19/09/2026
💥 एक शिकायत दूसरा जवाब अब सच की जांच जरूरी
🔥आरोपों के बीच वरिष्ट सहायक अशफाक हुसैन कृषि विभाग महराजगंज ने रखा अपना पक्ष उठाए कई गंभीर सवाल🔥
💥इल्ज़ामों की भीड़ में सच दबाया न जाए
किसी बेगुनाह की आवाज़ को यूँ मिटाया न जाए💥
👉महराजगंज के कृषि विभाग से जुड़ा एक मामला इन दिनों गंभीर सवाल खड़े कर रहा है एक तरफ उप कृषि विभाग के कामकाज को लेकर शिकायत सामने आई है जिसमें उप कृषि निदेशक महराजगंज पर शासनादेशों और उच्चाधिकारियों के निर्देशों के कथित अनुपालन न करने कार्यालयीय व्यवस्थाओं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं
💥वहीं दूसरी तरफ इसी पूरे मामले में कृषि विभाग महराजगंज के वरिष्ठ सहायक और यूपी एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन महराजगंज के अध्यक्ष अशफाक हुसैन ने लिखित जवाब देकर अपना पक्ष रखा है और अशफाक हुसैन का जवाब पढ़ने के बाद मामला सिर्फ एक शिकायत तक सीमित नहीं रह जाता बल्कि कई नए सवाल भी सामने आते हैं
👉अब सवाल यह नहीं होना चाहिए कि किसकी बात पहले मान ली जाए सवाल यह होना चाहिए कि आखिर सच क्या है? और अगर आरोप लगाए गए हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कब होगी?अशफाक हुसैन ने अपने जवाब में क्या कहा अशफाक हुसैन ने उप कृषि निदेशक महराजगंज को संबोधित अपने जवाब में कार्यालय पत्र का संदर्भ देते हुए कहा है कि उन्हें यह पत्र एक अनजान नंबर से प्राप्त हुआ और उसमें उनका नाम भी गलत लिखा गया था जवाब के अनुसार मामला उप सम्भागीय कृषि प्रसार अधिकारी सदर महराजगंज के अधीन कार्यरत रहे श्री श्रवण सिंह की सेवा पुस्तिका में कथित फर्जी हस्ताक्षर से जुड़ा हुआ बताया गया था लेकिन इसके बाद अशफाक हुसैन ने अपने जवाब में पूरा घटनाक्रम बताते हुए प्रधान सहायक संजीव पटेल को लेकर कई गंभीर आरोप और सवाल उठाए हैं ध्यान रहे ये बातें अशफाक हुसैन के लिखित जवाब में लगाए गए आरोप और दावे हैं इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है
🔥 पहला बड़ा सवाल A.C.P. लगाने के लिए पैसे मांगने का आरोप अशफाक हुसैन के लिखित जवाब के अनुसार उनके कार्यालय में लंबे समय से तैनात प्रधान सहायक संजीव पटेल द्वारा ग्रुप-C कर्मचारियों की प्रथम ACP लगाने के लिए सेवा पुस्तिका और पैसे की मांग किए जाने का आरोप लगाया गया पत्र में कहा गया है कि इसी क्रम में 27 जुलाई 2026 को छह कर्मचारियों की मूल सेवा पुस्तिकाएं श्री पटेल को दी गई थीं जिसमें श्री श्रवण सिंह की सेवा पुस्तिका भी शामिल थी अशफाक हुसैन का आरोप है कि पैसे नहीं दिए जाने के कारण उन कर्मचारियों की प्रथम ACP नहीं लगाई गई अगर यह आरोप सही है तो मामला बेहद गंभीर है और अगर आरोप गलत है तो इसकी भी जांच होकर सच्चाई सामने आनी चाहिए अशफाक हुसैन ने अपने जवाब में यह भी आरोप लगाया है कि उप सम्भागीय कृषि प्रसार अधिकारी सदर महराजगंज का लगभग पूरा काम प्रधान सहायक संजीव पटेल द्वारा किए जाने की स्थिति बनी हुई है उन्होंने कहा है कि उनसे केवल डिस्पैच नंबर मांगा जाता है इसी के साथ उन्होंने यह भी लिखा है कि संजीव पटेल का स्थानांतरण 15 जून 2025 को उप कृषि निदेशक बस्ती कार्यालय के लिए हो चुका था बावजूद इसके उनके अनुसार उन्हें महराजगंज कार्यालय से कार्यमुक्त नहीं किया गया यहीं से एक बड़ा प्रशासनिक सवाल पैदा होता है
अगर स्थानांतरण हो चुका था तो कार्यमुक्ति क्यों नहीं हुई और यदि नियमों के तहत उन्हें महराजगंज में रोके जाने का कोई वैध कारण था तो वह कारण क्या था? इसका जवाब जांच से ही सामने आ सकता है
🔥 श्रवण सिंह की सेवा पुस्तिका और कार्यमुक्ति का मामला
अशफाक हुसैन के जवाब में श्री श्रवण सिंह की तैनाती और कार्यमुक्ति का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है पत्र के अनुसार कृषि निदेशालय उत्तर प्रदेश कृषि भवन लखनऊ के आदेश के आधार पर श्री श्रवण सिंह की नई तैनाती जिला कृषि रक्षा अधिकारी बस्ती के अधीन की गई थी अशफाक हुसैन का कहना है कि उन्होंने 20 जून 2026 को श्री सिंह का कार्यमुक्त आदेश नोटशीट सहित उच्चाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया था लेकिन उस पर हस्ताक्षर नहीं किए गए
इसके बाद निदेशालय से रिमाइंडर आने और प्रमाण पत्र मांगे जाने के बाद 9 जुलाई 2026 को श्री श्रवण सिंह को बस्ती कार्यालय के लिए कार्यमुक्त किए जाने की बात पत्र में कही गई है लेकिन अशफाक हुसैन ने अपने जवाब में यह भी सवाल उठाया है कि 24 अगस्त 2026 को श्री सिंह को दोबारा उसी कार्यालय के लिए कार्यमुक्त किए जाने की कार्रवाई क्यों की गई? उनके अनुसार यह पूरी प्रक्रिया जांच का विषय है
💥अब सबसे गंभीर आरोप फर्जी रिपोर्ट और फर्जी हस्ताक्षर का दावा अशफाक हुसैन ने अपने जवाब में आरोप लगाया है कि IGRS की फर्जी रिपोर्ट बनाकर अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर किए जाते हैं यह बेहद गंभीर आरोप है लेकिन Siyasi Adda साफ कहना चाहता है
फर्जी रिपोर्ट और फर्जी हस्ताक्षर जैसे आरोपों की सच्चाई केवल दस्तावेजी जांच हस्ताक्षर सत्यापन और सक्षम जांच एजेंसी/अधिकारी की रिपोर्ट से ही तय हो सकती है
इसलिए यहां किसी को दोषी घोषित करना नहीं बल्कि निष्पक्ष जांच की मांग महत्वपूर्ण है
💥अशफाक हुसैन के जवाब के दूसरे हिस्से में आरोप लगाया गया है कि कुछ तैनाती के मामले में लगभग ₹50,000 रुपये लिए जाने की बात सामने आती है इसके अलावा नए TAO-C की नियुक्ति में भी पैसे लिए जाने और विकासखंड मिठौरा में कार्मिकों की तैनाती के बजाय अन्य विकासखंडों को पहले भरने का आरोप लगाया गया है ये भी गंभीर आरोप हैं लेकिन इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है इसलिए सवाल यही है क्या इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी? क्या दस्तावेज देखे जाएंगे? क्या संबंधित कर्मचारियों के बयान लिए जाएंगे? क्या वित्तीय लेन-देन से जुड़े आरोपों की जांच होगी? अगर आरोप गलत हैं तो आरोप लगाने वाले की बात भी सामने आनी चाहिए
और अगर आरोप सही हैं तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए
💥अशफाक हुसैन का दावा मेरे ऊपर लगाए गए आरोप फर्जी और मनगढ़ंत हैं अपने जवाब में अशफाक हुसैन ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को फर्जी मनगढ़ंत बेबुनियाद और तथ्यों से परे बताया है उन्होंने यह भी कहा है कि उनका इस पूरे मामले से कोई लेना-देना नहीं है और अपनी कुर्सी तथा नौकरी बचाने के लिए उनके ऊपर गलत दोषारोपण किया गया उनके अनुसार श्री श्रवण सिंह को महराजगंज में रोकने के लिए उन पर दबाव बनाया गया और तरह-तरह के प्रलोभन दिए गए लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया यह भी उनके लिखित जवाब में किया गया दावा है जिसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है
🔥 अशफाक हुसैन ने मानहानि की कार्रवाई की बात भी कही अशफाक हुसैन ने अपने जवाब में यह भी लिखा है कि उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से उनके खिलाफ आरोप लगाए गए हैं और इसी कारण उन्होंने मानहानि का मुकदमा किए जाने की बात कही है अब यहां भी कानून अपना रास्ता तय करेगा यदि किसी कर्मचारी की प्रतिष्ठा को गलत आरोपों से नुकसान पहुंचाया गया है तो उसे कानून के तहत अपना पक्ष रखने और उचित कार्रवाई मांगने का अधिकार है
💥नटवा जंगल का जर्जर कार्यालय सबसे बड़ा सवाल कर्मचारियों की सुरक्षा का अब बात उस मुद्दे की जो किसी राजनीतिक या विभागीय विवाद से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है कर्मचारियों की सुरक्षा
अशफाक हुसैन के जवाब में उप सम्भागीय कृषि प्रसार अधिकारी सदर महराजगंज स्थित नटवा जंगल प्रक्षेत्र के कार्यालय भवन की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है उनके अनुसार भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है और कभी भी गिरने की स्थिति पैदा हो सकती है उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि इस संबंध में कई बार मौखिक और लिखित रूप से अधिकारियों को अवगत कराया गया लेकिन अभी तक सुनवाई नहीं हुई
💥Siyasi Adda की टीम ने भी इस कार्यालय की स्थिति को देखा है वहां भवन की हालत टूटे हुए हिस्से दरवाजे-कांच और पानी रिसने जैसी समस्याओं को लेकर सवाल उठते हैं अब सवाल बिल्कुल सीधा है अगर भवन वास्तव में जर्जर है तो कर्मचारियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? क्या तकनीकी टीम से भवन की जांच कराई गई? क्या भवन सुरक्षित घोषित किया गया है? अगर सुरक्षित नहीं है तो कर्मचारियों को वहां बैठाकर काम क्यों कराया जा रहा है?
और अगर विभाग को पहले से जानकारी थी तो अब तक क्या कार्रवाई हुई?
सिर्फ एक कंप्यूटर अलमारी की कमी और इंटरनेट व्यवस्था पर भी सवाल अशफाक हुसैन ने अपने जवाब में कार्यालय की मूलभूत व्यवस्थाओं को लेकर भी कई बातें लिखी हैं उनके अनुसार कार्यालय में अभिलेखों को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त अलमारी नहीं है और उपलब्ध अलमारी भी पूरी तरह भरी हुई है उन्होंने यह भी कहा है कि कार्यालय में केवल एक कंप्यूटर उपलब्ध है और उसके साथ आवश्यक UPS इन्वर्टर तथा इंटरनेट/Wi-Fi जैसी सुविधाओं का अभाव है अगर ऐसा है तो सवाल सिर्फ एक कर्मचारी का नहीं है सवाल सरकारी कामकाज की गुणवत्ता और कर्मचारियों की कार्य-स्थितियों का भी है।
💥चिकित्सा खर्च और बजट को लेकर भी अशफाक हुसैन ने उठाई बात अपने जवाब में अशफाक हुसैन ने पिछले कुछ समय से अपनी तबीयत खराब रहने और इलाज से संबंधित बिल-बाउचर कार्यालय में जमा करने की बात कही है उनका आरोप है कि बजट नहीं होने की बात कहकर उसे रिसीव नहीं किया गया उन्होंने इस स्थिति को लेकर भी विभागीय जिम्मेदारी का सवाल उठाया है इस मामले में भी वास्तविक स्थिति दस्तावेजों और विभागीय रिकॉर्ड से स्पष्ट की जा सकती है
यूनियन अध्यक्ष होने की वजह से क्या उनकी आवाज दबाई जा सकती है? यहां एक और महत्वपूर्ण बात है अशफाक हुसैन केवल कृषि विभाग के वरिष्ठ सहायक ही नहीं बल्कि कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष भी हैं ऐसे में यदि कोई कर्मचारी अपने विभागीय अधिकारों कर्मचारियों की समस्याओं और कार्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर लिखित शिकायत करता है तो उसकी शिकायत को व्यक्तिगत विवाद बनाकर खत्म नहीं किया जाना चाहिए उसे भी सुना जाना चाहिए और अगर उसके खिलाफ कोई आरोप है तो उसका भी निष्पक्ष परीक्षण होना चाहिए न कर्मचारी को सिर्फ इसलिए दोषी माना जाए कि उसके खिलाफ शिकायत हुई है
और न शिकायतकर्ता को सिर्फ इसलिए गलत माना जाए कि वह कर्मचारी संगठन से जुड़ा है सच दस्तावेजों से तय होना चाहिए शिकायत में उप कृषि निदेशक पर भी उठाए गए हैं गंभीर सवाल आपके द्वारा साझा किए गए मूल शिकायती पत्र में उप कृषि निदेशक महराजगंज के कामकाज को लेकर भी कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं शिकायत में शासनादेशों और उच्चाधिकारियों के निर्देशों के कथित उल्लंघन कार्यालयीय व्यवस्था कर्मचारियों की तैनाती स्थानांतरण और नटवा जंगल कार्यालय की स्थिति सहित कई मुद्दों पर जांच की मांग की गई है शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि कार्यालय में कर्मचारियों से संबंधित कई मामलों में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है इसलिए यहां भी अंतिम फैसला जांच के बाद ही होना चाहिए
🔥 संजीव पटेल के स्थानांतरण को लेकर दोनों तरफ से सवाल पूरे मामले का सबसे अहम हिस्सा यही दिखाई देता है एक तरफ शिकायत में संजीव पटेल के स्थानांतरण और कार्यमुक्ति को लेकर सवाल उठाए गए हैं
दूसरी तरफ अशफाक हुसैन के जवाब में भी संजीव पटेल के स्थानांतरण उप सम्भागीय कार्यालय में उनके कार्य करने और श्री श्रवण सिंह की कार्यमुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
यानी एक ही मामले में अलग-अलग दावे सामने हैं तो फिर समाधान क्या है?
रिकॉर्ड की जांच
स्थानांतरण आदेश की जांच
कार्यभार ग्रहण/कार्यभार मुक्ति की जांच
नोटशीट की जांच
सेवा पुस्तिकाओं की जांच।
IGRS रिकॉर्ड की जांच।
और संबंधित कर्मचारियों के बयान यही जांच सच्चाई को सामने ला सकती है।
अब जिलाधिकारी महराजगंज से सबसे बड़ा सवाल इस पूरे प्रकरण में जिलाधिकारी महराजगंज से यह अपेक्षा की जा सकती है कि मामले के सभी पक्षों को सुनकर निष्पक्ष जांच कराई जाए जांच में यह देखा जाए कि संजीव पटेल के स्थानांतरण और कार्यमुक्ति की वास्तविक स्थिति क्या है?
श्री श्रवण सिंह की सेवा पुस्तिका और कार्यमुक्ति से संबंधित रिकॉर्ड में क्या तथ्य हैं? छह कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाओं और ACP से संबंधित प्रक्रिया क्या थी?
पैसे मांगने के लगाए गए आरोपों में कोई तथ्य है या नहीं? तीन SMS कर्मचारियों की तैनाती से संबंधित नियम क्या हैं? मिठौरा में सहायक विकास अधिकारी कृषि के अतिरिक्त प्रभार की वास्तविक स्थिति क्या है?। नटवा जंगल स्थित कार्यालय भवन की तकनीकी स्थिति क्या है?। कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए विभाग ने क्या कदम उठाए हैं? कार्यालय में कंप्यूटर UPS इन्वर्टर इंटरनेट और अभिलेख रखने की व्यवस्था पर्याप्त है या नहीं?IGRS रिपोर्ट और हस्ताक्षरों को लेकर लगाए गए आरोपों की सच्चाई क्या है? और सबसे महत्वपूर्ण अशफाक हुसैन पर लगाए गए आरोपों में तथ्य हैं या वे वास्तव में गलत/मनगढ़ंत हैं?
अशफाक हुसैन के लिए भी न्याय जरूरी है
💥Siyasi Adda किसी व्यक्ति को अदालत से पहले दोषी नहीं मानता लेकिन उसी तरह किसी कर्मचारी पर गंभीर आरोप लगा देना और उसकी बात सुने बिना उसकी छवि खराब कर देना भी उचित नहीं है अगर अशफाक हुसैन के खिलाफ लगाए गए आरोप गलत साबित होते हैं तो उनकी प्रतिष्ठा की भरपाई और जिम्मेदारी तय करने का सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है और अगर जांच में कोई आरोप सही पाया जाता है तो कानून और विभागीय नियम के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए न किसी को बचाया जाए न किसी को फंसाया जाए बस सच सामने आना चाहिए
Siyasi Adda की मांग व्यक्ति नहीं व्यवस्था की जांच हो हमारा सवाल किसी एक कर्मचारी के पक्ष या विपक्ष में फैसला सुनाना नहीं है
हमारा सवाल है अगर शिकायत है तो जांच हो
अगर आरोप हैं तो सबूत सामने आएं अगर आरोप गलत हैं तो आरोप लगाने वाले की जवाबदेही तय हो
अगर आरोप सही हैं तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई हो और अगर किसी कर्मचारी को गलत तरीके से फंसाने का प्रयास किया गया है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए
🔥 आखिर में बस इतना कुर्सियां आती-जाती रहती हैं
लेकिन किसी कर्मचारी की इज्जत और उसकी पूरी नौकरी की प्रतिष्ठा वर्षों में बनती है
इसलिए किसी भी आरोप को जांच से पहले अंतिम सच बना देना ठीक नहीं अशफाक हुसैन ने अपना लिखित जवाब दे दिया है अब बारी संबंधित अधिकारियों की है
क्या विभाग उनके जवाब पर भी उतनी ही गंभीरता से विचार करेगा? क्या सभी दस्तावेजों की जांच होगी क्या नटवा जंगल के जर्जर भवन की तकनीकी जांच होगी? क्या स्थानांतरण और कार्यमुक्ति के रिकॉर्ड सामने आएंगे? क्या ACP और पैसों से जुड़े आरोपों की जांच होगी? क्या IGRS और कथित फर्जी हस्ताक्षर के आरोपों की जांच होगी?
💥और सबसे अहम क्या अशफाक हुसैन पर लगाए गए आरोपों की सच्चाई सामने आएगी? अगर आरोप गलत हैं तो उन्हें राहत और सम्मान मिलना चाहिए और अगर किसी ने जानबूझकर गलत आरोप लगाकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग करना उनका अधिकार है सियासी अड्डा किसी को दोषी घोषित नहीं कर रहा सियासी अड्डा सिर्फ इतना कह रहा है जांच निष्पक्ष हो फैसला दस्तावेजों से हो और सच सामने आए
क्योंकि सवाल किसी एक अशफाक हुसैन का नहीं सवाल है कि सरकारी विभाग में काम करने वाले हर कर्मचारी की इज्जत सुरक्षा और न्याय का
Siyasi Adda हर खबर पर नजर हर सवाल पर नजर