23/12/2025
रेलवे परिवार में शोक की लहर एक और अनमोल जीवन बुझ गया
एक बार फिर रेलवे ट्रैक खामोश नहीं रहा…
एक बार फिर पटरियों पर खून के छींटों ने सिस्टम की असंवेदनशीलता को उजागर कर दिया।
चक्रधरपुर रेल मंडल में ट्रैक मेंटेनर मंगल केरकेट्टा की ड्यूटी के दौरान हुई दर्दनाक मौत ने पूरे रेलवे परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया है। सोमवार की सुबह, जब ज़्यादातर लोग अपने घरों में सुरक्षित थे, उसी वक्त मंगल केरकेट्टा रेलवे की सुरक्षा के लिए ट्रैक पर डटे हुए थे। लेकिन दुर्भाग्य ऐसा कि वही ट्रैक उनकी ज़िंदगी का आख़िरी पड़ाव बन गया।
मनोहरपुर सेक्शन के अंतर्गत घाघरा क्षेत्र में थर्ड लाइन पर काम करते हुए, किलोमीटर 369/3ए से 5ए के बीच, वह पूरी जिम्मेदारी के साथ अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। तभी शालीमार–कुर्ला एक्सप्रेस उनके कार्य स्थल से गुज़री और एक पल में सब कुछ खत्म हो गया। न कोई चेतावनी, न कोई सुरक्षा कवच… मौके पर ही मंगल केरकेट्टा ने दम तोड़ दिया।
यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं है।
यह एक सवाल है…
यह एक चीख़ है उस व्यवस्था पर, जो हर बार “दुर्भाग्य” कहकर अपनी जिम्मेदारी से बच निकलती है।
आज मंगल केरकेट्टा नहीं रहे, कल कोई और होगा?
चक्रधरपुर मंडल में अब तक 11 ट्रैक मेंटेनरों की जान जा चुकी है, लेकिन क्या सिस्टम जागा? क्या सुरक्षा के इंतज़ाम बदले? अफ़सोस, जवाब अब भी “नहीं” है।
ट्रैक मेंटेनर वे सिपाही हैं जो दिन-रात, धूप-बारिश, ठंड-गर्मी में रेलवे ट्रैक की रक्षा करते हैं। लाखों यात्रियों की सुरक्षित यात्रा उन्हीं के पसीने पर टिकी होती है। लेकिन जब सवाल उनकी खुद की सुरक्षा का आता है, तो वही सिस्टम आंखें मूंद लेता है।
आज मंगल केरकेट्टा के घर में मातम है।
उनके परिवार की दुनिया उजड़ चुकी है।
एक घर का चिराग बुझ गया, सिर्फ इसलिए क्योंकि सुरक्षा उपकरण “उपलब्ध नहीं” थे।
क्या यह बहुत बड़ी मांग है कि ट्रैक पर काम कर रहे कर्मचारियों को ‘रक्षक डिवाइस’ दी जाए?
क्या उनकी ज़िंदगी इतनी सस्ती है कि हर बार हादसे के बाद सिर्फ संवेदना व्यक्त कर दी जाए?
अब समय आ गया है कि सिर्फ शोक न मनाया जाए,
बल्कि ठोस कदम उठाए जाएँ।
हर ट्रैक मेंटेनर को सुरक्षा उपकरण मिले,
हर काम से पहले ट्रेन की जानकारी मिले,
और हर जीवन की कीमत समझी जाए।
मंगल केरकेट्टा की यह कुर्बानी बेकार नहीं जानी चाहिए।
अगर आज भी सिस्टम नहीं जागा,
तो कल फिर कोई ट्रैक, कोई ट्रेन और
कोई और परिवार इस दर्द को झेलेगा।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दे
और परिवार को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
रेलवे परिवार शोक में है… और जवाब मांग रहा है।