25/03/2026
“जब अपराधी VIP बन जाए… और सवाल पूछने वाले कटघरे में खड़े कर दिए जाएं — तब समझ लीजिए, समस्या बहुत गहरी है।”
एक ऐसा व्यक्ति, जिसे नाबालिग लड़कियों के साथ दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध में आजीवन कारावास की सज़ा मिल चुकी है…
आज मेडिकल आधार पर ज़मानत पर बाहर है — और VIP सुरक्षा के साथ पवित्र धार्मिक स्थलों के दर्शन कर रहा है।
ये सिर्फ एक खबर नहीं…
ये उस सिस्टम का सच है, जहां अपराध से ज़्यादा ‘पहचान’ मायने रखती है।
धर्म… जो इंसान को बेहतर बनाने के लिए था,
आज कुछ लोगों के लिए ढाल बन गया है।
और दूसरी तरफ, अगर कोई मुसलमान गंगा के किनारे इफ्तार कर ले, तो तुरंत ‘भावनाएं आहत’ होने की बात उठने लगती है — लेकिन यहां, ऐसे गंभीर आरोपों वाले व्यक्ति के लिए वही संवेदनाएं अचानक खामोश हो जाती हैं।
तो सवाल सीधा है —
क्या हमारी भावनाएं भी अब “चयनात्मक” हो चुकी हैं?
अगर हां, तो ये सिर्फ पाखंड नहीं…
ये एक खतरनाक सामाजिक बीमारी है।
और अगर नहीं…
तो फिर सच से भागना बंद कीजिए, और सवालों का सामना कीजिए।
क्योंकि जब न्याय कमजोर होता है,
तो समाज मजबूत नहीं रह सकता।
(अगर ये सवाल चुभे… तो समझिए, कहीं न कहीं सच मौजूद है।)