Live Update

Live Update I bring the latest updates from all across India!

23/04/2022

1992 में बाबरी ढांचा गिरने के बाद कांग्रेस सरकार ने आनन-फानन में उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश,मध्य प्रदेश और राजस्थान की बीजेपी सरकारों को भी बर्खास्त कर दिया, जबकि इन तीनों राज्यों का अयोध्या के मामले से कोई लेना-देना नहीं था।

बर्खास्त राज्य सरकारें तुरंत सुप्रीम कोर्ट गई लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने लोकतंत्र के साथ किए गए जघन्य अपराध को इस लायक भी नहीं समझा कि वह तुरंत सुनवाई कर सके।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने में काफ़ी समय लगाया और जजमेंट देने में टोटल 10 महीने लगा दिए। इस दरमियान इन सभी राज्यों में फिर से चुनाव हो गए और नई सरकार का भी गठन हो गया।

बाद में अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा एक हद तक उत्तर प्रदेश सरकार को बर्खास्त करना जायज था लेकिन राजस्थान, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश की बीजेपी सरकार को बर्खास्त करना पूरी तरह से गलत था लेकिन चुकी अब इन राज्यों में चुनाव हो चुके हैं इसलिए अब हम कुछ नहीं कर सकते।

लेकिन यही सुप्रीम कोर्ट सरकारी जमीनों और गोचर की जमीनों पर कब्जा जमाए मुस्लिमों के लिए तुरंत सुनवाई करता है और आधे घंटे में आर्डर निकाल कर दे देता है।

कर्नाटक के रायचूर जिले में सड़क चौड़ी करने के लिए एक मीनार की मस्जिद को तोड़ा गया तो पुराने खम्बे सामने आ गये।इन खम्बो की ब...
16/04/2022

कर्नाटक के रायचूर जिले में सड़क चौड़ी करने के लिए एक मीनार की मस्जिद को तोड़ा गया तो पुराने खम्बे सामने आ गये।
इन खम्बो की बनावट और शिल्प कला मन्दिर की लगती है जो वहां के लोगो के पुरखो की उस बात को सत्य का प्रकाश देती है की वहां का प्रसिद्ध वीरभद्रेश्वर मन्दिर का मूल स्थान एक जमाने में यही था, जिस पर यह मीनार बनाई गयी थी।
इन जिहादियों ने बहुत घाव दिए सनातन को, इन्होंने बनाया कुछ नहीं सिर्फ सनातनी मंदिरों को तोड़कर उन पर ही मीनार के डंडे खड़े किए है। यह सिर्फ कर्नाटक ही नहीं भारत के हर कोने में यह जिहादी घाव मिलेंगे। अयोध्या मथुरा काशी तो बड़े तीर्थ स्थल हैं पर इनके अलावा भी पूरे देश में हजारों लाखों हिंदू मान बिंदुओं को खंडित किया है इन जिहादियों ने। भारत के किसी भी जिले में चले जाओ किसी भी प्रदेश में चले जाओ किसी भी सनातनी तीर्थ स्थल पर चले जाओ आपको जिहादी उन्माद के निशान दिख जाएंगे। यह मजहबी स्थान ही हिंदू मंदिर नहीं है बल्कि जो जिहादी रात दिन उन्माद करते हैं उनके बाप दादा भी हिंदू थे और बहन बेटियों की इज्जत और खुद की जान बचाने के लिए धर्म बदला जिहादियों के बापदादा ने भी, इनको भरोसा ना हो तो इनके भाट की पोठिया निकाल ले । खुद भी हिंदू निकलेंगे और इन्होंने जो मीनारें खड़ी की है जब उनकी खुदाई करोगे तो वह भी हिंदू मंदिर ही निकलेंगे यह मामला सिर्फ कर्नाटक का नहीं भारत के हर कोने का है।
जय_श्री_राम ❤️🙏
साभार

06/04/2022

कोई भी पूछे कि जब कश्मीरी हिंदुओं का पलायन हुआ 1990 में, तब किसकी सरकार थी, तो साफ बताना है - वी. पी. सिंह की और गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद थे। सईद का नाम भूलना नहीं है।
(बंदा कितना कमिटेड था, इसे जरा सोचिए कि दिसंबर 1989 में गृह मंत्री बना, सबसे पहले अपनी ही बेटी के अपहरण के नाम पर कश्मीरी आतंकवादियों को छुड़वाया, फिर दो महीने के अंदर ही घाटी से कश्मीरी हिंदुओं को भगाने का इंतजाम कर दिया।)
फिर वे बोलेंगे कि सरकार में भाजपा भी तो थी, तो उन्हें साफ बोलना है कि अपना सामान्य ज्ञान (जीके) ठीक करो, भाजपा उस सरकार में नहीं थी।
फिर वे पूछेंगे सरकार किसके समर्थन पर थी, तो बताना है कि वामपंथियों के समर्थन पर थी! (उन्हें बस भाजपा का समर्थन याद रहता है तो आप भी बस वामपंथियों का समर्थन याद रख लीजिए!)

- Rajeev Ranjan

01/04/2022

.... ट्रेन का शोर डिस्टर्ब नही करता तो खर्राटे क्यों करते हैं?

)) मेरा एक मित्र लंबी ट्रेन यात्रा करके घर पहुंचते ही खड़े खड़े सोफे में गिर गया। मैंने कहा ऐसी क्या थकान हो गई यार। उसने कहा यार रात भर सो नहीं पाया क्योंकि बगल वाली सीट में एक महिला के खर्राटों ने रातभर सोने नहीं दिया।

)) मैंने कहा यार ठीक है एसी में बैठे थे पर ट्रेन भी तो चलते वक्त आवाज कर ही रही होगी, दूसरी ट्रेन जब क्रॉस होती होंगी तब भी तो आवाज आती होगी, तो सिर्फ खर्राटों का बहाना क्यों, ये बोलो चलती ट्रेन में नींद नहीं आती। दोस्त बोला नहीं ट्रेन की आवाज डिस्टर्ब नहीं करती उसकी तो आदत होती है।

)) मैंने ध्यान से सोचा वाकई ट्रेन की आवाज ज्यादातर लोगों को नींद में डिस्टर्ब नहीं करती। मुंबई में तो लोकल हर मिनट निकलती है फिर भी लोग सालों साल रेलवे लाइन के किनारे अपार्टमेंट में रहते हैं, मजे से सोते हैं। मेरे एक रिश्तेदार जुहू बीच के पास रहते हैं और उनके घर रात भर बोइंग और जंबो एयरक्रॉफ्ट की आवाजें आती हैं पर वो मजे से सोते हैं। दरअसल ट्रेन की आवाज उसका स्वाभाविक गुण है इसलिए उस आवाज में लोगों को नींद आ जाती है, पर उससे कम तीव्रता वाले खर्राटे लोगों को डिस्टर्ब करते हैं और नींद में खलल डालते हैं। क्योंकि खर्राटे आना किसी का मूल स्वभाव या स्वाभाविक गुण नहीं हो सकता वो शारीरिक परेशानी की वजह से आते हैं।

)) जैसे करेला कड़वा लगने के बावजूद हम उसे खाते हैं क्योंकि हमें मालूम है कि कड़वाहट करेले का मूल गुण है, पर अगर खीरा या ककड़ी कड़वी लगे तो हम उसे तुरंत उगल देते हैं क्योंकि खीरे का कड़वा होना उसका मूल स्वाद नहीं है, बल्कि खराब होने का प्रमाण है।
.. तो मॉरल ऑफ द स्टोरी यही है स्वाभाविक गुण ही दरअसल आपके व्यक्तित्व का आइना होते हैं। नफरत और बेईमानी किसी भी व्यक्ति या शख्स का स्वाभाविक गुण नहीं होते वो प्रकृति पदत्त नहीं हैं इसलिए इन्हें Deformity या अवगुण कहा जाता है। कड़वी ककड़ी की तरह इसका पता भी जल्दी लग जाता है।...
.. और इसलिए नफरती बात कहना, नफरती काम करना या लिखावट में नफरत उगलने को अपना स्वभाव मत बनाइए. ये अस्वाभाविक है तुरंत पता चल जाता है और उसके बाद लोग कड़वे खीरे की तरह आपके करीबी आपको उगल देंगे, आपकी सेहत आपको धोखा दे देगी, आपका परिवार भी इससे बुरी तरह प्रभावित होगा यानी सब कुछ अस्वाभाविक होगा। मान लीजिए स्वाभाविक रहिए, पानी की तरह बहिए, मूल स्वभाव को अपनाइए और हर क्षेत्र में सफलता पाइए, हर महफिल में सराहे जाइए।

Arun Panday

"मेरा मरना शायद मेरी बेगुनाही साबित कर दे"राजस्थान के दौसा जिले की डॉक्टर अर्चना शर्मा का यह सुसाइड नोट रुला देने वाला ह...
30/03/2022

"मेरा मरना शायद मेरी बेगुनाही साबित कर दे"

राजस्थान के दौसा जिले की डॉक्टर अर्चना शर्मा का यह सुसाइड नोट रुला देने वाला है। एक प्रसूता की मौत पर अर्चना के खिलाफ हत्या का केस दर्ज हो गया। डॉक्टर अर्चना डिप्रेशन का शिकार हो गईं। डॉक्टर अर्चना कहतीं रहीं कि मौत medical negligance से नहीं बल्कि medical complication से हुई। गलती न होने पर भी प्रताड़ना से तंग आकर अर्चना ने जान दे दी। सुसाइड नोट में परिवार से कहा - मेरा मरना शायद मेरी बेगुनाही साबित कर दे...
मेरे बच्चों को मां की कमी महसूस न होने देना.
Via - Navneet Mishra

और अरविंद केजरीवाल सदन में हंसते हैं...
28/03/2022

और अरविंद केजरीवाल सदन में हंसते हैं...

26/03/2022

आज से बस बीस पचीस दिन पूर्व उत्तर प्रदेश मे बहुत जबरदस्त घमासान चल रहा था - चुनावी।

ढेरों कट्टर हिन्दू मित्र चुनाव के समय कोई इस वजह से कि उसके नेता को टिकट न मिला, तो कोई सरकारी नौकरी / पेंशन की वजह से, तो कोई जातीय समीकरण से हिन्दूवादी चोला उतार चुका था।

मैंने चुनाव के समय भी यही कहा था और अब फिर कह रहा हूँ, हिंदुवों का बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि वह वोट डालते समय हिन्दू नहीं रहते। यदि योगी जी जैसे व्यक्ति से कोई हिन्दूवादी असन्तुष्ट हो तो उसका कुछ नहीं हो सकता। पर जो है सो है।

इन चुनावों मे जीत दिलाई मोदी जी के राशन और योगी जी के प्रशासन ने। साथ ही जीत दिलाई जातियों का छाता बना उसे हिन्दुत्व की पतली डोरी से बांधे रखने की कला ने।

भाजपा नेत्रत्व ने योगी जी के प्रशासन को सराहा और दूसरी बार वह मुख्य मंत्री बने। साथ ही Keshav Prasad Maurya जी को चुनाव हारने के पश्चात भी दुबारा फिर से उप मुख्य मंत्री बनाया क्योंकि यह उनका कौशल था कि अति पिछड़ी जातियाँ एकजुट रहीं भाजपा के पीछे। यद्यपि सपा ने ताकत लगा राखी थी और ऐन मौके पर भाजपा मे स्वामी प्रसाद के नेत्रत्व मे मची भगदड़ से संदेश भी गलत जा रहा था।

वहीं मीडिया के एक वर्ग ने योगी जी ठाकुर वादी हैं के नाम से ब्राह्मण बनाम ठाकुर की खाई पाँच साल खींचने की कोशिश की। ऊंचाहार हत्या कांड हो या गृह मंत्री अजय मिश्र के बेटे के किसानों के साथ हुई मुठभेड़ में चार भाजपा कार्यकर्ताओं के मरने का मामला। विकास दुबे जैसे कांड हों - इन सबमें जबरदस्त ब्राह्मण बनाम भाजपा खाई खींचने की कोशिश की गई। इन सारे ही मुद्दों पर भाजपा की ओर से Brajesh Pathak पूरे पाँच साल सबसे बड़े ब्राह्मण नेता बन कर खड़े रहे। जहां जरूरत थी वहाँ उन्होंने कार्यकर्ताओं / पीड़ित का साथ दिया और जहां मुकाबला करना था तो विकास दुबे जैसे केस मे जम कर सरकार की ओर से बचाव भी किया। भले ही उप मुख्य मंत्री दिनेश शर्मा जी थे, पर जमीन पर ब्राह्मणों के बीच पाठक जी ही दिखते थे सब जगह। इन्हीं सबका परिणाम रहा कि अंत तक आते आते चुनावों मे ब्राह्मण वोट अधिसंख्य भाजपा मे ही गया।

और इसी के पुरस्कार स्वरूप उन्हें भी उप मुख्यमंत्री बनाया गया।

यकीन मानिए यदि नॉन यादव ओबीसी जातियाँ या ब्राह्मण वोट थोड़ा भी उधर खिसक जाता तो आज न योगी जी मुख्य मंत्री बनते न हम आप यह समीक्षा लिख रहे होते।

वर्तमान भाजपा पेरफ़ॉर्मेंस बेस्ड भाजपा है। यह वह भाजपा है जो कांग्रेस से हेमंत बिसवा को लाकर उन्हें आसाम का मुख्य मंत्री और नॉर्थ पूर्वी का सबसे बड़ा भाजपा नेता बनाती है। यूपी मे भी जो मंत्री उपयोगिता / पेरफ़ॉर्मेंस के स्केल पर खरे नहीं उतरे, वह भले ही योगी जी को प्रिय हों या मोदी जी को उन्हें हटाया गया, नए लोगों को मौका दिया गया।

अब फिर से मीडिया/ एक वर्ग शक्रिय हो जाएगा डिवीजन क्रीऐट करने में। पहले ठाकुर / ब्राह्मण, अगड़ा / पिछड़ा डिवीजन था। अब मोदी / योगी मे संघर्ष, मुख्यमंत्री / उप मुख्य मंत्री मे संघर्ष जैसे मुद्दे चलेंगे कुछ दिनों तक।

पर अंततः बात यही है कि यह जीत जिनकी है, उन्हें इसका श्रेय दिया गया। यही एक संतुलित लोकतान्त्रिक दल मे होता है। भाजपा ही एक ऐसा दल है, जहां आप अपनी काबिलियत के आधार पर एक कार्यकर्ता बन कर आते हैं और प्रधान मंत्री बन जाते हैं। लोकतंत्र है, जिसने अच्छे परिणाम दिए, उन्हें उसका पुरस्कार दिया जाना स्वाभाविक है, स्वस्थ लोकतान्त्रिक दल की निशानी है।

Nitin Tripathi

किसी स्त्री का बलात्कार करने के उपरांत आरा मशीन से उसे दो भागों में चीर देने की किसी घटना के बारे में आपने सुना है ? और ...
25/03/2022

किसी स्त्री का बलात्कार करने के उपरांत आरा मशीन से उसे दो भागों में चीर देने की किसी घटना के बारे में आपने सुना है ? और दो भाग भी ऐसे कि उसके गुप्तांग से आरी चलाते हुए दोनों वक्ष स्थलों को दो भाग में करते हुए माथे को दो भाग में चीर देना .
सुना है आपने ?
नहीं ???

लेकिन आपने फिलिस्तीन में , सीरिया में शरणार्थियों के बुरे हाल के बारे में जरूर सुना होगा. सुना है कि नहीं ? कई लोग तो फिलिस्तीन पर कवितायेँ लिख कर महान भी बन गए।

खैर!!छोडिये उसको जिसके बारे में आपने सुना है, आइये!उसके बारे में जानें और तय करें कि हमने उसके बारे में क्यों नहीं सुना. किसी स्त्री के साथ होने वाली इतनी लोमहर्षक घटना आप तक क्यों नहीं पहुँच पायी? किसी ने उसकी इस खौफनाक मौत पर अफ़सोस क्यों नहीं जाहिर किया?

उस स्त्री का नाम था गिरिजा टिक्कू . जो 25 वर्ष की एक ख़ूबसूरत महिला थी एवं कश्मीर के बांदीपोरा में एक शिक्षिका थी . 1990 में जब आतंकवाद बढ़ा तो वह बांदीपोरा छोड़ कर बाहर निकल गयी लेकिन वह अपना सामान नहीं ले जा पायी थी. एक दिन किसी के यह कहने पर कि अब वहां स्थिति सामान्य है, वह बांदीपोरा अपना सामान लाने गयी. लेकिन वहां से वह वापस नहीं आ पायी. एक शिक्षिका जो अपना सामान लाने गयी थी का भीड़ के द्वारा बलात्कार किया गया . लेकिन बलात्कार इस देश में कौन सी बड़ी घटना है , यह तो होता ही रहता है..... आपने सुना नहीं लड़कों से गलतियाँ हो जाती हैं . ......

लेकिन बलात्कार के बाद जो हुआ वह अत्यंत वीभत्स था एवं सम्पूर्ण मानव इतिहास को कलंकित करने वाला था . बलात्कार के बाद उसके शरीर को उसके गुप्तांगो के पास से आरी चलाकर दो भागों में काट दिया गया एवं सड़क के किनारे फ़ेंक दिया गया ..... लेकिन इतनी बड़ी घटना अखबारों के मुख्य पृष्ठ पर अपना स्थान नहीं बना पायी . देश के लोगों को इसकी खबर नहीं हुई. कोई कैंडल मार्च नहीं निकला ... कोई सभा नहीं हुई..... क्यों ?

कश्मीर की आज़ादी के नाम पर एक स्त्री से ऐसा व्यवहार क्या भुला देने योग्य था ? लेकिन ऐसा हुआ।

यहाँ यह बात दृष्टव्य है कि यह घटना 25 जून 1990 की है , उस समय V P singh प्रधान मंत्री थे एवं मुफ़्ती मोहम्मद सईद उनके गृह मंत्री।

आपको बताता चलूँ कि 19 जनवरी 1990 को जब कश्मीर में मस्जिदों से यह घोषणा की गयी कि कश्मीर के हिन्दू काफ़िर हैं एवं वे कश्मीर छोड़ दें या इस्लाम कबूल कर लें या मारे जायें और जो पहला विकल्प चुने वे अपनी औरतों को छोड़ कर जाएँ ,

विषय यह है कि गिरिजा टिक्कू की खबर आप तक कभी क्यों नहीं पहुंची . एक व्यक्ति को अभी हाल ही में फोर्सेज ने जीप के आगे बिठाकर घुमाया तो इसपर काफी चर्चा हुई एवं उसके मानवाधिकार पर गहरी चिंता जाहिर की गयी तो फिर गिरिजा टिक्कू के मानवाधिकार का क्या हुआ? उसके परिवार पर क्या बीती होगी? मैं अभी जब उसके यंत्रणा की कल्पना करता हूँ तो सिहर उठता हूँ ......

कश्मीर मांगे आज़ादी का समर्थन करने वालों से मैं पूछना चाहता हूँ कि आपने कभी गिरिजा टिक्कू के बारे में क्यों नहीं बातें की ? आपको कभी गिरिजा टिक्कू के बारे में क्यों पता नहीं चला? कश्मीर की आजादी किसके लिए ? कश्मीर मांगे आज़ादी या कश्मीर मांगे निज़ामे मुस्तफा ? का नारा लगाने वाले या कश्मीर मांगे आज़ादी का समर्थन करने करने वाले, एक बार गिरिजा टिक्कू को जरूर याद कर लें!!!

मैं सोचता हूँ कभी गिरिजा टिक्कू के ऊपर एक कविता लिखूंगा. कितना दर्द , कितनी असह्य पीड़ा से गुजरी होगी वह, जब उसके शरीर को शर्मशार करने के बाद आरी से दो भागों में काटा जा रहा होगा और उन्मादी भीड़ मज़हबी नारे लगा रही होगी एवं चिल्ला रही होगी “कश्मीर मांगे आज़ादी”. यह सोचकर ही मेरी कलम रूक जाती है . मैं कभी इससे ज्यादा नहीं सोच पाता हूँ।

यह सत्य है गिरिजा टिक्कू तुम्हारी पीड़ा को मैं शब्द दे सकूं इतनी क्षमता नहीं है अभी मुझमें . लेकिन एक दिन मैं लिखूंगा तुम्हारे लिए एक छोटी सी कविता. ना ना उस लोमहर्षक घटना के बारे में नहीं बल्कि उससे पहले के बारे में जब तुम अपने पिता की एक प्यारी बेटी थी और कश्मीर की वादियों में उन्मुक्त तितली की भांति घुमती फिरती थी अपने भविष्य के सपने बुनते हुए. तुम्हारी उस ख़ुशी के बारे में जब तुम्हे शिक्षिका की नौकरी मिली थी और हाँ तुम्हारे प्रेम के बारे में . मैं लिखूंगा गिरिजा टिक्कू यह वादा रहा।

मेरा मन उनके प्रति घृणा से भर जाता है, जो पत्थरबाजों की लड़ाई लड़ने सुप्रीम कोर्ट चले जाते हैं लेकिन कभी तुम्हारी चर्चा नहीं करते ....
मैं शर्मिंदा हूँ ......

अपनी और अपनों की सुरक्षा के लिए इन पिशाचों के भयावह पैशाचिक कृत्यों को जानना ज़रूरी है।

मूल पोस्ट : Manoj Muntashir जी 🙏🏼

Address


Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Live Update posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

  • Want your business to be the top-listed Media Company?

Share