27/12/2025
आज के दौर में रिश्तों के नाम बदल गए हैं,
लेकिन क्या सच में औरत का मक़ाम बेहतर हुआ है?
इस वीडियो में हम एक अहम और नाज़ुक सवाल पर बात करते हैं:
“गर्लफ्रेंड या नए दौर की लौंडी?”
इतिहास में औरत के दो सामाजिक दर्जे रहे हैं —
एक बा-इज़्ज़त खानदानी औरत, जिसे निकाह के ज़रिए हक़, पहचान और सम्मान मिला।
और दूसरा, वह औरत जिसे खरीदा-बेचा जाता था, जिससे बिना जिम्मेदारी के रिश्ता रखा जाता था।
इस्लाम ने आकर गुलामी की सोच को तोड़ा,
और औरत को इंसान, बीवी और घर की मालकिन का मुक़ाम दिया।
मगर आज के दौर में
“गर्लफ्रेंड” जैसे रिश्तों में
न निकाह है,
न जिम्मेदारी,
न भविष्य की कोई ज़मानत।
यह वीडियो किसी पर हमला नहीं,
बल्कि दावत-ए-फ़िक्र है —
ताकि हर औरत अपनी क़ीमत पहचाने
और हर मर्द जिम्मेदारी को समझे।
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दुआ है अल्लाह हर औरत को इज़्ज़त वाला रास्ता चुनने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
Deeni Dastur