06/06/2026
धुआं था आग थी। और एक मां थी
जो तीसरी मंजिल से कूद गई।
अपने बच्चे को सीने से लगाकर।
नीचे गद्दे थे।
एक गद्दे वाले ने बिछाए थे।
बिना सोचे। बिना रुके। बिना किसी से पूछे।
बुधवार की सुबह।
दिल्ली के मालवीय नगर में।
Flourish Stay B&B होटल में आग लगी।
इक्कीस लोग नहीं बचे।
अट्ठावन बचे, क्योंकि कुछ लोग दौड़े।
बिना हेलमेट के।
बिना यूनीफॉर्म के।
बिना किसी ऑर्डर के।
मोहम्मद अफजल और उसके दस भाई-भतीजे।
पिता का फोन आया 'वहां आग लगी है।'
बस इतना काफी था।
वो पहुंचे। गेट तोड़ा। अंदर घुसे।
धुएं में। अंधेरे में।
एक बच्चे को उन्होंने ऊपरी मंजिल से कूदते हुए थाम लिया।
अफजल के कपड़े काले हो गए थे।
उसने कहा-
'हम बस जानें बचाना चाहते थे।
एक पल भी नहीं रुके।'
रियाज़ुद्दीन मंसूरी और उनका बेटा अरमान।
पास में गद्दे की दुकान है उनकी।
उन्होंने खिड़कियों से लोगों को कूदते देखा।
सोचा नहीं।
हिसाब नहीं लगाया।
दुकान खाली कर दी।
सड़क पर गद्दे बिछा दिए।
एक औरत थी-बच्चा गोद में था।
तीसरी मंजिल से कूदी।
गद्दे पर गिरी।
बच गई।
बच्चा बच गया।
रियाजुद्दीन ने बाद में कहा-
'नुकसान का खयाल ही नहीं आया।
बस यही दिखा कि लोगों को नीचे आना है।'
दस पुलिसवाले भी थे।
करतार, हरग्यान, प्रेमचंद, जितेंद्र, दिनेश।
रविरंजन, संदीप, विक्रम, दीपक, रामपाल।
धुएं में घुसे।
एम्स में भर्ती हुए।
लेकिन जब तक ऑपरेशन पूरा नहीं हुआ
वहां से नहीं हटे।
हमारे न्यूजरूम में एक कहावत है —
'खबर में हीरो ढूंढो तो मिलता है।
भीड़ में नहीं-उस एक चेहरे में
जो सबसे आगे था।'
मनोविज्ञान कहता है -
खतरे में इंसान के दो रास्ते होते हैं।
फाइट या फ्लाइट।
लड़ो या भागो
लेकिन कुछ लोग होते हैं
जिनमें एक तीसरा रास्ता होता है
केयर।
वो रुकते नहीं।
वो भागते नहीं।
वो दौड़ते हैं-उस तरफ
जहां से बाकी सब भाग रहे हैं।
वे गद्दे बिछाते हैं
अपनी दुकान से उठाकर
बिना कुछ सोचे
इस दुनिया में तकलीफ बहुत है।
नफरतें बहुते है। सियासत है।
यह सच है।
लेकिन यह भी सच है
कि जब एक मां तीसरी मंजिल से कूदती है
तो नीचे कोई न कोई गद्दा बिछाने वाला नेक इंसान होता है।
हमेशा।
यही इंसानियत है।
यही बचाती है हमें।
हर बार।
🙏