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शहजादपुर में हिन्द समाचार ग्रुप के संस्थापक अमर शहीद लाला जगत नारायण जी की 45 वीं पुण्यतिथि पर रक्तदान शिविर का आयोजन कि...
06/09/2026

शहजादपुर में हिन्द समाचार ग्रुप के संस्थापक अमर शहीद लाला जगत नारायण जी की 45 वीं पुण्यतिथि पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया ।

नारायणगढ़ : राधे फार्म नारायणगढ़ में बसपा की समीक्षा बैठक का अयोजन किया गया जिसमें हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने भा...
05/09/2026

नारायणगढ़ : राधे फार्म नारायणगढ़ में बसपा की समीक्षा बैठक का अयोजन किया गया जिसमें हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया ।

05/09/2026
परमात्मा हमें सर्व बंधनों से छुड़ाकर श्रीकृष्ण की दुनिया में चलने के लायक बना रहे: राजयोगिनी बीके ऊषा दीदी- श्रीकृष्ण जन्...
04/09/2026

परमात्मा हमें सर्व बंधनों से छुड़ाकर श्रीकृष्ण की दुनिया में चलने के लायक बना रहे: राजयोगिनी बीके ऊषा दीदी

- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह धूमधाम से मनाया
- राधारानी ने नृत्य तो पालने में झूला झूलते कान्हा ने मोहा सभी का मन

आबूरोड : ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के मुख्यालय शांतिवन में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह धूमधाम से मनाया गया। इसमें बालिकाओं ने राधारानी के वेश में सुंदर नृत्य की प्रस्तुति दी तो पालने में झूलते कान्हा ने सभी का मन मोह लिया। समारोह में गीता ज्ञान विशेषज्ञ राजयोगिनी बीके ऊषा दीदी ने कहा कि सर्वगुण संपन्न, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण का जीवन 16 कला संपूर्ण, संपूर्ण निर्विकारी था। श्रीकृष्ण के जीवन के बारे में दिखाते हैं कि जेल में सात बंद तालों के बीच उनका जन्म हुआ, जो जन्म के बाद एक-एक करके खुलते गए। वास्तव में ताले बंधन की निशानी हैं। आध्यात्मिक रीति से देखें तो सात ताले जीवन में सात बंधन का प्रतीक हैं।

सात ताले, ऐसे हैं सात बंधनों का प्रतीक-
- पहला: देह का बंधन। जब जीवन में देह अभिमान, अहंकार आ जाता है तो यह सबसे बड़ा बंधन है।
- दूसरा: मन का बंधन। अनेक प्रकार के कमजोर विचारों के बंधन ताले के समान हैं, जो हमें आगे बढ़ने से रोकते हैं।
- तीसरा: देह के संबंधों का बंधन। मेरेपन का बंधन, देह के संबंध के मोह का बंधन। जब जीवन में मोह आ जाता है तो हम जीवन के वास्तविक उद्देश्य से दूर हो जाते हैं।
- चौथा: धन का बंधन। धन है तो परेशानी, नहीं है तो भी परेशानी। आज मानव धन के चक्कर में मनुष्यता को भूल गया है।
- पांचवा: कर्मों का बंधन। मनुष्य के विकर्मों का बंधन भी उसे बांध रहा है, जिसके कारण कर्मभोग भोगना पड़ता है।
- छठा: धर्म का बंधन। आज अनेक प्रकार के धर्म, मठ, पंथ, संप्रदाय निकलते जा रहे हैं। धर्म का भी बहुत बड़ा बंधन है। क्योंकि मनुष्य स्वधर्म (मैं एक आत्मा हूं) को भूल गया है। वास्तव में हम सभी एक परमपिता परमात्मा की संतान आपस में भाई-भाई हैं।
- सातवां- समय का बंधन। आज सभी के पास एक ही समस्या है कि मेरे पास समय नहीं है। बहुत कुछ करना चाहते हैं लेकिन कर नहीं पाते हैं। ऐसे समय में कलियुग के अंत में परमात्मा आकर मनुष्य आत्माओं को सभी बंधनों से छुड़ाकर नई सतयुगी दुनिया, श्रीकृष्ण की दुनिया में हमें ले चलते हैं।

परमात्मा ज्ञान मुरली से जीवन बना रहे दिव्य-
दिल्ली पांडव भवन की निदेशिका राजयोगिनी बीके पुष्पा दीदी ने कहा कि परमपिता शिव परमात्मा सच्चा गीता ज्ञान देकर हमें श्रीकृष्ण की दुनिया में चलने के लायक बना रहे हैं। हमारा जीवन दिव्य बना रहे हैं। प्यारे शिव बाबा, ब्रह्मा बाबा ने हमें ज्ञान मुरली का वह सुख दिया, जो सभी के मन को आकर्षित करती है। ज्ञान मुरली जीवन की सारी समस्याओं का समाधान कर हमें संपूर्णती का ओर ले जाने का माध्यम बनती है। वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके रुक्मिणी दीदी ने परमात्मा को भाेग स्वीकार कराया। मधुरवाणी ग्रुप के बीके सतीश भाई व साथियों ने जन्माष्टमी पर गीत प्रस्तुत किया।

नारायणगढ़ ब्रह्माकुमारी सेंटर पर जन्माष्टमी पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।*प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वव...
03/09/2026

नारायणगढ़ ब्रह्माकुमारी सेंटर पर जन्माष्टमी पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

*प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा भव्य आयोजन, भोग और रास ने मोहा मन*।

पंजाब का सच बरखा राम नारायणगढ़, 3 सितम्बर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, शिव शक्ति भवन, नारायणगढ़ में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में विशेष तौर पर माउंट आबू ज्ञान सरोवर से पधारे बी.के. राजेश भाई जी ने कहा कि श्री कृष्ण कोई साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि 16 कला संपूर्ण, संपूर्ण पवित्रता और दिव्य गुणों के प्रतीक हैं। उनके गुण ही उन्हें कृष्ण बनाते हैं।

*शिव बाबा और श्री कृष्ण का संबंध बताते हुए उन्होंने कहा* कि निराकार परमपिता परमात्मा शिव बाबा ही आकर हमें श्री कृष्ण समान दिव्य गुण धारण करना सिखाते हैं। श्री कृष्ण सतयुग के प्रथम राजकुमार हैं, जो संगमयुग पर शिव बाबा से ज्ञान और राजयोग सीखकर यह पद प्राप्त करते हैं। शिव बाबा ज्ञान के सागर हैं और श्री कृष्ण उस ज्ञान को जीवन में धारण करने का प्रत्यक्ष स्वरूप हैं। कृष्ण के गुण जैसे मधुरता, नम्रता, हर्षितमुखता, संतुष्टता और सबको सुख देना - ये सभी हम शिव बाबा से राजयोग द्वारा सीखते हैं।

*संस्था का परिचय:* प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय का मुख्यालय *माउंट आबू, राजस्थान में स्थित है।* जिसे ज्ञान सरोवर और पांडव भवन के नाम से जाना जाता है। इसकी स्थापना 1937 में प्रजापिता ब्रह्मा बाबा द्वारा की गई थी। आज यह विश्व की 140 से अधिक देशों में 8500 से अधिक सेवा केंद्रों के माध्यम से मानव को आत्मा का ज्ञान, परमात्मा का परिचय और राजयोग मेडिटेशन सिखा रही है। इसका लक्ष्य विश्व में शांति, पवित्रता और दिव्य गुणों की स्थापना करना है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता *बी.के. हरदीप बहन* ने की। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी भाई-बहनों को जन्माष्टमी की शुभकामनायें दी। और दिव्य रास का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने आत्मिक आनंद का अनुभव किया। राजेश भाई जी को सभी बहन भाइयों ने राखी बांधी और रक्षाबंधन और जन्माष्टमी की बधाई दी
सेवा केंद्र पर उपस्थित सभी भाई बहनों ने कार्यक्रम को सफल बनाया। और कार्यक्रम के अन्त में प्रशाद का वितरण किया गया ।

02/09/2026

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