KapilPriyadarshi

KapilPriyadarshi I am more comfortable reading books and presenting to people some of the passages written in books

*पूज्य भंते महास्थविर संघरक्षितजी मूल इंग्लैण्ड निवासी हैं।* डेनिस लिंगवुड नाम था। *बचपन में जब बीमार थे तब बौद्ध ग्रंथो...
26/08/2026

*पूज्य भंते महास्थविर संघरक्षितजी मूल इंग्लैण्ड निवासी हैं।* डेनिस लिंगवुड नाम था। *बचपन में जब बीमार थे तब बौद्ध ग्रंथों के माध्यम से धम्म सान्निध्य में आए।* दूसरे महायुद्ध के काल में जबर्दस्ती से सेना में भर्ती करने के बाद वे भारत आए। *भारत भूमि पर पैर रखते ही उनके कदम धम्म की खोज करने में लगे।* लेकिन उन्हें निराश होना पड़ा। तब उन्होंने अपन तबादला सिलोन करवा लिया। महायुद्ध समाप्त होने के बाद भंतेजी ने भारत में ही रहने का निश्चय किया। *जुलाई 1950 में उन्होंने पूज्य भंते ऊ चन्द्रमणि जी के हाथों दीक्षा ली।* तत्पश्चात उन्होंने अपना समय धम्मप्रचार और अध्यय में बिताया। उनका 'सर्वे ऑफ बुद्धिज्म' ग्रंथ संसार भर में जाना-माना है। भारत में धम्मकार्य करते समय भंते संघरक्षित जी और पूज्य बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी से इनकी तीन बार भेंट और बहस हुई। *बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर भंते जी को एक आदर्श भिक्खु मानते थे।* सन 1964 को भंते जी इंग्लैण्ड गए, वहां उन्होंने त्रैलोक्य बौद्ध महासंघ सहाय्यक गण (जिसे पश्चिमात्य राष्ट्रों में फ्रेंड्स ऑफ दि वेस्टर्न बुद्धिस्ट आर्डर के नाम से जाना जाता है।) की स्थापना की। महासंघ के सदस्य बुद्ध, धम्म और संघ को अपना अंतिम आदर्श मानकर अपना धम्मजीवन बिताते हैं। उन्होंने Friends of the Western Buddhist Order की 1967 में और Western Buddhist Order की सन 1968 में स्थापना की, *जिसे भारत में 'त्रैलोक्य बौद्ध महासंघ सहायकगण' और 'त्रैलोक्य बौद्ध महासंघ' कहा जाता है।* पूर्व और पश्चिम, परम्परावादी जगत और आधुनिक जगत, तत्व और आचरण के बीच धम्म तत्वों के अनुवाद का काम संघरक्षित जी ने किया है। उनकी धम्म की गहरी अनुभूति और सुस्पष्ट चिंतन को सम्पूर्ण विश्व में सराहा जाता है। उन्होंने हमेशा ही आध्यात्मिक जीवन में प्रतिबद्धता या शरण गमन, कल्याणमित्रता के अद्वितीय मूल्य को आवासीय आध्यात्मिक कुल, धर्म और कला के संबंध को दृढ़तापूर्वक प्रतिपादित किया है। *त्रैलोक बौद्ध सहायकगण महासंघ अब एक विश्व बौद्ध आंदोलन है और विश्व के 45 देशों से भी अधिक देशों में इसके केन्द्र हैं।* पिछले कुछ वर्षों से संघरक्षित जी ने अपनी सारी जिम्मेदारियां अपने ज्येष्ठ शिष्यों को सौंप दी हैं। अब इंग्लैण्ड में वरमिंघम के मध्य इलाके के निवास में वे अपने लेखन और व्यक्तिगत तौर पर लोगों से मिलने में अपना ध्यान केंद्रित किए रहते हैं।

भंते संघरक्षित द्वारा रचित अंग्रेजी
साहित्य-
1. A
Survey of Buddhism,

2. The Three Jewels, 3. Flame in Darkness, 4. Crossing the Stream, 5. The Essence of Zen, 6. The Thousand-Petalled Lotus, 7. Human Enlightement, 8. The Ten Pillars of Buddhism, 9. The Eternal Legacy, 10. Travel Letters, 11. Alternative Traditions, 12. Ambedkar and Buddhism, 13. The History of My Going for Refuge, 14. The Taste of Freedom, 15. New Currents in Western Buddhism, 17. A Guide to the Buddhist Path, 18. Learning to Walk, 19. Vision and Transformation, 20. The Buddha's Victory, 21. Facing Mount Kanchenjunga, 22. The Drama of Cosmic Enlightenment, 23. Wisdom Beyound Words, 24. The Priceless Jewel, 25. Who is the Buddha?, 26. In the Realm of the Lotus, 27. Peace is a Fire, 28. The Inconceivable Emancipation, 29. Complet Poems 1941-1994, 30. Tranforming Self and World, 31. The FWBO and 'Protestant Buddhism', 32. The Meaning of Orthodoxy in Buddhism, 33. Mind Reactive and Creative, 34. Going for Refuge, 35. My Relation to the Order, 36. Buddhism and the West, 37. Forty-Three Years Ago, 38. The Meaning of conversion in Buddhism, 39. Was the Buddha a Bhikkhu? 40. Ritual and Devotion in Buddhism, 41. Buddhism today & tomorrow.

टाइपिंग : *धम्ममित्र कपिल प्रियदर्शी*
26/08/2026
#वायरल #स्वतंत्रता #समानता #बंधुता #त्रिरत्न #बुद्ध #धम्म #संध

🪷 5. *लज्जा और संकोच से लोक का पालन*🪷 ऐसा मैंने सुना, भगवान ने यह कहा- भिक्खुओ! दो परिशुद्ध बातें लोक का पालन करती हैं। ...
25/08/2026

🪷 5. *लज्जा और संकोच से लोक का पालन*🪷

ऐसा मैंने सुना, भगवान ने यह कहा- भिक्खुओ! दो परिशुद्ध बातें लोक का पालन करती हैं। कौन-सी दो? *लज्जा और संकोच* । भिक्खुओ! *यदि वे दोनों परिशुद्ध बातें लोक का पालन न करें,* तो यहां माता, मौसी, मामी, गुरुआईन या बड़ों की स्त्री का भेद न जान पड़े, लोक में उसी प्रकार मर्यादा न रहे, जैसे कि बकरी-भेड़, मुर्गी-सूअर, कुत्ते-गीदड़। चूंकि भिक्खुओ! ये दो परिशुद्ध बातें लोक का पालन करती हैं, इसलिए माता, मौसी, मामी, गुरुआईन या बड़ों की स्त्री का भेद जान पड़ता है।

*"जिनमें लज्जा और संकोच बिल्कुल नहीं हैं, वे परिशुद्ध बातों से रहित व्यक्ति जन्म और मृत्यु में पड़े रहते हैं, किंतु जिनमें लज्जा और संकोच भली-भांति बने हुए हैं, जो ब्रह्मचर्य का भली प्रकार पालन करने वाले हैं, शांत व्यक्ति फिर जन्म नहीं लेते।"*

यह बात भी भगवान ने कही। ऐसा मैंने सुना।

रचना : *इतिवृत्तक*
अनुवादक : *भिक्खु धर्मरक्षित*
पृष्ठ : 40

टाइपिंग : *धम्ममित्र कपिल प्रियदर्शी*
25/08/2026
#त्रिपिटक #त्रिरत्न #बुद्ध #धम्म #संध #इतिहास #વાઈરલ #દિક્ષાધામ #ત્રિરત્ન #બહુજન #બુદ્ધ #ધમ્મ #સંઘ #ઇતિહાસ #બાબાસાહેબ #સ્વતંત્રતા #સમાનતા #બંધુતા

*🪷 4. बुद्ध की स्पृहा🪷*ऐसा मैंने सुना, भगवान ने यह कहा- भिक्खुओ ! *वे प्राणी बिल्कुल ही वंचित हैं, जो कि आर्य प्रज्ञा से...
24/08/2026

*🪷 4. बुद्ध की स्पृहा🪷*

ऐसा मैंने सुना, भगवान ने यह कहा- भिक्खुओ ! *वे प्राणी बिल्कुल ही वंचित हैं, जो कि आर्य प्रज्ञा से वंचित हैं। वे इसी जन्म में दुख, पीड़ा, परेशानी और संताप के साथ विहरते हैं तथा शरीर छूटने पर उनके लिए दुर्गति जाननी चाहिए।* भिक्खुओ! वे प्राणी वंचित नहीं हैं, जो कि आर्य प्रज्ञा से वंचित नहीं हैं। *वे इसी जन्म में बिना दुख, पीड़ा, परेशानी और संताप के विहरते हैं तथा शरीर छूटने पर उनके लिए सुगति जाननी चाहिए ।...*

*"देवताओं सहित सारे लोक को देखो, प्रज्ञा से वंचित, नाम और रूप में आसक्त हो 'यही सत्य है' समझता है। जो यह राग आदि को नष्ट करने वाली प्रज्ञा है, वही श्रेष्ठ है, जो कि बार-बार जन्म लेने के खात्मे (= समाप्ति) को भली प्रकार जानती है।*

देवता और मनुष्य उन स्मृतिमान और *प्रज्ञावान बुद्धों की स्पृहा करते हैं, जो कि अंतिम शरीर धारण करने वाले हैं।"*

यह बात भी भगवान ने कही। ऐसा मैंने सुना।

रचना : *इतिवृत्तक*
अनुवादक : *भिक्खु धर्मरक्षित*
पृष्ठ : 40

टाइपिंग : *धम्ममित्र कपिल प्रियदर्शी*
24/08/2026

#त्रिपिटक #त्रिरत्न #बुद्ध #धम्म #संध #इतिहास #बाबासाहेब #वायरल #स्वतंत्रता #समानता #बंधुता

*2. दो प्रकार के उपदेश*🪷 ☸️ ऐसा मैंने सुना, भगवान ने यह कहा- भिक्खुओ ! पर्याय से *तथागत अर्हत सम्यकसंबुद्ध के उपदेश दो प...
23/08/2026

*2. दो प्रकार के उपदेश*🪷 ☸️

ऐसा मैंने सुना, भगवान ने यह कहा- भिक्खुओ ! पर्याय से *तथागत अर्हत सम्यकसंबुद्ध के उपदेश दो प्रकार के होते हैं।* कौन-से दो? 'पाप को बुराई के तौर से देखो' यह पहले प्रकार का उपदेश है। 'पाप को बुराई के तौर से देख कर उससे निर्वेद करो, विरक्त होओ, विमुक्त होओ' यह दूसरे प्रकार का उपदेश है। भिक्खुओ ! पर्याय से तथागत अर्हत सम्यकसंबुद्ध के उपदेश दो प्रकार के होते हैं।...

🍃 *"सब प्राणियों पर अनुकंपा करने वाले तथागत बुद्ध के उपदेश पर्याय से दो प्रकार के कहे गए हैं। एक बुराई को देखो और दूसरा उससे विरक्त चित्त होकर दुख का अंत करोगे।"*

यह बात भी भगवान ने कही। ऐसा मैंने सुना।

*3. अच्छे-बुरे के अगुआ*🪷 ☸️

ऐसा मैंने सुना, भगवान ने यह कहा- भिक्खुओ! बुरे कामों को करने के लिए अविद्या अगुआ है, जिसके अनुगामी निर्लज्जता और असंकोच हैं। भिक्खुओ ! भले कामों को करने के लिए विद्या अगुआ है, जिसके अनुगामी लज्जा और संकोच हैं।...

🍃 *"इस लोक तथा परलोक में जो कोई दुर्गतियां हैं, सभी अविद्या के कारण हैं। इच्छा और लोभ से उत्पन्न हैं, जब आदमी बुरी नियत वाला निर्लज्ज और पुण्य करने में आदर करने वाला नहीं होता है, तब वह पाप कमाता है और उससे नरक जाता है। इसलिए भिक्खु राग, लोभ और अविद्या को छोड़ विद्या उत्पन्न कर सब दुर्गतियों से छूट जाए।"*

यह बात भी भगवान ने कही। ऐसा मैंने सुना।

रचना : 🪷 *इतिवृत्तक*☸️
अनुवादक : *भिक्खु धर्मरक्षित*
पृष्ठ : 39

टाइपिंग : *धम्ममित्र कपिल प्रियदर्शी*
23/08/2026

#त्रिपिटक #त्रिरत्न #बुद्ध #धम्म #संध #इतिहास #बाबासाहेब #वायरल #स्वतंत्रता #समानता #बंधुता

*🪷 ૨. બે પ્રકારના ઉપદેશ ☸️*આવું મેં સાંભળ્યું છે કે ભગવાને કહ્યું—“ભિક્ષુઓ! તથાગત અર્હત સમ્યક્સંબુદ્ધના ઉપદેશ મુખ્યત્વે ...
23/08/2026

*🪷 ૨. બે પ્રકારના ઉપદેશ ☸️*

આવું મેં સાંભળ્યું છે કે ભગવાને કહ્યું—

“ભિક્ષુઓ! તથાગત અર્હત સમ્યક્સંબુદ્ધના ઉપદેશ મુખ્યત્વે બે પ્રકારના હોય છે. કયા બે?

*‘અકુશળને અકુશળ તરીકે જુઓ’ — આ પ્રથમ પ્રકારનો ઉપદેશ છે.*

*‘અકુશળને અકુશળ તરીકે જોઈને તેનાથી નિર્વેદ પામો, વિરક્ત થાઓ અને વિમુક્ત થાઓ’ — આ બીજા પ્રકારનો ઉપદેશ છે.*

ભિક્ષુઓ! તથાગત અર્હત સમ્યક્સંબુદ્ધના ઉપદેશ બે પ્રકારના હોય છે.”

*🍃 “બધાં પ્રાણીઓ પ્રત્યે અનુકંપા ધરાવતા તથાગત બુદ્ધના ઉપદેશ બે પ્રકારના કહેવાયા છે—એક, અકુશળને જુઓ; અને બીજો, અકુશળ પ્રત્યે વિરક્ત ચિત્ત થઈને દુઃખનો અંત કરો.”*

આ વાત પણ ભગવાને કહી હતી. આવું મેં સાંભળ્યું છે.

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*🪷 ૩. કુશળ-અકુશળના અગ્રણી ☸️*

આવું મેં સાંભળ્યું છે કે ભગવાને કહ્યું—

“ભિક્ષુઓ! અકુશળ કર્મો કરવાના અગ્રણી અવિદ્યા છે, જેના અનુગામી નિર્લજ્જતા અને અસંકોચ છે.

ભિક્ષુઓ! કુશળ કર્મો કરવાના અગ્રણી વિદ્યા છે, જેના અનુગામી લજ્જા અને સંકોચ છે.”

*🍃 “આ લોક અને પરલોકમાં જે કોઈ દુર્ગતિઓ છે, તે અવિદ્યાના કારણે છે અને ઇચ્છા તથા લોભથી ઉત્પન્ન થાય છે. જ્યારે મનુષ્ય દુષ્ટ ઇરાદાવાળો, નિર્લજ્જ અને કુશળ કર્મો કરવામાં આદર ન ધરાવનાર બને છે, ત્યારે તે અકુશળ કર્મો કરે છે અને તેના પરિણામે દુર્ગતિને પામે છે. તેથી, ભિક્ષુએ રાગ, લોભ અને અવિદ્યાનો ત્યાગ કરીને વિદ્યા ઉત્પન્ન કરવી અને તમામ દુર્ગતિઓથી મુક્ત થવું.”*

આ વાત પણ ભગવાને કહી હતી. આવું મેં સાંભળ્યું છે.

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📖 સંદર્ભ

રચના : 🪷 ઇતિવુત્તક ☸️
અનુવાદક : ભિક્ષુ ધર્મરક્ષિત
પૃષ્ઠ : ૩૯

ટાઇપિંગ : ધમ્મમિત્ર કપિલ પ્રિયદર્શી
તારીખ : ૨૩/૦૮/૨૦૨૬

#ત્રિપિટક #ત્રિરત્ન #બુદ્ધ #ધમ્મ #સંઘ #ઇતિહાસ #બાબાસાહેબ #સ્વતંત્રતા #સમાનતા #બંધુતા #वायरलपोस्ट2026 #

*1. दो वितर्क*ऐसा मैंने सुना, भगवान ने यह कहा- भिक्खुओ ! *तथागत अर्हत सम्यकसंबुद्ध को प्रायः दो वितर्क हुआ करते हैं।* कल...
22/08/2026

*1. दो वितर्क*

ऐसा मैंने सुना, भगवान ने यह कहा- भिक्खुओ ! *तथागत अर्हत सम्यकसंबुद्ध को प्रायः दो वितर्क हुआ करते हैं।* कल्याण करने का वितर्क और एकांत-चिंतन का वितर्क ।
भिक्खुओ ! *तथागत किसी को दुख नहीं देने वाले हैं, किसी को दुख न देने में ही लगे रहते हैं,* इसलिए भिक्खुओ !

*किसी को दुख नहीं देने वाले तथागत को प्रायः दो वितर्क हुआ करते हैं*- 'मैं इस ईर्या (चाल-ढाल) से किसी भी चेतन या जड़ को पीड़ा नहीं दे रहा हूं।'

भिक्खुओ ! तथागत एकांत-चिंतन वाले हैं, एकांत-चिंतन में लगे रहते हैं, इसलिए भिक्खुओ ! एकांत-चिंतन वाले और एकांत-चिंतन में लगे रहने वाले *तथागत को प्रायः दो वितर्क हुआ करते हैं- 'जो बुराइयां थीं, वह सब दूर हो गईं।'* इसलिए भिक्खुओ ! तुम लोग भी किसी को दुख नहीं देने वाले और किसी को दुख न देने में ही लगे विहरो। भिक्खुओ ! तब किसी को दुख न देने में लगे हुए विहरने वाले तुम लोगों को प्रायः यही वितर्क हुआ करेगा- 'हम लोग इस ईर्या से किसी भी चेतन या जड़ को पीड़ा नहीं दे रहे हैं।'

भिक्खुओ ! एकांत-चिंतन वाले और एकांत-चिंतन में लगे विहरो। भिक्खुओ ! तब एकांत-चिंतन वाले और एकांत-चिंतन में लगे हुए विहरने वाले तुम लोगों को प्रायः यही वितर्क हुआ करेगा- 'क्या बुराई है? क्या दूर नहीं हुआ? किसे छोड़ें?'...

"न सहे जाने लायक को सहने वाले, (मोह रूपी) अंधकार को दूर करने वाले, (भव-सागर से) पार हो गए महर्षि, जिन्होंने पाने लायक को पा लिया है। अपने को वश में कर लिया है, जो आस्रव-रहित हैं, विषमता को तर गए हैं, तृष्णा के नाश से विमुक्त हो गए हैं, जो मुनि हैं और अंतिम शरीर धारण करते हैं, जिन्होंने अभिमान को छोड़ दिया है, जिन्हें मैं बुढ़ापे को पार किया हुआ कहता हूं, उन *भगवान बुद्ध को दो वितर्क हुआ करते हैं। पहला कल्याण में लगने का वितर्क और दूसरा चिंतन का वितर्क ।*

*पथरीले पहाड़ की चोटी पर खड़ा (पुरुष) जैसे चारों ओर जनता को देखे, उसी तरह सर्वत्र नेत्र वाले महाप्रज्ञावान शोकरहित भगवान बुद्ध धर्म-रूपी महल पर चढ़ कर शोक-निमग्न, जन्म, जरा से पीड़ित जनता को देखते हैं।"*

यह बात भी भगवान ने कही। ऐसा मैंने सुना।

रचना : *इतिवृत्तक*
अनुवादक : *भिक्खु धर्मरक्षित*
पृष्ठ : 38

टाइपिंग : *धम्ममित्र कपिल प्रियदर्शी*
22/08/2026

#त्रिपिटक #त्रिरत्न #बुद्ध #धम्म #संध #इतिहास #बाबासाहेब #वायरल #स्वतंत्रता #समानता

🪷 *૧. બે વિતર્ક*🪷 એવું મેં સાંભળ્યું છે કે ભગવાને કહ્યું—“ભિક્ષુઓ! તથાગત અર્હત સમ્યકસંબુદ્ધને સામાન્ય રીતે બે વિતર્ક થયા...
22/08/2026

🪷 *૧. બે વિતર્ક*🪷

એવું મેં સાંભળ્યું છે કે ભગવાને કહ્યું—

“ભિક્ષુઓ! તથાગત અર્હત સમ્યકસંબુદ્ધને સામાન્ય રીતે બે વિતર્ક થયા કરે છે—કલ્યાણમાં પ્રવૃત્ત થવાનો વિતર્ક અને એકાંત-ચિંતનનો વિતર્ક.

ભિક્ષુઓ! તથાગત કોઈને દુઃખ આપતા નથી અને કોઈને દુઃખ ન પહોંચાડવામાં જ પ્રવૃત્ત રહે છે. તેથી, ભિક્ષુઓ! કોઈને દુઃખ ન આપનાર તથાગતને સામાન્ય રીતે એવો વિતર્ક થયા કરે છે—

*‘હું આ ઈર્યા (ચાલ-ઢાલ) દ્વારા કોઈ પણ ચેતન કે જડ વસ્તુને પીડા પહોંચાડી રહ્યો નથી.’*

ભિક્ષુઓ! તથાગત એકાંત-ચિંતન કરનાર છે અને એકાંત-ચિંતનમાં જ પ્રવૃત્ત રહે છે. તેથી, ભિક્ષુઓ! એકાંત-ચિંતન કરનાર અને તેમાં પ્રવૃત્ત રહેતા તથાગતને સામાન્ય રીતે એવો વિતર્ક થયા કરે છે—

*‘જે બુરાઈઓ હતી, તે બધી દૂર થઈ ગઈ છે.’*

તેથી, *ભિક્ષુઓ! તમે પણ કોઈને દુઃખ ન આપનાર અને કોઈને દુઃખ ન પહોંચાડવામાં જ પ્રવૃત્ત રહીને વિહાર કરો.* ભિક્ષુઓ! ત્યારે કોઈને દુઃખ ન આપવાની ભાવનામાં પ્રવૃત્ત રહીને વિહાર કરતા તમને સામાન્ય રીતે એવો વિતર્ક થશે—

*‘અમે આ ઈર્યા દ્વારા કોઈ પણ ચેતન કે જડ વસ્તુને પીડા પહોંચાડી રહ્યા નથી.’*

ભિક્ષુઓ! એકાંત-ચિંતન કરનાર અને એકાંત-ચિંતનમાં પ્રવૃત્ત રહીને વિહાર કરો. ભિક્ષુઓ! ત્યારે એકાંત-ચિંતન કરનાર અને તેમાં પ્રવૃત્ત રહીને વિહાર કરતા તમને સામાન્ય રીતે એવો વિતર્ક થશે—

*‘કઈ બુરાઈ હજુ બાકી છે? કઈ બુરાઈ દૂર થઈ નથી? કઈ બુરાઈનો ત્યાગ કરવો જોઈએ?’”*

---

**“જે અસહ્યને સહન કરે છે, મોહરૂપ અંધકારને દૂર કરે છે, ભવસાગરને પાર કરી ગયેલા મહર્ષિ, જેમણે પ્રાપ્ત કરવા યોગ્યને પ્રાપ્ત કરી લીધું છે; *જેમણે પોતાને વશમાં કરી લીધા છે; જેઓ આસ્રવરહિત છે; જેઓ વિષમતાને પાર કરી ગયા છે; તૃષ્ણાના નાશથી મુક્ત થયા છે; જેઓ મુનિ છે અને અંતિમ શરીર ધારણ કરે છે; જેમણે અભિમાનનો ત્યાગ કર્યો છે—એવા ભગવાન બુદ્ધને હું વૃદ્ધાવસ્થાને પાર કરી ગયેલા કહું છું.*

એ *ભગવાન બુદ્ધને બે વિતર્ક થયા કરે છે*—
*પહેલો કલ્યાણમાં પ્રવૃત્ત થવાનો વિતર્ક અને બીજો ચિંતનનો વિતર્ક.”*

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*“પથ્થરાળ પર્વતની ટોચ પર ઊભેલો પુરુષ જેમ ચારે તરફની જનતાને જોઈ શકે છે, તેમ સર્વત્ર દૃષ્ટિ ધરાવતા મહાપ્રજ્ઞાવાન, શોકરહિત ભગવાન બુદ્ધ ધર્મરૂપી મહેલ પર ચઢીને જન્મ અને જરાથી પીડિત, શોકમાં ડૂબેલી જનતાને જુએ છે.”*

આ વાત પણ ભગવાને કહી હતી. એવું મેં સાંભળ્યું છે.

રચના: *ઇતિવૃત્તક*
અનુવાદક: *ભિક્ષુ ધર્મરક્ષિત*
પૃષ્ઠ: ૩૮
ટાઇપિંગ: *ધમ્મમિત્ર કપિલ પ્રિયદર્શી*
તારીખ: ૨૨/૦૮/૨૦૨૬
🪷☸️
#વાઈરલ #દિક્ષાધામ #ત્રિરત્ન #બહુજન #બુદ્ધ #ધમ્મ #સંઘ

#2026वायरल #बाबासाहेबरिसर्च #त्रिपिटक #बुद्धविहार #पंचशील #बुद्ध

*9. लाभ-सत्कार के लिए नहीं*ऐसा मैंने सुना, भगवान ने यह कहा- भिक्खुओ! यह ब्रह्मचर्य लोगों के बहकाने, लोगों में बड़ा कहलवा...
21/08/2026

*9. लाभ-सत्कार के लिए नहीं*

ऐसा मैंने सुना, भगवान ने यह कहा- भिक्खुओ! यह ब्रह्मचर्य लोगों के बहकाने, लोगों में बड़ा कहलवाने और लाभ, सत्कार तथा प्रशंसा पाने के लिए नहीं रहा जाता कि 'लोग मुझे ऐसा जानें'। बल्कि भिक्खुओ! यह ब्रह्मचर्य अभिज्ञा और परिज्ञा" के लिए रहा जाता है।...

*"उन भगवान ने बतलाया है कि उपद्रवरहित, निर्वाण को पहुंचाने वाला यह ब्रह्मचर्य अभिज्ञा और परिज्ञा के लिए है। यह मार्ग महान महर्षियों द्वारा चलाया गया है। भगवान बुद्ध के बतलाने के अनुसार जो-जो लोग इस मार्ग पर चलते हैं, वे शास्ता की आज्ञा का पालन करने वाले दुख का अंत कर डालेंगे।"*

यह बात भी भगवान ने कही। ऐसा मैंने सुना।

*10. संवेग से मुक्ति*

ऐसा मैंने सुना, भगवान ने यह कहा- भिक्खुओ ! दो बातों से युक्त भिक्खु इसी जन्म में अधिक सुख सौमनस्य के साथ विहरता है और आम्रवों' (= चित्तमलों) के क्षय के लिए उचित रूप से प्रयत्न करता है। कौन-सी दो? संवेग पैदा होने वाली बातों में संवेग करने और संवेग के लिए उचित रूप से प्रयत्न करने से ।...

*"परिश्रमी, चतुर, बुद्धिमान भिक्खु ज्ञान से भली प्रकार संवेग पैदा होने वाली बातों में संवेग करे। इस प्रकार विहरने वाला, परिश्रमी, शांत और चंचलता-रहित (भिक्खु) चित्त की समाधि (= एकाग्रता) में लगे हुए दुख के क्षय को प्राप्त कर लेता है।"*

यह बात भी भगवान ने कही। ऐसा मैंने सुना।

रचना : *इतिवृत्तक*
अनुवादक :* भिक्खु धर्मरक्षित*
पृष्ठ : 37

टाइपिंग : *कपिल प्रियदर्शी*
21/08/2026
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*૯. લાભ-સત્કાર માટે નહીં*એવું મેં સાંભળ્યું છે કે ભગવાને કહ્યું હતું—“ભિક્ષુઓ! આ બ્રહ્મચર્ય લોકોનું મન જીતવા, લોકોમાં પો...
21/08/2026

*૯. લાભ-સત્કાર માટે નહીં*

એવું મેં સાંભળ્યું છે કે ભગવાને કહ્યું હતું—

“ભિક્ષુઓ! આ બ્રહ્મચર્ય લોકોનું મન જીતવા, લોકોમાં પોતાને મહાન કહેવડાવવા કે લાભ, સત્કાર અને પ્રશંસા મેળવવા માટે પાળવામાં આવતું નથી કે ‘લોકો મને આ રીતે ઓળખે.’ પરંતુ, ભિક્ષુઓ! આ બ્રહ્મચર્ય અભિજ્ઞા અને પરિજ્ઞા માટે પાળવામાં આવે છે.”

*“તે ભગવાને જણાવ્યું છે કે ઉપદ્રવરહિત અને નિર્વાણ તરફ લઈ જનાર આ બ્રહ્મચર્ય અભિજ્ઞા અને પરિજ્ઞા માટે છે. આ માર્ગ મહાન મહર્ષિઓ દ્વારા અનુસરવામાં આવ્યો છે. ભગવાન બુદ્ધે બતાવેલા આ માર્ગ પર જે લોકો ચાલે છે, તેઓ શાસ્તાની આજ્ઞાનું પાલન કરીને દુઃખનો અંત લાવે છે.”*

આ વાત પણ ભગવાને કહી હતી. એવું મેં સાંભળ્યું છે.

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*૧૦. સંવેગથી મુક્તિ*

એવું મેં સાંભળ્યું છે કે ભગવાને કહ્યું હતું—

“ભિક્ષુઓ! બે બાબતોથી યુક્ત ભિક્ષુ આ જ જન્મમાં વધુ સુખ અને સૌમનસ્ય સાથે વિહાર કરે છે અને **આસ્રવો (= ચિત્તના મેલો)**ના ક્ષય માટે યોગ્ય રીતે પ્રયત્ન કરે છે. કઈ બે? સંવેગ ઉત્પન્ન કરનારી બાબતોમાં સંવેગ અનુભવવો અને સંવેગ માટે યોગ્ય રીતે પ્રયત્ન કરવો.”

*“પરિશ્રમી, ચતુર અને બુદ્ધિમાન ભિક્ષુએ જ્ઞાનપૂર્વક સંવેગ ઉત્પન્ન કરનારી બાબતોમાં સંવેગ અનુભવવો જોઈએ. આ રીતે વિહાર કરનાર પરિશ્રમી, શાંત અને ચંચળતાથી રહિત ભિક્ષુ ચિત્તની સમાધિ (= એકાગ્રતા)માં સ્થિર થઈ દુઃખનો ક્ષય પ્રાપ્ત કરે છે.”*

આ વાત પણ ભગવાને કહી હતી. એવું મેં સાંભળ્યું છે.

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રચના: ઇતિવુત્તક
અનુવાદક: ભિક્ષુ ધર્મરક્ષિત
પૃષ્ઠ: ૩૭
ટાઇપિંગ: કપિલ પ્રિયદર્શી
તારીખ: ૨૧/૦૮/૨૦૨૬
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*7. संकोच*ऐसा मैंने सुना, भगवान ने यह कहा- भिक्खुओ! अ-परिश्रमी और अ-संकोची भिक्खु संबोधि (परम ज्ञान), निर्वाण' और सर्वोत...
20/08/2026

*7. संकोच*

ऐसा मैंने सुना, भगवान ने यह कहा- भिक्खुओ! अ-परिश्रमी और अ-संकोची भिक्खु संबोधि (परम ज्ञान), निर्वाण' और सर्वोत्तम कल्याण की प्राप्ति के लिए अयोग्य है। भिक्खुओ! परिश्रमी और संकोची भिक्खु संबोधि, निर्वाण और सर्वोत्तम कल्याण की प्राप्ति के लिए योग्य है।...

*"जो अ-परिश्रमी, अ-संकोची, आलसी, प्रयत्नरहित, मानसिक तथा शारीरिक आलस्य की अधिकता से युक्त, निर्लज्ज और पुण्य कर्मों को करने में आदर नहीं करने वाला है, उस प्रकार का भिक्खु उत्तम संबोधि की प्राप्ति के लिए अयोग्य है और जो स्मृतिवान, ज्ञानी, ध्यानी, परिश्रमी, संकोची तथा प्रमाद नहीं करने वाला है, वह जन्म और बुढ़ापे के बंधन को यहीं काट कर सर्वोत्तम संबोधि (ज्ञान) को पा लेता है।"*

यह बात भी भगवान ने कही। ऐसा मैंने सुना।

*8. बहकाने के लिए नहीं*

ऐसा मैंने सुना, भगवान ने यह कहा- भिक्खुओ! यह ब्रह्मचर्य लोगों के बहकाने, लोगों में बड़ा कहलवाने और लाभ, सत्कार तथा प्रशंसा पाने के लिए नहीं रहा जाता कि 'लोग मुझे ऐसा जानें'। बल्कि भिक्खुओ! यह ब्रह्मचर्य संयम और त्याग के लिए रहा जाता है।...

*"उन भगवान ने बतलाया है कि उपद्रवरहित, निर्वाण को पहुंचाने वाला यह ब्रह्मचर्य संयम और त्याग के लिए है। यह मार्ग महान महर्षियों द्वारा चलाया गया है। भगवान बुद्ध के बतलाने के अनुसार जो-जो लोग इस मार्ग पर चलते हैं, वे शास्ता (बुद्ध) की आज्ञा का पालन करने वाले दुख का अंत कर डालेंगे।"*

यह बात भी भगवान ने कही। ऐसा मैंने सुना।

रचना : *इतिवृत्तक*
अनुवादक : *भिक्खु धर्मरक्षित*
पृष्ठ : 36

टाइपिंग : *कपिल प्रियदर्शी*
20/08/2026

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