03/09/2026
रामायण के मुख्य प्रतिनायक लंकापति रावण को बुराई का प्रतीक माना जाता है, लेकिन यह भी सत्य है कि वह अपने समय का सबसे बड़ा विद्वान, महापराक्रमी योद्धा और भगवान शिव का परम भक्त था।
रावण के जीवन से जुड़े कुछ सबसे रोचक और अनसुने तथ्य यहाँ दिए गए हैं:
ब्रह्मा जी का वंशज:
रावण केवल एक राक्षस नहीं था। उसके पिता ऋषि विश्रवा एक ब्राह्मण थे (जो प्रजापति पुलस्त्य के पुत्र और ब्रह्मा जी के पौत्र थे), जबकि माता कैकसी राक्षस कुल की थीं। इसी कारण रावण में ब्राह्मण और राक्षस दोनों के गुण मौजूद थे।
भगवान शिव ने दिया था 'रावण' नाम: जन्म के समय रावण के दस सिर होने के कारण उसका नाम 'दशानन' रखा गया था। भगवान शिव की कठोर तपस्या करते हुए जब उसने अपना सिर अर्पित करना शुरू किया, तब शिव जी ने उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर उसे 'रावण' नाम दिया था।
दसों सिरों का प्रतीक:
रावण के दस सिरों को 6 शास्त्रों और 4 वेदों के अपार ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। साथ ही, यह मानवीय भावनाओं और अहंकार का भी प्रतिनिधित्व करते हैं।
रथ में घोड़ों की जगह गधे:
राजा-महाराजाओं के रथ आमतौर पर घोड़े खींचते थे, लेकिन वाल्मीकि रामायण के अनुसार, रावण के रथ में घोड़ों के बजाय गधे जुते हुए थे।
महान वैज्ञानिक और कलाप्रेमी: रावण 64 कलाओं में निपुण था। वह न केवल वेदों और संस्कृत का प्रकांड विद्वान था, बल्कि एक असाधारण वीणा वादक भी था।
नवग्रहों को बना लिया था बंदी:
रावण अपने पुत्र मेघनाद को अजेय बनाना चाहता था। इसके लिए उसने नवग्रहों को आदेश दिया कि वे मेघनाद की कुंडली में शुभ स्थानों पर बैठें। जब शनिदेव ने ऐसा करने से इनकार किया, तो रावण ने अपने बल से उन्हें बंदी बना लिया था।
कुबेर से छीना पुष्पक विमान:
देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर, रावण के सौतेले बड़े भाई थे। रावण ने कुबेर को युद्ध में हराकर न केवल सोने की लंका पर अपना आधिपत्य जमाया, बल्कि उनका अद्भुत 'पुष्पक विमान' भी छीन लिया था।
कांवड़ यात्रा की शुरुआत:
कई धार्मिक कथाओं के अनुसार रावण को ही पहला 'कांवड़िया' माना जाता है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उसने कांवड़ में जल भरकर शिवलिंग का जलाभिषेक किया था। झारखंड के देवघर स्थित प्रसिद्ध 'बैद्यनाथ धाम' ज्योतिर्लिंग की स्थापना की कथा भी सीधे रावण से ही जुड़ी हुई है।
अप्सरा रंभा का शाप:
माता सीता को बंदी बनाने के बाद भी रावण ने उन्हें कभी बलपूर्वक नहीं छुआ। इसका कारण अप्सरा रंभा द्वारा दिया गया एक शाप था। रंभा ने रावण को शाप दिया था कि यदि वह किसी भी स्त्री को उसकी इच्छा के विरुद्ध स्पर्श करेगा, तो उसके सिर के टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे।