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21/05/2026

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नेगेटिव फैक्टर्स (बाजार पर दबाव बनाने वाले कारण)यूएस-ईरान तनाव (Geopolitical Tensions): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्...
18/05/2026

नेगेटिव फैक्टर्स (बाजार पर दबाव बनाने वाले कारण)यूएस-ईरान तनाव (Geopolitical Tensions): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान को दी गई कड़ी चेतावनी ("जल्दी फैसला लो, वरना कुछ नहीं बचेगा") के बाद मिडिल ईस्ट में युद्ध की आशंका गहरा गई है। इससे वैश्विक बाजारों में डर का माहौल है।कच्चे तेल में भारी उछाल (Crude Oil Surge): स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में सप्लाई रुकने के डर से ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) $111 प्रति बैरल के पास पहुंच गया है। भारत के लिए यह सबसे बड़ा सिरदर्द है क्योंकि इससे देश में महंगाई (Imported Inflation) बढ़ने का खतरा रहता है।कमजोर वैश्विक संकेत (Weak Global Cues): सुबह GIFT Nifty करीब 115 से 175 अंक नीचे ट्रेड कर रहा है। इसके अलावा एशियाई बाजारों में भारी गिरावट है—दक्षिण कोरिया का Kospi 3% से ज्यादा टूटा है और जापान का Nikkei भी लाल निशान में है।

17/05/2026

. रिस्क मैनेजमेंट (Risk Management) को प्राथमिकता दें1-2% का नियम: किसी भी एक ट्रेड में अपनी कुल ट्रेडिंग कैपिटल का 1% से 2% से अधिक जोखिम में न डालें.रिस्क-रिवॉर्ड रेशियो: हमेशा कम से कम 1:2 या 1:3 रिस्क-रिवॉर्ड वाले ट्रेड ही लें. इसका मतलब है कि यदि आप ₹1,000 का रिस्क ले रहे हैं, तो आपका टारगेट कम से कम ₹2,000 होना चाहिए.स्टॉप लॉस (Stop Loss): बिना स्टॉप लॉस के कभी भी कोई ट्रेड न लें. बाजार आपके विपरीत जाते ही तुरंत बाहर 🌟💯📈

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14/05/2026

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13/05/2026

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13/05/2026

केंद्र सरकार ने सोने (Gold) और चांदी (Silver) के आयात पर कुल इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, यह नई दरें 13 मई 2026 से पूरे देश में लागू हो चुकी हैं.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को बचाने और नागरिकों से 1 साल तक सोना न खरीदने की अपील के ठीक बाद सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है.नया इंपोर्ट ड्यूटी स्ट्रक्चर इस प्रकार है:बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD): इसे 5% से बढ़ाकर 10% कर दिया गया है.कृषि अवसंरचना और विकास उपकर (AIDC): इसे 1% से बढ़ाकर 5% कर दिया गया है.कुल प्रभावी इंपोर्ट ड्यूटी: दोनों को मिलाकर अब यह 15% हो गई है.शुल्क बढ़ाने का मुख्य कारण:पश्चिम एशिया संकट (Iran War) के चलते देश का इम्पोर्ट बिल लगातार बढ़ रहा था और रुपये में गिरावट आ रही थी. वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का गोल्ड इम्पोर्ट रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर पर पहुंच गया था. इसी बढ़ते व्यापार घाटे को रोकने और विदेशी मुद्रा को देश में ही रोकने के लिए सरकार ने टैक्स में यह भारी बढ़ोतरी की है. इस फैसले के बाद घरेलू बाजार में सोना और चांदी खरीदना काफी महंगा हो जाएगा. 🌟💰🔥👍

13/05/2026

पॉजिटिव फैक्टर्स (बाजार को संभालने वाले कारण)घरेलू निवेशकों (DIIs) का मजबूत सपोर्ट: विदेशी निवेशकों की बिकवाली के सामने भारतीय घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को सहारा दिया है। DIIs ने पिछले सत्र में ₹7,990 करोड़ की बड़ी खरीदारी की है।शॉर्ट-टर्म रिकवरी की उम्मीद (Oversold Bounce): लगातार चार-पांच दिनों की तेज गिरावट (निफ्टी और सेंसेक्स में करीब 4% की कमी) के बाद, बाजार तकनीकी रूप से 'ओवर्सोल्ड' जोन में है। इस वजह से आज निचले स्तरों पर हल्की खरीदारी या शॉर्ट कवरिंग (Short Covering) देखने को मिल सकती है।कच्चे तेल से जुड़ी कंपनियों को फायदा: तेल की बढ़ती कीमतों और सरकार द्वारा तेल व गैस खोज पर रॉयल्टी का बोझ कम करने से ONGC और Oil India जैसे शेयरों को मजबूती मिल रही है।चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे: आज भारती एयरटेल (Bharti Airtel) जैसी कई बड़ी कंपनियों के Q4FY26 के नतीजे आने वाले हैं, जिससे चुनिंदा शेयरों में तेजी आ सकती है। 🌟📈💰👍

13/05/2026

नेगेटिव फैक्टर्स (बाजार पर दबाव के कारण)कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतें: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की उम्मीदें कम होने से ब्रेंट क्रूड $107 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। यह भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए सबसे बड़ा नकारात्मक फैक्टर है।विदेशी निवेशकों (FIIs) की भारी बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। पिछले कारोबारी सत्र में भी FIIs ने करीब ₹1,959 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की।रुपये की ऐतिहासिक कमजोरी: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया ₹95.6 के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा है, जिससे आयात महंगा होने और महंगाई बढ़ने का डर है।घरेलू स्तर पर सतर्कता का माहौल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ऊर्जा खपत, सोने की खरीद और विदेशी यात्राओं में कटौती करने की अपीलों से निवेशकों के बीच आर्थिक सुस्ती को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।सेक्टोरल दबाव: आईटी (IT), ऑटो, रियल्टी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टर्स में भारी बिकवाली का माहौल बना हुआ है।

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