Shivesh Pratap

Shivesh Pratap Author | IIM Cal. Alumnus | Television Panelist | Tech-Mgmt. He is an established blogger for 8 years and a renowned author of books. Regards/ आभार

Consultant | Senior Research Fellow, SPMRF | Literature Enthusiast | स्वयंसेवक | Public Policy | Vision Viksit Bharat देश भर की 40 पत्र-पत्रिकाओं में देश के विकास और संस्कार पर सतत लेखन करने वाले शिवेश प्रताप एक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर हैं एवं IIM कलकत्ता से प्रबंधन की शिक्षा प्राप्त कर एक मैनेजमेंट कंसलटेंट के रूप में कार्य करने के साथ ही 8 वर्षों से एक स्थापित ब्लॉगर, पुस्तकों के ख्यातिप्राप्त ल

ेखक, साहित्य एवं संस्कृति प्रेमी हैं।

लोकप्रिय हिंदी वेबसाइट ShiveshPratap.com इंटरनेट पर प्रतिमाह 50 लाख बार पढ़ा जाता है। संस्कृति, संस्कार, मानवीय अनुभवों, जिज्ञासाओं, रोचक जानकारियों, साहित्यिक चिंतन, संस्कृत श्लोकों तथा समसामयिक विचारों का यह सुन्दर मंच है।

ShiveshPratap.com इंटरनेट पर संस्कृत श्लोकों का हिंदी एवं अंग्रेजी अर्थ सहित सबसे बड़ा एवं प्रामाणिक संकलन है। साथ ही प्रेरणादायक लेख, अनमोल वचन आदि का भी एक सुन्दर संकलन है।

Shivesh Pratap, who has been writing continuously on the development and culture of the country in 40 newspaper & magazines across the country, is an electronics engineer and IIM Calcutta alumnus and working as a Management Consultant. The popular Hindi website ShiveshPratap.com have 50 lakh page views every month on the Internet. This is a beautiful platform for culture, human experiences, curiosities, interesting information, literary thought, Sanskrit shlokas and contemporary thoughts. ShiveshPratap.com is the largest and most authentic platform for compilation of Sanskrit shlokas with Hindi and English meanings. Along with this, there is also a beautiful collection of inspirational articles.

30/08/2026

39 states , 853 cities, 6000 delegates, 250+ students from various universities, 250 organisations from USA have all come together to celebrate at MSG NYC.

29/08/2026
27/08/2026

At Khelo India Dialogue, PM Modi Ji Narendra Modi highlighted the importance of sports, youth talent and preparing India for the 2036 Olympics. 🏆

Play More. Dream Bigger. Build Viksit Bharat 2047. 🇮🇳🏅
Sports Power + Youth Power = Viksit Bharat.” 🇮🇳
Vision Viksit Bharat

The Following

17/08/2026

We congratulate Shri Ajay Sharma, Member, National Executive Council, Vision Viksit Bharat Policy & Research Center, on his thought-provoking book:
India Beyond the Blips: India’s 5000-Year Economic History and Global Trade — A Radical New Look.

Published by Garuda, the book explores India’s long economic journey, global trade networks, enterprise and the forces that shaped Bharat’s economic civilisation.

For anyone interested in India’s history, economy, trade, public policy and the journey towards Viksit Bharat, this is a book worth reading. To understand the India we are building, it is important to understand the India we inherited.

📚 Read the book:
https://www.amazon.in/India-beyond-Blips-5000-Year-Economic/dp/8199438614

हाल ही में हमारे प्रधानमंत्री श्री मोदी जी ने एवं परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने GenZ से सीधा संवाद किया।क्यों...
16/08/2026

हाल ही में हमारे प्रधानमंत्री श्री मोदी जी ने एवं परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने GenZ से सीधा संवाद किया।

क्यों कि GenZ बदलते समाज की नई वास्तविकता है। इस विमर्श की आवश्यकता आज संपूर्ण देश को है। स्वतंत्रता दिवस पर स्वदेश के साप्ताहिक परिशिष्ट में पढ़ें मेरा आलेख।

Warm birthday greetings to my mentor Dr. Anirban Ganguly ji, a profound thinker, nationalist, intellectual and tireless ...
11/08/2026

Warm birthday greetings to my mentor Dr. Anirban Ganguly ji, a profound thinker, nationalist, intellectual and tireless custodian of India’s civilizational wisdom.
Your erudition, clarity of vision and professionalism inspire me a lot.
Wishing you a year filled with health, happiness and continued service to Bharat Mata.

01/08/2026

श्रीमती अनीता शुभदर्शिनी (सांसद, असका, उड़ीसा) व श्री छत्रपाल सिंह गंगवार जी (सांसद, बरेली, UP) का सुखद सान्निध्य 🙏
At Ashoka Road Thought Collective by SPMRF

|| मेरा जन्मदिन ||श्रावण मास के प्रथम दिन मेरा जन्म हुआ और परिवार की परंपरा के अनुसार मेरा जन्मदिन गांव पर श्री सत्यनारा...
30/07/2026

|| मेरा जन्मदिन ||
श्रावण मास के प्रथम दिन मेरा जन्म हुआ और परिवार की परंपरा के अनुसार मेरा जन्मदिन गांव पर श्री सत्यनारायण व्रत कथा के पावन श्रवण से होता है। बाब दादी की गोद में बैठकर कथा सुनते जीवन प्रारंभ किया.....। मेरे बाबा जी ने मेरा जन्मदिन पञ्चांग के आधार मनाया जाना प्रारंभ किया। इस रीति को आगे भी बनाए रखना मेरी जिम्मेदारी है।

जैसी भवितव्यता होती है ईश्वर वैसे ही सहाय भी होते हैं, मेरे जन्म सावन के पहले दिन तो विवाह, वसंत पंचमी के दिन और पुत्र का जन्म, दुर्गा अष्टमी के शुभ दिन हुआ।🙏

भले ही फेसबुक आपको हिन्दू पञ्चांग से मेरे जन्मदिन का नोटिफिकेशन भेज पाने में असफल हो पर आप मुझे शुभ कामना दे सकते हैं। 😀
सभी को सादर जय जय सियाराम। 🙏 हर: ॐ 🙏

16/07/2026

प्रज्ञा प्रवाह, मालवा प्रांत द्वारा आयोजित व्याख्यान "राष्ट्र प्रथम: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन और विचार" में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के सीनियर रिसर्च फेलो श्री Shivesh Pratap मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार साझा करेंगे।

📅 17 जुलाई 2026
🕟 सायं 4:30 बजे
📍 तक्षशिला अध्ययन केंद्र, डीएवीवी, इंदौर
💻 हाइब्रिड मोड (ऑफलाइन एवं ऑनलाइन)

बड़े मंदिरों की भीड़ और सूने पड़ते ग्राम-मंदिर: एक आत्ममंथन ==== भारतीय दर्शन का मूल भाव है—“ईश्वर कण-कण में व्याप्त है”...
21/06/2026

बड़े मंदिरों की भीड़ और सूने पड़ते ग्राम-मंदिर: एक आत्ममंथन ====
भारतीय दर्शन का मूल भाव है—“ईश्वर कण-कण में व्याप्त है”, “कंकर-कंकर शंकर है”, “ईशावास्यमिदं सर्वम्”। यदि हम वास्तव में इस दर्शन में विश्वास करते हैं, तो यह प्रश्न स्वाभाविक है कि फिर हमारी श्रद्धा और संसाधनों का इतना बड़ा हिस्सा कुछ गिने-चुने मंदिरों तक ही क्यों सीमित होता जा रहा है? क्यों लाखों रुपये और करोड़ों का दान कुछ प्रसिद्ध तीर्थस्थलों तक पहुँचता है, जबकि हमारे गाँवों और मोहल्लों के मंदिर उपेक्षा, जर्जरता और संसाधनों के अभाव से जूझ रहे हैं?
यह किसी मंदिर विशेष का विरोध नहीं है। बड़े मंदिर हमारी आस्था, संस्कृति और सभ्यता के गौरवशाली प्रतीक हैं। उनका संरक्षण और संवर्धन आवश्यक है। किंतु प्रश्न संतुलन का है। यदि किसी समाज की आस्था केवल कुछ केंद्रों में सिमट जाए और उसके स्थानीय धार्मिक-सामाजिक संस्थान कमजोर पड़ जाएँ, तो यह स्थिति दीर्घकाल में समाज की जड़ों को कमजोर कर सकती है।
इतिहास साक्षी है कि जब भी किसी एक स्थान पर अपार संपदा, वैभव और संसाधनों का अत्यधिक केंद्रीकरण हुआ, वह बाहरी आक्रमणकारियों और सत्ता-लोलुप शक्तियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। ग़ज़नी के शासक महमूद ग़ज़नवी ने सोमनाथ मंदिर पर किया गया आक्रमण केवल धार्मिक असहिष्णुता का परिणाम नहीं था, बल्कि उस मंदिर में संचित विशाल संपदा भी उसका प्रमुख कारण थी। इस ऐतिहासिक प्रसंग से यह शिक्षा मिलती है कि समाज की शक्ति और संसाधनों का अत्यधिक केंद्रीकरण सदैव जोखिम उत्पन्न करता है।
आज जब करोड़ों श्रद्धालुओं का दान कुछ चुनिंदा मंदिरों में केंद्रित होता जा रहा है, तब यह प्रश्न उठाना आवश्यक है कि क्या हम अनजाने में फिर से ऐसे केंद्रीकरण को बढ़ावा दे रहे हैं जो भविष्य में राजनीतिक हस्तक्षेप, भ्रष्टाचार, दुरुपयोग या अन्य प्रकार की चुनौतियों को आमंत्रित कर सकता है? हिंदू समाज की वास्तविक शक्ति उसकी विकेंद्रित संरचना में रही है, जहाँ हर गाँव का मंदिर, हर क्षेत्र का देवस्थान और हर समुदाय का पूजा-स्थल सांस्कृतिक तथा सामाजिक ऊर्जा का स्वतंत्र केंद्र होता था। इसलिए इतिहास से सीख लेते हुए हमें अपनी आस्था और संसाधनों का संतुलित वितरण सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि समाज की जड़ें मजबूत हों और उसकी शक्ति किसी एक केंद्र में सिमटकर असुरक्षित न हो जाए।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी आस्था को केवल विशाल मंदिरों की भव्यता तक सीमित न रखें, बल्कि उन छोटे-छोटे मंदिरों की ओर भी देखें जहाँ वर्षों से घंटियाँ मौन हैं, जहाँ आरती में शामिल होने वाले लोग कम होते जा रहे हैं और जहाँ पुजारियों को न्यूनतम संसाधनों के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
गाँव और मोहल्ले का मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं होता। वह सामाजिक जीवन का केंद्र भी होता है। वहीं उत्सव मनाए जाते हैं, वहीं लोगों का मिलना-जुलना होता है, वहीं संस्कृति अगली पीढ़ी तक पहुँचती है। यदि इन मंदिरों को सशक्त बनाया जाए, तो वे शिक्षा, संस्कार, सेवा और सामाजिक समरसता के केंद्र बन सकते हैं। स्थानीय मंदिरों को दिया गया दान स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल देता है। मंदिर का जीर्णोद्धार, उत्सवों का आयोजन, सेवा-कार्य और सांस्कृतिक गतिविधियाँ स्थानीय लोगों को रोजगार और अवसर प्रदान करती हैं।
आवश्यकता इस बात की भी है कि मंदिरों के प्रबंधन में समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व हो। मंदिर केवल किसी एक व्यक्ति, परिवार या समूह की संपत्ति नहीं हैं; वे पूरे समाज की सांस्कृतिक धरोहर हैं। पारदर्शी और उत्तरदायी ट्रस्ट व्यवस्था स्थानीय लोगों का विश्वास बढ़ा सकती है और दान को समाजोपयोगी कार्यों से जोड़ सकती है।
आज स्थिति यह है कि अनेक लोग हजारों किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध मंदिरों की यात्रा करने के लिए उत्सुक रहते हैं, लेकिन अपने ही गाँव के मंदिर में वर्ष में एक बार भी नहीं जाते। बड़े मंदिरों की यात्रा श्रद्धा का विषय हो सकती है, किंतु यदि उसी श्रद्धा का एक अंश भी हम अपने आसपास के मंदिरों के संरक्षण में लगाएँ, तो धार्मिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर बड़ा परिवर्तन संभव है।
हिंदू समाज की शक्ति उसकी विविधता, विकेंद्रीकरण और स्थानीयता में रही है। यहाँ हर गाँव का अपना देवस्थान है, हर क्षेत्र की अपनी परंपरा है और हर समुदाय की अपनी सांस्कृतिक अभिव्यक्ति है। यही विविधता उसकी जीवंतता का आधार है। यदि यह सब कुछ छोड़कर आस्था कुछ ही केंद्रों में सिमटने लगे, तो समाज अपनी स्वाभाविक संरचना से दूर होने लगेगा।
इसलिए समय की माँग है कि हम अपनी श्रद्धा को स्थानीय उत्तरदायित्व से जोड़ें। बड़े मंदिरों के दर्शन करें, वहाँ दान भी दें, किंतु अपने गाँव, मोहल्ले और क्षेत्र के मंदिरों को न भूलें। जिस मंदिर की घंटी वर्षों से आपकी प्रतीक्षा कर रही है, जहाँ दीपक जलाने वाला कोई नहीं है, जहाँ दीवारें जीर्ण हो चुकी हैं—वहीं से समाज के पुनर्जागरण की शुरुआत हो सकती है।
यदि वास्तव में हमें विश्वास है कि भगवान कण-कण में व्याप्त हैं, तो हमें अपनी आस्था को भी कण-कण तक पहुँचाना होगा। हिंदू समाज का भविष्य केवल विशाल मंदिरों की ऊँची शिखरों में नहीं, बल्कि उन असंख्य छोटे मंदिरों में भी सुरक्षित है जो हमारी संस्कृति की जड़ों को सींचते हैं। श्रद्धा का विकेंद्रीकरण ही समाज की शक्ति का विस्तार है। यही धर्म है, यही समाजधर्म है और यही भविष्य की आवश्यकता भी।

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