24/08/2026
मैं अच्छा हूँ,
ये साबित करने की मुझे कोई ज़रूरत नहीं।
लोग अपनी औकात और मतलब के हिसाब से ,
मुझे अच्छा या बुरा ठहराते हैं।
जब तक फ़ायदा है, मैं फ़रिश्ता हूँ ,,
मतलब खत्म होते ही शैतान।
लेकिन अब मुझे किसी की सोच,
राय या फ़ैसले की रत्तीभर परवाह नहीं।
जिसे मैं सही लगता हूँ, वो रहे,,
जिसे गलत लगता हूँ, वो रास्ता नापे।
मैं अपनी फ़ितरत नहीं बदलता क्योंकि भीड़ की पसंद बनने से बेहतर है, अपने उसूलों पर अकेला खड़ा रहना।