06/10/2025
*"दस रुपये के बदले,13 लाख"*😳🤫👇
*😳सेठ ने अभी दुकान खोली ही,थी, कि :- एक औरत आई और बोली: "सेठ जी ये अपने दस रुपये लो"..।🙏*
*😳सेठ उस गरीब औरत को प्रश्नवाचक नजरों से देखने लगा,जैसे पूछ रहा हो ? कि : मैंने तुम्हे दस रुपये कब दिये?😳*
*औरत बोली : कल शाम को मैं सामान ले गई थी l तब मैंने आपको सौ रुपये दिये थे। 70 रुपये का सामान खरीदा था। आपने 30 रुपये की जगह मुझे 40 रुपये वापस दे दिये। "सेठ ने दस रुपये को माथे से लगाया, फिर गल्ले मे डालते हुए बोला : एक बात बताइये बहन जी ; आप सामान खरीदते समय कितने मोल भाव कर रही थीं। पांच रुपये कम करवाने के लिए आपने कितनी बहस की थी, और अब ये दस रुपये लौटाने चली आई?
औरत बोली : "पैसे कम करवाना मेरा हक है"।
मगर एक बार मोल भाव होने के बाद,
"उस चीज के कम पैसा देना पाप है"।*😳🤫
*सेठ बोला : लेकिन आपने कम पैसे कहाँ दिये? आपने पूरे पैसे दिये थे,
ये दस रुपया तो मेरी गलती से, आपके पास चला गया। रख लेती तो मुझे कोई फर्क नही पड़ने वाला था।
औरत बोली : आपको कोई फर्क नही पड़ता ! मगर मेरे मन पर हमेशा ये बोझ रहता, कि मैंने जानते हुए भी आपके पैसे खाये।
-इसलिए मैं रात को ही आपके पैसे वापस देने आई थी l मगर उस समय आपकी दुकान बन्द थी।
सेठ ने महिला को आश्चर्य से देखते हुए पूछा : "आप कहाँ रहती हो" ?
वह बोली ; "सेक्टर आठ में रहती हूँ"।
सेठ का मुँह खुला ही रह गया ...?🤔
बोला : "आप 7 किलोमीटर दूर से ये दस रुपये देने दूसरी बार आई हो"?😳🤔
औरत सहज भाव से बोली : "हाँ दूसरी बार आई हूँ"। मन का सुकून चाहिए, तो "ऐसा करना ही पड़ता है"। -मेरे पति इस दुनिया मे नहीं हैं l
मगर उन्होंने मुझे एक ही बात सिखाई है l
कि: "दूसरे के हक का एक पैसा भी कभी मत खाना"। 🤫क्योंकि : "इंसान चुप रह सकता है...? मगर "ऊपर वाला कभी भी हिसाब मांग सकता है ?🤫
और "उस हिसाब की सजा मेरे बच्चों को भी मिल सकती है...."।🤫
इतना कह कर वह औरत चली गई।*🤫😳
*😳सेठ ने तुरंत गल्ले से तीन सौ रुपये निकाले, और स्कूटी पर बैठता हुआ, अपने नौकर से बोला, : तुम दुकान का ख्याल रखना, मैं अभी आता हूँ। सेठ बाजार में ही एक दुकान पर पहुंचा।
उस दुकान वाले को तीन सौ रुपये देते हुए बोला : ये अपने तीन सौ रुपये लीजिए प्रकाश जी। कल जब आप सामान लेने आये थे,तब हिसाब मे ज्यादा जुड़ गए थे। 😳
प्रकाश हँसते हुए बोला :- "पैसे हिसाब मे ज्यादा जुड़ गए थे, तो आप तब दे देते, जब मै दुबारा आपकी दुकान पर आता"...। इतनी सुबह सुबह आप तीन सौ रुपये देने चले आये।*😳🤔
*सेठ बोला, : "जब आप दुबारा आते ? तब तक मै मर जाता तो"..?? आपके मुझ पर तीन सौ रुपये निकलते हैं, ये आपको तो पता ही नहीं था ना..? इसलिए देना जरूरी था। पता नहीं ...? "ऊपर वाला कब हिसाब मांगने लग जाए"...? 😳🤔
और... "उस हिसाब की सजा मेरे बच्चों को भी मिल सकती है"...।*😳🤫
*😳सेठ तो चला गया..?
मगर प्रकाश के दिल में खलबली मच गई। क्योंकि "दस साल पहले उसने अपने एक करीबी दोस्त से तेरह लाख रुपये उधार लिए थे"।
"मगर पैसे देने के, दूसरे ही दिन दोस्त मर गया था"।*😳🤫🤔
*दोस्त के घर वालों को, पैसों के बारे में पता नहीं था। इसलिए किसी ने उससे पैसे वापस नहीं मांगे थे। प्रकाश के दिल में लालच आ गया था। इसलिए खुद पहल करके उनके पैसे देने वहां नहीं गया।
आज दोस्त का परिवार बहुत गरीबी में जी रहा था। दोस्त की पत्नी, लोगों के घरों मे झाड़ू पौंछा करके, बच्चों को पाल रही थी।
फिर भी प्रकाश उनके पैसे हजम किये बैठा था।
सेठ का ये वाक्य "पता नही ...? कब ऊपर वाला हिसाब मांगने बैठ जाए"...? और ...."उस हिसाब की सजा मेरे बच्चों को भी मिल सकती है"....l
"प्रकाश को बह डरा रहा था"...।*😳🤫
*😳प्रकाश दो तीन दिन तक बहुत टेंशन में रहा। आखिर मे उसका जमीर जाग गया।
उसने बैंक से तेरह लाख रुपये निकाले, और पैसे लेकर दोस्त के घर पहुँच गया। दोस्त की पत्नी घर पर ही थी। वह अपने बच्चो के पास बैठी बतिया रही थी, कि प्रकाश जाकर उसके पैरों मे गिर गया।
एक एक रुपये के लिए संघर्ष कर रही उस "विधवा औरत" के लिए 13 लाख रुपये बहुत बड़ी रकम थी। पैसे देखकर उसकी आँखों मे आँसू आ गए।
वह प्रकाश को "दुआएं" देने लगी,जो उसने ईमानदारी दिखाते हुए पैसे लौटा दिये।*
*😳🤫"ये वही औरत थी"....,"जो सेठ को दस रुपये लौटाने दो बार गई थी"...।*😳🤫
*💥 अपनी "मेहनत" और "ईमानदारी" का खाने वालो की ईश्वर "परीक्षा"जरूर लेता है l मगर कभी भी उन्हें अकेला नही छोड़ता। एक दिन जरूर सुनता है। "ऊपर वाले पर अटूट भरोसा रखिये"।*
जय सियाराम 🙏