10/05/2026
Mother’s Day पर अक्सर लोग अपनी माँ के साथ तस्वीरें साझा करते हैं, उन्हें गिफ्ट देते हैं और एक दिन खास तरीके से मनाते हैं। लेकिन कुछ माँएँ ऐसी होती हैं, जिनकी पूरी जिंदगी ही एक प्रेरणा बन जाती है।
आज मैं राशिद ऐसी ही एक माँ की कहानी बता रहा हूँ, जिनका संघर्ष मैंने अपनी आँखों से देखा है।
मैं बचपन से इस परिवार को जानता हूँ। उनका बेटा आमिर मेरे साथ स्कूल में पढ़ता था। हम साथ खेलते थे, साथ स्कूल जाते थे। उस समय शायद हम इतने छोटे थे कि जिंदगी की परेशानियों को पूरी तरह समझ नहीं पाते थे, लेकिन आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो एहसास होता है कि उस घर ने कितने मुश्किल हालात देखे थे।
बिहार के Motihari का यह परिवार बेहद साधारण था। घर में 8 बच्चे थे, जिनमें 6 बेटियाँ थीं। परिवार की आर्थिक हालत बहुत कमजोर थी। कई बार ऐसा समय भी आता था जब दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो जाता था।
लेकिन गरीबी से भी बड़ा संघर्ष था समाज की सोच। गाँव में लोग ताने देते थे — “इतनी बेटियाँ हैं, इनसे काम करवाओ, इतना पढ़ा कर क्या होगा?”
लेकिन मैंने देखा कि इस परिवार ने कभी हार नहीं मानी। उनके माता-पिता ने बेटियों को बोझ नहीं समझा। उस दौर में जब गाँवों में लड़कियों की पढ़ाई को जरूरी नहीं माना जाता था, तब उन्होंने अपनी बेटियों को स्कूल भेजा। साबिया, अल्फिया और उनकी बहनें गाँव की पहली लड़कियों में थीं जो स्कूल जाती थीं। मेरी बहन सोनी की अल्फिया से अच्छी दोस्ती थी, हम सभी लोग साथ में स्कूल जाते थे।
उनकी माँ Kahkashan Parveen को मैंने हमेशा मेहनत करते देखा। एक पुरानी सिलाई मशीन पर घंटों बैठकर कपड़े सिलना, बच्चों की फीस जमा करना, घर संभालना — यही उनकी जिंदगी थी।
आज भी मुझे वो दिन याद हैं जब लोग सिर्फ इसलिए बातें बनाते थे क्योंकि घर में बेटियाँ ज्यादा थीं। लेकिन उनकी माँ ने कभी किसी की बातों को अपने बच्चों के सपनों के बीच नहीं आने दिया।
धीरे-धीरे उन्होंने सिलाई का काम बढ़ाया। फिर शहर जाकर एक छोटी-सी टेलर शॉप खोली। उस छोटी दुकान में सिर्फ कपड़े नहीं सिले जाते थे, वहाँ बच्चों का भविष्य तैयार हो रहा था।
वक्त बदला। बच्चे बड़े हुए। पढ़ाई पूरी की। अपने पैरों पर खड़े हुए। आज Sabia UAE में अपने परिवार के साथ खुशहाल जिंदगी जी रही हैं। परिवार के दूसरे बच्चे भी अच्छी जगहों पर सेटल्ड हैं। आमिर भी आज अपना Political Company चला रहा है और अपनी मेहनत से एक नई पहचान बना रहा है।
लेकिन सबसे खास बात यह है कि उनकी माँ आज भी काम करती हैं। अब वो छोटी सिलाई मशीन एक बड़े बुटीक में बदल चुकी है। कई लोग उनके साथ काम करते हैं। संघर्ष कम हुआ है, लेकिन मेहनत करने की आदत आज भी वैसी ही है।
मैंने अपनी जिंदगी में कई लोग देखे हैं, लेकिन एक माँ को इस तरह अपने बच्चों के लिए लड़ते हुए बहुत कम देखा। शायद इसलिए Mother’s Day पर मुझे सबसे पहले उन्हीं का चेहरा याद आता है।
हम अक्सर अपनी माँओं के त्याग को सामान्य समझ लेते हैं। लेकिन सच यह है कि एक माँ अपने बच्चों के लिए जितना सहती है, उतना शायद दुनिया में कोई और नहीं सह सकता।
आज Mother’s Day पर अगर आपकी माँ आपके साथ हैं, तो उनके पास बैठिए। उनसे बात कीजिए। उनका शुक्रिया अदा कीजिए। क्योंकि कई बार “शुक्रिया माँ” जैसे छोटे शब्द भी उनके लिए दुनिया की सबसे बड़ी खुशी बन जाते हैं। ❤️