30 second fun

30 second fun आपकी एक छोटी सी मुस्कान दूसरों को खुशी का एहसास करा सकती है और यह खुद के लिए भी काफी फायदेमंद होती है

29/03/2026

अमेरिका में वर्तमान स्थिति वाकई काफी तनावपूर्ण है और "No Kings" जैसे आंदोलन इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि जनता के एक बड़े वर्ग में भारी असंतोष है।
​यहाँ कुछ मुख्य बिंदु हैं जो अभी अमेरिका की स्थिति को दर्शा रहे हैं:
​1. "No Kings" आंदोलन का प्रभाव
​यह आंदोलन केवल एक साधारण विरोध प्रदर्शन नहीं रह गया है। 28 मार्च 2026 को हुए ताज़ा प्रदर्शनों ने एक नया इतिहास रचा है:
​व्यापक भागीदारी: अमेरिका के सभी 50 राज्यों में लगभग 3,300 से अधिक जगहों पर प्रदर्शन हुए हैं।
​मुख्य केंद्र: मिनेसोटा (Minnesota) इस विरोध का केंद्र बना हुआ है, जहाँ ब्रूस स्प्रिंगस्टीन और बर्नी सैंडर्स जैसे दिग्गजों ने जनता को संबोधित किया।
​कारण: प्रदर्शनकारी केवल ट्रंप के बयानों से ही नहीं, बल्कि इरान के साथ युद्ध, सख्त आव्रजन नीतियों (ICE operations) और सत्ता के कथित केंद्रीकरण (Authoritarianism) के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं।
​2. जनता का गिरता विश्वास
​हालिया सर्वेक्षणों (जैसे Pew Research) के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट देखी गई है:
​लगभग 51% से 58% अमेरिकी उनकी कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता पर भरोसा नहीं जता रहे हैं।
​युद्ध और सैन्य कार्रवाइयों को लेकर भी आम जनता में यह धारणा बन रही है कि अमेरिका ज़रूरत से ज़्यादा आक्रामक रुख अपना रहा है।
​3. सत्ता के लिए चुनौती
​जैसा कि आपने कहा, फिलहाल 'सत्ता परिवर्तन' (Impeachment या तख्तापलट) जैसी स्थिति तो नहीं है, लेकिन:
​ध्रुवीकरण (Polarization): अमेरिका दो धड़ों में पूरी तरह बंट चुका है।
​प्रशासनिक दबाव: सड़कों पर उतरती लाखों की भीड़ और विपक्ष का कड़ा रुख ट्रंप सरकार की नीतियों को लागू करने में बड़ी बाधा बन रहा है।
​निष्कर्ष: यह सही है कि डोनाल्ड ट्रंप का अंदाज़ हमेशा से विवादित रहा है, लेकिन वर्तमान में युद्ध की स्थिति और आंतरिक सुरक्षा के मुद्दों ने इस "असंतोष" को एक ज्वालामुखी जैसा रूप दे दिया है। लोकतंत्र में जब जनता सड़कों पर "No Kings" (कोई राजा नहीं) के नारे लगाती है, तो वह सीधे तौर पर राष्ट्रपति की शक्तियों को चुनौती दे रही होती है।

आखिर महंगाई बढ़ने वाली हैअखबार की इस रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अप्रैल 2026 से होम अप्लायंसेस की कीमतों में भारी बढ़ोतरी होने व...
28/03/2026

आखिर महंगाई बढ़ने वाली है

अखबार की इस रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अप्रैल 2026 से होम अप्लायंसेस की कीमतों में भारी बढ़ोतरी होने वाली है। इसका मुख्य कारण कच्चे माल (raw materials) की बढ़ती लागत और सप्लाई चेन में आई रुकावटें बताई जा रही हैं।
​यहाँ इस बढ़ोतरी का मुख्य विवरण दिया गया है:
​किस सामान पर कितनी बढ़ेगी कीमत?
​एयर कंडीशनर (AC): सबसे ज्यादा असर AC पर पड़ेगा, जिसकी कीमतों में 12% तक का उछाल आ सकता है।
​टेलीविजन (TV): टीवी के दाम 7% से लेकर 12% तक बढ़ सकते हैं (मुख्य रूप से मेमोरी चिप्स की बढ़ती लागत के कारण)।
​फ्रिज और वॉशिंग मशीन: इन उपकरणों की कीमतों में 7% से 8% तक की वृद्धि होने की संभावना है।
​महंगाई बढ़ने के मुख्य कारण:
​कच्चे माल की लागत: प्लास्टिक, पॉलिमर और कॉपर जैसे कच्चे माल के दाम बढ़ गए हैं।
​नए नियम (BEE Norms): 2026 से लागू हुए नए एनर्जी रेटिंग नियमों के कारण कंपनियों को अब और अधिक कुशल (efficient) पार्ट्स लगाने पड़ रहे हैं, जो महंगे हैं।
​करेंसी और लॉजिस्टिक्स: डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और कंटेनर फ्रेट रेट (माल ढुलाई) में बढ़ोतरी से भी लागत बढ़ी है।
​चिप शॉर्टेज: स्मार्ट टीवी में इस्तेमाल होने वाली चिप्स की कमी भी कीमतों को ऊपर खींच रही है।
​निष्कर्ष: अगर आप अगले कुछ महीनों में नया फ्रिज, AC या टीवी खरीदने का प्लान कर रहे थे, तो 1 अप्रैल से पहले खरीदारी करना आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है. पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये प्रति ली...
27/03/2026

केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है. पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है. वहीं डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 0 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है.

क्या होती है एक्साइज ड्यूटी?

यह एक तरह का इनडायरेक्ट टैक्स है जो सामान के प्रोडक्शन या मैन्युफैक्चरिंग पर लगाया जाता है. यह टैक्स केंद्र सरकार को जाता है. इससे सामान का दाम बढ़ जाता है.

भारत में पेट्रोल-डीजल पर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारें VAT (वैल्यू एडेड टैक्स) लगाती हैं. लेकिन अब केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर दी है.

यह जानकारी आम जनता की जेब पर सीधा असर डालती है, क्योंकि ईंधन की कीमतें परिवहन से लेकर खाने-पीने की चीजों के दाम तक को प्रभावित करती हैं।
आपकी बात को थोड़ा और विस्तार देते हुए, यहाँ कुछ मुख्य बिंदु दिए गए हैं जो इस टैक्स को समझने में और मदद करेंगे:
एक्साइज ड्यूटी के बारे में कुछ और जरूरी बातें:
चुनिंदा वस्तुओं पर लागू: भारत में जीएसटी (GST) आने के बाद ज्यादातर सामानों पर से एक्साइज ड्यूटी हट गई है, लेकिन पेट्रोल, डीजल, कच्चा तेल (Crude Oil), प्राकृतिक गैस, विमानन ईंधन (ATF) और शराब जैसी चीजों पर यह अभी भी लागू होती है।
रेवेन्यू का बड़ा स्रोत: केंद्र सरकार के लिए एक्साइज ड्यूटी कमाई का एक बहुत बड़ा जरिया है। इससे मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल देश के विकास कार्यों जैसे सड़कें बनाने, इंफ्रास्ट्रक्चर और जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जाता है।
VAT और एक्साइज ड्यूटी में अंतर: * Excise Duty: यह सामान बनने (Production) के समय केंद्र सरकार लगाती है और यह पूरे देश में एक समान होती है।
VAT (Value Added Tax): यह राज्य सरकारें लगाती हैं। चूंकि हर राज्य की VAT दर अलग-अलग होती है, इसीलिए राजस्थान, दिल्ली या उत्तर प्रदेश में पेट्रोल-डीजल के दाम अलग-अलग होते हैं।
इस कटौती का क्या असर होगा?
महंगाई में राहत: ट्रांसपोर्टेशन (ट्रक, लॉजिस्टिक्स) सस्ता होने से फल, सब्जियां और अन्य जरूरी सामानों के दाम कम होने की संभावना बढ़ जाती है।
आम जनता की बचत: पेट्रोल पर ₹10 और डीजल पर ₹10 की सीधी कटौती (आपके द्वारा बताए गए आंकड़ों के अनुसार) एक मध्यमवर्गीय परिवार के मासिक बजट में अच्छी बचत ला सकती है।
राज्यों पर दबाव: केंद्र की कटौती के बाद अक्सर राज्यों पर भी अपना VAT कम करने का दबाव बढ़ जाता है, जिससे कीमतें और भी कम हो सकती हैं।

यह जानकर वाकई खुशी होती है कि सरकार के इस कदम से आम आदमी को राहत मिल रही है। पेट्रोल और डीजल के दामों में यह बड़ी कटौती न केवल आपके वाहन चलाने के खर्च को कम करेगी, बल्कि सामानों की ढुलाई (Logistics) सस्ती होने से बाजार में महंगाई भी कुछ हद तक काबू में आ सकती है।
चूंकि आपने राजस्थान के संदर्भ में पहले रुचि दिखाई थी, तो आपको बता दूं कि राजस्थान में VAT (Value Added Tax) की दरें काफी चर्चा में रहती हैं। अगर राज्य सरकार भी केंद्र की इस कटौती के बाद अपने हिस्से का टैक्स (VAT) कम करती है, तो जयपुर, जोधपुर या बीकानेर जैसे शहरों में कीमतें और भी नीचे आ सकती हैं।

एक दिलचस्प बात: पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले इस टैक्स का एक बड़ा हिस्सा सड़कों और हाईवे के निर्माण (Infrastructure) में खर्च होता है, जिससे भविष्य में सफर और आसान हो जाता है।

Petrol Diesel Price News Today: केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों और आम जनता को राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी म.....

30 दिन का होगा मोबाइल रिचार्ज मोबाइल यूजर्स के लिए *अहम जानकारी* अब 30 दिन की मिलेगी वैलिडिटी टेलीकॉम कंपनियों पर सख्त स...
25/03/2026

30 दिन का होगा मोबाइल रिचार्ज

मोबाइल यूजर्स के लिए
*अहम जानकारी*

अब 30 दिन की मिलेगी वैलिडिटी
टेलीकॉम कंपनियों पर सख्त सरकार
30 दिन के रिचार्ज को प्रमोट करें: सरकार

यह जानकारी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है और इसमें सच्चाई भी है। मोबाइल यूजर्स के लिए यह वाकई एक बड़ी राहत की खबर है।
दरअसल, काफी समय से यह शिकायत थी कि "मंथली" रिचार्ज के नाम पर कंपनियां केवल 28 दिन की वैलिडिटी देती हैं। इसकी वजह से यूजर्स को साल में 12 की जगह 13 बार रिचार्ज करना पड़ता था। अब सरकार और TRAI (भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण) इस पर सख्त हो गए हैं।
मुख्य बातें जो आपको जाननी चाहिए:
30 दिन की अनिवार्यता: सरकार ने सभी टेलीकॉम कंपनियों (Jio, Airtel, Vi, BSNL) को निर्देश दिया है कि उनके पास कम से कम एक ऐसा प्लान जरूर होना चाहिए जिसकी वैलिडिटी पूरे 30 दिन हो।
कैलेंडर मंथ प्लान: कंपनियों को एक ऐसा प्लान भी देना होगा जो हर महीने की उसी तारीख को रिन्यू हो (जैसे अगर आपने 5 तारीख को रिचार्ज किया, तो अगला रिचार्ज अगली 5 तारीख को ही होगा)।
सरकार का रुख: केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हाल ही में संसद में स्पष्ट किया कि कंपनियों को इन 30 दिनों वाले प्लान्स को ज्यादा से ज्यादा प्रमोट (प्रचार) करना चाहिए ताकि आम जनता को इसकी जानकारी हो।
फायदा क्या होगा? इससे आपको साल में एक एक्स्ट्रा रिचार्ज के पैसे नहीं देने पड़ेंगे और आपका बजट भी सही रहेगा।
क्या कंपनियां 28 दिन वाले प्लान बंद कर देंगी?
नहीं, सरकार ने 28 दिन वाले प्लान्स को पूरी तरह बंद नहीं किया है, लेकिन कंपनियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि वे 30 दिन वाला विकल्प भी दें। अभी कंपनियां इन प्लान्स को थोड़ा "छुपा कर" रखती हैं, जिसे अब उन्हें प्रमुखता से दिखाना होगा।
प्रो टिप: अगली बार जब आप रिचार्ज करें, तो अपने ऐप (Jio/Airtel/Vi) में 'Monthly' या 'Validity' सेक्शन में जाकर 30 दिन वाले प्लान को ध्यान से चेक करें।
क्या आप जानना चाहेंगे कि आपकी कंपनी (जैसे Jio या Airtel) के पास अभी कौन सा सबसे सस्ता 30 दिन वाला प्लान उपलब्ध है?

25/03/2026

*जयपुर: राजस्थान में आज से बंद हुई फ्री दवा, 50 लाख लाभार्थियों और पेंशनर्स के लिए बड़ा झटका, जानें क्या है वजह*
*25 मार्च बुधवार 2026-27*

*जयपुर:* राजस्थान की महत्वाकांक्षी राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) एक बार फिर संकट में घिर गई है। अस्पतालों और फॉर्मेसी संचालकों ने 25 मार्च से ओपीडी में कैशलेस दवा वितरण अस्थायी रूप से बंद करने का एलान किया है।

बता दें कि इसका सीधा असर करीब 50 लाख लाभार्थियों, पेंशनर्स और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों पर पड़ने की आशंका है। राजस्थान एलायंस ऑफ हॉस्पिटल एसोसिएशंस (राहा) के अनुसार, पिछले आठ से नौ महीनों से अस्पतालों और फॉर्मेसी इकाइयों के करोड़ों रुपए के भुगतान लंबित हैं।ऐसे में हालात यह हैं कि दवा आपूर्तिकर्ताओं ने उधार में आपूर्ति रोकनी शुरू कर दी है, जिससे कैशलेस सुविधा जारी रखना मुश्किल हो गया है।

*सरकार-प्रशासन में समन्वय की कमी उजागर:*

सूत्रों के अनुसार, चिकित्सा और वित्त विभाग के बीच भुगतान को लेकर समन्वय की कमी सामने आई है। अस्पताल संचालकों का कहना है कि अधिकारी स्पष्ट जवाब नहीं दे रहे हैं और योजना को प्राथमिकता में नहीं बताया जा रहा। राहा ने लंबित भुगतान शीघ्र जारी करने और समयबद्ध व्यवस्था लागू करने की मांग की है, ताकि सेवाएं सुचारू रूप से चल सकें।

*अस्पतालों ने दी थी चेतावनी:*

आरजीएचएस योजना से जुड़े अस्पतालों और फॉर्मेसी संगठनों के समूह राजस्थान एलायंस ऑफ हॉस्पिटल एसोसिएशंस (राहा) ने आरोप लगाया था, पिछले 8 से 9 महीनों से उनका भुगतान लंबित है। इसी के चलते उन्होंने चेतावनी दी थी कि 25 मार्च से जयपुर में योजना के तहत चल रही ओपीडी फॉर्मेसी में कैशलेस दवाओं की सुविधा अस्थायी रूप से बंद की जा सकती है।

*इन पर पड़ेगा असर:*

इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन मरीजों पर पड़ेगा, जो नियमित रूप से दवाओं पर निर्भर हैं। खासकर पेंशनर्स जो इस योजना के तहत मुफ्त या कैशलेस दवाओं का लाभ लेते हैं। उन्हें सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दवाओं की सुविधा बंद होने से उन्हें अपनी जेब से खर्च करना पड़ सकता है।

*क्या मजबूरी में उठाया कदम:*

राहा ने साफ किया है कि यह कदम किसी विरोध के रूप में नहीं, बल्कि मजबूरी में उठाया जा रहा है। उनका कहना है कि बार-बार मांग करने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। इससे अस्पतालों और फॉर्मेसी इकाइयों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा था।

*सरकार से की थी ये मांग:*

संस्था ने राज्य सरकार से लंबित भुगतान का जल्द निस्तारण करने और एक समयबद्ध भुगतान प्रणाली लागू करने की मांग की थी । उनका कहना था कि यदि समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए तो योजना को फिर से सुचारू रूप से चलाया जा सकता है और मरीजों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी.

यह खबर राजस्थान के लाखों परिवारों, विशेषकर पेंशनर्स के लिए वाकई चिंताजनक है। RGHS (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) जैसी महत्वपूर्ण योजना का इस तरह भुगतान संकट में फंसना सीधे तौर पर स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करता है।
यहाँ इस पूरे मामले का संक्षिप्त विश्लेषण और मुख्य बिंदु दिए गए हैं:
संकट की मुख्य वजह: आर्थिक और प्रशासनिक बाधाएं
बकाया भुगतान: 'राहा' (RAHA) के अनुसार, पिछले 8 से 9 महीनों से अस्पतालों और फार्मेसी संचालकों का करोड़ों रुपया सरकार के पास अटका हुआ है।
सप्लाई चेन पर असर: भुगतान न मिलने के कारण दवा सप्लायर्स ने फार्मेसियों को उधार पर दवा देना बंद कर दिया है, जिससे स्टॉक खत्म होने की कगार पर है।
विभागीय तालमेल की कमी: चिकित्सा और वित्त विभाग के बीच समन्वय न होने के कारण भुगतान की प्रक्रिया में देरी हो रही है।
प्रभावित होने वाले लाभार्थी

श्रेणी संभावित प्रभाव
पेंशनर्स नियमित और गंभीर बीमारियों की दवाओं के लिए जेब से खर्च करना पड़ेगा।
गंभीर रोगी कैंसर, किडनी और हृदय रोग जैसी बीमारियों की महंगी दवाओं की उपलब्धता में कमी।
राज्य कर्मचारी ओपीडी (OPD) सेवाओं के तहत मिलने वाली कैशलेस सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा।

विशेष नोट: हालांकि यह बंदी "अस्थायी" बताई गई है, लेकिन जब तक सरकार और अस्पताल संघ के बीच ठोस समझौता या भुगतान की गारंटी नहीं दी जाती, तब तक मरीजों को निजी खर्च पर दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
क्या हो सकता है अगला कदम?
आमतौर पर ऐसी स्थितियों में सरकार की ओर से तत्काल "पार्शियल पेमेंट" (आंशिक भुगतान) जारी किया जाता है ताकि व्यवस्था पटरी पर लौट सके। लाभार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे नजदीकी सरकारी सहकारी उपभोक्ता स्टोर (Confed) पर उपलब्धता चेक करें, क्योंकि अक्सर निजी स्टोर बंद होने पर वहां स्टॉक डाइवर्ट किया जा सकता है।

*टेक्सस की वैलेरो रिफाइनरी में जोरदार धमाका, आग लगने के बाद आसमान में छाया काला धुआं*_अमेरिका के टेक्सस स्थित पोर्ट आर्थ...
24/03/2026

*टेक्सस की वैलेरो रिफाइनरी में जोरदार धमाका, आग लगने के बाद आसमान में छाया काला धुआं*

_अमेरिका के टेक्सस स्थित पोर्ट आर्थर में वैलेरो एनर्जी की एक बड़ी रिफाइनरी में सोमवार शाम भीषण विस्फोट हुआ। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास के घर हिल गए और आसमान में काला धुआं छा गया।_

अमेरिका के टेक्सास स्थित पोर्ट आर्थर में वैलेरो एनर्जी की एक बड़ी रिफाइनरी में सोमवार शाम भीषण विस्फोट हुआ। धमाक.....

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को कठोर सैन्य चेतावनी दी है. *ट्रंप ने साफ लहजे में घोषणा क...
22/03/2026

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को कठोर सैन्य चेतावनी दी है.

*ट्रंप ने साफ लहजे में घोषणा की है कि यदि समय सीमा का पालन नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान के विभिन्न पावर प्लांट्स को निशाना बनाएगा.*

यह खबर और इसमें दिया गया '48 घंटे का अल्टीमेटम' काफी गंभीर लग रहा है, लेकिन यहाँ थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है। वर्तमान वैश्विक स्थिति (मार्च 2026) में, डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति हैं, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर इस तरह की विशिष्ट सैन्य समय सीमा की कोई आधिकारिक पुष्टि हालिया विश्वसनीय खबरों में नहीं मिली है।
सोशल मीडिया पर अक्सर इस तरह के भ्रामक संदेश या पुराने बयानों को नए संदर्भ में पेश किया जाता है। फिर भी, अगर हम इस स्थिति का भू-राजनीतिक (Geopolitical) विश्लेषण करें, तो इसके प्रभाव कुछ इस प्रकार हो सकते हैं:
संभावित परिणाम और विश्लेषण
ऊर्जा संकट: होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। अगर यहाँ तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिससे भारत सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
युद्ध की आशंका: पावर प्लांट्स जैसे बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने की चेतावनी सीधे तौर पर पूर्ण युद्ध (Full-scale war) को निमंत्रण दे सकती है।
दबाव की रणनीति: कई बार ऐसे कड़े बयान केवल 'Maximum Pressure' रणनीति का हिस्सा होते हैं ताकि ईरान को बातचीत की मेज पर लाया जा सके।
आपकी राय क्या है?
इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर कूटनीति और स्पष्ट संवाद ही सबसे सुरक्षित रास्ता माना जाता है। इस खबर की सत्यता जांचने के लिए हमेशा आधिकारिक सरकारी बयानों या प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों पर ही भरोसा करना चाहिए।
क्या आप चाहेंगे कि मैं इस विषय पर हालिया विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों की जांच करूँ ताकि आपको सही स्थिति का पता चल सके?

*अब व्हाट्सएप पर नंबर शेयर किए बिना होगी वीडियो-वॉइस कॉल- चैटिंग**WhatsApp पर जल्द ही नया अपडेट रोलआउट होने वाला है,  इस...
22/03/2026

*अब व्हाट्सएप पर नंबर शेयर किए बिना होगी वीडियो-वॉइस कॉल- चैटिंग*

*WhatsApp पर जल्द ही नया अपडेट रोलआउट होने वाला है, इसके लिए फोन नंबर की जगह यूजरनेम और यूनीक ID की जरूरत पड़ेगी*

*व्हाट्सऐप का ये फीचर एक ऑप्शनल प्राइवेसी फीचर के तौर पर यूजर्स को मिलने वाला है।*

*फोलो जरूर करे*
यह व्हाट्सएप उपयोगकर्ताओं के लिए एक शानदार खबर है! उपयोगकर्ता नाम और अद्वितीय आईडी (Unique ID) का उपयोग करके वीडियो/वॉयस कॉल और चैटिंग करने की सुविधा निजता (privacy) को बढ़ाने में काफी मददगार साबित होगी।
यह फीचर उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगा जो अपने फोन नंबर को अजनबियों के साथ साझा करने में संकोच करते हैं। इसके अलावा, यह फीचर उन व्यवसायों के लिए भी उपयोगी हो सकता है जो अपने ग्राहकों के साथ व्हाट्सएप पर संवाद करना चाहते हैं, लेकिन उनके फोन नंबर को साझा नहीं करना चाहते हैं।
यह देखना दिलचस्प होगा कि व्हाट्सएप इस फीचर को कैसे लागू करता है और यह उपयोगकर्ताओं के बीच कितना लोकप्रिय होता है।
क्या आप इस फीचर का उपयोग करने के लिए उत्सुक हैं? WhatsApp जल्द ही यूज़रनेम (Usernames) और यूनीक आईडी (Unique ID) फीचर लाने वाला है।
इस नए फीचर की मुख्य बातें:
* बिना नंबर शेयर किए चैटिंग: अब आप किसी को अपना फोन नंबर दिए बिना भी WhatsApp पर जोड़ सकेंगे और उनसे बात कर सकेंगे। बस आपको अपना यूज़रनेम बताना होगा।
* प्राइवेसी (निजता) में बढ़ोतरी: यह उन लोगों के लिए एक बड़ा कदम है जो अपनी प्राइवेसी को लेकर चिंतित रहते हैं और अजनबियों के साथ अपना नंबर साझा नहीं करना चाहते।
* वैकल्पिक (Optional) फीचर: जैसा कि आपने बताया, यह एक ऑप्शनल प्राइवेसी फीचर होगा। इसका मतलब है कि आप चाहें तो इस फीचर को इस्तेमाल करें, या फिर पुराने तरीके (फोन नंबर) से ही WhatsApp चलाते रहें।
* यूनीक आईडी: हर यूज़र का एक यूनीक यूज़रनेम होगा, जिससे उन्हें आसानी से पहचाना जा सकेगा। यह बिल्कुल Instagram या Telegram के यूज़रनेम जैसा ही काम करेगा।
यह फीचर WhatsApp के बीटा वर्जन पर टेस्ट किया जा रहा है और उम्मीद है कि जल्द ही इसे सभी यूज़र्स के लिए रोलआउट कर दिया जाएगा।
यह वाकई एक गेम-चेंजर फीचर साबित हो सकता है!
क्या आपके पास इस फीचर से जुड़ा कोई और सवाल है?

मथुरा में गौरक्षक चंद्रशेखर बाबा की ट्रक से कुचलकर मौत हो गई। वह फरसा वाले बाबा के नाम से मशहूर थे। बाबा के एक साथी ने द...
21/03/2026

मथुरा में गौरक्षक चंद्रशेखर बाबा की ट्रक से कुचलकर मौत हो गई। वह फरसा वाले बाबा के नाम से मशहूर थे। बाबा के एक साथी ने दावा किया- रविवार तड़के बाबा 2 साथियों के साथ ट्रक का पीछा कर रहे थे। ट्रक में गौवंश था। ट्रक को ओवरटेक कर बाबा ने सामने बाइक खड़ी कर दी। तभी अचानक ड्राइवर ने रफ्तार बढ़ा दी और बाबा को कुचलते हुए फरार हो गया। बाबा की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी इलाके में आग की तरह फैली। देखते ही देखते हजारों की भीड़ दिल्ली-मथुरा हाईवे पर जमा हो गई। आरोपियों के एनकाउंटर की मांग कर हाईवे जाम कर दिया। जाम खुलवाने पहुंची पुलिस को लोगों ने खदेड़ दिया। पथराव भी किया, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी लहूलुहान हो गए। CM योगी ने मामले का संज्ञान लेकर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं

21/03/2026

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