14/02/2026
दिव्यांगों की आवाज बने Ammol Dewaji Walkke, हर रविवार सैकड़ों समस्याओं का मौके पर समाधान
नागपुर से एक ऐसी तस्वीर सामने आती है, जो सिर्फ सेवा नहीं बल्कि संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल है। हर रविवार, बिना किसी दिखावे के, सैकड़ों दिव्यांगों की उम्मीद बनकर सामने आते हैं अमोल वालके। दिव्यांग जन संवाद कार्यक्रम के ज़रिए वो न सिर्फ समस्याएं सुनते हैं, बल्कि समाधान तक पहुंचाते हैं। यह कार्यक्रम उन लोगों के लिए है, जिनकी आवाज़ अक्सर सिस्टम तक नहीं पहुंच पाती।
नागपुर के मानेवाडा रोड स्थित वालके सेलिब्रेशन में हर रविवार दिव्यांग जन संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस कार्यक्रम में पूरे विदर्भ से सैकड़ों दिव्यांगजन अपनी-अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। कोई पेंशन से परेशान है, कोई प्रमाणपत्र से, तो किसी को रोजगार और इलाज की दिक्कत है।
इस संवाद कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां समस्याएं सिर्फ सुनी नहीं जातीं, बल्कि तुरंत हल करने की कोशिश होती है। अमोल वालके दिव्यांगों के सामने ही संबंधित अधिकारियों को फोन करते हैं और मौके पर समाधान की प्रक्रिया शुरू कराते हैं। यही कारण है कि लोग उन्हें सिर्फ नेता नहीं, बल्कि अपना मानते हैं।
इतना ही नहीं, अमोल वालके हर सुबह ठीक 7 बजे लाइव आते हैं। इस लाइव संवाद में रोज़ाना सैकड़ों दिव्यांग जुड़ते हैं। खास बात यह है कि इसमें सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों से लोग जुड़कर अपनी समस्याएं रखते हैं और उन्हें भरोसा मिलता है कि कोई है जो सुनेगा।
आज अमोल वालके सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि उन लोगों की पहचान बन चुके हैं जिनकी आवाज़ को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। वो उन दिव्यांगों की ताकत हैं, जिनसे समाज ने उम्मीद छोड़ दी थी। सेवा, संवेदना और समाधान यही उनकी असली पहचान है।
दिव्यांग जन संवाद कार्यक्रम यह साबित करता है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो सिस्टम भी झुकता है। अमोल वालके का यह प्रयास न सिर्फ दिव्यांग समाज के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा है।
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