12/01/2026
माता-पिता की सेवा और सत्कार..... गुरु की शरण और सम्मान.... प्रकृति व अन्य जीवों का संरक्षण..... आमजन को समर्पण.....ये भगवान की सार्थक व सच्ची भक्ति के स्वरूप हैं.... माता-पिता.... जिन्होने हमें... आकार दिया है.... पहला आहार दिया है... जन्म के 3 से 4 वर्ष तक ...मैया का दूध, हमारा आहार है... संस्कार दिए हैं.... माता -पिता द्वारा दिए गए संस्कार ही , एक सभ्य व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं.... आधार... हमारी जीविका का साधन के साथ साथ समाज में एक सभ्य व्यक्तित्व का निर्माण.... हमें गुरु से प्राप्त होता है.... मैंने अपने बहुत से लेखों में वर्णन भी किया है.... भगवान भी जब मानव रूप में पृथ्वी पर आते हैं तो वो भी गुरु से शिक्षा ग्रहण करते हैं.... फिर चाहे त्रेता युग में गुरु वशिष्ठ और गुरु विश्वामित्र हों या द्वापर में गुरु महर्षि संदीपनी..... गुरु की शरण के बिना हमारा जीवन अधुरा और निरर्थक है.....दुसरा है प्रकृति व अन्य जीवों का संरक्षण..... प्रकृति में मौजूद पंचतत्व (वायु, अग्नि,जल, आकाश और भूमि).... जिनके कारण हमारे जीवन का अस्तित्व है , और हम इन पंचतत्वों में से किसी का भी निर्माण नहीं कर सकते हैं ..... केवल उनका संरक्षण कर सकते हैं...और प्रकृति में हर जीव एक-दुसरे पर आधारित है ... इसलिए हमें अपने साथ साथ अन्य जीवों का संरक्षण भी करना चाहिए....ये सब मैं अपने पहले लेखों में बता चुका हूं...और अन्त में है....हमारा समाज (आमजन).... भगवान भी जब मानव रूप में पृथ्वी पर आते हैं तो वो भी अपना जीवन आम समाज के कल्याण में ही व्यतीत करते हैं..... महलों के वैभव और ऐश्वर्य का त्याग करके..... आमजन जैसा जीवन व्यतीत करते हैं.....आप अयोध्या के राजा रामचंद्र हों या द्वारका के द्वारकाधीश.... इससे उनको कोई सरोकार नहीं है.....जब तक आपका आमजन मानस के उत्थान और कल्याण में कोई दायित्व नहीं तो , आप का जीवन एक जीवित प्राणी मात्र है..... सम्मानीय और स्मरणीय वो ही है जिसने आम समाज को अपना जीवन समर्पित कर दिया हो.... उदाहरण के लिए.... शहीद-ए-आजम सरदार भगतसिंह 🙏... भूतपूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डा एपीजे अब्दुल कलाम 🙏.... संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर 🙏 लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल 🙏...देश के पहले फिल्ड मार्शल जनरल सैम मानेकशॉ 🙏....सुची में एसे बहुत से महान् विभुतियों के नाम है..... जो आज भी सम्माननीय और स्मरणीय हैं.... इनके पास कोई बहुत बड़ी धन सम्पत्ति तो नहीं थी लेकिन इन्होंने अपना , सम्पूर्ण जीवन समाज को समर्पित कर दिया था..... युवा भाईयों और विधार्थियों से (जो पृथ्वी पर मानव सभ्यता का भविष्य हैं) मेरा विशेष अनुरोध है आप ये 4 मंत्र (माता-पिता की सेवा.... गुरु की शरण और सम्मान.... प्रकृति और अन्य जीवों का संरक्षण....आमजन को समर्पण) ....इनका अनुसरण करते हो तो ....आज भी वो आपके जीवन रूपी रथ के सारथी बनते हैं...... प्रकृति और मानवता का संरक्षण ही हमारा धर्म है (Save Nature and humanity)....🙏🙏