16/07/2026
सरकारी बाबू यदि बिना रोक टोक के ठीक से काम करे तो भारत देश फिर से सोने की चिड़ियाँ बन सकता है।
21 वर्ष में 25 ट्रांसफर झेलने वाले, एक सत्यनिष्ठ, कर्तव्यपरायण IAS अधिकारी इनका नाम है तुकाराम मुंढे, जो आज पूरे देश में ख्याति पा रहे हैं। इनके नाम से ही मिलावटी लोगों में इतना खौफ है कि लोग भय के मारे मिलावटी सामान स्वयं नष्ट कर रहे हैं।
तुकाराम नाम में ही कुछ बात है! संत तुकाराम जी से ले कर तुकाराम ओंबले जी ने जो देश पर उपकार किया, और अब महाराष्ट्र के फूड कमिश्नर तुकाराम जी!
पिछले कुछ हफ्तों में आपने शायद इनका नाम सुना होगा। इन्हें हाल ही में राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) का आयुक्त नियुक्त किया गया है। पदभार संभालने के बाद से एफडीए अवैध, नकली, कृत्रिम और मिलावटी उत्पादों पर छापेमारी करते हुए पूरी तरह से सक्रिय है। कृत्रिम दूध नेटवर्क और मिलावटी पनीर से लेकर अवैध गुटखा और अनहाइजीनिक होटलों तक, कोई भी चीज उनकी नजर से नहीं बच पाई है।
मुंढे ने स्पष्ट कर दिया है कि बड़े-बड़े नाम भी छूट नहीं पाएंगे। उनके विभाग ने मुंबई को उस समय चौंका दिया जब उन्होंने 73 साल पुराने मरीन ड्राइव आइसक्रीम पार्लर, के. रुस्तम एंड कंपनी जैसे प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों के साथ-साथ शालीमार हॉस्पिटैलिटी, नूर मोहम्मदी होटल और रहमानिया रेस्टोरेंट जैसे प्रसिद्ध भोजनालयों के खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिए। अचानक निरीक्षणों में जीवित कीड़े-मकोड़े और एक्सपायर्ड सामग्री सहित स्वच्छता के गंभीर उल्लंघन पाए गए थे।
उनकी कार्रवाई का डर इतना ज्यादा है कि, महज दो दिन पहले, एफडीए की संभावित छापेमारी की अफवाहें फैलने के बाद डेयरी किसानों को सैकड़ों लीटर कृत्रिम दूध बहाते हुए वीडियो में पकड़ा गया था।
21 साल के करियर में यह उनका 25वां तबादला है, जो राजनीतिक दबाव के आगे न झुकने के उनके दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। इससे मन में यह सवाल उठता है कि अगर सिर्फ एक आईएएस अधिकारी इतना बदलाव ला सकता है, तो अगर हर अधिकारी उनके जैसा दृढ़ निश्चयी और सक्रिय होता, तो हमारा देश आज कहाँ होता?