Save Nature and Huminity

Save Nature and Huminity Save Nature and Humanity......this is a moral duty of all communities and religions those are living on this planet....राधे राधे �

17/02/2026
05/02/2026

हम भक्ति करते हैं प्रभु की आराधना करते हैं..... इच्छा करते हैं....हे प्रभु आपके दर्शन हो जाएं..….मेरा जीवन सफल हो जाएगा..... जीवन में सब कुछ सही हो जाएगा..... लेकिन वास्तविकता एकदम इसके विपरीत है..... प्रभु के दर्शन से नहीं हमारे सुख और दुख हमारे कर्मों पर निर्भर करते हैं.... दर्शन तो रावण और कंस ने भी किए थे..... दर्शन दुर्योधन और दुशासन ने भी किए थे..... दर्शन सब कर रहे थे.... लेकिन इन सब का अंत इनके कर्मों के कारण बहुत ही दयनीय और पीड़ा से भरा हुआ था...... भक्ति रावण ने भी की थी.... महादेव की भक्ति रावण से बढ़कर किसी ने नहीं की .....हम भक्ति स्वरूप महादेव पर जल अर्पित करते हैं....रावण ने अपना शीष अर्पित कर दिया था..... महादेव ने दर्शन भी दिए और वरदान भी..... लेकिन कर्मो के कारण रावण का अंत दयनीय था..... और हर वर्ष उसके पुतले भी जलाए जाते हैं.... मैंने अपने बहुत से लेखों में वर्णन भी किया है..... उनके जीवन का अनुसरण ही उनकी भक्ति है...... महलों के एश्वर्य और वैभव से भरे सुखों का त्याग करना.... माता-पिता की आज्ञा का पालन.... गरीब आमजन मानस को समर्पण..... उन्होंने भक्ति से ज्यादा कर्म को प्रधानता दी है..... महाभारत युद्ध में उन्होंने पाण्डवों को ये नहीं कहा था ....आप मेरी भक्ति करो मैं अभी जाकर कौरव दल को खत्म करके आता हूं..... उन्होंने अर्जुन को अपना गाणडिव उठाने को कहा था..... उनके जीवन के अनुसरण में सबसे पहले गुरु (अध्यापक/Teachers/Professor) की शरण और सम्मान.....वो चाहे त्रेता युग में गुरु वशिष्ठ और गुरु महर्षि विश्वामित्र हों या द्वापर में गुरु महर्षि संदीपनी......वो भी गुरु से शिक्षा ग्रहण करते हैं..... देश के युवाओं और विधार्थियों (जो इस ग्रह पर मानव सभ्यता का भविष्य हैं) उनसे एक ही अनुरोध है सबसे पहले अपनी शिक्षा (Education) पर ध्यान केंद्रित करो...... माता-पिता की सेवा और सत्कार.... गुरु की शरण और सम्मान..... प्रकृति और अन्य जीवों को संरक्षण.... आमजन मानस को समर्पण.....ये भगवान की सच्ची भक्ति स्वरूप हैं..... प्रकृति और मानवता का संरक्षण ही हमारा धर्म है Save Nature and humanity)...🙏🙏🙏

05/02/2026
29/01/2026

किसी ने बार-बार.... पृथ्वी पर आकर मानव को अपने जीवन में अनेकों संदेश दिए... लेकिन हर बार मानव ने उनके दिए संदेशों और उनके जीवन के अनुसरण को छोड़ कर उनकी भक्ति को महत्वता दी है...अगर उनको अपनी भक्ति ही करवानी होती तो नरसिंह अवतार के बाद भी वो अवतरित होते रहते और भक्तों के दुख संकट हर लेते.... लेकिन इसके विपरीत उन्होंने राम और कृष्ण अवतार में आकर पृथ्वी लोक पर एक साधारण मानव की भांति अपना जीवन यापन किया और मानव सभ्यता को अनेकों संदेश दिए.....उनका सबसे पहला संदेश है माता-पिता की सेवा और सत्कार...राम के स्वरूप में उन्होंने बताया... माता-पिता की आज्ञा से वो वनवास चले गए... जंगलों में घूमे... महलों के सुख और वैभव से भरे जीवन का त्याग करके.... गरीब मैया के बेर खाए...ये सब संदेश थे मानव सभ्यता के लिए.... दुसरा संदेश वो जब भी पृथ्वी पर आए हैं उन्होंने भी सबसे पहले गुरु से शिक्षा ग्रहण की हैं.... चाहे त्रेता युग में गुरु महर्षि विश्वामित्र और गुरु महर्षि वशिष्ठ.....या फिर द्वापर में गुरु महर्षि संदीपनी....ऐसा नहीं है वो आए और अपने संदेश और लिलाएं की और चले गए.... गुरु (अध्यापक/Teachers/Professor's) के बिना हमारा जीवन निरर्थक है.... सबसे पहले अपनी शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करो ....गुरु ही हमको गोविंद का ज्ञान करवाते हैं इसलिए गोविंद से पहले गुरु का सम्मान करो.... गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागूं पाय.... बलिहारी गुरु आपने जो गोविंद दियो बताए.... लेकिन आज का युवा भोग-विलासीता के जीवन में इतना खो गया है और शिक्षा की महत्वता को भूल गया है....आप किसी भी आदि शक्ति को मानते हो उनकी भक्ति करते हो ...वो आपकी आस्था है....मैं किसी की आस्था पर कोई टिप्पणी नहीं करता हूं....लेकिन एक बात मैं हमेशा ... युवाओं को कहता रहुंगा ... सबसे पहले अपनी शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करो🙏......तीसरा संदेश प्रकृति और अन्य जीवों का संरक्षण.... जंगलों में घुमना गैया चराना....और चौथा संदेश है आमजन मानस को समर्पण...... द्वारकाधीश होते हुए... अपने मित्र के चरण धोना ....गले से लगाना....साथ बैठा कर भोजन करवाना....ये सब उन्होंने अपने जीवन में बताएं हैं.... लेकिन हमने माया और अहंकार के वशीभूत होकर।....मैया बाबा के साथ दुर्व्यवहार, उनको घर से निकाल देना.....माया को ही सर्वश्रेष्ठ मान लेना .... शिक्षा ग्रहण नहीं करना.... आज-कल छोटे-छोटे बच्चे जिनको ... स्कूल में होना चाहिए वो कथावाचक बने बैठे हैं.....हम कोई भक्ति करें या ना करें.... इससे उनको कोई सरोकार नहीं है.... यदि हम उनकी इच्छानुसार...मैया,गैया और आमसमाज इनको अपना जीवन समर्पित करते हैं तो आज भी वो आपके जीवन रूपी रथ के सारथी बनते हैं.... जैसे महाभारत के युद्ध में अर्जुन के बने थे मैया स्वरूप है माता-पिता और गुरु का .....गैया स्वरूप है प्रकृति और अन्य जीवों का...और आम समाज ...प्रकृति के बाद आम समाज ही है जिसके कारण हमारे जीवन का अस्तित्व है.... माता-पिता की सेवा और सत्कार..... गुरु की शरण और सम्मान..... प्रकृति और अन्य जीवों का संरक्षण.... आमजन मानस को समर्पण ये भगवान की सच्ची भक्ति स्वरूप हैं.....🙏🙏

26/01/2026

जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान.....🙏🙏

23/01/2026

पृथ्वी पर जीवन के लिए बहुत से कारक हैं ...जो बाकी के ग्रहों से पृथ्वी को अलग बनाते हैं..... विज्ञान के अनुसार हमारी पृथ्वी एक जीवन्त ग्रह (Habitable zone ) है..... पृथ्वी सूर्य से एक निश्चित दूरी (15 करोड़ किमी) पर है... जिसके कारण पृथ्वी पर तापमान जीवन योग्य है.....इसके विपरीत बुध ग्रह जो सूर्य से बहुत निकट वहां का तापमान बहुत अधिक और प्लूटो जो सूर्य से सबसे दूर है वहां का तापमान बहुत कम है..... दोनों ही परिस्थितियों में जीवन सम्भव नहीं है.... पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र(Magnetic field) बहुत शक्तिशाली है जो अंतरिक्ष से आनेवाली खतरनाक पराबैंगनी किरणों (Ultra violet rays) से हमे सुरक्षित रखता है..... पृथ्वी पर आक्सीजन है जो जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक है....हम बिना भोजन के या जल के कुछ दिनों तक जीवित रह सकते हैं..... लेकिन आक्सीजन के बिना हमारा जीवन कुछ क्षण में ही समाप्त हो सकता है..... वृहस्पति ग्रह जो पृथ्वी पर जीवन को सुरक्षित रखने के लिए एक प्राकृतिक रक्षक(Natural Guard) की तरह काम करता है.... आकार में बड़े होने के कारण वृहस्पति का गुरुत्वाकर्षण बल(Gravitational force) बहुत शक्तिशाली है....जो पृथ्वी पर आने वाले क्षुद्र ग्रहों (Asteroids) और धुमकेतु (Comets) को अपनी और आकर्षित कर लेता है....अगर वृहस्पति ग्रह नहीं होता तो पृथ्वी पर जीवन कभी नहीं होता..... एसे बहुत से कारक हैं जो पृथ्वी पर जीवन के लिए अपने अपने काम पर लगे हुए हैं..... देखने और समक्षने में ऐसा लगता है किसी ने बहुत ही उत्तमता(Prfactness ) से इन सब को बनाया है....और इन सब को बनने में अरबों वर्ष लगे हैं.... जैसे कोई बड़ी इमारत को बनने में 5 से 6 वर्ष तक लग जाते हैं वैसे ही.... लेकिन उस इमारत के संरक्षण को अगर नजर अंदाज कर दिया जाए तो उस इमारत को गिरने में कुछ क्षण भर का समय लगता है...... विज्ञान के अनुसार कभी मंगल ग्रह पर भी जीवन था नदियों के बहाव से बनी संरचनाएं इस बात की गवाह है वहां भी किसी सभ्यता के होने के अवशेष हैं लेकिन आज वहां ऐसा कुछ भी नहीं है..... केवल तेज हवाओं और धुल भरी आंधियों के ...... मैं अपने बहुत से लेखों में वर्णन कर चुका हूं..... शायद जो गलतियां हम पृथ्वी पर रहकर कर रहे हैं वहां की सभ्यता ने भी ऐसा ही किया हो ......पृथ्वी पर जीवन के अन्य कारकों के लिए हम कुछ नहीं कर सकते हैं.... लेकिन पृथ्वी पर विधमान कारक ..... पंचतत्वों का संरक्षण तो कर सकते हैं.....हम पंचतत्वो में से किसी का भी निर्माण नहीं कर सकते हैं केवल संरक्षण कर सकते हैं..... जिससे आने वाली हमारी पीढ़ी का भी पृथ्वी पर जीवन सुखमय हो ...... हमारी आकाशगंगा में अरबों तारे हैं.....और उन सब में सूर्य भी एक हैं हर क्षण हजारों सौर मंडल खत्म होते हैं और हजारों बनते हैं.....और एक दिन हमारा सौर मंडल भी खत्म हो जाएगा और फिर से एक नए निर्माण की यात्रा पर चल पड़ेगा ..... बनना और नष्ट होना ये ब्रह्माण्ड का नियम है.....पृथ्वी पर आपने बहुत बार लोगों को ये कहते सुना होगा कि पृथ्वी पर हम हमेशा के लिए नहीं है लेकिन वास्तविकता में ये पृथ्वी भी हमेशा के लिए नहीं है....मानव से पहले ना जाने कितने जीव और सभ्यताएं अस्तित्व में आई और विलुप्त हो गई......नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप(JWST) ने एक प्रकाश (Light) को देखा है जिसका अस्तित्व 13.8 अरब साल पहले का है..... और पृथ्वी का अस्तित्व 4.5 अरब साल पहले का है.....ये ब्रह्माण्ड बहुत विशाल और रहस्यों से भरा हुआ है....मेरा हमेशा की तरह सभी युवाओं और विधार्थियों से (जो पृथ्वी पर मानव सभ्यता का भविष्य हैं) एक ही अनुरोध है कृप्या सबसे पहले अपनी शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित करो..... माता-पिता की सेवा.... गुरु की शरण और सम्मान..... प्रकृति और अन्य जीवों का संरक्षण..... आमजन मानस को समर्पण....ये भगवान की सच्ची भक्ति स्वरूप हैं..... प्रकृति और मानवता का संरक्षण ही हमारा धर्म है (Save Nature and humanity).....🙏🙏

19/01/2026

हमारा कोई प्रिय....अपना ...जब एक समय पर मृत्यु को प्राप्त होता है तो हम सब दुखी हो जाते हैं...विलाप करते हैं...इसके विपरीत ऐसा कुछ भी नहीं है....इसको विस्तार से समक्षते हैं... विज्ञान के अनुसार ना तो हम उर्जा(Energy) को उत्पन्न(Create) कर सकते हैं और नाहि उर्जा को समाप्त(Destroy)....हम केवल उर्जा को परिवर्तित(Convert) कर सकते हैं..... मैंने अपने लेख में विस्तार से वर्णन भी किया है हमारा शरीर और कुछ नहीं... उर्जा का एक परिवर्तित स्वरूप है....जब हम किसी को मृत्यु के पश्चात.... मृत शरीर को अग्नि में जलाते हैं तो उसमें बहुत सी प्रक्रियाऐं होती हैं.... हमारे शरीर में विद्यमान जल वाष्पीकरण (Evaporation) से वायुमंडल में चला जाता है... जितने भी खनीज(Minerals ) जो हम आहार स्वरूप ग्रहण करते वो सब भी..... बिना जले कार्बन के कण (Unburnt corbon particles) जिनको हम राख बोलते हैं....वो सब मिट्टी में मिलकर फिर से किसी पेड़ पौधे प्रकाश संश्लेषण विधि (Photo synthesise) से भोजन बनाते हैं और फिर से कार्बन का स्वरूप ले लेते हैं.... अग्नि दहन से जो कार्बन-डाई-ऑक्साइड गैस निकलती है..... पेड़ पौधे फिर से उसी कार्बन-डाई-ऑक्साइड से अपना भोजन बनाते हैं.....जब हम अपने किसी के जाने के ग़म में विलाप कर रहे होते हैं.....और कुछ समय पश्चात वो ही वाष्पित जल वर्षा के स्वरूप में गिरता है तो बहुत आनंद का अनुभव करते हैं.....उसी कार्बन-डाई-ऑक्साइड से हमारे गार्डन के पेड़ पौधे, बालकनी के पेड़ पौधे.... खेतों में हमारी फसल के पेड़ पौधे....अपना भोजन बनाते हैं और फलते फुलते हैं.... जिनको देखकर हम भी प्रसन्न होते हैं.... मैंने अपने एक लेख में बताया भी है.... हमारी आकाशगंगाऐं(Galaxies), हमारा सौर मंडल(Star system ) ये सब इस अनंत ब्रह्माण्ड में एक अपकेन्द्रीय (Incentric) स्वरूप में चक्कर लगा रहे हैं....और हमारा जीवन भी एक अपकेन्द्रीय बल स्वरूप है.... और हर वो वस्तु जो एक चक्कर में घुमती है तो उसका सम्पूर्ण नियंत्रण उसके केंद्र में होता है...... और जब भी कोई वस्तु चक्कर में घुमती है तो दोहराव (Repition)स्वाभाविक(Natural) है जो बार बार होता रहता है...जो गया है उसको आना भी है ....हमारी चेतना/आत्मा भी एक आत्मिक उर्जा (Energy of soul) का स्वरूप है.... इसलिए आपने बहुत बार सुना होगा आत्मा ना मरती है ना जन्म लेती है अपना चोला बदल लेती है.... मैं अपने हर लेख में युवा वर्ग और विधार्थीयों से एक ही अनुरोध करता हूं....आप अपनी शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करो आपको सब कुछ अपने आप समक्ष आ जाएगा... गुरु की शरण के बिना हमारा जीवन निरर्थक है.....माता -पिता की सेवा और सत्कार..... गुरु की शरण और सम्मान..... प्रकृति और अन्य जीवों का संरक्षण..... आमजन मानस को समर्पण....ये भगवान की सच्ची भक्ति स्वरूप हैं..... प्रकृति और मानवता का संरक्षण ही हमारा धर्म है (Save Nature and humanity)...🙏🙏

18/01/2026
12/01/2026

माता-पिता की सेवा और सत्कार..... गुरु की शरण और सम्मान.... प्रकृति व अन्य जीवों का संरक्षण..... आमजन को समर्पण.....ये भगवान की सार्थक व सच्ची भक्ति के स्वरूप हैं.... माता-पिता.... जिन्होने हमें... आकार दिया है.... पहला आहार दिया है... जन्म के 3 से 4 वर्ष तक ...मैया का दूध, हमारा आहार है... संस्कार दिए हैं.... माता -पिता द्वारा दिए गए संस्कार ही , एक सभ्य व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं.... आधार... हमारी जीविका का साधन के साथ साथ समाज में एक सभ्य व्यक्तित्व का निर्माण.... हमें गुरु से प्राप्त होता है.... मैंने अपने बहुत से लेखों में वर्णन भी किया है.... भगवान भी जब मानव रूप में पृथ्वी पर आते हैं तो वो भी गुरु से शिक्षा ग्रहण करते हैं.... फिर चाहे त्रेता युग में गुरु वशिष्ठ और गुरु विश्वामित्र हों या द्वापर में गुरु महर्षि संदीपनी..... गुरु की शरण के बिना हमारा जीवन अधुरा और निरर्थक है.....दुसरा है प्रकृति व अन्य जीवों का संरक्षण..... प्रकृति में मौजूद पंचतत्व (वायु, अग्नि,जल, आकाश और भूमि).... जिनके कारण हमारे जीवन का अस्तित्व है , और हम इन पंचतत्वों में से किसी का भी निर्माण नहीं कर सकते हैं ..... केवल उनका संरक्षण कर सकते हैं...और प्रकृति में हर जीव एक-दुसरे पर आधारित है ... इसलिए हमें अपने साथ साथ अन्य जीवों का संरक्षण भी करना चाहिए....ये सब मैं अपने पहले लेखों में बता चुका हूं...और अन्त में है....हमारा समाज (आमजन).... भगवान भी जब मानव रूप में पृथ्वी पर आते हैं तो वो भी अपना जीवन आम समाज के कल्याण में ही व्यतीत करते हैं..... महलों के वैभव और ऐश्वर्य का त्याग करके..... आमजन जैसा जीवन व्यतीत करते हैं.....आप अयोध्या के राजा रामचंद्र हों या द्वारका के द्वारकाधीश.... इससे उनको कोई सरोकार नहीं है.....जब तक आपका आमजन मानस के उत्थान और कल्याण में कोई दायित्व नहीं तो , आप का जीवन एक जीवित प्राणी मात्र है..... सम्मानीय और स्मरणीय वो ही है जिसने आम समाज को अपना जीवन समर्पित कर दिया हो.... उदाहरण के लिए.... शहीद-ए-आजम सरदार भगतसिंह 🙏... भूतपूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डा एपीजे अब्दुल कलाम 🙏.... संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर 🙏 लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल 🙏...देश के पहले फिल्ड मार्शल जनरल सैम मानेकशॉ 🙏....सुची में एसे बहुत से महान् विभुतियों के नाम है..... जो आज भी सम्माननीय और स्मरणीय हैं.... इनके पास कोई बहुत बड़ी धन सम्पत्ति तो नहीं थी लेकिन इन्होंने अपना , सम्पूर्ण जीवन समाज को समर्पित कर दिया था..... युवा भाईयों और विधार्थियों से (जो पृथ्वी पर मानव सभ्यता का भविष्य हैं) मेरा विशेष अनुरोध है आप ये 4 मंत्र (माता-पिता की सेवा.... गुरु की शरण और सम्मान.... प्रकृति और अन्य जीवों का संरक्षण....आमजन को समर्पण) ....इनका अनुसरण करते हो तो ....आज भी वो आपके जीवन रूपी रथ के सारथी बनते हैं...... प्रकृति और मानवता का संरक्षण ही हमारा धर्म है (Save Nature and humanity)....🙏🙏

Address

Mahendragarh

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Save Nature and Huminity posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share