23/08/2025
नमस्ते दोस्तों!
अक्सर हम सब अपने जीवन में सिर्फ़ फलों की चिंता करते रहते हैं। हम सोचते हैं कि अगर हमें मनचाही सफलता नहीं मिली, तो हमारी मेहनत बेकार चली गई। लेकिन क्या यह सही है?
भगवद्गीता में भगवान कृष्ण अर्जुन से कहते हैं, "कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।" इसका सीधा मतलब है कि तुम्हारा अधिकार सिर्फ़ कर्म करने पर है, उसके फल पर कभी नहीं।
यह बात हमें सिखाती है कि हमें अपने कर्तव्य को पूरी ईमानदारी और लगन से करना चाहिए, बिना यह सोचे कि हमें उसका क्या नतीजा मिलेगा। जब हम फल की चिंता छोड़ देते हैं, तो हमारा मन शांत होता है और हम अपना काम बेहतर तरीक़े से कर पाते हैं।
याद रखें, कर्म ही हमारी पहचान है। फल तो उसका स्वाभाविक परिणाम है। अगर हमारा कर्म सही है, तो फल भी सही ही होगा। तो आज से सिर्फ़ अपने कर्म पर ध्यान दें और अपने मन को शांत रखें।
प्रश्न:
आपके जीवन में भगवान कृष्ण की कौन-सी सीख सबसे ज़्यादा मायने रखती है? नीचे कमेंट्स में ज़रूर बताएं!
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