02/06/2026
कलयुग में दोनों राक्षस ...जय और विजय... ब्रह्म जी से वरदान लेकर... पृथ्वी पर अदृश्य रूप में आए हैं....माया और अहंकार के स्वरूप में.... भगवान मानव के वशीभूत हैं....और मानव को माया और अहंकार... जैसे कलयुगी राक्षसों ने अपने वशीभूत कर लिया है....आज पृथ्वी पर .... सामाजिक स्तर हो या ... राष्ट्रीय स्तर या फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर.... जहां भी... प्रकृति और मानवता ....हनन के जो कार्य हो रहे हैं...वो इन कलयुगी राक्षसों के कारण ही है.... भगवान देख रहे हैं.... उनके सामने खड़े...मानव को माया और अहंकार ने वशीभूत कर रखा है... लेकिन मानव इस बात से बिल्कुल अनभिज्ञ है.... भगवान मानव के वशीभूत हैं... लेकिन दोनों राक्षसों ने मानव को भगवान के समकक्ष....खड़ा कर दिया है.... भगवान मानव को नहीं मार सकते हैं....और मानव ... क्योंकि गलती....मानव की नहीं... ये सब इन राक्षसों के कारण है..…कलयुग चरम पर है.... क्योंकि दोनों राक्षसों ने विकराल रूप धारण कर लिया है....और दोनों... प्रकृति... जिससे मानव जीवन का अस्तित्व है...और मानवता... जिससे समाज में स्थिरता है... दोनों का विनाश कर रहे हैं.... भगवान के और दोनों राक्षसों के बीच.... युद्ध आरंभ हो चुका है.... आप अपने समाज में देख भी सकते हैं....जो भी माया और अहंकार के वशीभूत लोग हैं.... उनके जीवन में कठिनाईयां और परेशानियां...आने लगी हैं....निकट भविष्य में...आपको समाज में एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा..... क्योंकि... चाहे हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष...रावण और कुम्भकरण....कंस और शिशुपाल जैसे राक्षस हों....या फिर... माया और अहंकार जैसे राक्षस .... दोनों की मृत्यु निश्चित है... एकबार फिर से मानव ...माया और अहंकार....से मुक्त होकर...अपना जीवन सुखमय तरीके से व्यतित कर सकेगा...और फिर से.... सतयुग की स्थापना होगी.... भगवान के जीवन का अनुसरण ही उनकी सार्थक भक्ति स्वरूप है....माता पिता की सेवा और सत्कार..... गुरु की शरण और सम्मान.... प्रकृति और अन्य जीवों को संरक्षण..... आमजन मानस (गरीब और असहाय) को समर्पण....अगर आप निस्वार्थ भाव से ये क्रियाएं करते हो तो ....आज भी वो आपके जीवन रुपी रथ के सारथी बनने को तैयार हैं.... प्रकृति और मानवता का संरक्षण ही हमारा धर्म है (Save nature and humanity)....👏