26/04/2026
जिस खतरे की ओर मैं और मेरे जैसे कुछ लोग, जिन्हें अक्सर बेवकूफ समझ लिया जाता है, लगातार इशारा कर रहे थे—यह नहीं लगा था कि वह इतना जल्दी सामने आ जाएगा…
जंगलों को बेरहमी से काट दिया गया… पहाड़ों को खोखला कर दिया गया… अब तो मैंग्रोव के जंगल भी सुरक्षित नहीं रहे…
यह विकास नहीं है, बल्कि पूंजीपतियों की असीम लालच को पूरा करने की दौड़ है… इसी लालच में हिमालय तक को नहीं छोड़ा गया—और इसके परिणाम सामने आना तय था…
आने वाले 40-50 वर्षों में हिमालय के ग्लेशियर तेजी से खत्म हो सकते हैं, नदियां सूखने लगेंगी…
बंजर जमीन बढ़ेगी…
अनाज का उत्पादन पहले ही गिरावट की ओर बढ़ चुका है…
खेती की जमीन पर लगातार हाईवे, टाउनशिप और कंक्रीट के जंगल खड़े किए जा रहे हैं…
आज जिनकी उम्र 35-40 साल है, वे अपने जीवन के अंत तक इस भयावह बदलाव को देखेंगे…
लेकिन जो आज 15-20 साल के हैं, उन्हें इसका सबसे गंभीर और कष्टदायक असर झेलना पड़ेगा…
यह प्रकृति है… किसी का हिसाब बाकी नहीं छोड़ती…
आपका भी नहीं छोड़ेगी…
— Nitai Das Sapkota ✍🏻