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भोजेश्वर मीडिया संघ परिवार के लिए यह अत्यंत गर्व और आनंद का विषय है कि संघ के संस्थापक आदरणीय श्री कल्याण मल जैन जी को भ...
20/02/2026

भोजेश्वर मीडिया संघ परिवार के लिए यह अत्यंत गर्व और आनंद का विषय है कि संघ के संस्थापक आदरणीय श्री कल्याण मल जैन जी को भारतीय पत्रकार संघ (AIJ) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी प्रदान की गई है। यह उपलब्धि उनकी दीर्घकालीन समर्पित, निर्भीक और मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता का सम्मान है।

इस गौरवपूर्ण अवसर पर भोजेश्वर मीडिया संघ (मध्यप्रदेश) द्वारा गरिमामय सम्मान समारोह आयोजित कर श्री जैन जी का अभिनंदन किया गया तथा उन्हें शुभकामनाएँ प्रेषित की गईं।
यह क्षण केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि पत्रकार जगत के लिए प्रेरणा, गौरव और आत्मविश्वास का प्रतीक है।

में पुनः एक बार उन्हें हृदय से मंगल कामनाएं प्रेषित करता हूं।
पूनम चौकिकर
उपाध्यक्ष
भोजेश्वर मीडिया संघ

दैनिक भास्कर परिवार के वरिष्ठ सदस्य, हमारे प्रिय मित्र एवं भोजेश्वर मीडिया संघ के पूर्व अध्यक्ष स्व. सुनील यादव जी के छो...
20/02/2026

दैनिक भास्कर परिवार के वरिष्ठ सदस्य, हमारे प्रिय मित्र एवं भोजेश्वर मीडिया संघ के पूर्व अध्यक्ष स्व. सुनील यादव जी के छोटे भाई श्री अनिल यादव जी को दैनिक भास्कर की जिम्मेदारी सौंपे जाने पर भोजेश्वर मीडिया संघ ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।

इस अवसर पर माननीय संरक्षक महोदय की अनुशंसा पर श्री अनिल यादव जी को भोजेश्वर मीडिया संघ की सदस्यता प्रदान की गई तथा उन्हें संगठन में वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपकर मनोनीत किया गया।

प्रिय अनिल जी, संगठन की सदस्यता एवं इस महत्वपूर्ण दायित्व हेतु आपको पुनः हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। हम आपके सफल एवं प्रेरणादायी कार्यकाल की कामना करते हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुनाई करवा चौथ की कथा, धर्मपत्नी साधना सिंह ने रखा व्रतभोपाल केंद्रीय कृषि एवं...
10/10/2025

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुनाई करवा चौथ की कथा, धर्मपत्नी साधना सिंह ने रखा व्रत

भोपाल केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल स्थित अपने निवास पर करवा चौथ पर्व को पूरे पारंपरिक विधि-विधान के साथ मनाया। इस अवसर पर श्री चौहान ने पूजन-अर्चन कर करवा चौथ की कथा सुनाई और आरती की।चंद्रोदय होने पर उनकी धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह चौहान ने परंपरा के अनुरूप चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित किया तथा छलनी के माध्यम से चंद्र दर्शन कर अपने पति श्री शिवराज सिंह चौहान के चरणों से आशीर्वाद प्राप्त किया।

परिवार की बहुओं ने भी रखा व्रत

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बड़े बेटे कार्तिकेय चौहान की पत्नी श्रीमती अमानत चौहान और छोटे पुत्र कुणाल चौहान की पत्नी श्रीमती रिद्धि चौहान ने भी इस अवसर पर करवा चौथ का व्रत रखा। पूरे परिवार ने एक साथ बैठकर पूजन किया और पारंपरिक रीति से करवा चौथ पर्व की रस्में निभाईं।
यह पहला अवसर है जब दोनों बेटों के विवाह के बाद पहला करवा चौथ का व्रत परिवार ने एक साथ मनाया ।

संजय उवाच.. जन्मशती  वर्ष पर विशेषः पद्मश्री से अलंकृत एक देसी पत्रकार**पं.श्यामलाल चतुर्वेदीः उन्हें भुलाना है मुश्किल*...
10/10/2025

संजय उवाच..
जन्मशती वर्ष पर विशेषः पद्मश्री से अलंकृत एक देसी पत्रकार*
*पं.श्यामलाल चतुर्वेदीः उन्हें भुलाना है मुश्किल*
*-प्रो.संजय द्विवेदी*
वे होते तो इस साल सौ साल के हो जाते। इस साल उनका शताब्दी वर्ष है। सच में पद्मश्री से अलंकृत पं. श्यामलाल चतुर्वेदी की पावन स्मृति को भूल पाना कठिन है। वे हमारे समय के ऐसे नायक हैं जिसने पत्रकारिता, साहित्य और समाज तीनों क्षेत्रों में अपनी विरल पहचान बनाई। वे छत्तीसगढ़ के ‘असली इंसान’ थे। जिन अर्थों में ‘सबले बढ़िया छत्तीसगढ़िया’ का नारा दिया गया होगा, उसके मायने शायद यही रहे होंगे कि ‘अच्छा मनुष्य’ होना। छत्तीसगढ़ उनकी वाणी,कर्म, देहभाषा से मुखरित होता था। बालसुलभ स्वभाव, सच कहने का साहस और सलीका, अपनी शर्तों पर जिंदगी जीना- यह सारा कुछ एक साथ श्यामलाल जी ने अकेले संभव बनाया।
श्यामलाल जी अपनी जमीन को, माटी को, महतारी को प्यार करने वाले व्यक्ति थे। सत्ता के साथ उनके निरंतर और व्यापक संपर्क थे। वे राजपुरुषों के साथ-साथ आम आदमी से भी समान रूप से संवाद कर सकते थे। वे अक्सर अपने वक्तव्यों में कहते थे- *“आपको मेरी बात बुरी लग जाए तो आप मेरा क्या कर लेगें? वैसै ही मैं भी बुरा मान जाऊं तो आपका क्या कर लूंगा?”* उन्होंने कभी भी इसलिए कोई बात नहीं कि वह राजपुरुषों को अच्छी या बुरी लगे। उन्हें जो कहना था वे कहते थे। दिल से कहते थे। शायद इसीलिए उनकी तमाम बातें लोंगो को प्रभावित करती थीं।
*अप्रतिम वक्ताः*
श्यामलाल जी अप्रतिम वक्ता थे। मां सरस्वती उनकी वाणी पर विराजती थीं। हिंदी और छत्तीसगढ़ी दोनों भाषाओं में वे सहज थे। दिल की बात दिलों तक पहुंचाने का हुनर उनके पास था। वे बोलते तो हम मंत्रमुग्ध होकर उन्हें सुनते। रायपुर, बिलासपुर के अनेक आयोजनों में उनको सुनना हमेशा सुख देता था। अपनी साफगोई, सादगी और सरलता से वे बड़ी से बड़ी बात कह जाते थे। उनकी बहुत कड़ी बात भी कभी किसी को बुरी नहीं लगती थी, क्योंकि उसमें उनका प्रेम और व्यंग्य की धार छुपी रहती थी। उनसे शायद ही कोई नाराज हो सकता था। मैंने उन्हें सुनते हुए पाया कि वे दिल से दिल की बात कहते थे। ऐसा संवाद हमेशा प्रभावित करता है। उनके वक्तव्यों में आलंकारिक शब्दावली के बजाए ‘लोक’ के शब्द होते। साधारण शब्दों से असाधारण संवाद करने की कला उनसे सीखी जा सकती थी। उनकी देहभाषा (बाडी लैंग्वेज) उनके वक्तव्य को प्रभावी बनाती थी। हम यह मानकर चलते थे कि वे कह रहे हैं , तो बात ठीक ही होगी। वे किसी पर नाराज हों, मैंने सुना नहीं। मलाल या गुस्सा करना उन्हें आता नहीं था। हमेशा हंसते हुए अपनी बात कहना और अपना वात्सल्य नई पीढ़ी पर लुटाना उनसे सीखना चाहिए। आज जबकि हमारे बुर्जुग बेहद अकेले और तन्हा जिंदगी जी रहे हैं। भरे-पूरे घरों और समाज में वे अकेले हैं। उन्हें श्यामलाल जी की जिंदगी से सीखना चाहिए। समाज में समरस होकर कैसे एक व्यक्ति अपनी अंतिम सांस तक प्रासंगिक बना रह सकता है, यह उन्होंने हमें सिखाया।
*सक्रिय जीवनः*
वे सक्रिय पत्रकारिता, लेखन कब का छोड़ चुके थे। लेकिन आप रायपुर से बिलासपुर तक उनकी सक्रियता और उपस्थिति को रेखांकित कर सकते थे। निजी आयोजनों से लेकर सार्वजनिक समारोहों तक में वे बिना किसी खास प्रोटोकाल की अपेक्षा के आते थे। अपना प्यार लुटाते, आशीष देते और लौट जाते। उनके परिवार को भी इस बात के लिए धन्यवाद देना चाहिए कि कैसे उनके बड़े सुपुत्र श्री शशिकांत जी ने उनकी हर इच्छा का मान रखा। वे खराब स्वास्थ्य के बाद भी जहां जाना चाहते थे, शशिकांत जी उन्हें लेकर जाते थे। श्यामलाल जी के तीन ही मंत्र थे- संपर्क,संवाद और संबंध। वे संपर्क करते थे, संवाद करते और बाद में उनकी जिंदगी में इन दो मंत्रों से करीब आए लोगों से उनके संबंध बन जाते थे। वे बिना किसी अपेक्षा के रिश्तों को जीते थे। उनका इस तरह एक महापरिवार बन गया था। जिसमें उनकी बेरोक-टोक आवाजाही थी। अपने अंतिम दिनों में वे छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के अध्यक्ष बने। किंतु पूरी जिंदगी उनके पास कोई लाभ का पद नहीं था। ऐसे समय में भी वे लोगों के लिए उतने ही सुलभ और आकर्षण का केंद्र थे। मुझे आश्चर्य होता था कि दिल्ली के शिखर संपादक श्री प्रभाष जोशी, मप्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा,दिग्विजय सिंह हों या बनारस के संगीतज्ञ छन्नूलाल मिश्र अथवा छत्तीसगढ़ के दोनों पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी या डा. रमन सिंह। श्यामलाल जी के जीवन में सब थे। तमाम संपादक, पत्रकार, सांसद, मंत्री, विधायक उन्हें आदर देते थे। समाज से मिलने वाला इतना आदर भी उनमें लेशमात्र भी अहंकार की वृद्धि नहीं कर पाता था।
*छत्तीसगढ़ी अस्मिता के प्रतीकः*
छत्तीसगढ़ देश का अकेला प्रदेश है, जिसकी समृद्ध भाव संपदा और लोकसंपदा है। उसके लिए ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ शब्द का उपयोग भी होता है। अपनी जमीन, भूमि के लिए ‘मां’ शब्द उदात्त भावनाओं से ही उपजता है। भारत मां के बाद किसी राज्य के लिए संभवतः ऐसा शब्द प्रयोग छत्तीसगढ़ में ही होता है। वैसे भी यह मां महामाया रतनपुर,मां बमलेश्वरी,मां दंतेश्वरी की धरती है, जहां लोकजीवन में ही मातृशक्ति के प्रति अपार आदर है। छत्तीसगढ़ महतारी भी लोकजीवन की ऐसी ही मान्यताओं से संयुक्त है। अपनी माटी से मां की तरह प्यार करना और उसका सम्मान करना यही भाव इससे शब्द से जुड़े हैं। श्यामलाल जी का परिवेश भी लोकजीवन से शक्ति पाता है। इसलिए शहर आकर भी वे अपने गांव को नहीं भूलते, अपने लोकजीवन को नहीं भूलते। उसकी भाषा और भाव को नहीं भूलते। वे शहर में बसे लोकचिंतक थे, लोकसाधक थे। यह अकारण नहीं था वे प्रो. पी.डी खेड़ा जैसे नायकों के अभिन्न मित्र थे, क्योंकि दोनों के सपने एक थे- एक सुखी, समृद्ध छत्तीसगढ़। आज जबकि प्रो. खेड़ा और श्यामलाल जी दोनों हमारे बीच नहीं हैं, पर वे हम पर कठिन उत्तराधिकार छोड़कर गए हैं। श्यामलाल जी अपने लोगों को न्याय दिलाना चाहते थे,वे चाहते थे कि छत्तीसगढ़ का सर्वांगीण विकास हो, यहां के लोकजीवन को उजाड़े बगैर इसकी प्रगति हो। इसलिए वे सत्ता का ध्यानाकर्षण अपने लेखन और वक्तव्यों के माध्यम से करते रहे। सही मायने में वे छत्तीसगढ़ी अस्मिता के प्रतीक और लोकजीवन में रचे-बसे नायक थे। उनका शब्द-शब्द इसी माटी से उपजा और इसी को समर्पित रहा।
जिस समाज की स्मृतियां जितनी सघन होतीं हैं, वह उतना ही चैतन्य समाज होता है। हम हमारे नायकों को समय के साथ भूलते जाते हैं। छत्तीसगढ़ की जमीन पर भी अनेक ऐसे नायक हैं जिन्हें याद किया जाना चाहिए। मुझे लगता है कि श्यामलाल जी जैसे नायकों की याद ही हमारे समाज को जीवंत, प्राणवान, संवेदनशील और मानवीय बनाने की प्रक्रिया को और तेज करेगी। उनके शताब्दी वर्ष पर छत्तीसगढ़ के मित्र उन्हें याद करेगें तो उनकी स्मृति हमें और समृद्ध करेगी।
*( लेखक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में जनसंचार विभाग के अध्यक्ष हैं।)*

नहीं रहे देश के 'रतन'..."भारतीय उद्योग जगत के प्रमुख स्तंभ और एक महान परोपकारी, 'श्रद्धेय रतन टाटा जी' के निधन से हम सब ...
10/10/2024

नहीं रहे देश के 'रतन'...

"भारतीय उद्योग जगत के प्रमुख स्तंभ और एक महान परोपकारी, 'श्रद्धेय रतन टाटा जी' के निधन से हम सब स्तब्ध हैं। उनकी नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति उनके योगदान ने हमें हमेशा प्रेरित किया है। उनकी उदारता और समाज सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता हमें हमेशा याद रहेगी। हम उनके परिवार, मित्रों और अनगिनत प्रशंसकों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं।"

भारत के लिए उनके अद्वितीय योगदान हेतु वह सदैव अविस्मरणीय रहेंगे।

विनम्र श्रद्धांजलि 🙏🏻

स्वच्छता एक सेवा है आज नगर पालिका परिषद मंडीदीप द्वारा सामुदायिक भवन में पॉलिथीन उपयोग पर प्रतिबंध हेतु  पेपर बेग स्व सह...
30/09/2024

स्वच्छता एक सेवा है

आज नगर पालिका परिषद मंडीदीप द्वारा सामुदायिक भवन में पॉलिथीन उपयोग पर प्रतिबंध हेतु पेपर बेग
स्व सहायता समूह प्रशिक्षण कार्यशाला के कार्यक्रम में सम्मिलित हुआ

ये समर्थन महिलाओं की ताकत और एकता का प्रतीक है। ये मजबूत कदम न्याय, समानता, और विकास की दिशा में सामूहिक संकल्प को दर्शाते हैं। जब महिलाएं एकजुट होती हैं, तो बदलाव अवश्य होता है। मिलकर, हम अपने क्षेत्र को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाएंगे।

आज  "  R hair & Beauty Acedemy " द्वारा एक अनोखा आयोजन  "महादेवी महोत्सव" आयोजित किया गया जिसमें महाआरती के साथ ,भिन्न भ...
30/09/2024

आज " R hair & Beauty Acedemy " द्वारा एक अनोखा आयोजन "महादेवी महोत्सव" आयोजित किया गया
जिसमें महाआरती के साथ ,भिन्न भिन जगह से आई हुई ब्यूटीशियन ने ,देवी के सभी रूपों को अपने अपने तरीके से प्रस्तुत किया ,जिसका आकर्षण था नारी के कोमल सुंदर रूप के साथ साथ ,आज का सबसे चर्चित पहलू नारी शक्ति को प्रदर्शित किया।
इसमें हिस्सा लिया -----------
प्रोग्राम की शुरुआत देवी की पूजा अर्चना के साथ साथ ,शास्त्रों की पूजा की भी पूजा की गई , तादुपरांत दीप प्रज्वलित कर प्रोग्राम को आगे बढ़ाया गया।
सिनेमा इंडस्ट्री के विख्यात मेकअप आर्टिस्ट श्री ललित जी ने देवी लुक कर , सभी को फैंटेसी मेकअप करने के तरीके सिखाए & टिप्स दिएइस कार्यक्रम में महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में ब्यूटी संगठन की अध्यक्ष श्रीमती सरिता श्रीवास्तव जी जिनका बहुत ही महत्वपूर्ण सहयोग एवं गुलफाम खान कास्टिंग डायरेक्टर एवं फाउंडर मेंबर की टीम एवं ग्रुप मेंबर की टीम सम्मिलित रही इसमें सभी मैंने मां काली का रूप मां लक्ष्मी का रूप कात्यान देवी कोल्हापुर की अंबा माई महालक्ष्मी का रूप तिरुपति बालाजी महिषासुर महालक्ष्मी मां दुर्गा शिव शंकर भोलेनाथ को आकृति किया राजेश सोनी पधारे हुए सभी अतिथि गण का धन्यवाद करते हैं

18/08/2023

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