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NIU में महिला उद्यमिता पर खास एक्सपर्ट टॉक, छात्रों को मिले सफल स्टार्टअप के मंत्रनोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (NIU) के स...
20/08/2026

NIU में महिला उद्यमिता पर खास एक्सपर्ट टॉक, छात्रों को मिले सफल स्टार्टअप के मंत्र

नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (NIU) के स्कूल ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट ने 19 अगस्त को "Entrepreneurship: Women Founders, Social Entrepreneurs and Inclusive Startups" विषय पर एक विशेष Expert Talk आयोजित किया।

असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. ऋचा श्रीवास्तव ने छात्रों को किरण मजूमदार-शॉ, फाल्गुनी नायर, विनीता सिंह, गजल अलाघ, राधिका घई और अदिति गुप्ता जैसी सफल महिला उद्यमियों की प्रेरक यात्राओं से रूबरू कराया।

कार्यक्रम में छात्रों ने People, Planet & Profit मॉडल, Startup India, WEP, Stand-Up India, PMEGP और मुद्रा योजना जैसी सरकारी पहल के बारे में भी जाना।

सबसे खास रहा Think–Pair–Share एक्टिविटी, जिसमें छात्रों ने महिला नेतृत्व और सामाजिक बदलाव से जुड़े स्टार्टअप आइडिया तैयार किए।

मुख्य संदेश: समावेशिता (Inclusion) किसी स्टार्टअप में बाद में जोड़ी जाने वाली चीज़ नहीं, बल्कि पहले दिन से लिया गया डिज़ाइन निर्णय है।

📍 स्थान: SBM Seminar Hall, Noida International University
📅 तारीख: 19 अगस्त 2026

Delhi Jal Board Case: सत्येंद्र जैन समेत 5 आरोपी 3 सितंबर तक जेल, ₹1,946 करोड़ टेंडर मामले में कोर्ट का बड़ा आदेशदिल्ली ...
20/08/2026

Delhi Jal Board Case: सत्येंद्र जैन समेत 5 आरोपी 3 सितंबर तक जेल, ₹1,946 करोड़ टेंडर मामले में कोर्ट का बड़ा आदेश

दिल्ली जल बोर्ड के करीब ₹1,946 करोड़ के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टेंडर मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत पांच आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं मामले के एक अन्य आरोपी अंकित श्रीवास्तव को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजने की जांच एजेंसी की मांग स्वीकार कर ली गई।

अदालत के आदेश के मुताबिक सत्येंद्र जैन, दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय, नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा अब 3 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे। सभी आरोपियों को उसी दिन सुबह 11 बजे दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा।

किस आरोपी की कब होगी अगली सुनवाई?

राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय की ओर से उनकी जमानत अर्जी पर जल्द सुनवाई की मांग की गई। उनके वकील ने अदालत को बताया कि वह एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी हैं और यदि हिरासत लंबी चली तो उनके खिलाफ निलंबन जैसी कार्रवाई हो सकती है।

कोर्ट ने इस दलील पर विचार करते हुए जांच अधिकारी को जमानत अर्जी पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। उदित प्रकाश की जमानत पर 20 अगस्त दोपहर 12 बजे सुनवाई होगी और वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश होंगे।

दूसरी ओर, सत्येंद्र जैन समेत बाकी चार आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर अदालत ने एसीबी (ACB) से जवाब मांगा है। इन याचिकाओं पर अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।

अंकित श्रीवास्तव को क्यों मिली पुलिस रिमांड?

मामले के आरोपी कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव को अदालत ने दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

एसीबी का कहना है कि जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन की बरामदगी और कथित साजिश से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि पूछताछ सीसीटीवी निगरानी वाले स्थान पर की जाए और आरोपी का नियमित मेडिकल परीक्षण भी कराया जाए।

उसे 21 अगस्त दोपहर 2 बजे फिर से अदालत में पेश किया जाएगा।

क्या है ₹1,946 करोड़ का दिल्ली जल बोर्ड टेंडर मामला?

यह मामला दिल्ली जल बोर्ड के 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के आधुनिकीकरण और उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए जारी किए गए करीब ₹1,946 करोड़ के टेंडर से जुड़ा है।

विजिलेंस विभाग की रिपोर्ट के आधार पर एसीबी ने 10 मई 2024 को एफआईआर दर्ज की थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि टेंडर की शर्तों में ऐसे बदलाव किए गए, जिससे एक विशेष कंपनी को फायदा पहुंचाया जा सके।

एसीबी के अनुसार, तकनीकी पात्रता की शर्तों को सीमित किया गया, पानी की गुणवत्ता से जुड़े कुछ जरूरी मानकों को हटाया गया और रोहिणी एसटीपी की क्षमता 15 एमजीडी से बढ़ाकर 30 एमजीडी कर दी गई। एजेंसी का दावा है कि इन बदलावों से करीब ₹123 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय नुकसान हुआ।

जांच में कुछ आरोपियों और Euroteck से जुड़े लोगों के बीच कथित वित्तीय लेनदेन और व्हाट्सएप बातचीत के साक्ष्य मिलने का भी दावा किया गया है।

गिरफ्तारी पर क्या बोले आरोपी?

सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने अदालत में कहा कि एफआईआर दर्ज होने के करीब 27 महीने बाद गिरफ्तारी की गई है। उनका तर्क था कि सभी आरोपी जांच में लगातार सहयोग करते रहे हैं और मामले से जुड़े अधिकांश दस्तावेज पहले ही एजेंसी के कब्जे में हैं, इसलिए हिरासत की आवश्यकता नहीं है।

हालांकि अदालत ने इस स्तर पर गिरफ्तारी को अवैध या अनुचित मानने से इनकार कर दिया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जमानत याचिकाओं पर अलग से सुनवाई होगी और फिलहाल उस पर कोई अंतिम राय नहीं दी जा रही है।

अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में अगली सुनवाईयों पर नजर रहेगी, जहां अदालत जमानत अर्जियों और जांच एजेंसी के जवाबों पर आगे का फैसला करेगी।

UP BJP 2027: मिशन हैट्रिक के लिए विनोद तावड़े पर बड़ा दांव, सरकार-संगठन से लेकर जातीय समीकरण तक होंगी 5 बड़ी चुनौतियांउत...
20/08/2026

UP BJP 2027: मिशन हैट्रिक के लिए विनोद तावड़े पर बड़ा दांव, सरकार-संगठन से लेकर जातीय समीकरण तक होंगी 5 बड़ी चुनौतियां

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी है। उनके साथ गुजरात के जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी बनाया गया है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी यानी 'मिशन हैट्रिक' को लेकर तैयारी तेज कर रही है।

हालांकि यह जिम्मेदारी आसान नहीं मानी जा रही। 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी को बड़ा झटका लगा था। पार्टी की सीटें 62 से घटकर 33 रह गई थीं। विपक्ष ने संविधान, आरक्षण और पीडीए जैसे मुद्दों के जरिए सामाजिक समीकरणों को नए तरीके से साधने की कोशिश की थी। ऐसे में 2027 का चुनाव केवल विधानसभा की लड़ाई नहीं, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव की रणनीतिक नींव भी माना जा रहा है।

सरकार और संगठन के बीच तालमेल सबसे बड़ी परीक्षा

विनोद तावड़े के सामने सबसे पहली चुनौती सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना होगी। चुनावी वर्ष में संगठन की अपेक्षाओं और सरकार के कामकाज के बीच संतुलन बनाए रखना किसी भी प्रभारी की अहम जिम्मेदारी होती है।

बीजेपी नेतृत्व पहले भी इस बात पर जोर देता रहा है कि सरकार की योजनाओं और संगठन की चुनावी तैयारी एक-दूसरे के पूरक बनें। ऐसे में तावड़े को कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और सरकार के बीच संवाद को मजबूत करने पर खास ध्यान देना होगा।

गुटबाजी पर लगाम और नेताओं को एक मंच पर लाना

उत्तर प्रदेश बीजेपी में अलग-अलग नेताओं और खेमों के बीच राजनीतिक समीकरण समय-समय पर चर्चा का विषय रहे हैं। चुनाव नजदीक आने के साथ ऐसी अंदरूनी खींचतान चुनावी प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।

इसी वजह से तावड़े के सामने दूसरी बड़ी चुनौती पार्टी के भीतर एकजुटता बनाए रखना होगी। सभी वरिष्ठ नेताओं को साझा रणनीति के तहत साथ लेकर चलना और संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय रखना उनकी जिम्मेदारियों में शामिल माना जा रहा है।

जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने की चुनौती

उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन हमेशा चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। बीजेपी के लिए अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने के साथ-साथ ओबीसी, दलित और गैर-यादव पिछड़े वर्गों के बीच भी पकड़ बनाए रखना अहम होगा।

तावड़े और जगदीश पटेल की जोड़ी को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की सामाजिक परिस्थितियों को समझते हुए ऐसी रणनीति तैयार करनी होगी, जो स्थानीय मुद्दों और क्षेत्रीय अपेक्षाओं के अनुरूप हो।

क्या बिहार का चुनावी मॉडल यूपी में काम करेगा?

विनोद तावड़े को बिहार में चुनावी प्रबंधन के अनुभव के लिए जाना जाता है। लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर उससे कहीं अधिक व्यापक और जटिल मानी जाती है।

प्रदेश की 403 विधानसभा सीटें, अलग-अलग क्षेत्रीय मुद्दे और विविध सामाजिक समीकरण यह संकेत देते हैं कि किसी दूसरे राज्य का चुनावी मॉडल सीधे लागू करना आसान नहीं होगा। ऐसे में बिहार के अनुभव को यूपी की परिस्थितियों के अनुसार ढालना उनके लिए अहम चुनौती होगी।

2027 की जीत से जुड़े हैं आगे के राजनीतिक संकेत

बीजेपी ने 2017 और 2022 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाई थी। अब पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने का लक्ष्य लेकर मैदान में उतर रही है।

इसके लिए योगी सरकार के कामकाज को चुनावी संदेश में बदलना, बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना, सहयोगी दलों के साथ तालमेल बनाए रखना और विपक्ष की रणनीति का प्रभावी जवाब तैयार करना जरूरी माना जा रहा है।

कुल मिलाकर विनोद तावड़े के सामने चुनौती केवल चुनावी प्रबंधन तक सीमित नहीं है। उन्हें सरकार, संगठन, सामाजिक समीकरण और चुनावी संदेश—इन सभी पहलुओं को साथ लेकर ऐसी रणनीति तैयार करनी होगी, जो बीजेपी के मिशन हैट्रिक को जमीन पर मजबूत आधार दे सके।

Aaj Ka Mausam: दिल्ली में अभी 3 दिन और बरसेंगे बादल, यूपी-बिहार समेत कई राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्टदेशभर में मानसून ...
20/08/2026

Aaj Ka Mausam: दिल्ली में अभी 3 दिन और बरसेंगे बादल, यूपी-बिहार समेत कई राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट

देशभर में मानसून एक बार फिर पूरे जोर पर है। उत्तर भारत से लेकर पूर्वी और दक्षिण भारत तक कई राज्यों में लगातार बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग के मुताबिक 20 अगस्त को कई इलाकों में बारिश की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। दिल्ली में अगले तीन दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है, जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में तेज हवाओं और भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

पूर्वी भारत में बने गहरे दबाव (डीप डिप्रेशन) का असर अभी भी कई राज्यों में बना हुआ है। इसके चलते पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड में लगातार बारिश हो रही है, जबकि उत्तर भारत में सक्रिय मानसून लोगों को उमस से राहत तो दे रहा है, लेकिन कई जगह जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ गई है।

दिल्ली में अगले तीन दिन कैसा रहेगा मौसम?

राजधानी दिल्ली में मानसून फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार आज पूरे दिन बादल छाए रहने और मध्यम बारिश होने की संभावना है। अधिकतम तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

इसके अलावा 21, 22 और 23 अगस्त तक हल्की बारिश और बूंदाबांदी का दौर जारी रह सकता है। ऐसे में दफ्तर जाने वाले लोगों और वाहन चालकों को फिसलन और ट्रैफिक धीमा रहने जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

यूपी, बिहार और झारखंड में तेज बारिश का अलर्ट

उत्तर प्रदेश में मानसून का असर कई जिलों में बना हुआ है। मौसम विभाग ने मुजफ्फरनगर, मेरठ, गौतमबुद्ध नगर, मथुरा, आगरा, अलीगढ़, झांसी, बांदा, कानपुर, प्रयागराज, आजमगढ़, देवरिया और गोरखपुर समेत कई जिलों में तेज बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की है।

बिहार के कई हिस्सों में भी भारी बारिश और तेज हवाओं का अनुमान है। झारखंड में आज और कल दोनों दिन बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं, जिससे कुछ इलाकों में जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।

वहीं पश्चिम बंगाल में भी कई जिलों में भारी बारिश का अनुमान है। ओडिशा में 21 से 25 अगस्त तक व्यापक बारिश की संभावना जताई गई है।

राजस्थान से गुजरात तक कई राज्यों में बदलेगा मौसम

राजस्थान के कई हिस्सों में आज बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं। मध्य प्रदेश में भी कई जिलों के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

पंजाब और हरियाणा में अचानक तेज बारिश और आंधी का दौर देखने को मिल सकता है। पश्चिमी भारत में कोंकण और गोवा में 25 अगस्त तक भारी बारिश का अनुमान है। मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

गुजरात और सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र में भी अगले कुछ दिनों तक कई स्थानों पर बारिश होने की संभावना है।

पहाड़ों में बढ़ी सावधानी की जरूरत

उत्तराखंड के नैनीताल, हरिद्वार, ऋषिकेश, बागेश्वर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, पौड़ी गढ़वाल, चंपावत, रुद्रप्रयाग और ऊधम सिंह नगर में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है।

हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में भी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी है। जम्मू-कश्मीर में भी मौसम विभाग ने कई इलाकों के लिए भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है।

पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के चलते भूस्खलन और सड़क बाधित होने की आशंका बनी रह सकती है। ऐसे में यात्रा करने वालों को मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही निकलने की सलाह दी जा रही है।

दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में भी जारी रहेगा बारिश का दौर

दक्षिण भारत में केरल, कर्नाटक और तेलंगाना में बारिश और आंधी की संभावना बनी हुई है। तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश हो सकती है।

वहीं पूर्वोत्तर राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। खासकर अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में 25 अगस्त तक कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

कुल मिलाकर अगले कुछ दिनों तक देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून सक्रिय रहेगा। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखना और खराब मौसम के दौरान आवश्यक सावधानी बरतना जरूरी होगा।

Ayodhya Verdict Case: ₹6 लाख नहीं चुकाने पर एडवोकेट महमूद प्राचा की संपत्ति कुर्क करने का आदेश, दिल्ली कोर्ट का बड़ा फैस...
20/08/2026

Ayodhya Verdict Case: ₹6 लाख नहीं चुकाने पर एडवोकेट महमूद प्राचा की संपत्ति कुर्क करने का आदेश, दिल्ली कोर्ट का बड़ा फैसला

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता महमूद प्राचा के खिलाफ उनकी चल संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया है। यह कार्रवाई उस ₹6 लाख की लागत (कॉस्ट) का भुगतान नहीं करने के मामले में हुई है, जो अयोध्या फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज होने के बाद उन पर लगाई गई थी।

कोर्ट ने कहा कि कई अवसर दिए जाने के बावजूद महमूद प्राचा ने न तो कोई आपत्ति दाखिल की और न ही तय राशि का भुगतान किया। ऐसे में अदालत ने उनकी चल संपत्ति को कुर्क करने के लिए अटैचमेंट वारंट जारी करने का आदेश दिया।

यह रकम नई दिल्ली जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (NDLSA) को दी जानी है, जिसने इस आदेश को लागू कराने के लिए निष्पादन (Ex*****on) की कार्यवाही शुरू की थी।

कोर्ट ने क्यों जारी किया अटैचमेंट वारंट?

पटियाला हाउस कोर्ट की जज मेधा आर्या ने 14 अगस्त 2026 को यह आदेश पारित किया। अदालत ने कहा कि प्राचा को कई बार जवाब दाखिल करने का मौका दिया गया था, लेकिन उन्होंने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई।

इसी आधार पर कोर्ट ने उनकी चल संपत्ति को डिक्री की राशि तक कुर्क करने का निर्देश दिया। अदालत ने बेलिफ (Bailiff) को जरूरत पड़ने पर ताले तोड़कर भी कुर्की की कार्रवाई करने की अनुमति दी है।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि कुर्की की तारीख तय करने से पहले डिक्रीधारक संबंधित नजारत शाखा से समन्वय करेगा। मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष और 1 अक्टूबर 2026 को जज मेधा आर्या के समक्ष होगी।

कैसे बढ़कर ₹6 लाख तक पहुंची लागत?

पूरा मामला उस दीवानी मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें महमूद प्राचा ने सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर 2019 के अयोध्या फैसले को "शून्य और अमान्य" घोषित करने की मांग की थी।

ट्रायल कोर्ट ने अप्रैल 2025 में इस मुकदमे को खारिज करते हुए उन पर ₹1 लाख की लागत लगाई थी। इसके बाद प्राचा ने जिला न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा की अदालत में अपील दायर की।

अपील भी खारिज हो गई। इसके साथ ही अदालत ने अतिरिक्त ₹5 लाख की लागत लगा दी। इस तरह कुल राशि ₹6 लाख हो गई।

जिला अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि पहले लगाई गई लागत निरर्थक मुकदमों पर रोक लगाने के उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकी, इसलिए राशि बढ़ाना जरूरी था।

पूर्व CJI चंद्रचूड़ के कथित बयान पर आधारित थी याचिका

प्राचा की याचिका का आधार पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ का वर्ष 2024 में पुणे में दिया गया एक सार्वजनिक संबोधन बताया गया था।

याचिका में दावा किया गया था कि पूर्व CJI ने कहा था कि अयोध्या मामले के फैसले से पहले उन्हें भगवान श्री रामलला विराजमान से समाधान मिला था। इसी आधार पर प्राचा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अमान्य घोषित करने और मामले की दोबारा सुनवाई कराने की मांग की थी।

हालांकि जिला अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि ईश्वर से मार्गदर्शन लेना किसी भी दृष्टि से धोखाधड़ी या अनुचित लाभ हासिल करने का कृत्य नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने कहा- यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग था

अदालत ने यह भी पाया कि महमूद प्राचा मूल अयोध्या विवाद के पक्षकार नहीं थे, इसलिए उनके पास इस मुकदमे के लिए वैध कारण (Cause of Action) नहीं था।

कोर्ट ने पूर्व CJI चंद्रचूड़ को सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद मामले में पक्षकार बनाने की कोशिश पर भी सवाल उठाए और इसे उनके उद्देश्य पर संदेह पैदा करने वाला कदम बताया।

जिला न्यायाधीश ने अपने फैसले में इस मुकदमे को "न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग" करार दिया था। अदालत ने कहा था कि पहले से लंबित मामलों के बोझ से जूझ रही न्याय व्यवस्था निरर्थक और विलासितापूर्ण मुकदमों का अतिरिक्त बोझ नहीं उठा सकती।

फिलहाल पटियाला हाउस कोर्ट का ताजा आदेश केवल ₹6 लाख की लागत की वसूली से जुड़ा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि भुगतान न होने के कारण अब चल संपत्ति कुर्क कर राशि की वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

Karnataka High Court का बड़ा फैसला: 'Homemaker' सिर्फ महिलाओं के लिए नहीं, पुरुष और नौकरीपेशा लोग भी हो सकते हैंकर्नाटक ...
20/08/2026

Karnataka High Court का बड़ा फैसला: 'Homemaker' सिर्फ महिलाओं के लिए नहीं, पुरुष और नौकरीपेशा लोग भी हो सकते हैं

कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि "Homemaker" (गृह निर्माता) शब्द केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है। अदालत के मुताबिक, जो भी व्यक्ति अपने परिवार की देखभाल करता है और घर की जिम्मेदारियां निभाता है, उसे गृह निर्माता माना जा सकता है। इसमें पुरुष, नौकरीपेशा लोग, पेशेवर और परिवार का खर्च उठाने वाले कमाऊ सदस्य भी शामिल हो सकते हैं।

यह टिप्पणी अदालत ने सड़क दुर्घटना मुआवजे से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी महिला की उच्च शिक्षा या पेशेवर अनुभव उसे गृह निर्माता माने जाने से नहीं रोक सकता।

जस्टिस डॉ. चिल्लाकुर सुमलता की एकल पीठ ने यह फैसला देते हुए दुर्घटना में घायल महिला को अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश भी दिया।

क्या था मामला, जिसमें आया यह फैसला?

यह मामला पम्पापाल नाम की महिला से जुड़ा है, जो अक्टूबर 2013 में कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) की बस से जुड़े सड़क हादसे में घायल हो गई थीं।

पम्पापाल ने बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर डिग्री हासिल की थी और अगस्त 2012 से मार्च 2013 तक कॉलेज में गेस्ट लेक्चरर के तौर पर काम भी किया था। उस दौरान उनकी मासिक आय 35,000 रुपये थी। हालांकि, दुर्घटना के समय इस बात का कोई प्रमाण नहीं था कि वह नौकरी कर रही थीं।

इसी आधार पर मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) ने भविष्य की आय के नुकसान के लिए मुआवजा देने से इनकार कर दिया था। ट्रिब्यूनल ने उन्हें कुल 4.55 लाख रुपये का मुआवजा दिया था।

बाद में उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कहा कि भले ही दुर्घटना के समय वह नौकरी में नहीं थीं, लेकिन स्थायी दिव्यांगता के कारण वह परिवार की देखभाल और घरेलू जिम्मेदारियां पहले की तरह नहीं निभा सकीं। इसलिए इस नुकसान का भी आकलन होना चाहिए।

'Homemaker' की नई परिभाषा दी कोर्ट ने

सुनवाई के दौरान KSRTC ने तर्क दिया कि पम्पापाल उच्च शिक्षित थीं, इसलिए उन्हें गृह निर्माता नहीं माना जा सकता। लेकिन हाई कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया।

अदालत ने कहा कि कोई महिला डिग्री, पोस्टग्रेजुएशन या डॉक्टरेट रखने के बावजूद यदि घर में परिवार की देखभाल करती है, तो उसे गृह निर्माता माना जाएगा।

कोर्ट ने आगे कहा कि गृह निर्माता होने के लिए यह जरूरी नहीं कि कोई व्यक्ति दिनभर केवल घरेलू काम ही करता रहे। यदि कोई नौकरीपेशा या पेशेवर व्यक्ति भी अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभाता है, तो वह भी इस श्रेणी में आ सकता है।

अपने फैसले में अदालत ने कहा कि जो व्यक्ति बिना थके परिवार के लिए काम करता है, निस्वार्थ प्रेम देता है और घर की खुशहाली का आधार बनता है, वही असल मायने में गृह निर्माता है।

सबसे अहम टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा कि "Homemaker" एक जेंडर-न्यूट्रल शब्द है, इसलिए यह पुरुषों और महिलाओं दोनों पर समान रूप से लागू होता है।

मुआवजा कैसे बढ़ाया गया?

हाई कोर्ट ने दुर्घटना के समय यानी 2013 के लिए पम्पापाल की काल्पनिक मासिक आय 8,000 रुपये तय की। अदालत ने उनकी उम्र करीब 25 वर्ष मानते हुए 18 के मल्टीप्लायर और ट्रिब्यूनल द्वारा तय 10 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता के आधार पर भविष्य की आर्थिक क्षति 1,72,800 रुपये आंकी।

इसके अलावा अदालत ने माना कि गंभीर चोटों के कारण पम्पापाल कम से कम तीन महीने तक बिस्तर पर रहीं और इस दौरान वह परिवार की देखभाल नहीं कर सकीं। इस नुकसान के लिए उन्हें 24,000 रुपये अलग से दिए गए।

इस तरह हाई कोर्ट ने कुल 1,96,800 रुपये अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया।

मेडिकल इंश्योरेंस पर भी कोर्ट ने दी अहम स्पष्टता

सुनवाई के दौरान KSRTC ने यह भी कहा कि चूंकि पम्पापाल को ICICI Lombard से मेडिकल खर्च की भरपाई मिल चुकी है, इसलिए मुआवजा कम किया जाना चाहिए। लेकिन अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के New India Assurance बनाम Dolly Satish Gandhi फैसले का हवाला देते हुए इस दलील को भी खारिज कर दिया।

हाई कोर्ट ने कहा कि मेडिकल इंश्योरेंस का भुगतान उस अनुबंध के आधार पर होता है, जिसके लिए प्रीमियम दिया गया था। वहीं मोटर वाहन अधिनियम के तहत मिलने वाला मुआवजा कानूनी अधिकार है। इसलिए इसे "डबल बेनिफिट" नहीं कहा जा सकता।

अदालत ने KSRTC की अपील खारिज करते हुए आठ सप्ताह के भीतर बढ़ी हुई राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ जमा कराने का निर्देश दिया।

यह फैसला केवल एक मुआवजा विवाद तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यह घर के भीतर किए जाने वाले देखभाल और श्रम को व्यापक कानूनी मान्यता देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Shiv Sena Row: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल- क्या आज ही एकनाथ शिंदे को अयोग्य ठहरा सकते हैं? UBT गुट से पूछा अहम सवालशिवसे...
20/08/2026

Shiv Sena Row: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल- क्या आज ही एकनाथ शिंदे को अयोग्य ठहरा सकते हैं? UBT गुट से पूछा अहम सवाल

शिवसेना के भीतर हुए विभाजन और दलबदल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बुधवार को एक ऐसा सवाल उठा, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। अदालत ने उद्धव ठाकरे गुट से पूछा कि अगर महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष का फैसला रद्द भी कर दिया जाए, तो क्या सुप्रीम कोर्ट खुद एकनाथ शिंदे और उनके साथ गए विधायकों को अयोग्य घोषित कर सकती है?

यह सवाल इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि मामला केवल बागी विधायकों की सदस्यता तक सीमित नहीं है। इससे शिवसेना की वैधता, चुनाव चिह्न और दलबदल कानून की व्याख्या पर भी असर पड़ सकता है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच सुनील प्रभु बनाम एकनाथ शिंदे मामले की सुनवाई कर रही है। इस याचिका में महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें शिंदे गुट के विधायकों को दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य ठहराने से इनकार किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों पूछा यह सवाल?

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत से पूछा कि क्या अदालत आज ऐसा आदेश दे सकती है, जिससे एकनाथ शिंदे सीधे अयोग्य हो जाएं।

उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका निभा सकती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी अधिकारी का फैसला गलत हो, तो अदालत उसे रद्द कर सकती है। लेकिन क्या अदालत खुद वही फैसला लागू भी कर सकती है या मामला सक्षम प्राधिकारी के पास वापस भेजना होगा?

जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि इस बात पर विवाद नहीं है कि एकनाथ शिंदे के पास विधायी बहुमत था। लेकिन असली सवाल यह है कि बहुमत हासिल करने के समय उनकी पार्टी में संवैधानिक स्थिति क्या थी।

UBT गुट ने क्या दलील दी?

उद्धव ठाकरे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और देवदत्त कामत ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को कानून के खिलाफ बताया।

कामत ने कहा कि यदि स्पीकर का आदेश मनमाना या गलत है, तो सुप्रीम कोर्ट अपनी न्यायिक समीक्षा की शक्ति का इस्तेमाल कर उसे ठीक कर सकता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यदि स्पीकर का आदेश रद्द होता है, तो उसका सीधा असर चुनाव आयोग द्वारा शिंदे गुट को असली शिवसेना मानने वाले फैसले पर भी पड़ेगा।

सुनवाई के दौरान उन्होंने ICOMM, Subhash Desai और अन्य फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अयोग्यता संबंधी मामलों में अदालत पहले भी हस्तक्षेप कर चुकी है।

कपिल सिब्बल बोले- गैरकानूनी काम से वैधता नहीं मिल सकती

कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि किसी गैरकानूनी कदम को केवल समय बीत जाने के आधार पर वैध नहीं माना जा सकता।

उन्होंने तर्क दिया कि यदि कोई कार्रवाई शुरुआत से ही कानून के खिलाफ थी, तो बाद की घटनाओं के आधार पर उसे सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने इसकी तुलना सरकारी जमीन पर हुए अवैध निर्माण से करते हुए कहा कि लंबे समय तक बने रहने से वह निर्माण वैध नहीं हो जाता।

सिब्बल ने यह भी कहा कि बागी विधायकों ने स्पीकर के सामने दाखिल हलफनामों में 2018 के पार्टी संविधान का हवाला दिया था, जिसे बाद में "वकीलों की गलती" बताया गया।

चुनाव चिह्न और दलबदल कानून भी दांव पर

इस मामले में अदालत के सामने उद्धव ठाकरे की वह याचिका भी लंबित है, जिसमें चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी गई और 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न आवंटित किया गया।

सिब्बल ने राजेंद्र सिंह राणा बनाम स्वामी प्रसाद मौर्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि विपक्षी दल के साथ जाकर राज्यपाल से मुलाकात करना भी दलबदल कानून के उल्लंघन के दायरे में आ सकता है। उन्होंने सूरत और गुवाहाटी में बागी विधायकों की गतिविधियों का जिक्र करते हुए इसे दलबदल का स्पष्ट मामला बताया।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। अदालत ने सुनवाई गुरुवार दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या अदालत केवल स्पीकर के आदेश की समीक्षा करेगी या दलबदल कानून की व्याख्या को लेकर कोई बड़ा संवैधानिक सिद्धांत भी तय करेगी।

Chandigarh Petrol Langar: ₹1,000 के फ्री पेट्रोल कूपन का ऐलान बना सिरदर्द, बारिश के बीच पेट्रोल पंप पर मचा हंगामाचंडीगढ़...
19/08/2026

Chandigarh Petrol Langar: ₹1,000 के फ्री पेट्रोल कूपन का ऐलान बना सिरदर्द, बारिश के बीच पेट्रोल पंप पर मचा हंगामा

चंडीगढ़ में मुफ्त पेट्रोल कूपन बांटने की घोषणा लोगों के लिए राहत की खबर बनकर आई थी, लेकिन कुछ ही घंटों में यही आयोजन अफरा-तफरी की वजह बन गया। सेक्टर-10 के एक पेट्रोल पंप पर सैकड़ों लोग ₹500 और ₹1,000 के फ्री पेट्रोल कूपन लेने पहुंचे, लेकिन कार्यक्रम स्थगित होने की जानकारी सभी तक नहीं पहुंची। नतीजा यह हुआ कि भारी बारिश के बीच घंटों इंतजार के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और पेट्रोल पंप पर हंगामे जैसी स्थिति बन गई।

हालात इतने बिगड़ गए कि सुरक्षा कारणों से पेट्रोल पंप को बंद करना पड़ा। सड़क पर लंबा जाम लग गया और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा।

क्या था ‘पेट्रोल लंगर’ का पूरा प्लान?

अमृतसर के समाजसेवी राकेश त्रेहन, जिन्हें ‘राजा द किंग’ के नाम से भी जाना जाता है, ने 18 अगस्त को चंडीगढ़ के सेक्टर-10 स्थित पेट्रोल पंप पर मुफ्त पेट्रोल कूपन बांटने की घोषणा की थी।

योजना के मुताबिक:

दोपहिया और तीन पहिया वाहन चालकों को ₹500 का पेट्रोल कूपन मिलना था।

कार चालकों के लिए ₹1,000 का पेट्रोल कूपन तय किया गया था।

बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों के बीच इस घोषणा ने बड़ी संख्या में लोगों का ध्यान खींचा और कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही लोगों की भीड़ जुटने लगी।

भारी बारिश ने बदला पूरा कार्यक्रम

मंगलवार को चंडीगढ़ में मूसलाधार बारिश हुई, जिससे शहर के कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हो गया। आयोजक राकेश त्रेहन का कहना है कि लोगों की सुरक्षा और परेशानी को देखते हुए कार्यक्रम को स्थगित करने का फैसला लिया गया।

उन्होंने बाद में घोषणा की कि अब पेट्रोल कूपन का वितरण शुक्रवार से रविवार तक तीन दिनों में किया जाएगा। हालांकि, यह जानकारी हर व्यक्ति तक समय पर नहीं पहुंच सकी।

यही वजह रही कि पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार बड़ी संख्या में लोग पेट्रोल पंप पहुंच गए और वहां स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण से बाहर होने लगी।

घंटों इंतजार के बाद भड़का लोगों का गुस्सा

बारिश में भीगते हुए लोग लंबे समय तक कूपन मिलने का इंतजार करते रहे। जब उन्हें पता चला कि कार्यक्रम टाल दिया गया है, तो कई लोगों ने नाराजगी जताई।

एक स्थानीय युवक ने बताया कि वह करीब दो घंटे तक बारिश में खड़ा रहा, लेकिन उसे कोई कूपन नहीं मिला। बाद में जानकारी मिली कि वितरण अब शुक्रवार से होगा।

भीड़ बढ़ने के कारण पेट्रोल पंप पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ट्रैफिक भी प्रभावित हुआ और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्था संभाली। ट्रैफिक बाधित करने के आरोप में कुछ वाहनों को भी जब्त किया गया।

कौन हैं राकेश त्रेहन, जिन्होंने शुरू किया ‘पेट्रोल लंगर’?

राकेश त्रेहन पहले क्रिप्टो ट्रेडिंग और शेयर बाजार से जुड़े रहे हैं। हाल के समय में उन्होंने अपनी और अपने पिता से मिली संपत्ति का 90 प्रतिशत हिस्सा दान करने का फैसला करने की बात कही है।

इससे पहले भी वह जरूरतमंद लोगों को खाद्य सामग्री और ₹500 के नकद कूपन बांटने जैसे कार्यक्रम चला चुके हैं। उनका दावा है कि पेट्रोल कूपन अभियान के बाद वह भविष्य में लोगों को आईफोन भी वितरित करने की योजना रखते हैं।

फिलहाल, चंडीगढ़ का यह ‘पेट्रोल लंगर’ राहत से ज्यादा अव्यवस्था की वजह बन गया। अब लोगों की नजर शुक्रवार से शुरू होने वाले नए कार्यक्रम पर है, जहां आयोजकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती भीड़ को व्यवस्थित तरीके से संभालने की होगी।

Bihar Cabinet: बक्सर से भागलपुर तक बनेगा 336 किमी का 6-लेन एक्सप्रेसवे, सम्राट कैबिनेट के 13 बड़े फैसलेबिहार में सड़क, स...
19/08/2026

Bihar Cabinet: बक्सर से भागलपुर तक बनेगा 336 किमी का 6-लेन एक्सप्रेसवे, सम्राट कैबिनेट के 13 बड़े फैसले

बिहार में सड़क, सिंचाई, रोजगार और तकनीक से जुड़े कई बड़े फैसलों पर राज्य सरकार ने एक साथ मुहर लगा दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 13 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें सबसे बड़ा फैसला बक्सर से भागलपुर तक 336 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड 6-लेन एक्सप्रेसवे के निर्माण का है।

यह एक्सप्रेसवे पूरी तरह नई जमीन पर विकसित होगा और इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर बनाया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस परियोजना से दक्षिण और पूर्वी बिहार के बीच यात्रा आसान होगी, जबकि सड़क के किनारे नए आर्थिक अवसर भी विकसित होंगे।

336 किमी का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, 12 जिलों को मिलेगा फायदा

कैबिनेट ने एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए बिहार राज्य सड़क विकास निगम (BSRDCL) के माध्यम से सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कराने और ट्रांजेक्शन एडवाइजर नियुक्त करने की भी स्वीकृति मिल गई है।

यह नया एक्सप्रेसवे बक्सर, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गया, नवादा, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, जमुई, मुंगेर, बांका होते हुए भागलपुर तक पहुंचेगा। सरकार की योजना है कि इसके आसपास बड़े भूखंडों को आर्थिक गतिविधियों के लिए भी विकसित किया जाए, जिससे उद्योग, निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिल सके।

किसानों के लिए नलकूप और नहरों पर बड़ा निवेश

कैबिनेट ने खेती को मजबूत करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 11,000 निजी नलकूपों के लिए 305.60 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसका उद्देश्य किसानों तक सिंचाई की बेहतर सुविधा पहुंचाना है।

इसके अलावा सिंचाई व्यवस्था सुधारने के लिए कटिहार और नरपतगंज क्षेत्रों की नहर प्रणालियों के पुनर्स्थापन पर भी मंजूरी दी गई है।

कटिहार सिंचाई परियोजना: 35.82 करोड़ रुपये

जानकीनगर शाखा नहर (नरपतगंज): 30.35 करोड़ रुपये

सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से लंबे समय से प्रभावित नहरों को फिर से चालू किया जाएगा।

गोदाम, चीनी मिल और सोलर प्रोजेक्ट को भी मिली मंजूरी

भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए राज्य के विभिन्न जिलों में 48,200 मीट्रिक टन क्षमता वाले नए गोदाम बनाए जाएंगे। इसके लिए 34.95 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। चयनित समितियों को 50 प्रतिशत अनुदान और 50 प्रतिशत चक्रीय पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी।

मधुबनी के सकरी और दरभंगा के रैयाम की बंद पड़ी चीनी मिलों की जमीन पर नई सहकारी चीनी मिलें स्थापित करने के लिए भी सहकारी समितियों के गठन को मंजूरी मिल गई है।

वहीं, लखीसराय के कजरा सोलर पावर प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने के लिए अधिग्रहित जमीन की लीज पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट देने का फैसला लिया गया है।

AI से रोजगार तक, तकनीक पर भी सरकार का फोकस

कैबिनेट ने भविष्य की तकनीक पर भी बड़ा दांव लगाया है। बिहार सरकार Tyo AI India Private Limited के साथ समझौता करेगी, ताकि राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा सके। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही दोनों पक्षों के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे।

इसके अलावा डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए 63.92 करोड़ रुपये की नस्ल सुधार योजना को भी मंजूरी दी गई है। यह योजना कॉम्फेड के माध्यम से लागू होगी और इसका उद्देश्य दूध उत्पादन तथा पशुओं की उत्पादकता बढ़ाना है।

रोजगार व्यवस्था में बदलाव करते हुए कैबिनेट ने अवर प्रादेशिक नियोजनालय का नाम बदलकर जिला नियोजनालय करने का भी फैसला लिया है। यही कार्यालय जिलों में रोजगार मेलों के आयोजन की जिम्मेदारी निभाता है।

इन फैसलों से साफ है कि सरकार ने एक ही बैठक में सड़क, कृषि, ऊर्जा, भंडारण, तकनीक और रोजगार जैसे कई क्षेत्रों पर एक साथ ध्यान केंद्रित करने की कोशिश की है। खास तौर पर बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे को बिहार की सबसे बड़ी आधारभूत संरचना परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है।

PM CARES Fund पर नई बहस: अभिजीत दीपके बोले- ₹8,452 करोड़ से बन सकते हैं 1,000 से ज्यादा हाईटेक स्कूलपीएम केयर्स फंड को ल...
19/08/2026

PM CARES Fund पर नई बहस: अभिजीत दीपके बोले- ₹8,452 करोड़ से बन सकते हैं 1,000 से ज्यादा हाईटेक स्कूल

पीएम केयर्स फंड को लेकर एक बार फिर नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने मांग की है कि फंड में मौजूद हजारों करोड़ रुपये का इस्तेमाल देशभर के सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने और नए हाईटेक स्कूल बनाने में किया जाए। उन्होंने दावा किया कि अगर फंड में मौजूद ₹8,452 करोड़ की राशि शिक्षा पर खर्च की जाए, तो 1,000 से अधिक आधुनिक स्कूल बनाए जा सकते हैं।

दीपके ने यह मांग ऐसे समय उठाई है, जब उनकी पार्टी गांवों में “स्कूल ठीक करो” अभियान चला रही है। इस अभियान के तहत वे अलग-अलग राज्यों के सरकारी स्कूलों का दौरा कर वहां की बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को सामने ला रहे हैं।

PM CARES Fund को लेकर क्या कहा अभिजीत दीपके ने?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो में अभिजीत दीपके ने कहा कि हाल ही में सामने आई ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2025 तक पीएम केयर्स फंड में ₹8,452 करोड़ की राशि उपलब्ध थी। उनके अनुसार, एक ओर इतनी बड़ी रकम फंड में मौजूद है, जबकि दूसरी ओर देश के कई सरकारी स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

दीपके ने कहा कि यदि एक आधुनिक स्कूल के निर्माण की लागत करीब ₹8 करोड़ मानी जाए, तो इसी राशि से एक हजार से अधिक नए हाईटेक स्कूल तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि इस फंड का उपयोग बच्चों की शिक्षा और स्कूलों की बेहतरी के लिए किया जाना चाहिए।

ऑडिट रिपोर्ट के आंकड़ों से तेज हुई चर्चा

दीपके ने अपनी दलील में पीएम केयर्स फंड की ऑडिट रिपोर्ट का भी हवाला दिया। रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक फंड में कुल राशि ₹8,452 करोड़ थी, जबकि एक साल पहले यह ₹7,173 करोड़ थी।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान फंड से कुल 87.85 लाख रुपये का भुगतान हुआ, जबकि इससे पहले वाले वित्त वर्ष में यह राशि 15.6 करोड़ रुपये थी। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर उन्होंने सवाल उठाया कि जब शिक्षा के क्षेत्र में संसाधनों की कमी की बात कही जा रही है, तो उपलब्ध धनराशि के उपयोग पर चर्चा क्यों नहीं होनी चाहिए।

गांवों के स्कूलों का दौरा, कई कमियां गिनाईं

अभिजीत दीपके ने अपने अभियान के दौरान महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं बेहद खराब हालत में हैं।

उन्होंने विशेष रूप से हिंगोली जिले के एक सरकारी स्कूल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कक्षाओं और शौचालयों के दरवाजे टूटे हुए थे। उनके अनुसार, शौचालयों में नल तक नहीं थे और पूरा परिसर काफी जर्जर दिखाई दिया।

दीपके ने बताया कि जब उन्होंने अधिकारियों से इन कमियों के बारे में पूछा, तो उन्हें जवाब मिला कि पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं है। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने पीएम केयर्स फंड की राशि को शिक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल करने की मांग दोहराई।

'स्कूल ठीक करो' अभियान के केंद्र में शिक्षा का मुद्दा

कॉकरोच जनता पार्टी इन दिनों गांवों में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर लगातार अभियान चला रही है। पार्टी का कहना है कि शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना प्राथमिकता होनी चाहिए।

फिलहाल अभिजीत दीपके का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। उनके स्कूल दौरों के वीडियो भी व्यापक रूप से साझा किए जा रहे हैं। हालांकि, इस मांग पर सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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