13/03/2026
रहस्यमयी मोहब्बत – Part 2
दरवाज़ा धीरे-धीरे खुला…
क्रीईईक…
आरव का दिल तेज़ धड़कने लगा।
अंधेरे में किसी की परछाईं दिखाई दी।
अनाया अचानक आरव का हाथ पकड़कर फुसफुसाई —
"चुप रहो… आवाज मत करना।"
दोनों किताबों की बड़ी अलमारी के पीछे छिप गए।
दरवाज़े से एक लंबा आदमी अंदर आया। उसके हाथ में टॉर्च थी।
टॉर्च की रोशनी पूरे कमरे में घूमने लगी।
वह आदमी धीरे-धीरे बोला —
"मुझे पता है तुम यहीं कहीं हो… अनाया।"
अनाया का हाथ काँप रहा था।
आरव ने धीरे से पूछा —
"ये कौन है?"
अनाया ने बहुत धीमी आवाज में कहा —
"यही वो लोग हैं जिनसे मैं भाग रही हूँ…"
टॉर्च की रोशनी अचानक उनकी तरफ आने लगी।
आरव ने जल्दी से एक किताब नीचे गिरा दी।
धड़ाम!
आदमी की नजर दूसरी तरफ चली गई।
मौका देखकर अनाया ने आरव का हाथ पकड़ा और बोली —
"चलो… अभी!"
दोनों तेजी से लाइब्रेरी के पीछे वाले दरवाज़े से बाहर भागे।
कॉलेज के पीछे एक पुराना गार्डन था, जहाँ रात में कोई नहीं आता था।
कुछ देर भागने के बाद आरव ने सांस लेते हुए पूछा —
"अब तो सच बताओ… आखिर क्या हो रहा है?"
अनाया की आँखों में आँसू आ गए।
वह बोली —
"आरव… मेरा असली नाम अनाया नहीं है।
और मैं इस कॉलेज में पढ़ने नहीं… छिपने आई हूँ।"
आरव पूरी तरह हैरान था।
"किससे छिप रही हो?"
अनाया ने आसमान की तरफ देखा… फिर धीरे से कहा —
"एक ऐसे राज से… जो अगर दुनिया को पता चल गया…
तो बहुत बड़ी तबाही हो सकती है।"
उसी समय गार्डन के पीछे झाड़ियों में अचानक आवाज आई —
सरसर… सरसर…
और वही टॉर्च की रोशनी फिर से उनकी तरफ आने लगी…
अनाया घबराकर बोली —
"आरव… वो लोग फिर से हमें ढूंढ चुके हैं!"
और इस बार उनके सामने तीन लोग खड़े थे…
आगे क्या होगा…?