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20/04/2026

क्या विधानसभा चुनाव में पूजा पाल पर दांव खेलेगी BJP? एंट्री के साथ ही बदल जाएगा यूपी का सियासी खेल

महिला आरक्षण पर यूपी में सियासी रण: 30 अप्रैल को विशेष सत्र, सरकार की विपक्ष पर सीधी चुनौतीमहिला आरक्षण बिल को लेकर देश ...
20/04/2026

महिला आरक्षण पर यूपी में सियासी रण: 30 अप्रैल को विशेष सत्र, सरकार की विपक्ष पर सीधी चुनौती

महिला आरक्षण बिल को लेकर देश की राजनीति इस समय तेज़ बहस के दौर से गुजर रही है। संसद से लेकर सड़कों तक यह मुद्दा चर्चा के केंद्र में है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया है। यह सत्र केवल औपचारिक कार्यवाही नहीं, बल्कि सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सीधी राजनीतिक टकराव का मंच बनने की संभावना लिए हुए है।

सरकार की रणनीति साफ है—महिला आरक्षण के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करना और विपक्ष को घेरते हुए जनता के बीच एक मजबूत संदेश देना।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद सत्र का रास्ता साफ

विशेष सत्र बुलाने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया के तहत सदस्यों को पहले से सूचना देना जरूरी होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने बाई सर्कुलेशन के जरिए कैबिनेट से प्रस्ताव पास कराया।

अब इस प्रस्ताव को राज्यपाल के पास भेजा जाएगा, जिसके बाद सत्र की औपचारिक घोषणा हो जाएगी। समयसीमा को देखते हुए सरकार ने इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया है।

विपक्ष पर हमले की तैयारी, निंदा प्रस्ताव भी संभव

सूत्रों के अनुसार, इस सत्र में केवल महिला आरक्षण पर चर्चा ही नहीं होगी, बल्कि विपक्ष के रुख को लेकर निंदा प्रस्ताव लाने की भी तैयारी है। बीजेपी का आरोप है कि विपक्ष महिला आरक्षण के मुद्दे पर स्पष्ट रुख नहीं अपना रहा और राजनीतिक लाभ के लिए इसे उलझा रहा है।

वहीं विपक्ष लगातार सरकार की नीतियों और बिल के प्रावधानों पर सवाल उठा रहा है। ऐसे में यह सत्र आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा मंच बन सकता है।

2027 चुनाव की रणनीति से भी जुड़ा सत्र

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह विशेष सत्र आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी का हिस्सा भी है। बीजेपी इस मुद्दे को महिलाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है।

दूसरी तरफ, विपक्ष इसे सरकार की चुनावी रणनीति का हिस्सा बताते हुए ‘विभाजनकारी राजनीति’ करार दे रहा है। दोनों पक्ष इस मुद्दे के जरिए अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में हैं।

महिला आरक्षण पर देशभर में बहस

महिला आरक्षण बिल को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी मतभेद देखने को मिल रहे हैं। केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों पर यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श का केंद्र बना हुआ है।

उत्तर प्रदेश का यह विशेष सत्र ऐसे समय में हो रहा है, जब इस विषय पर देशभर में नजरें टिकी हुई हैं। सरकार का कहना है कि वह इस मंच के जरिए अपनी सकारात्मक भूमिका को सामने रखेगी, जबकि विपक्ष की आलोचना का भी जवाब देगी।

आने वाले दिनों में यह सत्र सिर्फ विधायी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह तय करेगा कि महिला आरक्षण का मुद्दा राजनीति में किस दिशा में आगे बढ़ता है। फिलहाल, 30 अप्रैल की तारीख ने यूपी की सियासत को एक नया मोड़ दे दिया है।

UPSSSC में 209 पदों पर भर्ती: हवलदार इंस्ट्रक्टर बनने का मौका, जानिए आवेदन की तारीख और पूरी डिटेलउत्तर प्रदेश में सरकारी...
20/04/2026

UPSSSC में 209 पदों पर भर्ती: हवलदार इंस्ट्रक्टर बनने का मौका, जानिए आवेदन की तारीख और पूरी डिटेल

उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक अहम मौका सामने आया है। यूपी अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने हवलदार इंस्ट्रक्टर के पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती के जरिए गृह सुरक्षा विभाग में कुल 209 पद भरे जाएंगे। खास बात यह है कि चयन प्रक्रिया PET स्कोर के आधार पर शुरू होगी, जिससे पहले से तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को सीधा फायदा मिल सकता है।

कब से शुरू होगा आवेदन, क्या हैं जरूरी तारीखें

इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 19 जून 2026 से शुरू होगी। इच्छुक उम्मीदवार 9 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अगर आवेदन में कोई गलती हो जाती है, तो उसे सुधारने के लिए 16 जुलाई तक का समय दिया गया है।

उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि आवेदन से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ लें, ताकि पात्रता और शर्तों को लेकर कोई भ्रम न रहे।

कैटेगरी के हिसाब से कितनी सीटें

कुल 209 पदों को अलग-अलग वर्गों में बांटा गया है। सामान्य वर्ग के लिए 88 पद तय किए गए हैं, जबकि ओबीसी के लिए 57, अनुसूचित जाति के लिए 39, ईडब्ल्यूएस के लिए 20 और अनुसूचित जनजाति के लिए 5 पद निर्धारित हैं।

यह वितरण इस बात का संकेत देता है कि सभी वर्गों के उम्मीदवारों को अवसर देने की कोशिश की गई है।

योग्यता और उम्र सीमा क्या चाहिए

इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास PET स्कोर कार्ड होना अनिवार्य है। साथ ही, कम से कम इंटरमीडिएट (12वीं) पास होना जरूरी है।

उम्र की बात करें तो न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम 40 वर्ष तय की गई है। आरक्षित वर्गों को नियमानुसार छूट भी दी जाएगी।

चयन प्रक्रिया और परीक्षा पैटर्न

चयन प्रक्रिया दो चरणों में होगी। पहले PET स्कोर के आधार पर उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। इसके बाद लिखित परीक्षा आयोजित होगी, जो 100 अंकों की होगी और इसकी अवधि 2 घंटे तय की गई है।

परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे और हर प्रश्न 1 अंक का होगा। गलत उत्तर पर निगेटिव मार्किंग भी लागू होगी। इसके बाद दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया होगी।

सैलरी और फीस की जानकारी

चयनित उम्मीदवारों को लेवल-3 के तहत 21,700 रुपये से लेकर 69,100 रुपये तक वेतन मिलेगा। नियुक्ति लखनऊ स्थित होमगार्ड मुख्यालय में की जाएगी।

आवेदन शुल्क की बात करें तो सभी श्रेणियों के लिए केवल 25 रुपये ऑनलाइन प्रोसेसिंग फीस रखी गई है, जिससे यह भर्ती आर्थिक रूप से भी सुलभ बनती है।

यह भर्ती उन युवाओं के लिए एक अच्छा अवसर है जो सुरक्षा बलों में करियर बनाना चाहते हैं। सही तैयारी और समय पर आवेदन से इस मौके को भुनाया जा सकता है।

Aadhaar में मोबाइल नंबर अपडेट करना हुआ आसान: अब घर बैठे मिनटों में करें काम, सेंटर जाने की जरूरत नहींअगर आपके आधार कार्ड...
20/04/2026

Aadhaar में मोबाइल नंबर अपडेट करना हुआ आसान: अब घर बैठे मिनटों में करें काम, सेंटर जाने की जरूरत नहीं

अगर आपके आधार कार्ड से जुड़ा मोबाइल नंबर पुराना हो गया है या अब इस्तेमाल में नहीं है, तो अब इसे अपडेट करना पहले जितना मुश्किल नहीं रहा। UIDAI ने नई सुविधा के जरिए इस प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया है। अब आपको आधार केंद्र की लंबी लाइनों में खड़ा होने की जरूरत नहीं, बल्कि घर बैठे ही कुछ आसान स्टेप्स में मोबाइल नंबर अपडेट किया जा सकता है।

यह बदलाव खास तौर पर उन लोगों के लिए राहत लेकर आया है, जिनके रोजमर्रा के काम आधार से जुड़े OTP पर निर्भर रहते हैं।

Aadhaar App से शुरू होता है पूरा प्रोसेस

मोबाइल नंबर अपडेट करने के लिए सबसे पहले आपको अपने स्मार्टफोन में UIDAI का आधिकारिक Aadhaar App डाउनलोड करना होगा। यह ऐप Android और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।

ऐप इंस्टॉल करने के बाद आपको अपने आधार नंबर से लॉगिन करना होता है। लॉगिन के दौरान पुराने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP आता है। कुछ मामलों में फेस ऑथेंटिकेशन जैसे विकल्प भी दिए जाते हैं, जिससे सुरक्षा और मजबूत होती है।

सही ऑप्शन चुनना है जरूरी

लॉगिन के बाद ऐप के होम स्क्रीन पर कई सेवाएं दिखती हैं। यहां आपको “Update Mobile Number” का विकल्प चुनना होता है। इसके बाद आधार नंबर की पुष्टि करके आप आगे की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

इंटरफेस को इस तरह डिजाइन किया गया है कि आम उपयोगकर्ता भी बिना किसी तकनीकी परेशानी के इसे आसानी से समझ सके।

नया नंबर डालें, OTP से करें वेरिफिकेशन

अगले चरण में आपको वह नया मोबाइल नंबर दर्ज करना होता है, जिसे आधार से जोड़ना चाहते हैं। इसके बाद उसी नंबर पर एक OTP भेजा जाता है।

OTP डालकर वेरिफिकेशन पूरा करना जरूरी होता है। यह सुनिश्चित करता है कि नंबर सही है और उसी व्यक्ति के पास मौजूद है जो अपडेट कर रहा है।

रिक्वेस्ट सबमिट और स्टेटस ट्रैकिंग

सभी जानकारी सही तरीके से भरने के बाद आपको अपनी रिक्वेस्ट सबमिट करनी होती है। कुछ मामलों में इसके लिए मामूली शुल्क भी लिया जा सकता है।

रिक्वेस्ट सबमिट करने के बाद आपको एक अपडेट रिक्वेस्ट नंबर (URN) मिलता है, जिसकी मदद से आप स्टेटस ट्रैक कर सकते हैं। आमतौर पर यह प्रक्रिया कुछ दिनों में पूरी हो जाती है और अपडेट होने पर SMS के जरिए सूचना मिलती है।

ध्यान रखने वाली बातें और क्यों जरूरी है अपडेट

मोबाइल नंबर अपडेट करते समय यह जरूरी है कि सभी जानकारी सही भरी जाए, क्योंकि गलती होने पर रिक्वेस्ट खारिज हो सकती है। साथ ही, हमेशा आधिकारिक ऐप या वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें, ताकि किसी भी तरह के फ्रॉड से बचा जा सके।

अगर आधार से मोबाइल नंबर लिंक नहीं है, तो कई जरूरी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। OTP आधारित सेवाएं, e-KYC, बैंकिंग, सरकारी योजनाएं और DigiLocker या UMANG जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल मुश्किल हो जाता है।

कुल मिलाकर, आधार में मोबाइल नंबर अपडेट करने की यह नई सुविधा डिजिटल सेवाओं को और आसान बनाती है। यह न सिर्फ समय बचाती है, बल्कि लोगों को सरकारी सेवाओं तक तेज और सुरक्षित पहुंच भी देती है।

पाकिस्तान की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका पर कांग्रेस का हमला: “मोदी सरकार की रणनीति फेल, दुनिया में नई इमेज बना रहा पाक”भारत क...
20/04/2026

पाकिस्तान की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका पर कांग्रेस का हमला: “मोदी सरकार की रणनीति फेल, दुनिया में नई इमेज बना रहा पाक”

भारत की विदेश नीति को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान की संभावित मध्यस्थ भूमिका को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि जिस पाकिस्तान को भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की कोशिश करता रहा, वही अब वैश्विक मंच पर सक्रिय भूमिका निभाता दिख रहा है।

यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिक के नजरिए से देखें तो यह भारत की वैश्विक स्थिति और कूटनीतिक प्रभाव से भी जुड़ा हुआ है।

कांग्रेस का आरोप: कूटनीति में बदलाव की जरूरत

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि भारत को अपनी विदेश नीति के तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव करने की जरूरत है। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदा रणनीति पाकिस्तान को अलग-थलग करने में सफल नहीं रही।

उन्होंने कहा कि आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं में भूमिका निभा रहा है, जो भारत के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। कांग्रेस का मानना है कि यह स्थिति भारत की कूटनीतिक पकड़ कमजोर होने का संकेत देती है।

पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल और तंज

जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि जिस देश को पहले ‘दलाल’ कहा गया था, वही अब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी करता नजर आ रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पाकिस्तान आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद वैश्विक मंच पर सक्रिय दिखाई दे रहा है।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय सहयोग से अपने कर्ज का प्रबंधन किया है, जो यह दर्शाता है कि उसे बाहरी समर्थन मिल रहा है।

आसिम मुनीर और ट्रंप का जिक्र

कांग्रेस ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर को लेकर भी टिप्पणी की। जयराम रमेश के मुताबिक, मुनीर का अमेरिकी नेतृत्व, खासकर डोनाल्ड ट्रंप के साथ बढ़ता प्रभाव भारत के लिए एक कूटनीतिक चुनौती के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनीतिक और कारोबारी नेटवर्क के साथ बेहतर तालमेल बैठाया है, जबकि भारत इस मामले में पीछे रह गया है।

पुरानी तुलना और नई चिंता

कांग्रेस ने यह भी याद दिलाया कि 2008 मुंबई हमलों के बाद तत्कालीन सरकार ने पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने में सफलता हासिल की थी। इसके विपरीत, मौजूदा हालात में पाकिस्तान को नई पहचान मिलती दिख रही है।

यह पूरा विवाद इस बात की ओर इशारा करता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बदलते समीकरणों के बीच भारत की रणनीति पर गंभीर चर्चा हो रही है। आने वाले समय में यह बहस और तेज हो सकती है, क्योंकि विदेश नीति का असर सिर्फ सरकार तक सीमित नहीं, बल्कि देश की वैश्विक छवि और हितों पर भी पड़ता है।

दिल्ली से सूरत तक 1.2 करोड़ की डील? AAP पर हवाला का आरोप, CCTV फुटेज से जांच तेजगुजरात के स्थानीय निकाय चुनाव से पहले आम...
20/04/2026

दिल्ली से सूरत तक 1.2 करोड़ की डील? AAP पर हवाला का आरोप, CCTV फुटेज से जांच तेज

गुजरात के स्थानीय निकाय चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) पर एक नया आरोप सामने आया है, जिसने सियासी माहौल को और गरमा दिया है। गुजरात पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दावा किया है कि दिल्ली से सूरत तक हवाला के जरिए 1.2 करोड़ रुपये भेजे गए, जिन्हें कथित तौर पर पार्टी से जुड़े कुछ पदाधिकारियों ने रिसीव किया। इस मामले में पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया है और जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

दिल्ली से सूरत तक कैश ट्रेल का दावा

क्राइम ब्रांच और उमरा पुलिस के मुताबिक, यह रकम दिल्ली के एक कारोबारी हिमांशु पाहूजा द्वारा भेजी गई थी। सूरत में इसे कथित तौर पर AAP से जुड़े कार्यकर्ता आकाश मिश्रा और अजय तिवारी ने प्राप्त किया।

डीसीपी (क्राइम) भावेश रोजिया के अनुसार, इस लेनदेन की जानकारी पुलिस को गुप्त इनपुट के जरिए मिली थी। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि इस रकम का इस्तेमाल स्थानीय चुनावी गतिविधियों में किया जाना था।

जांच का दायरा बढ़ा, इनकम टैक्स भी अलर्ट

पुलिस ने इस मामले की जानकारी आयकर विभाग को भी दे दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक लेनदेन का मामला नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।

जांच में करीब 10 अन्य लोगों और कुछ अंगड़िया कारोबारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। पुलिस का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क दिल्ली से फंड भेजने और सूरत में उसे वितरित करने के लिए काम कर रहा था।

कौन हैं जांच के घेरे में आए लोग

जांच में सामने आए नामों में हिमांशु पाहूजा को इस नेटवर्क का अहम कड़ी बताया गया है। पुलिस के अनुसार, वह दिल्ली के जनकपुरी इलाके का निवासी है और राजनीतिक संपर्क भी रखता है।

वहीं, आकाश मिश्रा को एक वरिष्ठ AAP नेता का करीबी और पूर्व में जुड़े पदाधिकारी के रूप में बताया जा रहा है। पुलिस का दावा है कि मिश्रा सूरत में रहकर फंड रिसीव करने और आगे बांटने की भूमिका निभाता था। अजय तिवारी को उसका सहयोगी बताया गया है, जो इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल था।

CCTV फुटेज से मिले अहम संकेत

क्राइम ब्रांच ने स्थानीय अंगड़िया ऑपरेटरों से सीसीटीवी फुटेज भी हासिल किए हैं। इन फुटेज में कुछ लोग बड़ी मात्रा में नकदी गिनते हुए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस का दावा है कि यह वही रकम है, जिसे दिल्ली से भेजा गया था।

हालांकि, आम आदमी पार्टी की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे में यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी फंडिंग और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और तेज हो सकती है, जिससे इस मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।

“मैं क्रीज पर रहा तो मैच खत्म”: 15 साल के वैभव सूर्यवंशी का बड़ा दावा, टीम इंडिया पर नजरआईपीएल 2026 में एक नाम लगातार सु...
20/04/2026

“मैं क्रीज पर रहा तो मैच खत्म”: 15 साल के वैभव सूर्यवंशी का बड़ा दावा, टीम इंडिया पर नजर

आईपीएल 2026 में एक नाम लगातार सुर्खियों में बना हुआ है—राजस्थान रॉयल्स के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी। महज 15 साल की उम्र में जिस तरह का आत्मविश्वास और आक्रामक खेल वह दिखा रहे हैं, उसने क्रिकेट जगत का ध्यान खींच लिया है। उनका कहना है कि अगर वह क्रीज पर टिक गए और अपने अंदाज में बल्लेबाजी की, तो मैच पूरी तरह विरोधी टीम के हाथ से निकल सकता है।

यह बयान सिर्फ आत्मविश्वास नहीं, बल्कि उनके प्रदर्शन से भी साबित होता दिख रहा है।

“क्रीज पर टिक गया तो मैच पलट सकता हूं”

दूरदर्शन स्पोर्ट्स से बातचीत में वैभव सूर्यवंशी ने साफ कहा कि उनका खेल पूरी तरह आक्रामक सोच पर आधारित है। उनका मानना है कि बल्लेबाज अगर मैच को कंट्रोल करने लगे, तो विपक्ष के लिए वापसी मुश्किल हो जाती है।

उन्होंने कहा कि उनका सपना अभी अधूरा है। पिता से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि आईपीएल में प्रदर्शन करना सिर्फ आधा लक्ष्य है, असली सपना भारत की सीनियर टीम के लिए खेलना और वर्ल्ड कप जीतना है। फिलहाल उनका पूरा फोकस इसी दिशा में है।

कम उम्र, लेकिन प्रदर्शन बड़े खिलाड़ियों जैसा

वैभव सूर्यवंशी का मौजूदा आईपीएल सीजन शानदार रहा है। 6 मैचों में उन्होंने 247 रन बनाए हैं, औसत 41 का है और स्ट्राइक रेट 236 का—जो टी20 क्रिकेट में किसी भी बल्लेबाज के लिए बेहद प्रभावशाली माना जाता है। वह इस समय टॉप रन-स्कोरर्स की सूची में चौथे स्थान पर हैं और ऑरेंज कैप की दौड़ में बने हुए हैं।

अगर उनके पूरे आईपीएल करियर पर नजर डालें, तो 13 मैचों में 498 रन, एक शतक और तीन अर्धशतक उनके नाम हैं। उनका स्ट्राइक रेट 200 से ऊपर है, जो उनके आक्रामक खेल का स्पष्ट संकेत देता है।

सबा करीम का बड़ा बयान: ‘सचिन से भी ज्यादा पावर’

पूर्व भारतीय विकेटकीपर सबा करीम ने भी वैभव की जमकर तारीफ की है। उनका कहना है कि इस युवा बल्लेबाज में पावर के मामले में सचिन तेंदुलकर से भी ज्यादा क्षमता दिखाई देती है।

करीम ने साफ किया कि वह तकनीक की नहीं, बल्कि बल्लेबाजी की ताकत की बात कर रहे हैं। उनके मुताबिक, वैभव का बैट स्पीड, हाई बैकलिफ्ट और शॉट खेलने की क्षमता प्राकृतिक है, जिसे सिखाया नहीं जा सकता।

अंडर-19 से IPL तक, लगातार प्रदर्शन

वैभव सूर्यवंशी पहले भी अपने प्रदर्शन से चर्चा में रह चुके हैं। आईपीएल 2025 में उन्होंने 14 साल की उम्र में 35 गेंदों में शतक जड़कर सबको चौंका दिया था। इसके अलावा अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में 80 गेंदों पर 175 रन की पारी खेलकर भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

वैभव सूर्यवंशी की कहानी सिर्फ एक उभरते खिलाड़ी की नहीं, बल्कि उस नए आत्मविश्वास की भी है जो भारतीय क्रिकेट में नजर आ रहा है। अब नजर इस बात पर है कि क्या यह युवा बल्लेबाज जल्द ही टीम इंडिया की सीनियर जर्सी में भी वही चमक दिखा पाएगा।

उधमपुर बस हादसा: गहरी खाई में गिरी बस, 15 की मौत; कई घायल, बढ़ सकता है आंकड़ाजम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में मंगलवार सुब...
20/04/2026

उधमपुर बस हादसा: गहरी खाई में गिरी बस, 15 की मौत; कई घायल, बढ़ सकता है आंकड़ा

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में मंगलवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। रामनगर से उधमपुर जा रही एक यात्री बस अचानक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस हादसे में कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई यात्री गंभीर रूप से घायल हैं। राहत और बचाव का काम जारी है, लेकिन घायलों की हालत को देखते हुए मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

कैसे हुआ हादसा: पहाड़ी मोड़ बना जानलेवा

जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटना सुबह करीब 10 बजे हुई, जब बस रामनगर के पास कनोते गांव से गुजर रही थी। पहाड़ी रास्ते पर एक तीखे मोड़ के दौरान चालक ने वाहन पर नियंत्रण खो दिया। इसके बाद बस सीधे गहरी खाई में जा गिरी।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, सड़क संकरी और घुमावदार है, जिससे ऐसे हादसों का खतरा बना रहता है। दुर्घटना की तस्वीरों में बस पूरी तरह क्षतिग्रस्त दिखाई दे रही है, जिससे हादसे की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

रेस्क्यू ऑपरेशन तेज, घायलों का इलाज जारी

हादसे के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचे और बचाव अभियान शुरू किया गया। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत नाजुक बताई जा रही है।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने उधमपुर के डिप्टी कमिश्नर से बात की है और रेस्क्यू ऑपरेशन समय पर शुरू कर दिया गया था। गंभीर रूप से घायल लोगों को जरूरत पड़ने पर एयरलिफ्ट कर बड़े अस्पतालों में भेजने की भी तैयारी की जा रही है।

प्रशासन और नेताओं की प्रतिक्रिया

इस हादसे पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

वहीं, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी कहा कि वह लगातार प्रशासन के संपर्क में हैं ताकि राहत कार्यों में किसी तरह की देरी न हो। स्थानीय स्तर पर भी मदद के लिए टीमों को सक्रिय किया गया है।

क्यों बढ़ रही है चिंता

इस हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा के मुद्दे को सामने ला दिया है। तीखे मोड़, संकरी सड़कें और वाहन नियंत्रण की चुनौती ऐसे हादसों को और गंभीर बना देती है।

फिलहाल, पूरे इलाके में शोक का माहौल है और प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है। आने वाले घंटों में स्थिति और साफ होगी, लेकिन यह हादसा कई परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति बन चुका है।

अपराजिता बिल पर सियासी घमासान: अभिषेक बनर्जी ने BJP उम्मीदवार से कहा—PM मोदी से दिलवाएं मंजूरीपश्चिम बंगाल की राजनीति मे...
20/04/2026

अपराजिता बिल पर सियासी घमासान: अभिषेक बनर्जी ने BJP उम्मीदवार से कहा—PM मोदी से दिलवाएं मंजूरी

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय अपराजिता विधेयक को लेकर नया मोड़ देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी उम्मीदवार रत्ना देबनाथ से एक सार्वजनिक अपील की है। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह करें कि इस विधेयक को जल्द मंजूरी दिलाई जाए, जो फिलहाल राष्ट्रपति के पास लंबित है।

यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। ऐसे में इसका असर आम लोगों की सोच और चुनावी माहौल दोनों पर पड़ सकता है।

क्या है पूरा मामला और क्यों अहम है अपराजिता विधेयक

अपराजिता महिला एवं बाल (पश्चिम बंगाल आपराधिक कानून संशोधन) विधेयक सितंबर 2024 में राज्य विधानसभा से पारित हुआ था। यह कदम आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ हुई दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद उठाया गया था।

इस विधेयक में रेप मामलों की जांच 21 दिनों के भीतर पूरी करने और 50 दिनों के अंदर सजा सुनिश्चित करने का प्रावधान रखा गया है। साथ ही, फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए दोषियों को कड़ी सजा, यहां तक कि मृत्युदंड तक देने का प्रस्ताव भी शामिल है।

हालांकि, यह बिल अभी कानून नहीं बन पाया है क्योंकि इसे राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार है।

अभिषेक बनर्जी का हमला और अपील

उत्तर 24 परगना के पनिहाटी में एक सभा को संबोधित करते हुए अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो पार्टी आरोपियों को संरक्षण देती है, वह न्याय की बात नहीं कर सकती।

इसी दौरान उन्होंने रत्ना देबनाथ—जो आरजी कर केस की पीड़िता की मां हैं और अब बीजेपी उम्मीदवार भी—से अपील की कि वह प्रधानमंत्री से इस विधेयक को मंजूरी दिलाने की पहल करें।

बनर्जी ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई की थी। उनके मुताबिक, 48 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार किया गया और पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता दी गई।

कानूनी टकराव और सियासी बहस

यह विधेयक केंद्र और राज्य के बीच टकराव का कारण भी बना हुआ है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत जहां रेप के लिए न्यूनतम 10 साल की सजा का प्रावधान है, वहीं इस विधेयक में इसे बढ़ाकर आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक करने की मांग की गई है।

इसी मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बनर्जी ने आरोप लगाया कि विपक्ष इस घटना का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है, जबकि असली मुद्दा न्याय दिलाना होना चाहिए।

भवानीपुर सीट और बढ़ता चुनावी तापमान

इस पूरे घटनाक्रम के बीच भवानीपुर विधानसभा सीट पर भी सियासी मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सीधा मुकाबला शुभेंदु अधिकारी से माना जा रहा है।

इसके अलावा, ममता बनर्जी ने भी बीजेपी पर मतदाता सूची में गड़बड़ी और समाज को बांटने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने चुनाव को लोकतंत्र का उत्सव बताते हुए लोगों से एकजुट रहने की अपील की है।

अपराजिता विधेयक अब सिर्फ एक कानून का मसौदा नहीं, बल्कि चुनावी बहस का केंद्रीय मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या इसे मंजूरी मिलती है और इसका राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।

महिलाएं चुनाव का केंद्र, पर टिकट में पिछड़ गई आधी आबादी—5 राज्यों के आंकड़े चौंकाने वालेदेश में चुनावी माहौल के बीच महिल...
20/04/2026

महिलाएं चुनाव का केंद्र, पर टिकट में पिछड़ गई आधी आबादी—5 राज्यों के आंकड़े चौंकाने वाले

देश में चुनावी माहौल के बीच महिला आरक्षण का मुद्दा लगातार चर्चा में है। मंचों से लेकर घोषणापत्र तक, हर जगह महिलाओं को सशक्त बनाने की बात कही जा रही है। लेकिन जब बात टिकट वितरण की आती है, तो तस्वीर उतनी संतुलित नजर नहीं आती। असम, केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी—इन पांच राज्यों के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि राजनीतिक दलों के दावों और जमीनी हकीकत के बीच अभी भी बड़ा अंतर मौजूद है।

इन राज्यों में चुनाव प्रक्रिया जारी है या पूरी हो चुकी है, और 4 मई को नतीजे आने हैं। ऐसे में यह सवाल अहम हो जाता है कि क्या महिलाओं को वास्तव में बराबरी का मौका दिया गया है।

केरल और असम: महिला भागीदारी सबसे कम

केरल में कुल 863 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन इनमें सिर्फ 92 महिलाएं हैं, यानी करीब 11 प्रतिशत। बाकी 771 उम्मीदवार पुरुष हैं। प्रमुख दलों में भी महिलाओं की हिस्सेदारी सीमित ही दिखती है। उदाहरण के तौर पर कांग्रेस ने 85 में से सिर्फ 7 महिलाओं को टिकट दिया, जबकि बीजेपी ने 93 में से 13 और सीपीएम ने 77 में से 12 महिलाओं को मौका दिया।

असम की स्थिति इससे भी कमजोर है। यहां कुल 722 उम्मीदवारों में सिर्फ 60 महिलाएं हैं, यानी करीब 8 प्रतिशत। खास बात यह है कि राज्य की मतदाता सूची में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत है, लेकिन टिकट वितरण में यह अनुपात नजर नहीं आता।

तमिलनाडु और पुडुचेरी: हल्का सुधार, पर दूरी बाकी

तमिलनाडु में महिला उम्मीदवारों की हिस्सेदारी 14 प्रतिशत तक पहुंची है। कुल 3992 उम्मीदवारों में से 442 महिलाएं चुनाव लड़ रही हैं। यह पिछले चुनावों की तुलना में थोड़ा सुधार जरूर दिखाता है, लेकिन बराबरी से अभी भी काफी दूर है।

पुडुचेरी में भी लगभग यही स्थिति है। यहां 291 उम्मीदवारों में 40 महिलाएं हैं, जो कुल का करीब 14 प्रतिशत है। अलग-अलग दलों ने महिलाओं को सीमित संख्या में टिकट दिए हैं, जिससे स्पष्ट है कि सुधार की गुंजाइश अभी बाकी है।

पश्चिम बंगाल: राजनीतिक प्रभाव के बावजूद सीमित हिस्सेदारी

पश्चिम बंगाल में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी अक्सर चर्चा में रहती है, खासकर तृणमूल कांग्रेस के संदर्भ में। इसके बावजूद यहां कुल उम्मीदवारों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 11 प्रतिशत ही है।

हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने 52 महिलाओं को टिकट देकर बाकी दलों से बेहतर प्रदर्शन किया है। इसके बाद कांग्रेस (35), लेफ्ट (34) और बीजेपी (33) का नंबर आता है। फिर भी, कुल अनुपात संतोषजनक नहीं कहा जा सकता।

बड़ी तस्वीर: वादों और हकीकत के बीच अंतर

इन पांच राज्यों के आंकड़े एक स्पष्ट संदेश देते हैं—महिलाएं चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण मुद्दा जरूर हैं, लेकिन प्रतिनिधित्व के स्तर पर उन्हें अब भी सीमित अवसर मिल रहे हैं।

जबकि महिला मतदाता हर चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं, टिकट वितरण में उनकी हिस्सेदारी दो अंकों से आगे नहीं बढ़ पा रही। यह अंतर नीतियों और जमीनी अमल के बीच मौजूद खाई को उजागर करता है।

आने वाले समय में महिला आरक्षण कानून और राजनीतिक दलों की रणनीति इस दिशा में क्या बदलाव लाती है, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल, आंकड़े यही बताते हैं कि आधी आबादी को पूरा प्रतिनिधित्व मिलने में अभी वक्त लगेगा।

केजरीवाल बनाम CBI: हाईकोर्ट में तीखी बहस, जज ने माना जवाब… फैसला 2 घंटे टलादिल्ली हाईकोर्ट में कथित शराब नीति मामले को ल...
20/04/2026

केजरीवाल बनाम CBI: हाईकोर्ट में तीखी बहस, जज ने माना जवाब… फैसला 2 घंटे टला

दिल्ली हाईकोर्ट में कथित शराब नीति मामले को लेकर सोमवार को सुनवाई के दौरान दिलचस्प और अहम घटनाक्रम देखने को मिला। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कोर्ट में खुद पेश होकर CBI के जवाब पर अपना पक्ष रखने की कोशिश की। अदालत ने एक तरफ उन्हें प्रक्रिया का पालन करने की सख्त नसीहत दी, वहीं दूसरी ओर उनके रिजॉइंडर को रिकॉर्ड पर लेने की अनुमति भी दे दी। इस बीच, कोर्ट ने अपने फैसले को दो घंटे के लिए टाल दिया, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई।

कोर्ट में क्या हुआ: नियमों की याद भी, राहत भी

सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने अदालत से कहा कि उन्हें पहले रिजॉइंडर दाखिल करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन रजिस्ट्री इसे स्वीकार नहीं कर रही। उन्होंने दलील दी कि अगर उनका जवाब रिकॉर्ड पर नहीं लिया गया तो न्याय प्रभावित हो सकता है।

इस पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि बार-बार ‘मिसकैरिज ऑफ जस्टिस’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत पहले ही प्रक्रिया से हटकर उनका हलफनामा रिकॉर्ड पर ले चुकी है।

जज ने यह भी समझाया कि चूंकि केजरीवाल खुद अपनी पैरवी कर रहे हैं, इसलिए उन्हें तय प्रक्रिया का पालन करना होगा। हालांकि, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने उनके रिजॉइंडर को लिखित दलीलों के रूप में स्वीकार कर लिया।

फैसला टला: क्यों बढ़ाई गई समय सीमा

अदालत ने पहले इस मामले में फैसला दोपहर 2:30 बजे सुनाने की बात कही थी, लेकिन केजरीवाल द्वारा अतिरिक्त दस्तावेज पेश करने के बाद इसे शाम 4:30 बजे तक के लिए टाल दिया गया।

जस्टिस शर्मा ने कहा कि नए हलफनामे और दलीलों को ध्यान में रखते हुए फैसला देने से पहले उनका अध्ययन जरूरी है। साथ ही, केजरीवाल द्वारा लगाए गए पक्षपात के आरोपों को भी ध्यान में रखा जाएगा।

रिजॉइंडर में क्या हैं केजरीवाल के तर्क

अपने लिखित जवाब में केजरीवाल ने CBI पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि एजेंसी ने तथ्यों के बजाय अनुमान और डर पैदा करने वाले बयान दिए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि जस्टिस शर्मा के परिवार से जुड़े कथित हितों के टकराव के मुद्दे पर CBI ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। केजरीवाल के मुताबिक, एजेंसी ने इस संवेदनशील पहलू को नजरअंदाज किया है।

इसके अलावा, CBI द्वारा लगाए गए आरोप—जैसे दबाव बनाने या मामलों को लंबित रखने—को उन्होंने पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने यह भी कहा कि एजेंसी की दलीलें न्यायपालिका को अनावश्यक विवाद में खींचने जैसी हैं।

मामले का व्यापक असर क्या हो सकता है

यह मामला सिर्फ एक कानूनी विवाद नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया, पारदर्शिता और संस्थाओं की विश्वसनीयता से भी जुड़ा है। अदालत में उठे सवाल और दलीलें इस बात की ओर इशारा करती हैं कि आने वाला फैसला कई स्तरों पर प्रभाव डाल सकता है।

अब नजरें हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो न सिर्फ इस केस की दिशा तय करेगा, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक मिसाल भी बन सकता है।

19/04/2026

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