14/01/2026
रात ने रेशमा को चुपचाप चुना है,
चाँद ने अपना सा कोई ख़्वाब बुना है।
तेरी नज़र की तहज़ीब में ऐसा असर,
दिल ने शोर छोड़ कर सुकून चुना है।
तेरी मौजूदगी से ही मुकम्मल हूँ मैं,
वरना ये जिस्म तो बस एक फ़साना है।
तेरे लहजे की नरमी के सदके,
इश्क़ ने खुद को अदब सिखाया है।
आसिफ अब और क्या चाहे ज़िंदगी से,
रेशमा—तू ही वजह, तू ही बहाना है।