Rajbhar Chaupal

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भर / राजभर जनजाति का वास्तविक इतिहास
पश्चिम अवध से पूर्व बिहार तक का गौरवशाली अतीत
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11/06/2026

आज पटना स्थित विद्यापति भवन में महाराजा सुहेलदेव राजभर जी के विजय दिवस समारोह में सम्मिलित होकर उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया।

महाराजा सुहेलदेव राजभर जी भारतीय इतिहास के अद्वितीय वीर योद्धा, राष्ट्ररक्षक एवं सामाजिक समरसता के प्रतीक थे। उनका शौर्य, पराक्रम और मातृभूमि की रक्षा के लिए किया गया संघर्ष हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।

वीर शिरोमणि, राष्ट्रनायक महाराजा सुहेलदेव राजभर जी को कोटिशः नमन एवं श्रद्धापूर्ण वंदन आज पटना स्थित विद्यापति भवन में महाराजा सुहेलदेव जी के विजय दिवस समारोह में सम्मिलित होकर उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया।

महाराजा सुहेलदेव जी भारतीय इतिहास के अद्वितीय वीर योद्धा, राष्ट्ररक्षक एवं सामाजिक समरसता के प्रतीक थे। उनका शौर्य, पराक्रम और मातृभूमि की रक्षा के लिए किया गया संघर्ष हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।

वीर शिरोमणि, राष्ट्रनायक महाराजा सुहेलदेव जी को कोटिशः नमन एवं श्रद्धापूर्ण वंदन🙏

महाराजा सुहेलदेव राजभर विजय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
10/06/2026

महाराजा सुहेलदेव राजभर विजय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

Rajbhar Chaupal Suheldev Rajbhar ji
08/06/2026

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महाराजा सुहेलदेव राजभर
07/06/2026

महाराजा सुहेलदेव राजभर

ऐतिहासिक रानीताल को तारणहार का इंतजारचौदहवीं शताब्दी के ऐतिहासिक रानीताल को आज भी तारणहार का इंतजार है। रानीताल के साथ ह...
01/06/2026

ऐतिहासिक रानीताल को तारणहार का इंतजार

चौदहवीं शताब्दी के ऐतिहासिक रानीताल को आज भी तारणहार का इंतजार है। रानीताल के साथ ही देवी मंदिर एवं सतीचौरा भी उपेक्षा का शिकार हैं। पिछले चार दशकों से इसे पर्यटन केंद्र घोषित करने की मांग की जा रही है, किंतु अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका है। स्थिति यह है कि चारों ओर फैली गंदगी के कारण यहां ठहरना भी कठिन हो गया है।

नगर पंचायत के पूर्व स्थित इस तालाब को चौदहवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में भर राजा छत्रसाल की पत्नी ने खुदवाया था। पूजा-अर्चना के लिए पूर्व दिशा में देवी मंदिर की स्थापना कराई गई थी। नाग पंचमी के अवसर पर यहां विशाल यज्ञ का आयोजन होता था, जो बाद में मेले का रूप ले लेता था। दूर-दराज से भर समुदाय के लोग इसमें सम्मिलित होते थे। देवी मंदिर तथा सतीचौरा का जीर्णोद्धार नगर के छेदीलाल निषाद द्वारा कराया गया था।

इसका उद्घाटन 12 दिसंबर 1993 को क्षेत्रीय सांसद लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने किया था। रानीताल के उत्तर में ईंटों का एक टीला था, जिसे सतीचौरा के नाम से जाना जाता था।

वर्तमान में रानीताल के पूर्व एवं दक्षिण दिशा में बना खड़ंजा पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। देवी मंदिर तथा रानीताल जाने वाला मार्ग अतिक्रमण का शिकार है। वर्ष 1993 में तत्कालीन तहसीलदार ने कानूनगो एवं लेखपाल के साथ नापी कराकर इस मार्ग को आवागमन के लिए खुलवाया था।

बलिदान का गवाह है इतिहास

मान्यता है कि वर्ष 1304 ईस्वी में ईरान के सैय्यद अबू तालिब के वंशज सैय्यद जिक्रिया एवं भर राजा छत्रसाल के मध्य हुए युद्ध में उनके पुत्र त्रिलोकीनाथ वीरगति को प्राप्त हुए थे। त्रिलोकीनाथ की पत्नी अपने पति के साथ चिता में सती हो गई थीं। बाद में यही स्थान सतीचौरा के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

आज भी महिलाएं नाग पंचमी, विवाह, मुंडन तथा अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां पूजा-अर्चना करती हैं। दिसंबर 1978 में प्रदेश सरकार के मंत्री बाबूलाल वर्मा ने केंद्रीय पर्यटन मंत्री से मिलकर ऐतिहासिक रानीताल को पर्यटन केंद्र घोषित करने की मांग की थी, लेकिन उसका भी कोई परिणाम नहीं निकला।

योजना बनी, पर अमल नहीं हो सका

वर्ष 1984 में नगर पंचायत ने रानीताल, देवी मंदिर, सतीचौरा आदि ऐतिहासिक स्थलों के पुनरुद्धार के लिए चार लाख रुपये का बजट बनाकर शासन को भेजा था। तत्कालीन जिलाधिकारी पंकज कुमार ने स्थलीय निरीक्षण कर इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की संस्तुति भी की थी, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद योजना ठंडे बस्ते में चली गई।

छत्रसाल स्मारक समिति ने भी केंद्रीय एवं प्रदेशीय पर्यटन मंत्रियों को पत्र भेजकर इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण एवं विकास की मांग की है।

समय के साथ दबंगों द्वारा भूमि पर कब्जा कर लिया गया। देवी मंदिर का फाटक भी चोर तोड़कर उठा ले गए। वर्तमान में सतीचौरा झाड़ियों से घिरा हुआ है और ऐतिहासिक धरोहर होने के बावजूद उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।

31/05/2026

हर जाति में अपना बाप ढूंढने वाले कुछ चरवाहे सरीफ बन रहे हैं।

पृथ्वीराज चौहान भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध शासकों में गिने जाते हैं। उन्हें चौहान राजवंश का राजा माना जाता ...
17/05/2026

पृथ्वीराज चौहान भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध शासकों में गिने जाते हैं। उन्हें चौहान राजवंश का राजा माना जाता है। इतिहास को समझते समय भावनाओं के बजाय प्रमाण और शोध पर आधारित जानकारी को प्राथमिकता देना आवश्यक है। यही दृष्टिकोण समाज में सही ऐतिहासिक समझ विकसित करने में मदद करता है।

ऐसे इतिहास चोरों पर कौन विश्वास करेगा जिनका साथ हराखोर विधायक सांसद अपने वोट बैंक के लिए कर रहे हैं।

17/05/2026

चरवाहे हर जाति में बाप ढ़ूढ रहें है सोशल मीडिया पर आ कर बाप बोलने से कोई बाप बन जाता है कि सबूत भी दोगे।

🚨 लापता महिला की तलाश 🚨नाम: सावित्रीगांव: कुंभ भीरा, आजमगढ़पहचान: चश्मा लगाती हैं, मांग में सिंदूरयदि किसी भाई-बहन को इन...
15/05/2026

🚨 लापता महिला की तलाश 🚨
नाम: सावित्री
गांव: कुंभ भीरा, आजमगढ़
पहचान: चश्मा लगाती हैं, मांग में सिंदूर
यदि किसी भाई-बहन को इनके बारे में कोई भी जानकारी मिले तो कृपया तुरंत इस नंबर पर संपर्क करें:
📞 8097219579
🙏 सभी दोस्तों से निवेदन है कि इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और अपने Facebook/WhatsApp स्टेटस पर लगाएं ताकि ये जानकारी अधिक लोगों तक पहुंच सके और महिला सुरक्षित अपने परिवार तक वापस पहुंच सके।

आज अरविंद राजभर की सोमेन वर्मा से शिष्टाचार मुलाकात हुई। इस अवसर पर अरविंद राजभर जी द्वारा चक्रवर्ती सम्राट राष्ट्रवीर म...
09/05/2026

आज अरविंद राजभर की सोमेन वर्मा से शिष्टाचार मुलाकात हुई। इस अवसर पर अरविंद राजभर जी द्वारा चक्रवर्ती सम्राट राष्ट्रवीर महाराजा महाराजा सुहेलदेव राजभर के इतिहास, राजभर समाज एवं भारतवर्ष से संबंधित पुस्तकें भेंट की गईं।
मुलाकात के दौरान सामाजिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर सकारात्मक एवं सार्थक चर्चा हुई।
इस अवसर पर श्री संजय तिवारी भी उपस्थित रहे।

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