20/08/2026
क्या तिलचट्टे लिखेंगे भारत-भाग्य-विधान?
क्या तिलचट्टे लिखेंगे
भारत का भाग्य-विधान?
क्या अँधियारे को सौंपेंगे
हम अपने उषा-गान?
जिनको सूर्य से भय लगता,
जिन्हें प्रकाश कचोटता है,
जिनका जीवन कूड़े में
पलता,गलता और मरता है —
क्या वे ही आकाश नापकर
दिशा-दिशा को आदेश देंगे?
क्या वे भारत-पुण्य-धरा पर
नवयुग के सुसंदेश लिखेंगे?
यह भारत है-ऋषि-वाणी का,
गंगा-यमुना के पावन तट का;
यह भारत है तप की ज्वाला,
यह भारत है सत्य-व्रत का।
यहाँ 'सनातन' प्रहरी बनकर
शताब्दियों से है खड़ा हुआ,
यहाँ विवेक के हाथों मृत्यु-जयी
नरसिंह का पथ गढ़ा हुआ।
यहाँ भोर केवल सूरज की
किरणों से नहीं जगती—
एक जाग्रत अंतरात्मा
जब उठती है, तब जगती।
तिलचट्टो! तुम अंध-गुहा के
अपने तम में ही रहना,
भारत के भाग्य-सूर्य को
अपनी छाया मत कहना।
भाग्य-विधान लिखेंगे वे
जिनकी दृष्टि विराट रहे,
जिनके हृदय में राष्ट्र जगे,
जिनका जीवन निष्काम रहे।
जो मिट्टी को माथे धरकर
भविष्य-बीज बो सकते हैं,
जो अपने स्वार्थों की सीमा
तोड़ मनुष्य हो सकते हैं।
सुन! भारत का भाग्य किसी
कूड़े पर न लिखा जाएगा—
वह तो उस नवमानव के
रक्त-स्वेद से रचा जाएगा,
जिसकी आँखों में अरुणोदय,
जिसके मन में कृष्ण-स्मृति हो,
जिसके चरणों में कर्म-ज्योति,
और हृदय में भारत-भारती हो!
तो मत सोच कि कौन लिखेगा
भारत का भाग्य-विधान?
वज्रलेखनी से योगेश्वर विभ्राट
रचेगा भरतवंशी हिन्दुस्थान!
© अभिजित घटवारी — सर्वाधिकार सुरक्षित