08/01/2025
ठंड की हवा जब छूकर निकली,
तेरी यादों की अलमारी मेरे दिल से निकली।
मां, बहुत सी यादें, बातें और वो अनकहे वादे भी निकले,
तेरे खाने की महक, तेरे डाट की आवाज़ और कुछ मीठे पल भी निकले।
कहा था, जब मैं तुम बनूंगी, तो ये ना करूंगी, वो ना कहूंगी, बस तुम जैसा ना बनूंगी,
बड़े होते होते फिर ये याद ही ना रहा, कि मैं तुम जैसे कैसे बनूंगी।
तुममें कुछ बात थी, उस डाट में जीवन की सिखाई हर बात थी,
अब चाह कर भी तुम जैसा ना बन पाऊंगी, क्योंकि मुझमें कहां वो बात थी।
कैसे कर लेती थी अपनी पसंद छुपा,
और सबका ध्यान कैसे रखती थी हुए बिना खफा।
वो आंसू सारे आंचल में छुपा,
कैसे रो लेती थी हमें बिना बता।
अपनी हस्ती और वजूद छोड़ कैसे जी गई, मां, ये बता,
हमें सारा संसार बना खुद कहा खो गई ये बता।
कुछ तो था, अनोखा तुझमें मां,
कैसे ही बन पाती, तुझ जैसी में मां।