19/07/2026
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा सनातन धर्म के सबसे प्राचीन, भव्य और महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सवों में से एक है, जो हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को ओडिशा के पुरी शहर में आयोजित की जाती है। इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विशाल लकड़ी के रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) जाते हैं।
रथ खींचने और दर्शन का पुण्य:- शास्त्रों के अनुसार, रथ पर विराजमान भगवान के दर्शन मात्र से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। रथ की रस्सी को छूने या खींचने वाले व्यक्ति को जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति (मोक्ष) मिलती है और उसे वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।
अहंकार का परित्याग:- रथ की रस्सी खींचना केवल शारीरिक क्रिया नहीं है। यह इस बात का प्रतीक है कि भक्त अपना अहंकार प्रभु के चरणों में सौंपकर अपने जीवन रूपी रथ का सारथी भगवान को बना रहा है।
🚩 जय जय श्री जगन्नाथ 🚩