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ये जो दाढ़ी टोपी ऊँचे पजामे में नज़र आरहा है.... ये जो दिख रहा है वो नहीं...जो नहीं दिख रहा वो है,,,,मुरादाबाद के हत्या अभ...
17/09/2026

ये जो दाढ़ी टोपी ऊँचे पजामे में नज़र आरहा है....
ये जो दिख रहा है वो नहीं...जो नहीं दिख रहा वो है,,,,

मुरादाबाद के हत्या अभियुक्त ने छिपने और पुलिस से बचने को गज़ब तरीक़ा अपनाया...

नरेश बाल्मीकि मुरादाबाद से फरार हुआ तो सीधा UP के ही संभल पहुँच गया...
यहाँ उसने खुद को सुल्तान मिया बना लिया.... मज़हबी लोगों को बांग्लादेशी होना बताया...

फिर क्या पूरी कौम जुट गयी फुल मदद में... कागज़ बन गये सब के सब
बेग़म भी मिल गयी टना टन...
और बच्चे वच्चे भी बना डाले..

आराम से अगले की कट रही थी,,
पर बुरा हो नयी AI टेक्निक का...
पहचान लिया गया... पकड़ा गया..

आओ जानते है इसकी पूरी कुंडली,,,,,

मुरादाबाद पुलिस ने 21 साल से फरार हिस्ट्रीशीटर को गिरफ्तार किया है। वह संभल में सुल्तान नाम से रह रहा था। मुस्लिम समाज के लोगों के बीच रहकर मजदूरी कर रहा था। मस्जिद भी जाता था।
यक्ष एप पर फोटो अपलोड होते संभल की नखासा पुलिस से उसे पहचान लिया। सूचना पर पाकबड़ा पुलिस ने तलाश शुरू की। शनिवार को उसे गिरफ्तार कर लिया।

एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि नरेश हिस्ट्रीशीटर है। वह 21 साल पहले गांव से फरार हो गया था। कुछ दिनों पहले यक्ष एप पर हिस्ट्रीशीटर नरेश का फोटो अपलोड किया गया। एप पर संभल की नखासा पुलिस ने सुल्तान बनकर रह रहे नरेश को पहचान लिया और पाकबड़ा थाने में दी।

शनिवार को पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद उसने खुद को सुल्तान पुत्र जमालुद्दीन निवासी संभल बताया, लेकिन सख्ती से पूछताछ करने पर उसने अपना असली नाम नरेश स्वीकार कर लिया। पुलिस को उसके पास से दो फर्जी आधार कार्ड, तीन वोटर आइडी, एक पैन कार्ड, एक ई-श्रम कार्ड, प्रथमा बैंक का स्मार्ट कार्ड और एक लेटर हेड बरामद हुआ।

ये सभी दस्तावेज फर्जी नाम और पते पर बनाए गए थे, जिनके सहारे वह वर्षों से अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था। नरेश ने बताया कि उस पर लूट और डकैती के कई मुकदमे दर्ज हैं। वह कई वर्ष जेल में भी रह चुका है।

17/09/2026

गरीब के घर में जब अमीर आते हैं तो गरीब बहुत खुश होते हैं, लेकिन जब अमीर के घर गरीब जाते हैं तो अमीर परेशान होते हैं 💯✍️..

रोहिड़ा के फूल पेड़ का उपयोग,,,।। राज्य पुष्प रोहिड़ा का पेड़ लगातार अनदेखी का शिकार हो रहा है. भीषण गर्मी और माइनस सर्दी म...
17/09/2026

रोहिड़ा के फूल पेड़ का उपयोग,,,।।

राज्य पुष्प रोहिड़ा का पेड़ लगातार अनदेखी का शिकार हो रहा है. भीषण गर्मी और माइनस सर्दी में भी अपना वर्चस्व बनाए रखने वाले इस पेड़ की हर एक चीज बेशकीमती है. औषधीय गुणों से भरपूर रोहिड़ा के पेड़ की अनदेखी भविष्य में इसके वजूद पर भारी पड़ सकती है. सूखे में भी गुलजार रहने वाला यह पेड़ ना सिर्फ धोरों का श्रंगार है, बल्कि रेतीले धोरों के स्थिरीकरण के लिए भी यह पेड़ बहुउपयोगी है. दिसंबर से अप्रैल माह तक कई प्रकार के चटकीले फूलों से गुलजार होने वाला यह वृक्ष हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है.

प्रदेश सरकार ने 1983 में रोहिड़े के पुष्प को राज्य पुष्प घोषित कर दिया था, लेकिन आज यह अपने अस्तित्व और वजूद की लड़ाई लड़ रहा है. सरकार द्वारा इसके संरक्षण के लिए कोई विशेष योजना नहीं बनाई गई. स्थिरीकरण के लिए भी यह पेड़ बहुउपयोगी है. बता दे कि रोहिड़े की कटाई और इसकी लकड़ी के परिवहन पर प्रतिबंध है, कोई ऐसा करता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ वन अधिनियम के तहत कार्रवाई करने का वन विभाग के पास अधिकार है. वहीं, काश्तकार आज इसे लेने से मना कर रहा है और तर्क देता है कि इस पेड़ के नीचे फसल पैदा नहीं होती.

औषधीय गुण से भरपूर
रोहिड़ा औषधीय उपयोग में भी महत्वपूर्ण है. त्वचा, फोड़े-फुंसियों, पेट के रोग, घाव, कान का रोग, आंख के रोग की दवा में भी रोहिड़ा का उपयोग होता है. मूत्र संबंधी रोगों की दवा में भी रोहिड़ा का उपयोग होता है. पेट संबंधी रोगों में यह विशेष गुणकारी है और लिव-52 औषधि में भी इसका उपयोग किया जाता है.

रोहिड़ा पेड़ के फूल, तना, छाल काम आता है. यह लीवर, हार्ट, उदर रोगों में यह कारगर दवा है. इसके अलावा इसके फूलों से रोहितकारिष्ट, कुमार्यासव, कालमेघासव आदि दवा बनती है, जो लीवर संबंधी रोग, मोटापा, दमा, शुगर, बीपी सहित अन्य रोगों के इलाज में काम आता है.
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1. रोहिड़ा के फूल लीवर को स्वस्थ रखते हैं.
2. यह फूल शुगर और बीपी में असरदार हैं.
3. त्वचा रोगों और विषैले तत्वों में राहत मिलती है.

फूल मुरझाने लगते हैं. वहीं, रोहिड़ा के फूल इन दिनों खेत-खलियान में खिल रहे हैं. इसके फूल, पत्ते, फलियां व छाल काम आती है. जिससे इस पेड़ को तैयार करने में खर्चा बहुत कम एवं आमदनी अधिक और लंबे समय तक होती है. यह पेड़ कम बरसात वाले क्षेत्रों में भी अपना अस्तित्व बनाए रखता है. आपको बता दें कि रोहिड़ा के फूल को 1983 में राजस्थान का पुष्प घोषित किया गया था. इसे ‘मरू शोभा’ व ‘रेगिस्तान का सागवान’ भी कहते हैं. इसके लिए राजस्थान की जलवायु सबसे ज्यादा उपयुक्त रहती है |

इसकी लकड़ी है बेशकीमती
रोहिड़े की लकड़ी बेशकीमती और बेहद मजबूत होती है. रोहिड़े की लकड़ी की उम्र 100 साल बताई जाती है. बताया जाता है कि 100 साल तक रोहिड़े से बना फनीर्चर खराब नहीं होता और इसकी लकड़ी में कीड़े नहीं लगते. रोहिड़े की कमी की एक मुख्य वजह इसकी लकड़ी की मजबूती भी है, जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है. साज-सज्जा का सामान, फर्नीचर और घर के खिड़की और दरवाजे बनवाने के लिए भी रोहिड़े की अंधाधुंध कटाई हुई और आज भी हो रही है.

सर्दी और गर्मी सहने की अद्भुत क्षमता रखने वाला यह पेड़ -२ डिग्री सेल्सियस की ठंड और ५० डिग्री सेल्सियस की गर्मी में भी सीना तान कर खड़ा रहता है । पतझड़ के मौसम के अतिरिक्त यह वृक्ष खूब हरा-भरा रहता है ।

इस वृक्ष को विशेष वृक्षों की श्रेणी में लाने में इसके केसरिया रंग के घंटी के आकार के पुष्प महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जो देखने में बहुत ही सुन्दर और आकर्षक होते हैं ।

केसरिया रंग त्याग और बलिदान का प्रतीक माना जाता है और राजस्थान की भूमि वीरों की भूमि कहलाती है इसीलिए रोहिड़ा के फूल को १९८३ में राजस्थान का राज्य पुष्प घोषित किया गया है । गंधहीन होने के कारण इसके पुष्पों का प्रयोग पूजा पाठ में नहीं होता ।

इसके पुष्प राजस्थान की जैव विविधता को बनाए रखने में भी बहुत योगदान करते हैं । इसके पुष्पों पर जहां तरह तरह के कीट मंडराते रहते हैं वहीं बकरी के लिए यही पुष्प चारे का काम करते हैं । इसके वृक्षों पर अधिक पुष्पों का खिलना उस वर्ष अच्छी वर्षा होने का संकेत करता है । रोहिड़ा वृक्ष भूमि के कटाव को रोकने में मददगार होते हैं ।

रोहिड़ा की लकड़ी बहुत मजबूत और नक्काशी करने के लिए आदर्श मानी जाती है । इसलिए इसका उपयोग इमारती लकड़ी के रूप में किया जाता है और इसकी तुलना सागवान और शीशम से की जाती है ।

इसकी छाल का उपयोग विभिन्न रोगों के उपचार में ओषधि के रूप में किया जाता है । मूत्र , गर्मी , त्वचा और लीवर से सम्बन्धित रोगों में यह विशेष रूप से लाभकारी है ।

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की मौत बेटी (लव) जिहाद की वजह से हुई....कुटिल दामाद ने सब कुछ लूटा और पैसे और भ...
17/09/2026

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की मौत बेटी (लव) जिहाद की वजह से हुई....कुटिल दामाद ने सब कुछ लूटा और पैसे और भतीजी लेकर भागा !!* *शीला दीक्षित के जीवन से कुछ सीखने के लिए सभी हिंदुओं और उनकी बेटियों को यह लेख अवश्य पढ़ना चाहिए।

अपने अंतिम दिनों में, शीला दीक्षित की बेटी के मुस्लिम पति मोहम्मद इमरान द्वारा अपनी बेटी लतिका के साथ किए गए धोखे और विश्वासघात से बहुत आहत और परेशान थीं, जिसने माँ और बेटी दोनों का पैसा और संपत्ति ले ली…लतीका को छोड़ दिया और उनकी भांजी के साथ भाग गया।

शीला दीक्षित की बेटी लतिका ने 1996 में इमरान से शादी की, शीलाजी 15 साल सन 2013 तक मुख्यमंत्री रहीं पर जैसे ही वो पद से हटी मुस्लिम दामाद ने परेशान करना शुरू कर दिया बेटी को जो शादी के 20 साल बाद 2016 में भाग गया, उसकी सारी चल अचल संपत्ति धोखे से ले ली। लतिका की एफआईआर पर साल 2016 में इमरान को गिरफ्तार भी किया गया था। लतिका ने आरोप लगाया कि इमरान के किसी दूसरी महिला से संबंध थे, इसलिए वह उसे मारता पीटता था और उसके साथ बुरा बर्ताव करता था।

दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चा के मुताबिक शीला दीक्षित की जिंदगी भर की कमाई का हिसाब उनके मुस्लिम दामाद रखते थे.... मामला पुलिस तक गया, लेकिन मुस्लिम दामाद द्वारा ब्लैकमेल करने की धमकी के चलते गैर कानूनी कमाई का राज खोलने के लिए शीला दीक्षित रहीं खामोश। इस घटना ने शीला दीक्षित के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाला और अंततः उनकी मृत्यु का कारण बनी ।

पहली मूर्खता ताकतवर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की बेटी लतिका ने शादी में एक जिहादी पर आंख मूंदकर भरोसा करके की, दूसरी मूर्खता अनुभवी मुख्यमंत्री मां शीला ने अपनी कमाई और खाते को संभालने के लिए मुस्लिम दामाद पर आंख मूंदकर भरोसा करके की...तीसरी सबसे बड़ी मूर्खता की थी शीला की भांजी ने बेवफा और धोखेबाज इमरान के साथ भागकर....

इस घटना से बड़ी सीख लेनी चाहिए... एक साधारण आम मुसलमान किसी राज्य के शक्तिशाली मुख्यमंत्री, उसकी बेटी और भतीजी के साथ मिलकर उसकी व्यक्तिगत और राजनीतिक छवि को धूमिल करते हुए, उसके जीवन, परिवार को नष्ट करने के लिए इतना बड़ा षड्यंत्र रच सकता है लेकिन वह उसके खिलाफ कुछ नहीं कर सकती, फिर एक आम आदमी क्या करेगा और कर सकता है,,,,?!!
साभार,,,,

17/09/2026
16/09/2026

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