20/08/2026
बिहार के गोपालगंज जिले के जादोपुर थाना में कथित अवैध हिरासत, जबरन वसूली और रिश्वतखोरी का गंभीर मामला सामने आया है।
शुरुआती जांच में कई लोगों को कथित तौर पर बिना एफआईआर, आधिकारिक रिकॉर्ड या कानूनी आधार के घंटों तक थाना हाजत में हिरासत में रखने की बात सामने आई है। एक मामले में हिरासत की अवधि करीब 36 घंटे बताई गई है।
⭕..जांच में जादोपुर थानेदार पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने हिरासत में लिए गए लोगों के परिजनों को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी और रिहाई या मामले से नाम हटाने के बदले कथित तौर पर पैसे की मांग की।
⭕..गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक (SP) विनय तिवारी को 16 अगस्त को कथित वसूली के इस मामले की जानकारी मिली थी। इसके बाद उन्होंने डीएसपी मुख्यालय को पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दिए। जांच के दौरान कथित तौर पर अवैध हिरासत और पैसे की मांग से जुड़े कई मामले सामने आए।
⭕..जांचकर्ताओं के मुताबिक, एक व्यक्ति से कथित तौर पर बिचौलिए (दलाल ) के जरिए 50 हजार रुपये की मांग किए जाने का मामला सामने आया। एक अन्य मामले में एक महिला और उसकी नाबालिग बेटी को कथित तौर पर हिरासत से छोड़ने के लिए 75 हजार रुपये लिए जाने का आरोप है।
⭕..इसी तरह, एक युवक का नाम मामले से हटाने के लिए तत्कालीन थानाध्यक्ष और उनके अधीन काम करने वाले कर्मचारियों पर 55 हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया गया है। जांच टीम को तत्कालीन एसएचओ और कथित बिचौलिए के बीच कई बार हुई टेलीफोन बातचीत के साक्ष्य भी मिले हैं।
⭕..प्रारंभिक जांच में सामने आए आरोपों को पुलिस अधिकारियों ने गंभीरता से लिया है। मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच की जा रही है और आरोपों के आधार पर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
💥..पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जांच का उद्देश्य कथित अवैध हिरासत, वसूली और रिश्वतखोरी से जुड़े सभी मामलों की जानकारी जुटाना और इसमें शामिल लोगों की जिम्मेदारी तय करना है।
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