिंदुओं की अन्य हत्याओं के बारे में:
1. कित्तूर चेन्नम्मा के राज्य में 1.40,000 हिंदू जिन्होंने धर्मांतरण से इनकार कर दिया था, बेचारे मारे गए
2. 10,000 ब्राह्मण जिन्होंने धर्मांतरण से इनकार कर दिया, उनका केरल राज्य में जबरन 'खतना' किया गया।
3. हिंदू महिलाओं का अपनी इच्छानुसार उपयोग करना और फिर उन्हें अपने सैनिकों को पुरस्कार के रूप में देना
4. 20 साल के लड़कों को हिजड़ा बनाया गया था
5. कोडागु के हिंदुओं का माराना यज्ञ
6. कोडागु में हिंदू महिलाओं के स्तनों को काट कर क्षत-विक्षत कर दिया गया।

लड़कों पर इतने अत्याचार हुए कि लिखा नहीं जा सकता।
अगर ये सब जिहादी टीपू का घमंड था,तो टीपू के अब्बू हैदर अली को तिरुपति कल्याण वेंकटेश्वर की विशाल संपत्ति को लूटने का श्रेय दिया जाता है।

इस मामले में कोई किसी से कम नहीं है।
आतंकवादी टीपू का इतिहास उन संगठनों का एक बड़ा उदाहरण है जो हिंदुओं के खिलाफ हमारे देश के इतिहास को चित्रित करते रहे हैं। टीवी सीरियलों में टीपू को एक महान देशभक्त और कुशल प्रशासक के रूप में चित्रित करने वाले धर्मनिरपेक्षतावादी।
देखो कि जिहादी टीपू की मशहूर तलवार पर उर्दू में क्या लिखा है:
"मुस्लिम नायक जिसने काफिरों का कत्लेआम किया"।।।
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11/06/2026
11/06/2026

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