Darul Uloom Anware Mustafa Sehlau Shareef Barmer Rajasthan

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Darul Uloom Anware Mustafa Sehlau Shareef Barmer Rajasthan This is religious and globle institute

تعزیت نامہ بر وصال پرملال:خانقاہ عالیہ بخاریہ سہلاؤشریف،باڑمیر(راجستھان
08/06/2026

تعزیت نامہ بر وصال پرملال:خانقاہ عالیہ بخاریہ سہلاؤشریف،باڑمیر(راجستھان

दारुल उ़लूम अनवारे मुस्तफा सेहलाऊ शरीफ में ताज़ियती मज्लिस का आयोजनमरहूम मोहम्मद शरीफ़ अंसारी के ईसाले सवाब के लिए सामूह...
14/05/2026

दारुल उ़लूम अनवारे मुस्तफा सेहलाऊ शरीफ में ताज़ियती मज्लिस का आयोजन

मरहूम मोहम्मद शरीफ़ अंसारी के ईसाले सवाब के लिए सामूहिक क़ुरआनख़्वानी व ख़ुसूसी दुआ़

सेहलाऊ शरीफ/बाड़मेर (प्रेस रिलीज़)

दारुल उ़लूम अनवारे मुस्तफा सेहलाऊ शरीफ की विशाल ग़रीब नवाज़ मस्जिद में आज असेंबली (सलामी) के बाद एक ताज़ियती मज्लिस का आयोजन किया गया, जो लगभग सुबह आठ बजे से दस बजे तक जारी रही। यह मज्लिस दारुल उ़लूम के नाज़िमे तालीमात, प्रसिद्ध साहित्यकार हज़रत अ़ल्लामा मौलाना मोहम्मद शमीम अहमद साहब नूरी मिस्बाही के नाना जान मरहूम व मग़फ़ूर जनाब मोहम्मद शरीफ़ साहब अंसारी (जमुनहियां बाग, गोरखनाथ, गोरखपुर) के ईसाले सवाब के लिए आयोजित की गई।
ज्ञात हो कि जनाब मोहम्मद शरीफ़ अंसारी साहब का गत दिवस यानी 13 मई को अ़स्र और मग़रिब के बीच लंबी बीमारी के बाद इंतिकाल हो गया था। उनके इंतिकाल की खबर फैलते ही हर तरफ़ ग़म और अफ़सोस की लहर दौड़ गई तथा देश के विभिन्न हिस्सों से ताज़ियती पैग़ाम और दुआ़एँ मिलने लगीं। ताज़ियत पेश करने वालों में अनेक बड़े उ़ल्मा, मशाइखे इज़ाम, मुफ्तियाने किराम, इमाम, ख़तीब, साहित्यकार, बुद्धिजीवी तथा आ़म अहले सुन्नत शामिल रहे, जिन्होंने मरहूम के इंतिकाल को बड़ा नुक़सान बताते हुए परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
ख़ास तौर पर नूरुल उ़ल्मा, पीरे तरीक़त, रहबरे राहे शरीअ़त हज़रत अ़ल्लामा अल्हाज सय्यद नूरुल्लाह शाह बुख़ारी मद्दज़िल्लहुुल आ़ली ने मक्का मुकर्रमा से ऑडियो संदेश के माध्यम से अपने ताज़ियती विचार व्यक्त किए। उन्होंने हज़रत मौलाना मोहम्मद शमीम अहमद नूरी मिस्बाही को सब्र व शुक्र की नसीहत करते हुए मरहूम के लिए दुआ़ए मग़फ़िरत और ईसाले सवाब किया। हज़रत के इन मोहब्बत भरे अल्फ़ाज़ ने परिवार वालों को इस दुख की घड़ी में बड़ा हौसला और दिली सुकून प्रदान किया।
(मरहूम की नमाज़े जनाज़ा आज 14 मई की सुबह दस बजे अदा की गई, जिसकी इमामत उनके भांजे, प्रसिद्ध शोधकर्ता और अनेक किताबों के लेखक हज़रत अ़ल्लामा मुफ्ती अ़ब्दुल हकीम साहब क़िब्ला नूरी मिस्बाही ने फरमाई। नमाज़े जनाज़ा में उ़ल्मा, हुफ्फाज़, तलबा, आ़म व ख़ास और अक़ीदतमंदों की बड़ी संख्या ने शामिल होकर नम आंखों से मरहूम को सुपुर्दे ख़ाक किया।)
ताज़ियती मज्लिस से पहले दारुल उ़लूम के उस्तादों और छात्रों ने सामूहिक रूप से कुरआने करीम की तिलावत कर मरहूम के लिए ईसाले सवाब किया। इसके बाद फ़ातिहा ख़्वानी और मग़फ़िरत व बुलंदीए दर्जात के लिए ख़ुसूसी दुआ़एँ की गईं। इस अवसर पर भावुक दृश्य देखने को मिले और उपस्थित लोगों ने मरहूम के लिए दुआ़ए मग़फ़िरत पेश की।
मज्लिस की शुरुआ़त तिलावते कलामे पाक से हुई। इसके बाद मशहूर नातख़्वां मद्दाहे रसूल हज़रत मौलाना हाफ़िज़ व क़ारी बरकत अ़ली साहब बरकाती अहसनी अनवारी ने हुज़ूर मुफ्तीए आज़मे हिन्द अ़लैहिर्रहमा का एक दिलकश और ईमान अफ़रोज़ कलाम पेश किया, जिससे मज्लिस का माहौल और अधिक रूहानी हो गया।
इसके बाद दारुल उ़लूम के नायब सदरुल मुदर्रिसीन, ख़तीबे शीरीं मक़ाल हज़रत अ़ल्लामा मौलाना जमालुद्दीन साहब क़ादरी अनवारी ने “कुल्लु नफ़्सिन् ज़ाइक़तुल मौत” को विषय बनाकर संक्षिप्त लेकिन अत्यंत प्रभावशाली और विचारोत्तेजक भाषण दिया। उन्होंने इंसानी ज़िंदगी की नश्वरता, मौत की अटल सच्चाई और आख़िरत की तय्यारी पर प्रकाश डालते हुए मरहूम के अच्छे अख़लाक़, सादगी, मिलनसार स्वभाव, दीनी सोच और नेक गुणों का भी उल्लेख किया।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने हज़रत मौलाना मोहम्मद शमीम अहमद नूरी मिस्बाही, उनके परिवार, रिश्तेदारों और सभी परिजनों के लिए सब्रे जमील और अज्रे जज़ील की दुआ़ करते हुए कहा कि संस्था के ज़िम्मेदार लोग, उस्ताद और छात्र इस दुख की घड़ी में बराबर के शरीक हैं।
मजलिस का समापन सामूहिक दुआ़ पर हुआ, जिसमें मरहूम की मग़फ़िरत, जन्नतुल फिरदौस में ऊँचा मुक़ाम और परिवार वालों के लिए सब्र व इस्तिक़ामत की दुआ़ की गई।
रिपोर्ट: हबीबुल्लाह क़ादरी अनवारी
ख़ादिम:दारुल उ़लूम अनवारे मुस्तफा सेहलाऊ शरीफ, बाड़मेर(राजस्थान)

━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━🌸🌿 दीनी संस्थानों के संरक्षण और विकास के लिए विशेष सहयोग की अपील 🌿🌸━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━🌺 दारुल उ़लूम...
02/03/2026

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🌸🌿 दीनी संस्थानों के संरक्षण और विकास के लिए विशेष सहयोग की अपील 🌿🌸
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🌺 दारुल उ़लूम अनवारे मुस्तफ़ा, सेहलाऊ शरीफ़ की तामीर व तरक़्क़ी में अहले-ख़ैर का तआ़वुन निहायत ज़रूरी 🌺
✍️ लेखक: मुहम्मद शमीम अहमद नूरी मिस्बाही
🕌 ख़ादिम: दारुल उ़लूम अनवारे मुस्तफ़ा सेहलाऊ शरीफ़, बाड़मेर (राजस्थान)
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अल्हम्दुलिल्लाह! दीने मतीन व मज़हबे मुहज़्ज़ब इस्लाम की सरसब्ज़ व शादाब तालीमात, मस्जिदों व मदरसों की रौनक़ों और उ़ल्मा-ए-किराम की मसाई-ए-जमीला की बदौलत आज भी उम्मते मुस्लिमा रुश्द व हिदायत के नूर से मुनव्वर है। ये दीनी इदारे इस्लामी अक़दार के मुहाफ़िज़ और दीन व सुन्नियत की तर्वीज व इशाअ़त का ज़रिया हैं। इनके ज़रिए न‌ई नस्ल के दिलों व ज़ेहनों में इश्क़े मुस्तफ़ा ﷺ की शमअ़ रोशन होती है, क़ुरआन व हदीस की बरकतैं तक़सीम की जाती हैं और इस्लामी तहज़ीब व तमद्दुन को महफ़ूज़ रखा जाता है।
यह हक़ीक़त किसी से पोशीदा नहीं कि दौरे हाज़िर में माद्दा-परस्ती, दीन-बेज़ारी और रूहानी ज़वाल की वजह से बहुत से दीनी इदारे मुश्किलात का शिकार हो रहे हैं। ऐसे हालात में दीनी मदरसों की देख-रेख और मुआ़विनत(मदद) हर दर्देदिल रखने वाले मुसलमान पर फ़र्ज़े किफ़ाया की हैसियत रखती है। ख़ास तौर पर माहे रमज़ानुल मुबारक में, जो कि सख़ावत, ख़ैरात और नेकियों के अजर व सवाब के कई गुना बढ़ने का महीना है, हमें इन दीनी क़िलों की हिफ़ाज़त के लिए आगे बढ़ना होगा।
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🌿 इलाक़ा-ए- थार में दीन व सुन्नियत का अ़ज़ीम क़िला 🌿
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मग़रिबी राजस्थान, बिलख़ुसूस इलाक़ा-ए- थार, अपनी मख़्सूस जुग़राफ़ियाई, समाजी और सक़ाफ़ती हैसियत के बावजूद दीन व सुन्नियत के तहफ़्फ़ुज़ के हवाले से एक तारीखी पसमंज़र रखता है। यहाँ के बाशिंदे अपनी मज़हबी ग़ैरत व हमिय्यत के लिए मशहूर हैं, मगर इल्मे दीन की रौशनी को हर सू आ़म करने के लिए एक मुनज़्ज़म और मज़बूत दीनी इदारे की ज़रूरत हमेशा महसूस की गई।
अल्हम्दुलिल्लाह! इसी ज़रूरत को महसूस करते हुए दारुल उ़लूम अनवारे मुस्तफ़ा सेहलाऊ शरीफ़ की बुनियाद रखी गई, जो आज इस ख़ित्ते में अहले-सुन्नत व जमाअ़त के अ़ज़ीम इल्मी व रूहानी मरकज़ के तौर पर अपनी पहचान रखता है। इस इदारे ने बेशुमार हुफ्फ़ाज़, उ़ल्मा,क़ुर्रा और मुबल्लिग़ीन की एक कहकशाँ तैयार की है, जो मुख़्तलिफ़ बिलाद व अम्सार और मवाज़आ़त(इलाक़ों) में दीने मतीन की इशाअ़त में मशग़ूल हैं।
यह दीनी दर्सगाह न सिर्फ़ क़ुरआन व हदीस की रौशनी को आ़म कर रही है, बल्कि अफ़कारे अहले-सुन्नत व जमाअ़त, इश्क़े मुस्तफ़ा ﷺ और सच्चे इस्लामी अक़ायद की तर्वीज़ का भी एक मुस्तहकम क़िला है। यहाँ के उ़ल्मा व मशाइख़ न सिर्फ़ दर्स व तदरीस के ज़रिए दीने हक़ का पैग़ाम पहुँचा रहे हैं, बल्कि अ़मली तौर पर भी इस्लाहे उम्मत के फ़रीज़े को अंजाम दे रहे हैं।
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🌺 अहले-ख़ैर हज़रात से ख़ुसूसी अपील 🌺
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नूरुल उ़ल्मा पीरे तरीक़त हज़रत अ़ल्लामा अल्हाज सय्यद नूरुल्लाह शाह बुख़ारी मद्दज़िल्लहुल-आ़ली की जानिब से तमाम अहले-ख़ैर हज़रात, आशिक़ाने रसूल ﷺ और दर्दमंद मुसलमानों से ख़ुसूसी अपील है कि वह इस माहे मुक़द्दस में दीनी इदारों की किफ़ालत और मुआ़विनत के जज़्बे को मज़ीद तक़वियत दें। ख़ास तौर पर दारुल उ़लूम अनवारे मुस्तफ़ा सेहलाऊ शरीफ़ जैसे अ़ज़ीम इदारे की माली मुआ़विनत(मदद) में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लें।
यह इदारा अपने महदूद वसाइल के बावजूद दीन व सुन्नियत की शमअ़ को रोशन किए हुए है, मगर यह भी एक हक़ीक़त है कि दीनी मदरसे अ़वाम के तआ़वुन के बग़ैर अपनी ख़िदमात जारी नहीं रख सकते। यह आपकी ज़कात, सदक़ात, अ़तिय्यात और दीगर माली इमदाद के ज़रिए ही अपनी तालीमी सरगर्मियों को जारी रख सकते हैं।
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🌙 मदद का बेहतरीन वक़्त: माहे रमज़ानुल मुबारक 🌙
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यही वह मुबारक महीना है जिसमें अल्लाह तआ़ला अपने बंदों को बे-हिसाब नवाज़ता है। यही वह वक़्त है जब अल्लाह की राह में ख़र्च किए जाने वाले एक रुपया का अज्र कई गुना बढ़ा दिया जाता है। इसलिए ख़ुश-नसीब हैं वह लोग जो अपनी दौलत को दीनी इदारों की बक़ा और तर्वीज़ में लगाते हैं, क्योंकि यही अस्ल सरमाया है जो आख़िरत में निजात का ज़रिया बनेगा।
याद रखिए! दीनी मदरसों की बक़ा दरहक़ीक़त उम्मते मुस्लिमा की बक़ा है। इन इदारों के दर-व-दीवार से टकराने वाली सदाएँ आने वाली नस्लों को ईमान व अ़मल की रौशनी अ़ता करती हैं। लिहाज़ा आइए! हम सब मिलकर दारुल उ़लूम अनवारे मुस्तफ़ा सेहलाऊ शरीफ़, बाड़मेर की तरक़्क़ी व इस्तिहकाम के लिए भरपूर तआ़वुन करें और अपनी ज़कात, सदक़ात, फ़ित्राना और अतिय्यात का बेहतरीन मसर्फ़ इसे बनाएँ।
अल्लाह तआ़ला हमें अपनी दौलत को दीन व सुन्नियत की ख़िदमत में ख़र्च करने की तौफ़ीक़ अ़ता फ़रमाए और इस अ़ज़ीम ख़िदमत के बदले हमें दुनिया व आख़िरत में बे-हिसाब अज्र अ़ता फ़रमाए। आमीन बिजाहि सैय्यिदिल मुरसलीन ﷺ।
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🌸🌿 جزاکم اللہ خیراً 🌿🌸
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🕌
दारुल उ़लूम अनवारे मुस्तफा
दरगाह हज़रत पीर सय्यद हाजी आ़लीशाह बुखारी
पच्छमाई नगर, सेहलाऊ शरीफ़,पो: गरडिया, ज़िला: बाड़मेर (राजस्थान)
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DARUL ULOOM ANWARE MUSTAFA, PACHHMAI NAGAR
P/O: GARDIA, TAHSIL: RAMSAR, DIST: BARMER (RAJASTHAN)
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🔹 Account No: 2621000100017222
IFSC: PUNB0262100
🔹 Account No: 2646293808
IFSC: KKBK0003711
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📞
PhonePe द्वारा सीधे तआ़वुन के लिए: 8769449786
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27/02/2026

रमज़ानुल मुबारक में राहे-ख़ुदा में खर्च करने की अहमियत और ख़ास तआ़वुन की अपील

अस्सलामु अ़लैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू!

रमज़ानुल मुबारक रहमत, मग़फ़िरत और बरकतों का महीना है। यह वह मुबारक वक़्त है जब नेकियों का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है। खास तौर पर सदक़ा, ख़ैरात और राहे-ख़ुदा में खर्च करना इस महीने में बहुत अफ़ज़ल अ़मल माना गया है। जो माल हम अल्लाह की राह में खर्च करते हैं, वही असल में हमारे लिए आख़िरत का ज़ख़ीरा बनता है। गरीबों, यतीमों और दीनी इदारों की मदद करना न सिर्फ़ ज़रूरतमंदों का सहारा बनता है, बल्कि हमारे माल में बरकत और दिल में सुकून का ज़रिया भी बनता है।
इसी सिलसिले में दारुल उ़लूम अनवारे मुस्तफ़ा, सेहलाऊ शरीफ़ (बाड़मेर, राजस्थान) आप हज़रात की ख़ास तवज्जोह का मुंतज़िर है। यह इदारा दीनी, इल्मी और अख़लाक़ी तर्बियत का अहम मरकज़ है, जहाँ नई नस्ल को दीन की रोशनी से आरास्ता किया जा रहा है। आपकी दुआ़ओं और मदद से यह इदारा तरक़्क़ियों की मंज़िलें तय कर रहा है।
आप से गुज़ारिश है कि रमज़ान की इन मुबारक घड़ियों में अपनी हैसियत के मुताबिक़ ज़कात, सदक़ा और चंदे के ज़रिए इस इदारे का तआ़वुन फरमाएँ। आपका दिया हुआ हर रुपया दीनी तालीम के फ़रोग़ और तलबा की बेहतर तर्बियत में खर्च होगा, जो आपके लिए सदक़ा-ए-जारीया साबित होगा।
अल्लाह तआ़ला आप के उ़मर, माल और रिज़्क़ में खूब बरकत अ़ता फरमाए और आपकी हर नेक दुआ़ को क़ुबूल फरमाए। आमीन।

आप का खैरख़्वाह!
सय्यद नूरुल्लाह शाह बुख़ारी
दारुल उ़लूम अनवारे मुस्तफा दरगाह हज़रत पीर सय्यद हाजी आ़लीशाह बुखारी, पच्छमाई नगर,
सेहलाऊ शरीफ़,पो:गरडिया ज़िला:बाड़मेर (राजस्थान)
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🌸📚 दारुल उ़लूम अनवारे मुस्तफा सेहलाऊ शरीफ और उसकी ख़िदमात 📚🌸📝 अज़: मुहम्मद शमीम अहमद नूरी मिस्बाही━━━━━━━━━━━━━━━━━━अल्ह...
24/02/2026

🌸📚 दारुल उ़लूम अनवारे मुस्तफा सेहलाऊ शरीफ और उसकी ख़िदमात 📚🌸
📝 अज़: मुहम्मद शमीम अहमद नूरी मिस्बाही
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अल्हम्दुलिल्लाह! दारुल उ़लूम अनवारे मुस्तफा सेहलाऊ शरीफ, बाड़मेर — न सिर्फ राजस्थान बल्कि हिंदुस्तान के ज़्यादातर हिस्सों में जहाँ कहीं तअ़लीम व तअ़ल्लुम का रिश्ता क़ायम है — मुहताजे तआरुफ़ नहीं।
यूँ तो राजस्थान में जितने भी मदारिसे अ़रबिया हैं, सबकी अपनी-अपनी जगह अहम ख़िदमात व कारनामे हैं, जिनका एहतिराम व एअ़तिराफ़ न करना नाहक़ शनाशी और हक़ाइक़ से चश्मपोशी है। मगर दारुल उ़लूम अनवारे मुस्तफा सेहलाऊ शरीफ ने अपने निहायत ही पसमांदा व पिछड़े महल्ले वक़ूअ़ के बावजूद निहायत कम अ़रसे में अल्लाह तआला के बे-पायाँ फ़ज़्ल व करम से जिस क़दर हैरतअंगेज़ व ख़ुशकुन ख़िदमात अंजाम दी हैं, वह इस दर्सगाहे इल्म व अदब को माज़ी क़रीब में क़ायम होने वाली दर्सगाहों में मुम्ताज़ व नुमायाँ करती हैं।
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🌟 तासीस व बुनियाद 🌟
बिला शुब्हा दारुल उ़लूम अनवारे मुस्तफा राजस्थान की एक अ़ज़ीम व मुम्ताज़ दीनी दर्सगाह है, जिसे आज से तक़रीबन 32 साल पहले हुज़ूर मख़्दूमे जहानियाँ सय्यदुना जलालुद्दीन जहाँगश्त अ़लैहिर्रहमा
के ख़ानदान से तअ़ल्लुक़ रखने वाले मर्दे दरवेश, नमूना-ए-असलाफ हज़रत
पीर सय्यद कबीर अहमद शाह बुखारी अ़लैहिर्रहमा ने
क़ायम फरमाया।
इलाक़ा-ए-थार के पिछड़े क्षेत्र “खावड़” में बढ़ती बदमज़हबियत पर क़दग़न लगाने, मस्लके आला हज़रत के फ़रोग़ व इस्तिहकाम और तअ़लीम व तअ़ल्लुम की नश्र व इशाअत के लिए यह इदारा
🗓 02 फ़रवरी 1993 ईस्वी
को आस्ताना-ए-आलिया हज़रत पीर सैय्यद हाजी अ़ली शाह बुखारी अलैहिर्रहमा से मुत्तसिल क़ायम किया गया।
इसकी बुनियाद तवक्कल अ़लल्लाह, ख़ुलूस, लिल्लाहियत और तक़वा पर रखी गई — जो आज भी इस इदारे का असली सरमाया है।
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🌺 इल्मी व तरबियती ख़िदमात 🌺
पीरे तरीक़त हज़रत सय्यद कबीर अहमद शाह बुखारी अ़लैहिर्रहमा की ख़ुलूस व लिल्लाहियत और बुज़ुर्गों के फ़ैज़ान का नतीजा है कि इस दर्सगाह ने:
✔ बहुत से फ़ारिग़ुत्तहसील तलबा को दस्तारे फ़ज़ीलत व हिफ़्ज़ से नवाज़ा।
✔ सैकड़ों सीनों में क़ुरआने करीम के तीसों पारे महफ़ूज़ कराए।
✔ बे-ज़बानों को क़ुव्वते गोयाई और सलीक़ा-ए-गुफ़्तार अ़ता किया।
✔ गैर-मुहज़्ज़ब बच्चों को आला इस्लामी अख़्लाक़ से आरास्ता किया।
✔ फ़िक्रे सलीम और शऊरे दीनी से लैस उ़ल्मा-ए-दीन पैदा किए।
आज इदारे के मातहत राजस्थान व गुजरात, बिलख़ुसूस इलाक़ा-ए-थार में
✨ 96 तअ़लीमी शाखाएँ ✨
मदारिस व मकातिब की शक्ल में क़ायम हैं, जहाँ दीनियात के साथ उर्दू, हिंदी, अंग्रेज़ी और हिसाब की तअ़लीम भी दी जाती है।
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🏫 मौजूदा सूरते हाल 🏫
यह इदारा दीनी व अ़सरी उ़लूम का हसीन संगम है।
📖 दरजाते: प्राइमरी, हिफ़्ज़ व क़िराअत
🎓 मुकम्मल दर्से निज़ामी (आ़लिमियत व फ़ज़ीलत तक)
🏫 सीनियर सेकेंडरी स्कूल (बारहवीं तक दुनियावी तअ़लीम)
“अनवारे मुस्तफा उच्च माध्यमिक विद्यालय” की शक्ल में अ़सरी तअ़लीम का भी बेहतरीन इंतिज़ाम है।
यह इदारा महज़ दानिशगाह नहीं बल्कि तरबियतगाह भी है —
जहाँ इल्म के साथ अख़्लाक़ की ताक़त पैदा की जाती है।
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🌼 इदारे की क़ियादत 🌼
दारुल उ़लूम के मुहतमिम व शैखुल हदीस नूरुल उ़ल्मा पीरे तरीक़त हज़रत अ़ल्लामा
सय्यद नूरुल्लाह शाह बुखारी
मद्द ज़िल्लहुल आ़ली — इल्म व अ़मल, हिल्म व बुर्दबारी, करम व सखा और इन्किसारी का पैकर हैं।
आपका मक़सद क़ौम व मिल्लत की इस्लाह, तल्बा की तरबियत और तब्लीग़े दीन के लिए क़ाबिल उ़ल्मा तय्यार करना है। आप दिन-रात इदारे की तअ़लीमी व तअ़मीरी तरक़्क़ी के लिए कोशाँ रहते हैं।
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📣 अहले ख़ैर से खुसूसी गुज़ारिश 📣
अहक़र इदारे के ज़िम्मेदारान, मुदर्रिसीन व तल्बा की तरफ़ से तमाम अहले ख़ैर हज़रात से गुज़ारिश करता है कि:
🌟 अपने महबूब इदारे
“दारुल उ़लूम अनवारे मुस्तफा सेहलाऊ शरीफ”
को अपनी ख़ुसूसी इमदाद व तआ़वुन से नवाज़ें।
🌟 ज़कात, सदक़ात, फ़ित्रा व अ़तिय्यात के ज़रिये तअ़लीमी व तअ़मीरी उमूर में हिस्सा लें।
🌟 इदारे के अ़ज़ाइम व मंसूबों को पाया-ए-तक्मील तक पहुँचाने में इदारा के बाज़ुओं को मज़बूत करें।
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🤲 दुआ़ व शुक्रिया 🤲
हम जुम्ला मुसलमानाने अहले सुन्नत का तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं जिन्होंने इस इदारे की अहमियत को समझते हुए अपना क़ीमती तआ़वुन पेश किया।
अल्लाह तआ़ला इस इदारे को दिन दूनी रात चौगुनी तरक़्क़ी अ़ता फ़रमाए और इसे इल्म व अ़मल का मरकज़ बनाए रखे। आमीन।
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📍 Darul Uloom Anware Mustafa
Pachhamai Nagar, Sehlau Sharif
P/O: Gardia, Tah: Ramsar
Dist: Barmer (Rajasthan)
📞 9649536792
📞 9799462917
💳 Account No: 2621000100017222
🏦 IFSC Code: PUNB0262100
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🌹 इल्म की शमअ़ जलती रहे… सुन्नियत की खुशबू फैलती रहे… 🌹

21/02/2026

*ہمیں دارالعلوم انوارِ مصطفیٰ سہلاؤ شریف کا تعاون کرنا کیوں ضروری ہے؟*

*از: محمد شمیم احمد نوری مصباحی*
*خادم: دارالعلوم انوارِ مصطفیٰ سہلاؤ شریف، باڑمیر (راجستھان)*

علم وہ روشنی ہے جو دل و دماغ کو منور کرتی ہے، جہالت کے اندھیروں کو چاک کرتی ہے، اور انسان کو اس کے مقصدِ حیات سے روشناس کراتی ہے۔ اور جب یہ علم قرآن و سنت کی روشنی میں ہو، تو نہ صرف دنیاوی زندگی سنورتی ہے بلکہ آخرت بھی کامیاب ہو جاتی ہے۔ ایسے میں وہ ادارے جو علمِ دین کے چراغ روشن کر رہے ہیں، حقیقت میں امت کے حقیقی خادم اور مستقبل کے معمار ہیں۔ ان ہی میں سے ایک درخشاں ستارہ *دارالعلوم انوارِ مصطفیٰ سہلاؤ شریف* ہے، جو اپنے قیام سے لے کر آج تک دینِ اسلام کی ترویج، فروغِ سنیت، اور علم و تعلیم کے میدان میں بے مثال خدمات انجام دے رہا ہے۔

*دارالعلوم انوارِ مصطفیٰ: ایک علمی و دینی قلعہ:*

یہ عظیم دینی درسگاہ اپنے قیام کے 32 سال مکمل کر چکی ہے، اور اس مختصر عرصے میں اس نے جو علمی و روحانی خدمات انجام دی ہیں، وہ کسی تعارف کی محتاج نہیں۔ یہ ادارہ علاقۂ تھار کے اس پسماندہ علاقے میں قائم کیا گیا، جہاں جہالت اور بدعقیدگی کی گھٹائیں چھائی ہوئی تھیں۔ لیکن علم کے اس چراغ نے وہ روشنی پھیلائی کہ آج اس علاقے کے نوجوان دین و سنیت کے خادم بن کر نکل رہے ہیں۔

یہاں قرآن و حدیث کی تعلیم دی جاتی ہے، علمِ فقہ و کلام کے موتی لٹائے جاتے ہیں، علمِ تجوید و قرأت کی روشنی عام کی جاتی ہے، اور ساتھ ہی ساتھ عصری علوم سے بھی آراستہ کیا جاتا ہے تاکہ طلبہ زمانے کے بدلتے تقاضوں سے ہم آہنگ ہو کر اسلامی اقدار کی حفاظت کر سکیں۔

*بانیِ دارالعلوم نمونۂ اسلاف حضرت پیر سید کبیر احمد شاہ بخاری علیہ الرحمہ:*

اس عظیم علمی مرکز دارالعلوم انوارِ مصطفیٰ کے قیام کا سہرا نمونۂ اسلاف حضرت پیر سید کبیر احمد شاہ بخاری علیہ الرحمہ کے سر جاتا ہے، جنہوں نے اس پسماندہ علاقے میں دینِ متین کی شمع روشن کرنے کے لیے بے مثال قربانیاں دیں۔ آپ کی شبانہ روز محنت، اخلاص، اور علم و روحانیت سے محبت کا نتیجہ ہے کہ آج یہ ادارہ نہ صرف تھار کے علاقے بلکہ پورے راجستھان و گجرات میں اسلامی تعلیمات کے فروغ میں اپنا کردار ادا کر رہا ہے۔

*مہتمم و شیخ الحدیث: نورالعلماء حضرت علامہ الحاج سید نوراللہ شاہ بخاری مدظلہ العالی*

اس ادارے کی ترقی و استحکام میں اس وقت جو شخصیت کلیدی کردار ادا کر رہی ہے، وہ ہیں نورالعلماء پیر طریقت حضرت علامہ الحاج *سید نوراللہ شاہ بخاری* مدظلہ العالی۔ آپ دارالعلوم کے مہتمم و شیخ الحدیث ہونے کے ساتھ ساتھ ایک کثیرالمریدین شیخ طریقت، جید عالم، عظیم مصلح اور دینِ متین کے بے لوث خادم ہیں۔

آپ نے اپنی عرق ریزی، انتھک محنت، اور عظیم قربانیوں سے اس ادارے کو ایک مستحکم علمی قلعے میں تبدیل کر دیا ہے۔ آپ کی قیادت میں دارالعلوم نے دینی و عصری تعلیم، تبلیغِ اسلام، اور اصلاحِ معاشرہ کے میدان میں نمایاں کامیابیاں حاصل کی ہیں۔ آپ کا مقصد یہی ہے کہ اس ادارے سے علمِ دین کے سچے خادم، قرآن و حدیث کے ماہر، اور معاشرے کے مصلح تیار ہوں، جو امت کی رہنمائی کا فریضہ انجام دے سکیں۔

*ہمیں دارالعلوم انوارِ مصطفیٰ کا تعاون کیوں کرنا چاہیے؟*

*1. دینی تعلیم کی بقاء کا مسئلہ:*

اگر دینی مدارس کا نظام کمزور ہو جائے تو نئی نسل کا دین سے رشتہ ٹوٹ جائے گا، جس کے بھیانک نتائج ہمارے سامنے ہیں۔ دارالعلوم انوارِ مصطفیٰ ایک ایسا علمی قلعہ ہے جو نہ صرف دینی علوم کی حفاظت کر رہا ہے بلکہ جدید تقاضوں کو بھی مدنظر رکھتے ہوئے ایک متوازن نصاب فراہم کر رہا ہے۔ ایسے میں اس ادارے کی مدد کرنا درحقیقت دینِ اسلام کی خدمت کرنا ہے۔

*2. مفت تعلیم اور مستحق طلبہ کی کفالت:*

یہ ادارہ معاشی طور پر کمزور لیکن علمی صلاحیت رکھنے والے طلبہ کو تعلیم فراہم کر رہا ہے۔ یہاں طلبہ کو رہائش، کتب، علاج، خوراک، اور تعلیم وغیرہ مفت دی جاتی ہے۔ یہ سب عوام کے تعاون سے ہی ممکن ہے، اور اگر ہم بھی اس کارِ خیر میں حصہ ڈالیں تو نہ جانے کتنے روشن چہرے علم کے نور سے منور ہو سکتے ہیں۔

*3. عقائدِ اہلِ سنت و جماعت کا تحفظ:*

یہ ادارہ مسلکِ اعلیٰ حضرت کی روشنی میں قرآن و حدیث کی تعلیم دے رہا ہے تاکہ امت راہِ حق پر قائم رہے۔ اگر ہم چاہتے ہیں کہ یہ قلعہ ہمیشہ مضبوط رہے، تو ہمیں اس کا سہارا بننا ہوگا۔

*4. دارالعلوم کی تعلیمی شاخیں:*

یہ ادارہ نہ صرف دارالعلوم انوارِ مصطفیٰ کے ذریعے تعلیمی خدمات انجام دے رہا ہے بلکہ کثیر تعداد میں مدارس و مکاتب کو بھی منظم انداز میں چلا رہا ہے۔ ان شاخوں کے ذریعے:
★ناظرہ قرآن و تجوید کی تعلیم
★اردو، عربی، ہندی، انگریزی وحساب وغیرہ کی تعلیم
★ابتدائی دینیات و عقائد
★احادیثِ مبارکہ و فقہ کی بنیادی تعلیم
★اصلاحی اور تبلیغی سرگرمیاں

کو عام کیا جا رہا ہے، تاکہ دینی علوم کی شمع ہر گھر تک پہنچے اور اہلِ سنت و جماعت کے عقائد کو مضبوطی ملے۔

*آپ دارالعلوم کا تعاون کیسے کریں؟*
★رمضان المبارک میں زکوٰۃ، صدقات اور فطرہ کی رقم دارالعلوم کے اکاؤنٹ میں جمع کرائیں۔
★اپنے والدین یا مرحومین کے نام پر کوئی کمرہ، ہال یا عمارت وقف کریں۔
★کسی ایک مدرس کی تنخواہ یا کسی طالب علم کے سالانہ یا کم از کم ماہانہ اخراجات اپنے ذمہ لے لیں۔★دارالعلوم کی لائبریری کے لیے قرآن، حدیث، فقہ و دیگر دینی، تاریخی وسیرت وغیرہ کی مستند کتابیں وقف کریں۔
★کمپیوٹر سینٹر کے لیے چند کمپیوٹر عطیہ کریں۔
★اپنے حلقۂ احباب میں اس دارالعلوم کا بھرپور تعارف کروائیں اور دوسروں کو بھی اس کارِ خیر میں شامل کریں۔
★دارالعلوم کے سالانہ جلسۂ دستار بندی اور عرسِ قطب تھار حضرت پیر سید حاجی عالی شاہ بخاری علیہ الرحمہ میں شریک ہو کر اپنی آنکھوں سے اس ادارے کی عظیم خدمات کا مشاہدہ کریں۔

*دارالعلوم انوارِ مصطفیٰ، ایک عظیم تعلیمی تحریک:*

یہ دارالعلوم صرف ایک ادارہ نہیں بلکہ ایک تحریک ہے جو علم و عمل، دعوت و تبلیغ، اصلاحِ معاشرہ، اور دینی و عصری علوم کے فروغ میں مصروفِ عمل ہے۔ اگر یہ دینی ادارے باقی رہے، تو دین باقی رہے گا! اگر ہم نے آج اس کے تعاون میں کوتاہی کی، تو آنے والی نسلیں ہمیں معاف نہیں کریں گی۔

اللہ تعالیٰ ہمیں اس مقدس مشن میں بڑھ چڑھ کر حصہ لینے کی توفیق عطا فرمائے۔ آمین!

*DARUL ULOOM ANWARE MUSTAFA PACHHMAI NAGAR, SEHLAU SHARIF*
*📌 P/O: GARDIA, TAHSIL: RAMSAR, DIST: BARMER (RAJASTHAN)*

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