Shabdgaatha Publishing Group

Shabdgaatha Publishing Group लेखन के भविष्य का प्रकाशन
नए स्वर | नई दृष्टि | नया साहित्य
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05/07/2026
05/07/2026

Thank you dear readers 💛

150 Complete Sets SOLD OUT ✨एक ऑफिस टेबल पर शुरू हुई एक चर्चा से उपजे सपने से या कहिए एक प्रयोग से शुरू हुआ सफ़र....और आ...
05/07/2026

150 Complete Sets SOLD OUT ✨

एक ऑफिस टेबल पर शुरू हुई एक चर्चा से उपजे सपने से या कहिए एक प्रयोग से शुरू हुआ सफ़र....और आज आपके विश्वास ने उसे एक खूबसूरत मुकाम तक पहुँचा दिया।

डैशियल हैमेट के तीन कालजयी उपन्यासों के इस हिंदी कलेक्टर कॉम्बो सेट को इतना स्नेह देने के लिए हम अपने प्रत्येक पाठक के प्रति हृदय से आभारी हैं।

यह उपलब्धि केवल बस आपसे बिक्री का आँकड़ा साझा करना नहीं है, वरन हमारा मानना है कि यह हिंदी में विश्वस्तरीय अनुवाद और अपराध और नोयर कथा साहित्य के प्रति आपके बढ़ते विश्वास का प्रमाण है।

आपके विश्वास, सहयोग और प्रेम के लिए हार्दिक धन्यवाद। ❤️

The Team Shabdgaatha Publishing Group

हमारे उपक्रम Third.draft की यात्रा का एक और नया पन्ना: हर भूगोल अपने भीतर एक इतिहास भी छिपाए रहता है या फिर इसे यूँ कहिए...
04/07/2026

हमारे उपक्रम Third.draft की यात्रा का एक और नया पन्ना:

हर भूगोल अपने भीतर एक इतिहास भी छिपाए रहता है या फिर इसे यूँ कहिए कि हर मिट्टी की अपनी स्मृति होती है। हर बोलियों का अपना संगीत होता है और हर संघर्ष की अपनी एक भाषा होती है।

झारखंड की उसी मिट्टी से जन्मी है – दिलबसिया। झारखंड के ग्रामीण जीवन की पृष्ठभूमि में रची गई यह कथा एक स्त्री की कथा के माध्यम से बदलते समाज, टूटते-बनते रिश्तों और मानवीय गरिमा की भी कहानी है।

एक आंचलिक उपन्यास, जहाँ लोकजीवन पृष्ठभूमि भी है और कथा का सबसे जीवंत पात्र भी बनकर सामने आता है। पीढ़ियों का संघर्ष, रिश्तों की जटिलता, बदलते सामाजिक मूल्य और एक स्त्री का अडिग स्वाभिमान, ये सब मिलकर दिलबसिया को एक गहरी मानवीय संवेदना प्रदान करते हैं।

यदि आप साहित्य पढ़ते हैं और जीवन की सच्ची धड़कनें देखने की आशा करते हैं, तो यह उपन्यास आपके लिए ही है। लेखक ने भावुकता और यथार्थ के बीच संतुलन साधा है। कहीं भी करुणा दया में नहीं बदलती और साहस आक्रोश की बैसाखियाँ नहीं थामता। यही संतुलन उपन्यास को विश्वसनीय बनाता है।

किताब अमेजन प्राइम पर उपलब्ध है। लिंक शब्दगाथा के ऊपर लिखे बायो में ‘Featured Book’ सेक्शन में भी देख सकते हैं। बाकी आप सीधे हमसे भी मात्र ₹ 275 में 098677 65305 पर संपर्क करके भी मँगवा सकते हैं।

शब्दगाथा प्रकाशन समूह की यात्रा का एक और नया पन्ना। Third.draft की प्रस्तुति। Shalabh Kumar Gupta
10/06/2026

शब्दगाथा प्रकाशन समूह की यात्रा का एक और नया पन्ना। Third.draft की प्रस्तुति। Shalabh Kumar Gupta

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07/06/2026

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पिछले बरस आज ही के दिन दिलीप कुमार पाठक की प्रथम पुस्तक ‘मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया‘ के आवरण के माध्यम से प्रकाशन ...
04/06/2026

पिछले बरस आज ही के दिन दिलीप कुमार पाठक की प्रथम पुस्तक ‘मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया‘ के आवरण के माध्यम से प्रकाशन की ओर से एक तोहफ़ा दिया गया था।

इस बार भी ऐसा ही कुछ प्रयास था, क्योंकि लेखक द्वारा अगली पुस्तक प्रकाशन को सौंपी जा चुकी है, जो कि उनका उपन्यास विधा लेखन में उनका पहला प्रयास भी है। परन्तु अन्य प्रतिबद्धताओं के चलते अपनी तमाम कोशिशों के भी इस बार ये मुमकिन नहीं हो पाया है।

लेकिन आज पहली किताब की वर्षगांठ भी है, आंकड़ों की बाबत ख़बर आप सभी पाठकों तक पहले ही पहुंच चुकी थी कि इस किताब ने अपने प्रकाशन के साथ ही इतिहास बनाया है।

बहरहाल दिलीप कुमार पाठक जी को उनके अवतरण दिवस की ढेरों बधाईयां।

पाठकों के लिए विशेष : अगर आपने अभी तक ये पुस्तक नहीं ली है तो प्रकाशन से सीधे मंगवाने पर जो कि ₹ 275/- फ्री डिलीवरी है। इस अवसर पर सिर्फ आज रात बारह बजे तक आप इस पुस्तक को अतिरिक्त छूट में मात्र ₹ 249/- फ्री डिलीवरी प्राप्त कर सकते हैं।

ऑर्डर हेतु DM करें या हमारे आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर 098677 65305 पर DKP लिखकर भेजें।

22/05/2026

विश्व अपराध कथा साहित्य के शैदाईयों में शायद ही कोई ऐसा होगा, जो डैशिएल हैमेट के नाम से अनजान हो। मगर हैमेट महज़ एक लेखक नहीं, बल्कि ज़ुर्म की दुनिया के पहले सच्चे गवाह थे। कागज़ पर स्याही बिखेरने से पहले उन्होंने ख़ुद ‘पिंकरटन डिटेक्टिव एजेंसी’ के लिए बरसों तक सड़कों पर असली मुज़रिमों का पीछा किया था। यही वज़ह रही कि जब उन्होंने कलम चलानी शुरू की, तो जासूसी उपन्यासों की रवायत हमेशा के लिए बदल गई। उन्होंने शरलॉक होम्स या अगाथा क्रिस्टी के किरदारों की तरह मख़मली कमरों में बैठकर पहेलियाँ नहीं सुलझाईं, बल्कि अदब को उस ज़हरीली हवा, धूल और बारूद के बीच ले गए, जहाँ ज़ुर्म पनपता है, पनाह लेता है। हैमेट का मानना था कि खून बहता है तो कपड़े गंदे होते हैं और जब इंसान बिखरता है, तो उसका ज़मीर घुटनों पर आ जाता है।

उनकी उँगली हमेशा वक़्त की नब्ज़ पर रही। 1920 के दशक का अमेरिका जिस पूंजीवाद, धोखे और सियासी सड़ांध के दौर से गुज़र रहा था, हैमेट ने उसे बिना किसी लाग-लपेट के पन्नों पर उतार दिया। उनके जासूस, चाहे वो ‘सैम स्पेड’ हो या ‘कॉन्टिनेंटल ऑप’, कोई दूध के धुले नायक नहीं थे। वे ख़ुद चालबाज़, बेरहम, हरजाई और थके, उकताए हुए लोग थे, जो जानते थे कि इस दुनिया में मुक़म्मल इंसाफ़ जैसी कोई चीज़ नहीं होती। हैमेट ने दुनिया को सिखाया कि असल जासूसी अंधेरी गलियों में लगने वाली ठोकरों और अपनों से मिलने वाले धोखे का नाम है।

इसी बेबाक और सियाह मिज़ाज की गवाह है उनकी मशहूर तिकड़ी–‘रेड हार्वेस्ट’, ‘द डेन कर्स’ और ‘माल्टीज़ फाल्कन’।

हिंदी जगत के लिए यह किसी तोहफ़े से कम नहीं है कि इन शाहकारों को सुश्री सबा ख़ान ने अपनी क़लम की नफ़ासत से सँवारा है। उन्होंने हैमेट की उस तेज़-तर्रार धारदार ज़ुबान और थ्रिलर के मिज़ाज को इस तरह ढाला है कि पढ़ते हुए आपको अनुवाद का अहसास तक नहीं होगा। अगर आप ज़ुर्म के पीछे छिपी इंसानी फ़ितरत के असली मुसाफ़िर हैं, तो हैमेट की यह जादुई और ख़तरनाक दुनिया आपका इंतज़ार कर रही है।

+91 9867765305 पर DH COMBO लिखकर भेजें। या फिर DM करें।


विश्व अपराध कथा साहित्य के शैदाईयों में शायद ही कोई ऐसा होगा, जो डैशिएल हैमेट के नाम से अनजान हो। मगर हैमेट महज़ एक लेखक...
22/05/2026

विश्व अपराध कथा साहित्य के शैदाईयों में शायद ही कोई ऐसा होगा, जो डैशिएल हैमेट के नाम से अनजान हो। मगर हैमेट महज़ एक लेखक नहीं, बल्कि ज़ुर्म की दुनिया के पहले सच्चे गवाह थे। कागज़ पर स्याही बिखेरने से पहले उन्होंने ख़ुद ‘पिंकरटन डिटेक्टिव एजेंसी’ के लिए बरसों तक सड़कों पर असली मुज़रिमों का पीछा किया था। यही वज़ह रही कि जब उन्होंने कलम चलानी शुरू की, तो जासूसी उपन्यासों की रवायत हमेशा के लिए बदल गई। उन्होंने शरलॉक होम्स या अगाथा क्रिस्टी के किरदारों की तरह मख़मली कमरों में बैठकर पहेलियाँ नहीं सुलझाईं, बल्कि अदब को उस ज़हरीली हवा, धूल और बारूद के बीच ले गए, जहाँ ज़ुर्म पनपता है, पनाह लेता है। हैमेट का मानना था कि खून बहता है तो कपड़े गंदे होते हैं और जब इंसान बिखरता है, तो उसका ज़मीर घुटनों पर आ जाता है।

उनकी उँगली हमेशा वक़्त की नब्ज़ पर रही। 1920 के दशक का अमेरिका जिस पूंजीवाद, धोखे और सियासी सड़ांध के दौर से गुज़र रहा था, हैमेट ने उसे बिना किसी लाग-लपेट के पन्नों पर उतार दिया। उनके जासूस, चाहे वो ‘सैम स्पेड’ हो या ‘कॉन्टिनेंटल ऑप’, कोई दूध के धुले नायक नहीं थे। वे ख़ुद चालबाज़, बेरहम, हरजाई और थके, उकताए हुए लोग थे, जो जानते थे कि इस दुनिया में मुक़म्मल इंसाफ़ जैसी कोई चीज़ नहीं होती। हैमेट ने दुनिया को सिखाया कि असल जासूसी अंधेरी गलियों में लगने वाली ठोकरों और अपनों से मिलने वाले धोखे का नाम है।

इसी बेबाक और सियाह मिज़ाज की गवाह है उनकी मशहूर तिकड़ी–‘रेड हार्वेस्ट’, ‘द डेन कर्स’ और ‘माल्टीज़ फाल्कन’।

हिंदी जगत के लिए यह किसी तोहफ़े से कम नहीं है कि इन शाहकारों को सुश्री सबा ख़ान ने अपनी क़लम की नफ़ासत से सँवारा है। उन्होंने हैमेट की उस तेज़-तर्रार धारदार ज़ुबान और थ्रिलर के मिज़ाज को इस तरह ढाला है कि पढ़ते हुए आपको अनुवाद का अहसास तक नहीं होगा। अगर आप ज़ुर्म के पीछे छिपी इंसानी फ़ितरत के असली मुसाफ़िर हैं, तो हैमेट की यह जादुई और ख़तरनाक दुनिया आपका इंतज़ार कर रही है।

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